बैक्टीरिया एक कोशिका वाले माइक्रोस्कोपिक (केवल माइक्रोस्कोप से दिखने वाले) जीव हैं जो अन्य जीवों के अंदर और बाहर दोनों जगह लाखों की संख्या में हर तरह के पर्यावरण में मौजूद होते हैं। वे मिट्टी के भीतर, समुद्र में और मानव आंत के अंदर रह सकते हैं। बैक्टीरिया के साथ मनुष्यों का रिश्ता काफी जटिल है।
कभी-कभी वे दूध को दही में बदलने या हमारे पाचन में मदद करके एक सहायक के रूप में रहते हैं। दूसरी तरफ, वे विनाशकारी भी होते हैं, जिससे निमोनिया और मेथिसिलिन प्रतिरोधी स्टेफिलोकोकस ऑरियस (एमआरएसए) जैसी बीमारियां होती हैं।
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इस प्रकार, कुछ बैक्टीरिया या जीवाणु हानिकारक होते हैं, लेकिन अधिकांश का कोई उपयोगी उद्देश्य होता है। वे पौधे और जानवर दोनों के जीवन के कई रूपों को मदद करते हैं और इनका उपयोग औद्योगिक और औषधीय प्रक्रियाओं में भी किया जाता है।
माना जाता है कि लगभग 4 अरब साल पहले बैक्टीरिया पृथ्वी पर दिखाई देने वाले पहले जीव थे। सबसे पुराने ज्ञात जीवाश्म बैक्टीरिया की तरह के जीवों के हैं। बैक्टीरिया अधिकांश कार्बनिक और कुछ अकार्बनिक यौगिकों को भोजन के रूप में उपयोग कर सकते हैं और कुछ अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं।
मानव शरीर बैक्टीरिया से भरा है और वास्तव में अनुमान लगाया जाता है कि हमारे शरीर में मानव कोशिकाओं से भी अधिक जीवाणु कोशिकाएं पायी जाती हैं। शरीर में पाए जाने वाले अधिकांश बैक्टीरिया अच्छे होते हैं और कुछ तो सहायक होते हैं। एक अपेक्षाकृत छोटी संख्या ही रोग का कारण बनती है।
आंत माइक्रोबायम की कार्य प्रणाली में बढ़ती दिलचस्पी मानवीय स्वास्थ्य में बैक्टीरिया की भूमिका पर नई रोशनी डाल रही है। इस लेख में बैक्टीरिया क्या है, प्रकार, लाभदायक बैक्टीरिया और हानिकारक बैक्टीरिया के साथ बैक्टीरिया से होने वाले रोग के बारे में विस्तार से बताया गया है।
- बैक्टीरिया क्या है - Bacteria kya hai in hindi
- जीवाणु के प्रकार - Bacteria ke prakar in hindi
- लाभदायक बैक्टीरिया - Good bacteria in hindi
- हानिकारक बैक्टीरिया - Bad bacteria in hindi
- बैक्टीरिया से होने वाले रोग - Bacteria se hone wale rog in hindi
बैक्टीरिया क्या है - Bacteria kya hai in hindi
बैक्टीरिया या जीवाणु छोटे जीवित जीव हैं, जिन्हें सूक्ष्मजीव भी कहते हैं, ये इतने छोटे होते हैं कि उन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता है, लेकिन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके देखा जा सकता है। 1838 में “bacteria” शब्द ग्रीक शब्द “bakteria” से निकला, जिसका अर्थ “लिटिल स्टिक” (छोटी छड़ी) है। इसका कारण यह है कि पहली बार खोजे गए बैक्टीरिया का आकार रॉड के जैसा था।
बैक्टीरिया की खोज सबसे पहले 17 वीं शताब्दी में, एक डच वैज्ञानिक, वान लीवेंहोइक ने की थी। उन्होंने एक "प्रोटोजोआ" (एक कोशिका वाला जीव) की खोज की और उन्हें "अनिमल्क्यूल्स" (animalcules) नाम दिया। उन्होंने माइक्रोस्कोप में भी सुधार किया और सूक्ष्म जीव विज्ञान की नींव रखी।
एक ग्राम मिट्टी में आम तौर पर लगभग 40 मिलियन जीवाणु कोशिकाएं होती हैं। ताजे पानी के एक मिली लीटर में आमतौर पर लगभग दस लाख जीवाणु कोशिकाएं होती हैं। धरती में कम से कम 5 नोनिलियन (5 के बाद 54 बार शून्य लगाने पर बनने वाली संख्या) बैक्टीरिया होने का अनुमान है और माना जाता है कि पृथ्वी का अधिकांश बायोमास बैक्टीरिया से बना है।
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बैक्टीरिया प्रकृति में सर्वव्यापी हैं जिसका अर्थ है कि वे पर्यावरण जैसे हवा, मिट्टी और पानी में हर जगह पाए जा सकते हैं। यहां तक कि अत्यधिक मुश्किल वातावरण भी जीवाणुओं के लिए घर हो सकते हैं, जैसे कि हाइड्रोथर्मल वेंट्स या अंटार्कटिका में ग्लेशियर वाली झीलों के भीतर भी रह सकते हैं।
