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एसिडिटी (पेट में जलन​) क्या है?

एसिडिटी या पेट में जलन महसूस होना एक सामान्य समस्या है, जो मुख्य रूप से छाती या सीने में जलन पैदा करती है। आम तौर से ये जलन छाती के निचले हिस्से के आस-पास महसूस होती है। पेट के अम्लीय पदार्थों का खाने की नली (ग्रासनली या इसोफेगस; Esophagus) में आ जाना एसिडिटी का मुख्य कारण होता है। 

पेट में "हाइड्रोक्लोरिक एसिड" (hydrochloric acid) नामक अम्ल होता है। यह अम्ल भोजन को टुकड़ों में तोड़ता है, और बैक्टीरिया जैसे रोगजनकों से बचाता है। पेट की अंदरूनी परत शक्तिशाली होती है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रति अनुकूलित होती है, मगर इसोफेगस की परतें इस अम्ल के प्रति अनुकूलित नहीं होती इसलिए उसमें जलन महसूस होने लग जाती है।

बार-बार होने वाली एसिडिटी की समस्या को गर्ड (एसिड भाटा रोग; GERD) कहा जाता है।

  1. एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षण - Acidity (Pet me jalan) Symptoms in Hindi
  2. पेट में जलन (एसिडिटी) के कारण - Acidity Causes in Hindi
  3. एसिडिटी (पेट में जलन) से बचाव - Prevention of Acidity (pet me jalan) in Hindi
  4. एसिडिटी का परीक्षण - Diagnosis of Acidity in Hindi
  5. एसिडिटी (पेट में जलन) का इलाज - Acidity Treatment in Hindi
  6. एसिडिटी में परहेज़ - What to avoid during Acidity in Hindi?
  7. एसिडिटी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Acidity in Hindi?
  8. एसिडिटी में क्या खाना चाहिए, क्या न खाएं और परेहज
  9. एसिडिटी की आयुर्वेदिक दवा और इलाज
  10. एसिडिटी होने पर क्या करे
  11. एसिडिटी के घरेलू उपाय
  12. एसिडिटी की होम्योपैथिक दवा और इलाज
  13. एसिडिटी (पेट में जलन) की दवा - Medicines for Acidity in Hindi
  14. एसिडिटी (पेट में जलन) की दवा - OTC Medicines for Acidity in Hindi
  15. एसिडिटी (पेट में जलन) के डॉक्टर

एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षण - Acidity (Pet me jalan) Symptoms in Hindi

एसिडिटी (पेट में जलन​) के लक्षण क्या होते हैं?

एसिडिटी के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं -

  • सीने में जलन – यह ग्रासनली में एक जलन जैसी महसूस होती है। लेटने और झुकने पर यह और बद्तर हो जाती है। यह कुछ घंटों तक लगातार हो सकती है, और भोजन करने के बाद बढ़ जाती है।
  • सीने में जलन का दर्द गर्दन या गले के अंदर तक भी महसूस होने लग सकता है। कई बार पेट का अम्लीय द्रव गले तक भी वापस आ जाता है, जिससे जलन के साथ-साथ मुंह और गले का स्वाद भी बिगड़ जाता है।
  • अत्याधिक डकार आना और मुंह का स्वाद कड़वा होना। 
  • मतली या उलटी
  • पेट फूलना। (और पढ़ें - पेट फूलने की समस्या के उपाय)
  • लगातार सूखी खांसी आना।
  • घरघराहट।
  • गले की समस्याएं जैसे कि गले में खराश होना, या आवाज़ भारी होना। 
  • गले में लंबे समय से दर्द।
  • निगलने में कठिनाई या दर्द।
  • छाती या ऊपरी पेट में दर्द
  • पेट के एसिड के कारण दातों की परत को नुकसान हो सकता है।
  • सांसों में बदबू
  • काला मल या मल में खून।
  • लगातार हिचकी आना।
  • बिना किसी कारण के वजन घटना।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

निम्न परिस्थियां होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए -

  • अगर एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या अधिक गंभीर और बार-बार होने लगी है।
  • निगलने में कठिनाई या दर्द महसूस होना, खासकर ठोस भोजन या गोलियां आदि निगलने में।
  • अगर आपका वजन तेजी से घट रहा हो जिसके कारण का पता ना हो।
  • अगर आपको काफीसमय से खांसी है, या गले में घुटन जैसा महसूस होता है।
  • अगर आप 2 हफ्तों से भी ज्यादा समय से एंटी-एसिड दवाएं ले रहे हैं, लेकिन एसिडिटी की समस्या अभी भी बनी हुई है।
  • अगर आपका स्वर बैठ गया है, घरघराहट महसूस हो रही है या आपका अस्थमा और गंभीर हो गया है तो डॉक्टर को दिखाएं।
  • अगर आपकी बेचैनी आपकी रोजाना की जीवनशैली और गतिविधियों में बाधा डालने लगी है।
  • अगर आपको छाती में दर्द के साथ-साथ गर्दन, जबड़े, टागों या बाजू आदि में दर्द महसूस हो रहा है।
  • दर्द के साथ-साथ अगर आपको सांस लेने में कठिनाई, कमजोरी, नाड़ी अनियमित होना या पसीना आने से समस्याएं हैं।
  • अगर आपको अत्याधिक पेट में दर्द है।
  • अगर आपको दस्त की समस्या है, या काले रंग का मल आता है, या मल में खून आता है।

