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आपकी जीवनशैली और आनुवांशिकी (genetics) आपके वजन बढ़ाने या घटाने की क्षमता को निर्धारित करते हैं। साथ ही आप जितनी ऊर्जा ले रहे हैं और कितनी खर्च कर रहे हैं, उसका फर्क भी आपके वजन पर पड़ता है।

कई अध्ययनों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि सोना अपने आप में वजन में वृद्धि का कारण नहीं है। हम जब सो रहे होते हैं, तब भी हमारा शरीर हमारे विकास, रखरखाव और जीवित रहने के लिए आवश्यक जटिल प्रक्रियाओं को ईंधन देने के लिए ऊर्जा खर्च कर रहा होता है। वास्तव में सोने की कमी या देर रात काम करना वजन बढ़ने के कारणों में से एक है। नींद की कमी आपके शरीर में लेप्टिन (leptin) और ग्रहलिन (grehlin) हार्मोन के उत्पादन को धीमा कर देती है, जिससे आपको पेट भर खाने के बाद भी भूख लगती है।

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कई विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर में 30-45 मिनट तक की नींद (इससे ज़्यादा नहीं), कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के उत्पादन को कम करने और बाकी बचे दिन में काम की उत्पादकता (work productivity) को बढ़ाने में फायदेमंद हो सकती है। खास तौर से वो लोग जो देर रात तक काम करते हैं, उनके लिए तो यह और भी ज़रूरी है।

पाचन प्रक्रिया को धीमा होने से रोकने के लिए दोपहर के खाने के एक से दो घंटे के भीतर सोते रहने से बचें। इसलिए बस थोड़ी देर ही झपकी लें और दोपहर के भोजन के बाद सही समय पर लें।

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