बैक्टीरिया मोटाइल (गतिशील) या नॉन-मोटाइल (स्थिर) हो सकते हैं। मोटाइल बैक्टीरिया फिसलते हैं या यहां तक कि तैरते भी हैं। क्रॉस-कंटैमिनेशन नामक प्रक्रिया के माध्यम से बैक्टीरिया एक सतह से दूसरी सतह तक फैल सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के हाथों पर जीवाणु ई कोलाई है और वह दरवाजे के हैंडल को छूता है, तो बैक्टीरिया दरवाजे के हैंडल में चिपक सकता है और जल्दी से संख्या बढ़ा सकता है। फिर दरवाजा क्रॉस-कंटैमिनेशन के लिए एक नए स्थान के रूप में कार्य कर सकता है।
जीवाणु बाइनरी विखंडन के माध्यम से पुनरुत्पादन करता है। बाइनरी विखंडन प्रकृति में प्रजनन की सामान्य विधियों में से एक है जिसमें जीव के शरीर का विभाजन दो हिस्सों में हो जाता है, जिससे संतान बनती है। अनुकूल स्थितियों में बाइनरी विखंडन अपेक्षाकृत तेज़ी से हो सकता है।
पौधों की तरह कुछ बैक्टीरिया, सूरज की रोशनी (प्रकाश संश्लेषण) से अपना स्वयं का ऊर्जा स्रोत बनाते हैं, जबकि अन्य को अपने पर्यावरण से पोषक तत्वों को अवशोषित करना होता है। बैक्टीरिया ने अनुकूलन से स्वयं को सल्फर और आयरन जैसी विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय सामग्री से ऊर्जा लेने में सक्षम बनाया है।
जीवाणु के प्रकार - Bacteria ke prakar in hindi
डीएनए अनुक्रमण (सिक्वेंसिंग) तकनीक के आविष्कार से पहले, बैक्टीरिया को मुख्य रूप से उनके आकार के आधार पर ही वर्गीकृत किया गया था। जिसे मॉर्फोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और स्टेनिंग भी कहा जाता है, यानी या तो ग्राम पॉजिटिव या ग्राम नेगेटिव स्टेनिंग। आजकल, मॉर्फोलॉजी के साथ, बैक्टीरिया को वर्गीकृत करने के लिए डीएनए अनुक्रमण का भी उपयोग किया जाता है।
बैक्टीरिया को वर्गीकृत करने के लिए अलग-अलग मानदंडों का उपयोग किया जाता है। विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया को उनकी विशेषताओं के अनुसार अलग किया जा सकता है जैसे -
आकार के अनुसार बैक्टीरिया के प्रकार
- गोल आकार के बैक्टीरिया (उदहारण, कोकस)
- रॉड जैसे आकार के बैक्टीरिया (उदहारण, बेसिलस)
- कॉमा के आकार वाले बैक्टीरिया (उदहारण, विब्रियो)
- सर्पिल आकार के बैक्टीरिया (उदहारण, स्पिरिला या स्पिरोचेट)
सेल वाल की संरचना के आधार पर बैक्टीरिया के प्रकार
- ग्राम पॉजिटिव - पेप्टिडोग्लाइकन (एक प्रकार का पॉलीमर) की मोटी परत।
- ग्राम-नेगेटिव - पेप्टिडोग्लाइकन की पतली परत।
गैसीय आवश्यकताओं के आधार पर बैक्टीरिया के प्रकार
- एनारोबिक - यह दो तरह का होता है पहला, ओब्लिगेट एनारोबिक बैक्टीरिया जो ऑक्सीजन बिलकुल सहन नहीं कर सकता है और यदि ऑक्सीजन युक्त वातावरण में रखा जाता है तो मर सकता है। ऐसे बैक्टीरिया आमतौर पर पृथ्वी की सतह के नीचे या महासागरों में गहरे स्थानों में पाए जाते हैं। दूसरा, ऐच्छिक (facultative) एनारोबिक बैक्टीरिया ऑक्सीजन उपयोग कर सकता है लेकिन बिना ऑक्सीजन के भी ऊर्जा उत्पादन कर सकते हैं।
- एरोबिक - ऐसे बैक्टीरिया जिनको अपने अस्तित्व के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
पौषक तत्व लेने के पैटर्न के आधार पर बैक्टीरिया के प्रकार
- ऑटोट्रोफिक - ये दो प्रकार के होते हैं पहला, प्रकाश संश्लेषक जो कार्बनिक पदार्थ, प्रकाश ऊर्जा और कार्बन डाइऑक्साइड से अपने स्वयं के भोजन को संश्लेषित करते हैं। दूसरे, केमोसिंथेटिक ये अपने भोजन को रासायनिक स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा की सहायता से संश्लेषित करते हैं।