पेट में जलन (एसिडिटी) के कारण - Acidity Causes in Hindi

एसिडिटी (पेट में जलन) क्यों होती है?

  • हर किसी को कभी ना कभी एसिडिटी का समस्या होती ही है। आम तौर से ये खान-पान से जुड़ी होती है। 
  • गर्भावस्था में भी एसिड रिफ्लक्स हो जाता है, क्योंकि इस दौरान अंदरूनी अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लग जाता है। गर्भावस्था में अधिक खाने की वजह से भी एसिडिटी हो सकती है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में एसिडिटी)
  • अधिक तले हुऐ खाद्य पदार्थ भी एसिडिटी का कारण बन सकते हैं।
  • ज़्यादा तला हुआ खाना खाने से भी पेट की समस्या हो सकती है। तला हुआ खाना पचने में ज्यादा समय लगाता है और पेट में अधिक देर तक रहता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वसा भोजन को आंतों तक जाने की गति को धीमा कर देती है। इससे पेट में अम्ल बनने लगता है और एसिडिटी हो जाती है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में एसिडिटी)

अन्य जोखिम कारक जिनमें शामिल हैं:

एसिडिटी (पेट में जलन) से बचाव - Prevention of Acidity (pet me jalan) in Hindi

एसिडिटी होने से कैसे रोकें?

कुछ खाद्य पदार्थों और खाने की आदतों में बदलाव लाकर एसिडिटी होने से रोकी जा सकती है।

एसिडिटी (पेट में जलन) रोकने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं -

  • अधिक से अधिक फल और सब्जियों का सेवन करनें (जो अम्लीय नही होते)
  • एक बार खाने की बजाए, थोड़ा थोड़ा भोजन कई बार कर लेना।
  • रात को सोने से करीब 1 से 2 पहले भोजन करना।
  • शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना।
  • व्यायाम करना। (और पढ़ें - एक्सरसाइज के फायदे)
  • एक दिन में करीब 3 लीटर से ज्यादा पानी पीना। (और पढ़ें - कितना पानी पीना चाहिए)
  • खाना खाने से 30 मिनट पहले और खाना खाने के 1 घंटे बाद तक पानी ना पीना।
  • टाइट बेल्ट व कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

एसिडिटी का परीक्षण - Diagnosis of Acidity in Hindi

एसिडिटी का निदान कैसे किया जाता है?

आम तौर पर जीवन शैली में बदलाव और एसिडिटी की दवाएं देने के बाद सीने में जलन के लक्षणों में किसी प्रकार का सुधार ना होता देखकर इसका निदान हो जाता है।

एसिडिटी और सीने में जलन सामान्य समस्या है और इनका निदान करना भी काफी आसान होता है। हालांकि कई बार इनके कारण निमोनियादिल का दौरा और अन्य छाती संबंधी समस्याओं का भ्रम भी हो सकता है।

निम्न प्रकार की जांच करने की आवश्यकता हो सकती है:

  • एंडोस्कोपी (Endoscopy) – विशेष प्रकार के कैमरा से तस्वीरें लेना।
  • बायोस्कोपी (Biopsy) – लेबोरेट्री में जांच के लिए ऊतक का सेंपल लेना।
  • बरियम एक्स-रे (Barium X-ray) – इसमें पहले मरीज को एक विशेष प्रकार का चुनायुक्त तरल पिलाया जाता है, और उसके बाद मरीज के इमेंजिंग टेस्ट लिए जाते हैं, उस विशेष चुना की मदद से अंदरूनी अंगों की तस्वीरें साफ आती हैं।
  • इसोफेजियल मेनोमेट्री (Esophageal manometry) – इसमें इसोफेगस के दबाव को मापा जाता है।
  • इंपीडेंस मोनिटरींग (Impedance monitoring) – इसमें इसोफेगस में अम्ल की गति दर का माप लिया जाता है।
  • पीए मॉनिटरींग (pH monitoring) – पेट की सामग्री में अम्ल के स्तर की जांच करना।

एसिडिटी (पेट में जलन) का इलाज - Acidity Treatment in Hindi

एसिडिटी का इलाज क्या है?

