वायरल लोड टेस्ट क्या है?

वायरल लोड टेस्ट रक्त में ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) की मात्रा का पता लगाने के लिए किया जाता है। एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली की कुछ विशेष कोशिकाओं, सीडी4, को लक्ष्य बनाकर उन्हें नष्ट करता है। सीडी4 बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं जैसे बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है, जो संक्रमण होने के खतरे को अत्यधिक बढ़ा देते हैं और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है।

यह टेस्ट उन लोगों का भी किया जाता है, जिन्हें हेपेटाइटिस बी, सी या दूसरे संक्रमण होते हैं। इन लोगों से ये टेस्ट  करवाने को कहा जाता है ताकी इलाज के प्रभाव पर नजर रखी जा सके। साथ ही साथ यह टेस्ट रक्त में बीमारी फैलाने वाले वायरस की मात्रा की भी जांच करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली की शक्ति का पता लगाने के लिए इस टेस्ट के साथ सीडी4 टेस्ट करवाने को भी कहा जा सकता है।

  1. वायरल लोड टेस्ट क्यों किया जाता है - Viral Load Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. वायरल लोड टेस्ट से पहले - Viral Load Test Se Pahle
  3. वायरल लोड टेस्ट के दौरान - Viral Load Test Ke Dauran
  4. वायरल लोड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Viral Load Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

वायरल लोड टेस्ट किसलिए किया जाता है?

आमतौर पर वायरल लोड टेस्ट निम्न कारणों में करवाने को कहा जाता है:

  • संक्रमण का संदेह होने पर एचआईवी का परीक्षण करने के लिए
  • एचआईवी के लिए दी जा रही दवाओं का असर जानने के लिए 
  • संक्रमण के दौरान हो रहे बदलावों पर नजर रखने के लिए

यह टेस्ट निम्न लोगों को करवाने को भी कहा जा सकता है:

  • गर्भवती महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की जांच करना बहुत जरूरी है, ताकि इस संक्रमण को मां से बच्चे में फैलने से रोका जाए। 
  • जो लोग पहले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई इंजेक्शन सुई लगाते हैं। 
  • जो असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाते हैं। 
  • ऐसे पुरुष जो पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं। 
  • ऐसे लोग जिनके कई सेक्स पार्टनर होते हैं। 

जिन लोगों में एचआईवी का परीक्षण किया जा चुका है उन्हें परीक्षण के दूसरे से आठवें हफ्ते में ये टेस्ट करवाने को कहा जाता है और बाद में ये चौथे से छठे महीने के अंतराल में करने को कहा जाता है। इस टेस्ट के परिणामों से डॉक्टर को व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए सही दवाएं निश्चित करने में मदद मिलती है। इससे व्यक्ति के शरीर में वायरस का लोड कम करने में भी मदद मिलती है।

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वायरल लोड टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

वायरल लोड टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरुरत नहीं होती। हालांकि, यदि आपका टेस्ट एचआईवी की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए किया जा रहा है तो परिणामों को ठीक से समझने के लिए आपको डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

वायरल लोड टेस्ट कैसे किया जाता है?

यह एक सामान्य टेस्ट है जिसके लिए बांह की नस से ब्लड सैंपल लिया जाता है। 

  • जो डॉक्टर आपका ब्लड सैंपल लेंगे वो आपकी बांह पर एक बैंड बांध देंगे और आपसे मुट्ठी बनाने को कहेंगे। 
  • नस मिलने के बाद डॉक्टर नस में एक कीटाणु रहित सुई लगाएंगे और सैंपल ले लेंगे।  
  • पर्याप्त रक्त मिल जाने पर सुई लगी जगह पर बैंडेज लगा दी जाएगी। इससे रक्त स्त्राव नहीं होगा और इससे नील पड़ने और सूजन से भी बचा जा सकता है। 

इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर कुल 3 मिनट के करीब समय लगता है।

इस टेस्ट से छोटे-छोटे खतरे हैं जैसे नील पड़ना, रक्त स्त्राव और सुई लगी जगह पर हल्का सा दर्द। कुछ लोगों को इसके बाद चक्कर भी आ सकते हैं या इंजेक्शन लगी जगह पर घाव भी हो सकता है। हालांकि, ये लक्षण कुछ मिनट में ही गायब हो जाते हैं।

वायरल लोड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है?

सामान्य परिणाम:

सामान्य परिणाम इस बात का सूचक है कि व्यक्ति के शरीर में एचआईवी के वायरस नहीं है जिसका मतलब है कि व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण नहीं हुआ है। 

असामान्य परिणाम:

लो वायरल लोड यह दिखाता है कि एचआईवी वायरस शरीर में ज्यादा सक्रिय नहीं है। ऐसा इलाज के प्रभाव के कारण भी हो सकता है। 

हाई वायरल लोड का मतलब है कि व्यक्ति के शरीर में एचआईवी सक्रिय है। यह इस बात का संकेत भी हो सकता है कि संक्रमण के लिए किया जा रहा इलाज लाभदायक साबित नहीं हुआ है। जितना अधिक वायरल लोड होगा उतना ही अधिक खतरा ऐसी बिमारियों के होने का होगा जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है जैसे एड्स (अक्वायर्ड इम्यून डेफिशियेंसी सिंड्रोम)।

यह जरूरी है कि टेस्ट के लिए हर-बार एक ही तरीका प्रयोग किया जाए क्योंकि अलग-अलग तरीकों से रिजल्ट ऐसे आ सकते हैं जो आपस में मेल नहीं खाते।

वायरल लोड टेस्ट के परिणामों को सही और अच्छे ढंग से समझने के लिए डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

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