- हेटरोट्रोफिक - ये अपने अपने भोजन को अन्य जीवित जीवों से प्राप्त करते हैं, क्योंकि वे इसे स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकते हैं।
- सिम्बायोटिक बैक्टीरिया - ये बदले में कुछ देकर मेजबान जीव से पोषण प्राप्त करते हैं।
- रोगजनक (पैथोजेनिक) बैक्टीरिया - ये मेजबान से भोजन प्राप्त करते हैं, लेकिन मेजबान के लिए हानिकारक होते हैं और आम तौर पर बीमारियों का कारण बनते हैं।
- सैप्रोफाइटिक बैक्टीरिया - ये मृत और क्षय पदार्थ से पोषण प्राप्त करते हैं। पर्यावरण के लिए उपयोगी होते हैं।
लाभदायक बैक्टीरिया - Good bacteria in hindi
बैक्टीरिया या जीवाणु को अक्सर बुरा समझा जाता है, लेकिन कई बैक्टीरिया सहायक होते हैं। सभी बैक्टीरिया बुरे नहीं होते हैं। वास्तव में, हमारा शरीर अनुमानित तौर पर 100 ट्रिलियन "अच्छे" बैक्टीरिया का घर हैं, जिनमें से कई हमारी आंत में रहते हैं। न केवल हम इन फायदेमंद जीवाणुओं के साथ सामंजस्य से रहते हैं, बल्कि वे वास्तव में हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।
गुड बैक्टीरिया या अच्छे जीवाणुओं के लाभ निम्नलिखित हैं -
- मानव अस्तित्व
शरीर में कई बैक्टीरिया मानव अस्तित्व में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पाचन तंत्र में बैक्टीरिया, जटिल शर्करा जैसे पोषक तत्वों को इस तरह से तोड़ देते हैं, जिस तरीके से शरीर उपयोग कर सकें।
गैर-खतरनाक जीवाणु पैथोजेनिक जीवाणु से रोगों को रोकने में भी मदद करते हैं। ये शरीर में रोग पैदा करने वाले, बैक्टीरिया की जगह ले लेते हैं। कुछ जीवाणु पैथोजन पर हमला करके भी हमें बीमारी से बचाते हैं।
- नाइट्रोजन फिक्सेशन
बैक्टीरिया नाइट्रोजन लेते हैं और जब वे मर जाते हैं तो पौधों के उपयोग के लिए इसे छोड़ देते हैं। पौधों को जीवित रहने के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, लेकिन वे इसे स्वयं नहीं प्राप्त कर सकते हैं। इसकी पूर्ति के लिए, कई पौधे के बीज में बैक्टीरिया का एक छोटा कंटेनर होता है जिसका उपयोग पौधे अंकुरित होते समय करते हैं।
- उद्योग और अनुसंधान में
बैक्टीरिया कार्बनिक यौगिकों को तोड़ सकते हैं। यह अपशिष्ट के प्रसंस्करण और तेल के फैलाव और जहरीले अपशिष्ट की सफाई जैसी गतिविधियों के लिए उपयोगी है। दवा और रासायनिक उद्योग कुछ रसायनों के उत्पादन में बैक्टीरिया का उपयोग करते हैं।
बैक्टीरिया का उपयोग मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायो केमिस्ट्री और आनुवंशिक अनुसंधान में किया जाता है, क्योंकि वे जल्दी से बढ़ सकते हैं और कुशलता पूर्वक उपयोग करने में अपेक्षाकृत आसान होते हैं। वैज्ञानिक जीवाणुओं का उपयोग यह पता करने के लिए करते हैं कि जीन और एंजाइम कैसे काम करते हैं। एंटीबायोटिक्स बनाने के लिए भी बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है।
बैसिलस थुरिंगिएन्सिस (बीटी) एक जीवाणु है जिसका उपयोग कृषि में कीटनाशकों की जगह किया जा सकता है। इससे कीटनाशकों के उपयोग से जुड़े अवांछनीय पर्यावरणीय परिणाम भी नहीं हैं।
20 वीं शताब्दी की शुरुआत के बाद से ही जब नोबेल पुरस्कार विजेता रूसी जीव विज्ञानी इल्या मेखनिकोव ने पहले प्रस्तावित किया कि शरीर में रहने वाले बैक्टीरिया के जैसे बैक्टीरिया को खाने से स्वास्थ्य लाभ हो सकता है तो यह विचार होने लगा था कि कुछ प्रकार के बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।
हाल ही में, कई कंपनियों ने प्रोबायोटिक (जिसका अर्थ है "जीवन के लिए") नामक उत्पादों को बनाना शुरू किया जो ऐसे बैक्टीरिया युक्त हैं। प्रोबायोटिक्स सप्लीमेंट गोलियों, सपोसिटरी और क्रीम सहित कई रूपों में उपलब्ध हैं। कई खाद्य पदार्थों में गुड बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, जैसे - दही, मक्खन, चीज आदि।