पेट में जलन या एसिडिटी के उपचार में अक्सर जीवनशैली में बदलाव, दवाएं और बहुत ही कम मामलों में सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ती है। इसके उपचार का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को कम करना, जीवन की गुणवत्ता को सुधारना, इसोफेगस को ठीक करना और किसी भी प्रकार की जटिलताओं से बचाव करना।

दवाएं –

  • साधारण एंटी-एसिड – यह दवाएं हर केमिस्ट के यहाँ मिलती हैं। ये दवाएं कभी-कभी होने वाली एसिडिटी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए काफी होती हैं। ये दवाएं आपके पेट द्वारा बनाए गए अम्ल को बेअसर करने का काम करती हैं।
  • अम्ल कम करने वाली दवाएं – आपके पेट में बन रहे अम्ल की मात्रा में कमी करने के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाएं लक्षणों को कम करती हैं, और इसोफेगस में हुई क्षति को ठीक कर देती हैं। इन दवाओं में प्रोटोन पंप इनहिबिटर (Proton pump inhibitors), हिस्टामिन-2 रिसेप्टर एंटागोनिस्ट (Histamine-2 receptor antagonists) शामिल हैं।
  • पोर्किनेटिक एजेंट्स (Prokinetic agents) – ये दवाएं इसोफेगस और पेट को खाली कर देते हैं, जिससे नली में रिफ्लक्स होने के लिए उनमें कुछ नहीं बच पाता।
  • म्यूकोसल प्रोटेक्टिव एंजेंट्स (Mucosal protective agents) – इन दवाओं का प्रयोग इसोफेगस में एक सुरक्षात्मक परत बनाने के लिए किया जाता है, जिससे अम्ल इसोफेगस में जलन उत्पन्न नहीं कर पाता है।

सर्जरी –

कुछ परिस्थियों में सर्जरी का भी विकल्प हो सकता है, जैसे:

  • अगर उपरोक्त उपचारों से किसी प्रकार की मदद ना मिले, या उनके कारण कोई साइड इफेक्ट होनें लगें।
  • अगर आप लंबे समय तक दवाएं नहीं लेना चाहते तो सर्जरी विकल्प हो सकता है।

सर्जरी द्वारा इसोफेगस के निचले स्फिंक्टर (वॉल्व) के बंद होने के दबाव को बढ़ाया जाता है, जिससे अम्लीय प्रतिवाह की रोकथाम हो जाती है।  निगलने आदि में कठिनाई होने पर भी सर्जरी की आवश्यक्ता पड़ सकती है।

जीवनशैली में बदलाव –

आहार और पोषण के साथ एसिडिटी के लक्षणों को नियंत्रित करने के अलावा, आप जीवन शैली में कुछ बदलाव करके भी इसके लक्षणों को मैनेज कर सकते हैं:

  • अम्ल उत्पादन में कमी करने के लिए एंटीएसिड्स व अन्य प्रकार की दवाएं लेना।
  • चुईंगम चबाना (लेकिन वह पेपरमिंट फ्लेवर वाली नहीं होनी चाहिए)
  • खाना खाने के करीब 2 घंटे बाद तक लेटे नहीं।
  • बिस्तर पर जाने से 3-4 घंटे पहले खाना खा लें।
  • ज़रुरत से अधिक मात्रा में भोजन ना करें।
  • एक बार में पेट भरकर खाने की बजाए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खा लेना एसिडिटी के लक्षणों को कम करने का एक अच्छा तरीका है।
  • सोते समय अपने सिर की तरफ को पैरो की तुलना में उंचाई पर रखनें से एसिडिटी के लक्षणों में कमी की जा सकती है।

एसिडिटी में परहेज़ - What to avoid during Acidity in Hindi?

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए?

इनमें निम्न खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं,

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Acidity in Hindi?

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए?

  • सब्जियां – सब्जियों में प्राकृतिक रूप से वसा व शुगर की मात्रा कम होती है, पेट में अम्ल के स्तर को कम करने में मदद करती है। सब्जियों के बेहतर विकल्प में हरी बीन्स, ब्रोकोली, फूलगोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, आलू और खीरे शामिल हैं।
  • अदरक – इसमें सूजन व जलन विरोधी प्राकृतिक गुण होते हैं, यह एसिडिटी को कम करने में काफी मदद करता है।
  • दलिया (ओटमील) – ओटमील साबुत अनाज होता है, तो फाइबर के लिए उत्कृष्ट है। ओटमील पेट में अम्ल को अवशोषित कर लेता है, जिससे एसिडिटी के लक्षणों में कमी की जा सकती है।
  • फल जो खट्टे ना हों – जैसे खरबूजे, केले, सेब और नाशपाती आदि खट्टे फल की तुलना में में एसिडिटी को ट्रिगर करने की बहुत कम संभावना रखते हैं।
  • अंडे का सफेद भाग – अंडे के सफेद भाग का सेवन करना भी बेहतर विकल्प है, जिनको एसिडिटी की समस्या है, उनको अंडें का पीला वाला भाग नहीं खाना चाहिए।
  • स्वास्थ्यवर्धक वसा – इसके स्त्रोत में सन के बीज, जैतून का तेल और सूरजमुखी का तेल आदि शामिल है।
Dr. Gaurav Chauhan

