सुरक्षा की भावना, प्यार व अपनापन और देखभाल की हर किसी को जरूरत होती है. यदि इनमें से किसी भी एक भावना की कमी है, तो अकेलापन महसूस होना सामान्य बात है. वैसे तो बच्चे अक्सर दोस्तों, आस-पड़ोस, स्कूल आदि से घिरे रहते हैं. इसलिए, यह माना जाता है कि बच्चे अकेले नहीं हैं या बच्चे मानसिक रूप से काफी खुश हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्चों में भी अकेलापन और डिप्रेशन देखने को मिलता है.
आज के लेख से जानिए बच्चे के अकेलेपन की वजह.
- अकेलेपन का क्या कारण हो सकता है?
- अकेलेपन का बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- बच्चे के मन से अकेलेपन की भावना कैसे खत्म करें?
- सारांश
अकेलेपन का क्या कारण हो सकता है?
बच्चों में अकेलापन उनके घर के बैकग्राउंड की वजह से भी हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा अकेला है या उसके आस-पास कोई नहीं है. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि बच्चों में अकेलेपन की भावना इसलिए आती है कि उनके दोस्तों या परिवार के लोगों के साथ अच्छे रिलेशन नहीं है. आइए, बच्चों में अकेलेपन के कारण विस्तार से जानते हैं.
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बच्चों में जलन की भावना
- यह जलन भी उन्हें अकेला महसूस करने का कारण हो सकती है. हो सकता है जब उनके दोस्त अपने माता-पिता से अन्य बच्चों के साथ कहीं मूवी देखने या महंगी जगह जा रहे हों, तो उन्हें यह महसूस होता हो कि केवल वो ही ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें ये सब सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.
- हो सकता है बच्चा काफी गरीब परिवार से हो और अपने आस-पास के दोस्तों को देखकर जलन महसूस करता हो.
- यह अकेलापन केवल गरीब बच्चों में ही नहीं, बल्कि अधिक अमीर बच्चों में भी देखा जा सकता है. उनके माता–पिता हाई स्टेटस की वजह से अपने बच्चों को मुहल्ले के आम बच्चों के साथ जुड़ने नहीं देना चाहते हैं और जब वह अपने हमउम्र के बच्चों को साथ में खेलते हुए देखते हैं, तो उन्हें काफी अकेलापन महसूस होता है.
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शारीरिक सेहत के चलते भी
जो बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, उन्हें अकेलापन ज्यादा महसूस होता है. जो बच्चे अधिक मोटे होते हैं, जिनका ब्लड प्रेशर अधिक बढ़ा रहता है, वो अपने लुक्स के बारे में अच्छा महसूस नहीं कर पाते. इस कारण उनकी मानसिक सेहत प्रभावित होती है और उन्हें अकेला महसूस होता है. जिन बच्चों को अकेलापन महसूस होता है, उन्हें हृदय से जुड़ी बीमारियों का भी ज्यादा खतरा होता है.
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जगह बदलने से भी अकेलापन
अगर बच्चे एक स्कूल से दूसरे स्कूल में आए हैं या किसी कारणवश उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ रहा है, तो अकेलापन और अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में बच्चा अपने पुराने दोस्तों और उनके साथ होने वाली गतिविधियों को याद करता है. नए दोस्त बन पाने में और उनके साथ एडजस्ट होने में थोड़ा समय लग सकता है और तब तक के लिए बच्चे को अकेलेपन का ही सामना करना पड़ता है.
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अकेलेपन का बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अकेलापन बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. जो बच्चे ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं, उनकी आयु भी कम होती है और सामान्य से कम उम्र में ही उनकी मृत्यु होने का अंदेशा बढ़ जाता है. अकेलेपन से बच्चे को कई मानसिक स्थितियों, जैसे - तनाव, स्ट्रेस व डिप्रेशन आदि का सामना करना पड़ सकता है. इससे बच्चे का खुद पर से विश्वास कम हो जाता है. वह अपने बारे में नकारात्मक सोचने लग जाते हैं. इससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित होता है. बच्चे के जीवन पर यह असर लंबे समय तक रह सकता है.
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बच्चे के मन से अकेलेपन की भावना कैसे खत्म करें?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बच्चा किस वजह से अकेलापन महसूस कर रहा है, इसके बाद उसके समाधान पर काम करना चाहिए. आइए, ऐसे ही कुछ सुझाव जानते हैं-
- अक्सर बच्चे के दोस्त ही उसे हीन महसूस करवा देते हैं, जिससे उन्हें अपने आप में दोषी लगने वाली भावना महसूस होती है. इसलिए, यह जानने का प्रयास करें कि बच्चे के दोस्तों के साथ उसकी अच्छी जम रही है या नहीं.
- अगर स्कूल से जुड़ी कोई बात बच्चे अकेलेपन का कारण है, तो अध्यापक और प्रिंसिपल से इस बारे में खुलकर बताएं. इसके बारे में एक्शन लें.
- बच्चे की कोई नई आदत ढूंढने में उसकी मदद करें. जिसे वह खुलकर एंजॉय करता है, जैसे - पेंटिंग, सिंगिंग आदि. इस हॉबी को आगे बढ़ाने में उसकी मदद करें और जब भी वह अच्छा करे, तो उसे इनाम दे. इससे उसका आत्मविश्वास लौट आएगा.
- काम के बीच थोड़ा समय निकालकर बच्चे के साथ वक्त बिताएं. उसके साथ कहीं घूमने जाएं और खुलकर बातें करें.
- अगर आप किसी नई जगह शिफ्ट हो गए हैं, तो वहां आस-पास के बच्चों के साथ उसकी दोस्ती करवाएं, ताकि उसे एक अच्छा साथ मिल सके.
- बच्चे को अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ने के लिए भी कह सकते हैं. वैसे भी कहा गया है कि किताबों से बढ़कर और कोई अच्छा दोस्त नहीं होता.
- बच्चे के छोटे-छोटे सामाजिक कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. इससे उनका मन भी बहलेगा और इसी बहाने नए दोस्त भी बनेंगे.
- अगर फिर भी बच्चा अकेलेपन में ही रह रहा है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे मानसिक विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.
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सारांश
बच्चों में अकेलापन अपने को कमतर आंकना, आपसी जलन, स्कूल में दोस्तों का न होना आदि कारणों से हो सकता है, जो भविष्य में काफी गंभीर रूप ले सकता है. इसलिए अपने बच्चे की मानसिक स्थिति को हल्के में न लें. सोशल मीडिया भी कई बार बच्चों के अकेलेपन का कारण बन जाता है, क्योंकि साइबर बुलिंग और असली दुनिया से दूरी बनाना भी अकेलेपन का एक लक्षण होता है. इसलिए, बच्चे सही ढंग से सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे हैं या नहीं, इस बात को जरूर जानें.
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बच्चों में अकेलापन के डॉक्टर
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