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कैंसर और हृदय की बीमारियों को रोकने के लिए ओमेगा-3 सप्लिमेंट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन दो नए अध्ययनों के सामने आने के बाद ऐसे सप्लिमेंट्स की क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। खबर के मुताबिक, युनाइडेट किंगडम के अध्ययनकर्ताओं ने ओमेगा-3 सप्लिमेंट्स पर शोध कर निष्कर्ष निकाला है कि इनसे कैंसर और दिल की बीमारियों से बहुत कम या न के बराबर रक्षा होती है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन की शुरुआत में मिले प्रमाणों के आधार पर कहा है कि जो लोग स्वास्थ्य के लिहाज से फिश ऑयल सप्लिमेंट का सेवन करते हैं, उनके लिए ये 'किसी काम के नहीं' हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये दोनों अध्ययन ईस्ट ऑफ एंग्लिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक समूह ने किए हैं। 'पॉलिअनसैच्युरेटिड फैट्स एंड हेल्थ समूह' (पीयूएफएएच) नामक इस ग्रुप को विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़ा एक सलाहकार समूह आर्थिक मदद देता है।

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क्या हैं दोनों अध्ययन के परिणाम?
इस अध्ययन में ओमेगा-3 के प्रभावों से जुड़ी 2018 की एक विश्लेषण रिपोर्ट को शामिल किया गया। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इसकी काफी संभावना है कि ओमेगा-3 सप्लिमेंट्स का हृदय की बीमारी पर बहुत कम या न के बराबर पड़ता है। शोधकर्ताओं ने इस दावे की कई तरह से जांच की। इनमें एक लाख 60,000 से अधिक लोगों पर किए गए परीक्षणों की जांच भी शामिल थी। जांच के बाद शोधकर्ताओं ने 2018 की रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कहा कि ओमेगा-3 के सेवन का दिल की बीमारी के नियंत्रण से कोई संबंध नहीं है।

वहीं, दूसरे शोध में ओमेगा-3 और कैंसर के खतरे के संबंध की जांच की गई। इस जांच में एक लाख से ज्यादा लोगों पर किए गए परीक्षणों के परिणामों को शामिल किया गया। यहां भी पाया गया कि ऐसे सप्लिमेंट्स लेने से कैंसर की बीमारी और उससे होने वाली मौत पर बहुत कम या कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता?
इस शोध के मुख्य लेखक ली हूपर बताते हैं, 'हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि लंबे वक्त तक ओमेगा-3 सप्लिमेंट्स, जिनमें फिश ऑयल शामिल है, लेने से अवसाद (डिप्रेशन), स्ट्रोक, एंजाइटी, डायबिटीज से कोई रक्षा नहीं होती। हमने हजारों लोगों से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण किया है। ये लोग लंबे वक्त से ओमेगा-3 ले रहे थे। इनकी जांच में हमने पाया कि कई सालों तक ये सप्लिमेंट्स लेने के बाद भी दिल की बीमारी का खतरा कम नहीं होता। वहीं, कैंसर का खतरा बहुत निम्न स्तर पर कम होता है। कुल मिला कर बात यह है कि हमारी सेहत पर इनके प्रभाव बहुत कम हैं।'

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ली हूपर ओमेगा-3 फिश ऑयल सप्लिमेंट और डाइट में शामिल सामान्य ऑइली फिश में अंतर भी बताते हैं। वे कहते हैं कि एक संतुलित और स्वस्थ भोजन सप्लिमेंट लेने से बेहतर विकल्प है। उन्होंने कहा, 'ओमेगा-3 से जुड़े साक्ष्य अधिकतर फिश ऑयल सप्लिमेंट्स से प्राप्त किए गए हैं। ऐसे में यह अभी साफ नहीं है कि ऑयली फिश के क्या प्रभाव होते हैं।' हूपर ने आगे कहा, 'संतुलित डाइट के लिहाज से देखें तो ऑयली फिश एक पौष्टिक भोजन है जिसमें प्रोटीन और ऊर्जा दोनों मिलते हैं। इनके अलावा इसमें सेलेनियम, आयोडीन, विटामिन-डी और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। यह किसी ओमेगा-3 (सप्लिमेंट) से काफी ज्यादा है।'

क्या है ओमेगा-3?
शरीर में वसा कई रूपों में मौजूद होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड इन्हीं का एक प्रकार है। मेडिकल विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मस्तिष्क और आंखों के लिए जरूरी होता है। उनकी मानें तो मां के गर्भ में बच्चे के दिमाग के निर्माण में ओमेगा-3 की भूमिका काफी अहम होती है। वहीं, अभी तक ज्यादातर जानकार यह भी बताते रहे हैं कि हृदय संबंधी रोगों के अलावा कई अन्य बीमारियों को दूर रखने में भी ओमेगा-3 काफी कारगर है।

(और पढ़ें: ओमेगा-3 के स्रोत)

हालांकि ओमेगा-3 के नुकसान भी हैं। मेडिकल जानकार बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को मरकरी युक्त मछली का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं, स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में लाभदायक होने के बावजूद ओमेगा-3 को डॉक्टरी सलाह के बाद ही लिया जाना चाहिए। अगर इसका ध्यान रखने में लापरवाही हो तो व्यक्ति को निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं-

  • रक्तस्राव का खतरा: ओमेगा-3 युक्त दवाएं लेने से रक्त संबंधी विकार हो सकता है। बताया जाता है कि इससे रक्त के पतले होने की भी संभावना रहती है।
  • आंत की समस्या: ओमेगा-3 आपकी आंतों के लिए भी समस्या बन सकता है। फिश ऑयल सप्लिमेंट्स लेने से व्यक्ति को जी मचलाने और मुंह का स्वाद खराब होने की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा, दस्त, डकार, एसिडिटी, पेट फूलना और सीने में जलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • रक्तप्रवाह धीमा होने की आशंका: ओमेगा-3 सप्लिमेंट से व्यक्ति का बीपी लो हो सकता है। अगर किसी को पहले से यह समस्या है तो उसे ऐसे सप्लिमेंट लेने में सावधानी बरतनी चाहिए.
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