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Sushila Kataria

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Sanjay Mittal

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सामान्य चिकित्सा

एसिडिटी (पेट में जलन) की दवा - Medicines for Acidity in Hindi

एसिडिटी (पेट में जलन) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
P PpiP Ppi 40 Mg Injection43
PantocarPantocar 40 Mg Injection59
PantodacPantodac 20 Mg Tablet69
RantacRantac 150 Mg Tablet18
ZinetacZinetac 150 Mg Tablet17
PantocidPantocid 20 MG Tablet76
GemcalGEMCAL 120ML LIQUID126
DigeneDigene Gel Mint 130
AcilocAciloc 150 Tablet17
Ulgel TabletUlgel 400 Mg/20 Mg Tablet8
PanPAN OD 40MG TABLET 10S0
Esofag DEsofag-D Capsule SR108
Nexpro RdNexpro RD 20 Capsule SR71
Lafutax DLafutax D 10 Mg/30 Mg Capsule64
NexproNEXPRO 20MG TABLET 10S63
PantopPantop 20 Mg Tablet44
Nexpro LNexpro L Capsule188
LanspepLanspep 30 Mg Capsule36
Reden OReden O 2 Mg/150 Mg Tablet33
Raciper LRaciper L 75 Mg/40 Mg Capsule139
Hepamol TabletHepamol Tablet12
ProteraProtera 40 Mg Tablet75
ProtonilProtonil 20 Mg Injection46
LansproLanspro 15 Mg Capsule25
R T DomR T Dom 10 Mg/150 Mg/20 Mg Tablet7

एसिडिटी (पेट में जलन) की दवा - OTC medicines for Acidity in Hindi

एसिडिटी (पेट में जलन) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Baidyanath Prawal Panchamrita RasBaidyanath Praval Panchamrita Ras(My)216
Baidyanath Muktashukti PishtiBaidyanath Mukthashukti Pishti Combo Pack Of 3110
Divya Chitrakadi VatiDivya Chitrakadi Vati40
Dabur Pudin HaraDABUR PUDIN HARA ACTIVE LIQUID 30ML PACK OF 3121
Baidyanath Kamdudha Ras (Moti Yukta)Baidyanath Kamdudha Ras (Moti Yukta) 50 Tablet0
Baidyanath Sitopaladi ChurnaBaidyanath Sitopaladi Churna84
Divya KumaryasavaDivya Kumaryasava60
Divya Amalki RasayanDivya Amalki Rasayan58
Baidyanath Agnikumar RasBaidyanath Agnikumar Ras Combo Pack Of 2144
Baidyanath Sutshekhar RasBaidyanath Sutshekhar Ras88
Baidyanath Amlapittantak SyrupBaidyanath Amlapittantak Syrup91
Zandu Zanduzyme TabletZanduzyme Forte Tablet112
Baidyanath Amalaki RasayanaBaidyanath Amalaki Rasayana73
Baidyanath Dhatri LauhBaidyanath Dhatri Lauh72
Baidyanath Chitrakadi BatiBaidyanath Chitrakadi Bati Tablet49
Herbal Hills Lavan Bhaskar ChurnaHerbal Hills Lavan Bhaskar Churna 1kg1560
Baidyanath Avipattikar ChurnaBaidyanath Avipattikar Churna80
Zandu PancharishtaZandu Pancharishta88
Baidyanath Kamdudha RasBaidyanath Kamdudha Ras Tablet250

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References

  1. National Health Service [Internet]. UK; Heartburn and acid reflux.
  2. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Acid Reflux (GER & GERD) in Adults.
  3. Frederik Hvid-Jensen, Rikke B Nielsen, Lars Pedersen, Peter Funch-Jensen, Asbjørn Mohr Drewes, Finn B Larsen, Reimar W Thomsen. Lifestyle factors among proton pump inhibitor users and nonusers: a cross-sectional study in a population-based setting. Clin Epidemiol. 2013; 5: 493–499.PMID: 24348070
  4. Lauren B. Gerson. Treatment of Gastroesophageal Reflux Disease During Pregnancy. Gastroenterol Hepatol (N Y). 2012 Nov; 8(11): 763–764.
  5. Health Harvard Publishing, Published: April, 2011. Harvard Medical School [Internet]. Proton-pump inhibitors. Harvard University, Cambridge, Massachusetts.
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