पिछले कुछ दशकों में, हमने जीन्स की हमारी समझ और वे हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं, यह जानने में बड़ी प्रगति की है। 20 वीं शताब्दी के मध्य में, हमने यह समझना शुरू कर दिया कि डीएनए में मानव के विकास के बारे में पूर्ण निर्देश होते हैं।

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वैज्ञानिक अब न केवल अध्ययन कर रहे हैं कि कुछ जीन बीमारियों से कैसे संबंधित हो सकते हैं, बल्कि वे यह भी जान रहे हैं कि जीन और पर्यावरण के बीच जटिल संबंध कैसे कुछ बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इस बात की पहचान करना कि डीएनए में सभी जीवित जीवों के लिए सूचना का ब्लूप्रिंट होता है और वे तंत्र जो डीएनए कोड का अनुवाद जीवन की सामग्री में करते हैं उनका पता लगाना, आधुनिक विज्ञान की महान खोजों में से एक है।

26-अक्षर की अंग्रेजी वर्णमाला की तुलना में बहुत कम जैविक "अक्षरों" का उपयोग करके, डीएनए जीवों को जीवन, प्रजनन, चयापचय, परिपक्वता और अंततः मृत्यु के निर्देशों के बारे में बताता है।

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डीएनए शायद सबसे प्रसिद्ध जैविक अणु है। यह पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों में मौजूद होता है। लेकिन डीएनए या डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड क्या है? इस लेख में, हम इससे जुड़ी लगभग सारी जरूरी जानकारी को कवर कर रहे हैं, जैसे डीएनए क्या है? हमारे लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है और यह हमारे शरीर में क्या कार्य करता है?

  1. डीएनए क्या है - DNA kya hai in hindi
  2. डीएनए संरचना - DNA structure in hindi
  3. डीएनए के कार्य - Function of DNA in hindi

लाल रक्त कोशिकाओं को छोड़कर, आपके शरीर में लगभग हर कोशिका में डीएनए या जेनेटिक कोड होता है जो हमको “हम” बनाता है। डीएनए में पूरे जीवन के विकास, वृद्धि, प्रजनन और कार्य के लिए निर्देश होते हैं। आश्चर्यजनक रूप से, अगर मानव शरीर में मौजूद सभी डीएनए को सुलझाया जाएं, तो ये इतने लंबे होंगे कि सूर्य तक पहुंच कर 300 गुना बार वापस पृथ्वी पर पहुंच सकते हैं।

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आनुवांशिक कोड में अंतर ही वह कारण है कि एक व्यक्ति के भूरे रंग की बजाय नीली आंखें होती हैं या क्यों कुछ लोग कुछ बीमारियों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं या क्यों पक्षियों के केवल दो पंख होते हैं और क्यों जिराफ की गर्दन लंबी होती है।

डीएनए एक जटिल, लंबा जंजीर जैसा दिखने वाला अणु है जो जीवित जीव की आनुवांशिक विशेषताओं को एन्कोड करता है। अधिकांश पौधों और जानवरों में, डीएनए राइबोन्यूक्लिक एसिड और प्रोटीन के साथ कॉम्पैक्ट (संकुचित) संरचनाओं के रूप पाया जाता है जिसे कोशिका नाभिक (सेल न्यूक्लियस) में रहने वाले गुणसूत्र (क्रोमोसोम्स) कहा जाता है।

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क्रोमैटिन नामक प्रोटीन के साथ जुड़े बड़े संपीड़ित डीएनए अणु, ज्यादातर न्यूक्लियस के अंदर मौजूद होते हैं। हम अपने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए, एमटीडीएनए, भी प्राप्त करते हैं जो हम केवल हमारी माँ से प्राप्त करते हैं और हमारे पिता से नहीं। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए सेल के नाभिक (न्यूक्लियस) के बाहर स्थित होते है।

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गर्भधारण के समय, एक बच्चे को पिता और मां दोनों से डीएनए प्राप्त होता है। हमारे पास माँ-पिता के गुणसूत्रों के 23 जोड़े हैं। प्रत्येक जोड़े में से एक को पिता से प्राप्त किया गया था और एक मां से प्राप्त हुआ था। गुणसूत्रों के इन 23 जोड़ों को परमाणु (न्यूक्लियर) डीएनए के रूप में जाना जाता है क्योंकि लाल रक्त कोशिकाओं को छोड़ कर, वे हमारे शरीर में प्रत्येक कोशिका के नाभिक (न्यूक्लियस) में रहते हैं।

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23 वें गुणसूत्र को यौन गुणसूत्र (सेक्स क्रोमोसोम) के रूप में जाना जाता है। यह अन्य गुणसूत्रों के साथ, एक पिता से और एक मां से विरासत में मिलता है। मां से 23 वां गुणसूत्र हमेशा एक्स होता है। पिता से, एक व्यक्ति को या तो एक्स गुणसूत्र या वाई गुणसूत्र प्राप्त होता है।

