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वायु प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है, इसको लेकर वैज्ञानिकों ने कई बार चेतावनी दी है। इसके जरिए स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को बढ़ावा मिलता है। वहीं एक नई रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि वायु प्रदूषण हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बहुत हद तक प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों को कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह बताते हैं कि वायु प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से बाद के दिनों में मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।

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कैसे की गई थी रिसर्च?
अमेरिकन जेरिएट्रिक्स सोसाइटी के जर्नल में यह रिसर्च प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह अध्ययन 80 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं पर किया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक जो लोग वायु प्रदूषण के उच्च जोखिम वाली जगहों पर रहते थे, उनमें डिप्रेसिव (अवसादग्रस्त) लक्षणों का पता चला है।

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अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता एंड्रयू पेटकस के मुताबिक दरअसल यह ऐसा पहला अध्ययन है, जिसमें वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इस तरह के जोखिम का पता चला है। साथ ही वैज्ञानिकों को इस तरह के लक्षणों के साथ मानसिक क्षमता में गिरावट का भी पता चला है जो कि 80 वर्ष से कम आयु के बुजुर्ग लोगों में नहीं था"

डिमेंशिया का बढ़ता है रिस्क - रिसर्च 
दूसरी ओर जब वायु प्रदूषकों को अलग-अलग करके देखा गया तो रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड या वायु प्रदूषण के छोटे कणों के संपर्क में लंबे समय तक आने से डिप्रेसिव लक्षणों का जोखिम बढ़ता है, लेकिन केवल एक छोटे से प्रभाव के साथ। 

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रिसर्च के निष्कर्ष से यह भी सुझाव मिलता है कि 10 साल से अधिक समय तक प्रदूषण के संपर्क में आने के बाद अवसाद संबंधी लक्षण, मानसिक क्षमता की गिरावट में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वरिष्ठ शोधकर्ता जियू-च्यून चेन के मुताबिक, "हम जानते हैं कि सघन वायु प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिमाग तेजी से बूढ़ा होता है, जिससे मनोभ्रंश (डिमेंशिया) का जोखिम बढ़ता है।"

चेन आगे कहते हैं, "लेकिन हमारे नए निष्कर्ष बताते हैं कि बुजुर्ग पॉल्यूशन न्यूरोटॉक्सिसिटी के संपर्क में रहने से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दे सकते हैं। लेकिन इसके लिए आगे अभी और शोध की आवश्यकता होगी।"

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