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हानिकारक बैक्टीरिया - Bad bacteria in hindi
गुड बैक्टीरिया की तुलना में बेड बैक्टीरिया या नुकसान करने वाले जीवाणु को अधिक जाना जाता है। कई गंभीर बीमारियों के पीछे यही बैक्टीरिया हैं - जिनमें निमोनिया (स्ट्रेटोकोकस न्यूमोनिया), मेनिनजाइटिस (हैमोफिलस इन्फ्लूएंजा), स्ट्रेप थ्रोट (ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस), खाद्य विषाक्तता या फ़ूड पोइजनिंग (एस्चेरिचिया कोलाई और साल्मोनेला) और कई अन्य संक्रमण शामिल हैं।
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समूह ए स्ट्रेप्टोकोकस, क्लॉस्ट्रिडियम, एस्चेरिचिया कोलाई (ई कोलाई) और स्टाफिलोकोकस ऑरियस से लेकर कई बैक्टीरिया मुलायम ऊतक के गंभीर संक्रमण (हालाँकि ऐसा बहुत कम होता है) का कारण बन सकते हैं जिसे नेक्रोटाइजिंग फासिसाइटिस कहा जाता है। इन्हें कभी-कभी "मांस खाने वाले बैक्टीरिया" कहा जाता है।
यदि मानव शरीर में कोई ऐसा बैक्टीरिया जाता है जिसे शरीर सहायक बैक्टीरिया के रूप में नहीं पहचान पाता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली उस पर हमला करती है। यह प्रतिक्रिया सूजन और सूजन के लक्षणों का कारण बन सकती है, उदाहरण के लिए, एक संक्रमित घाव में ऐसा हो सकता है।
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इन्हीं "बुरे" जीवाणु के कारण हम अपने हाथों को परिश्रम से साफ करते हैं और हमारे रसोई घर और बाथ रूम के सिंक, साथ ही साथ अन्य किसी भी स्थान जहां रोगाणु एकत्रित हो सकते हैं, को साफ रखते हैं। हमने एंटीबायोटिक दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला भी विकसित की है, जो बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं को मारने के लिए डिज़ाइन की गई दवाएं हैं।
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बैक्टीरिया से होने वाले रोग - Bacteria se hone wale rog in hindi
शरीर के अंदर जब बैक्टीरिया विघटित होता है जैसे टाइफाइड में या उनके एंटीजनिक गुणों के प्रति संवेदनशीलता को प्रेरित करता है, जैसे तपेदिक में, तो विषाक्त पदार्थ का स्राव करके या उगल कर बीमारी का कारण बनता है। अन्य गंभीर जीवाणु रोगों में हैजा, डिप्थीरिया, जीवाणु मेनिंजाइटिस, टेटनस, लाइम रोग, गोनोरिया और सिफलिस शामिल हैं।
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20 वीं शताब्दी के मध्य तक, बुजुर्गों में बैक्टीरिया से होने वाला निमोनिया शायद मौत का प्रमुख कारण था। बेहतर स्वच्छता, टीकों और एंटीबायोटिक्स ने बैक्टीरियल संक्रमण से मृत्यु दर को कम कर दिया है, हालांकि एंटीबायोटिक प्रतिरोध विकसित होने से कुछ बीमारियों में फिर से वृद्धि हुई है।
एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग बैक्टीरिया संक्रमण के इलाज को कठिन बना रहा है। जैसे-जैसे जीवाणु उत्परिवर्तित (म्यूटेट) होता है, वो मौजूदा एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति अधिक प्रतिरोधी बन जाता है, जिससे इलाज में कठिनाई होती है। बैक्टीरिया स्वाभाविक रूप से भी बदल जाता है, लेकिन एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग इस प्रक्रिया को तेज कर रहा है।
21 वीं शताब्दी की शुरुआत में, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कई उपभेदों (स्ट्रेन) ने संक्रमण के इलाज के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एक या अधिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध का विकास कर लिया जिससे टीबी दुनिया भर में सबसे घातक संक्रामक रोगों में से एक बन गया था।