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पिता से विरासत में प्राप्त गुणसूत्र उनके लिंग को निर्धारित करता है। पिता के एक एक्स के परिणामस्वरूप एक्स एक्स संयोजन होगा, तो एक मादा शिशु का जन्म होता है। पिता के वाई के परिणामस्वरूप एक एक्स वाई संयोजन होगा, तो एक नर शिशु का जन्म होता है।

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डीएनए एक सीढ़ी जैसा दिखने वाला अणु है जो घुमावदार दिखाई देता है, जिससे इसे एक अद्वितीय आकार मिलता है जिसे डबल हेलिक्स कहा जाता है। डीएनए आमतौर पर न्यूक्लियोटाइड्स का एक डबल-स्ट्रेन्डेड पॉलीमर होता है, हालांकि सिंगल-स्ट्रेन्डेड डीएनए भी पाया जाता है।

दोनों स्ट्रैंड्स में से प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड्स या निम्नलिखित तत्वों से बनी व्यक्तिगत इकाइयों का एक लंबा अनुक्रम है -

  • फॉस्फेट अणु (और पढ़े - खून में फॉस्फेट का स्तर बढ़ने का इलाज)
  • एक शुगर अणु जिसे डीऑक्सीराइबोज कहा जाता है, जिसमें पांच कार्बन होते हैं
  • नाइट्रोजन युक्त मंडल, ऐसे चार प्रकार के नाइट्रोजन युक्त मंडल होते हैं जिन्हें बेसेस (bases) कहा जाता है -
    • एडीनाइन (A)
    • साइटोसिन (C)
    • गुआनिन (G)
    • थायमिन (T)

इन चार बेसेस का क्रम आनुवंशिक कोड बनाता है, जो जीवन के लिए हमारे निर्देश है। इन बेसेस के क्रम को डीएनए अनुक्रम (DNA sequence) कहा जाता है। ये "अक्षर" आपके जीन के भीतर विशेष अनुक्रम में होते हैं। उनमें किसी विशेष समय में, किसी विशेष सेल के लिए, किसी विशेष प्रोटीन को बनाने के निर्देश होते हैं।

डीएनए के दो स्ट्रैंड्स के बेसेस एक सीढ़ी की तरह आकार बनाने के लिए एक साथ फंस जाते हैं। सीढ़ी के भीतर, A हमेशा T पर चिपक जाता है और G हमेशा "सीढ़ी का पायदान" बनाने के लिए C पर चिपक जाता है। डीएनए की इस सीढ़ी जैसी आकृति की लंबाई शुगर और फॉस्फेट समूहों द्वारा बनी होती है।

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डीएनए के कार्यों के स्पष्ट करने से पहले इसको अलग किया गया और रासायनिक रूप से खोजा गया। जब यह स्पष्ट हो गया कि डीएनए ऐसी सामग्री है जिसे एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो इसके कार्यों की जांच शुरू की गयी।

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कोशिका में डीएनए की मुख्य भूमिका सूचना का दीर्घकालिक भंडारण है। इसकी तुलना अक्सर ब्लूप्रिंट से की जाती है, क्योंकि इसमें कोशिका के अन्य घटकों, जैसे प्रोटीन और आरएनए अणुओं का निर्माण करने के निर्देश होते हैं।

आनुवंशिक सूचना वाले डीएनए सेगमेंट को जीन कहा जाता है, लेकिन अन्य डीएनए अनुक्रम के संरचनात्मक उद्देश्य होते हैं या वे आनुवंशिक सूचना की अभिव्यक्ति को विनियमित करते हैं।

जानवरों और पौधों जैसे यूकेरियोट्स में, डीएनए कोशिका के नाभिक के अंदर संग्रहीत होता है, जबकि बैक्टीरिया और आर्काइया जैसे प्रोकैरियोट्स में, डीएनए कोशिका के साइटोप्लाज्म में होता है।

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एंजाइमों के विपरीत, डीएनए सीधे अन्य अणुओं पर कार्य नहीं करता है बल्कि विभिन्न एंजाइम डीएनए पर कार्य करते हैं और इसकी जानकारी को अधिक डीएनए में, डीएनए प्रतिकृति में कॉपी करते हैं या प्रोटीन में नक़ल (प्रतिलेखन) करते हैं।

हिस्टोन जैसे अन्य प्रोटीन डीएनए की पैकेजिंग में शामिल होते हैं या डीएनए को हुए नुकसान की मरम्मत करते हैं, अन्यथा यह नुकसान उत्परिवर्तन (mutations) का कारण बनता है।

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डीएनए का एक प्रमुख कार्य जेनेटिक कोड का उपयोग करके प्रोटीन में एमिनो एसिड अवशेषों के अनुक्रम को एन्कोड करना है। आनुवंशिक कोड को पढ़ने के लिए, कोशिकाएं न्यूक्लिक एसिड आरएनए में डीएनए के एक स्ट्रेच की एक प्रति बनाती हैं।

इन आरएनए प्रतियों का उपयोग प्रोटीन संश्लेषण को निर्देशित करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इन्हें सीधे राइबोसोम या स्प्लिसोसोम्स (spliceosomes) के हिस्सों के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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