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यह बात हर किसी को अटपटी लग सकती है और लगनी भी चाहिए, क्योंकि सालों से कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान को माना जाता आ रहा है। इंडोनेशिया के एक क्लिनिक में तंबाकू के जरिए कैंसर का इलाज किया जाता है। इस क्लिनिक का नाम है ग्रिया बालूर, जिसे दुनिया भर के कई देशों में बंद किया जा चुका है, लेकिन इंडोनेशिया में अब-भी तंबाकू की मदद से कैंसर का इलाज जारी है। इस क्लिनिक में मौजूद डॉक्टर न केवल इस बात का दावा करते हैं कि धूम्रपान से कैंसर का इलाज हो सकता है, बल्कि वह इस बात का भी दावा करते हैं कि धूम्रपान से आटिज्म और वातस्फीति (एक ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़ों के अंदर सांस नहीं जा पाती है) को भी ठीक किया जा सकता है।

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अगर कोई व्यक्ति कई वर्षों से धूम्रपान के कारण एम्फीसेमा या फेफडों के कैंसर से ग्रस्त है, तो उस व्यक्ति को ग्रिया बालूर के डॉक्टर, दवाई की जगह सिगरेट पीने को देते हैं। क्लिनिक की फाउंडर डॉ ग्रेथा जाहर का कहना है कि उन्होंने अभी तक तंबाकू की मदद से करीब 60,000 मरीजों का इलाज किया है।

तैयार किए डिवाइन सिगरेट और डिवाइन फिल्टर
80 वर्षीय ग्रेथा जाहर नैनोकेमिस्ट्री में पीएचडी हैं, जिन्होंने कई वर्षों की कड़ी मेहनत और रिसर्च के बाद ऐसी विशेष प्रकार की सिगरेट और सिगरेट फिल्टर विकसित किए हैं, जिन्हें डिवाइन सिगरेट और डिवाइन फिल्टर कहा जाता है। उन्होंने शरीर को साफ करने वाली एक प्रक्रिया का भी विकास किया है, जिसे बालूर (स्मीयर) इलाज कहा जाता है। इस इलाज में डिवाइन सिगरेट को पाइपलाइन की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से यह जहरीले धातुओं जैसे पारा को शरीर से बाहर निकाल देता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिस पर ग्रेथा को भरोसा है कि यह कैंसर और अन्य बीमारियों के इलाज में लाभदायी हो सकती है।

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कैंसर का सबसे बड़ा कारक है तंबाकू
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्लूएचओ) के मुताबिक तंबाकू इकलौता सबसे महत्वपूर्ण कारक है, जो कैंसर के खतरे को बढ़ता है। इसके कारण हर साल विश्व भर में 1 करोड़ 80 लाख मौतें होती हैं। डब्लूएचओ ने साथ ही यह भी बताया कि फेफड़ों के कैंसर के मामले अन्य कैंसर के मुकाबले सबसे अधिक होते हैं और साल 2030 ऐसा ही ट्रेंड बना रह सकता है।

धूम्रपान से इंडोनेशिया में हर साल चार लाख लोगों की मौत
इंडोनेशिया विश्व का तीसरा सबसे अधिक धूम्रपान करने वाला देश है। यहां 20 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 70 प्रतिशत पुरुष धूम्रपान का सेवन करते हैं और डब्लूएचओ के मुताबिक धूम्रपान संबंधित रोगों के कारण हर साल इंडोनेशिया में 4 लाख मौत होती हैं।

38 प्रकार की सिगरेट की तैयार
ग्रिया बालूर के वैज्ञानिकों का कहना है कि धूम्रपान से कैंसर हो सकता है, लेकिन निकोटिन और टार का लोगों के स्वास्थ्य पर कोई खास हानिकारक प्रभाव नहीं होता है। बिरैडिकल थ्योरी के जरिए ग्रेथा ने डिवाइन सिगरेट और डिवाइन फिल्टर का विकास किया। वह इन सिगरेट का उत्पादन अपने क्लिनिक में खुद करती हैं और साथ ही उन्होंने 38 प्रकार की सिगरेट विकसित की हैं।

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ग्रेथा का कहना है कि पारा जब तक जमीन के अंदर रहता है तब तक वह सुरक्षित होता है, पर 1970 में हुई खुदाइयों की वजह से पारा की काफी मात्रा हवा में मिल गई। पारा जब ओजोन लेयर और प्रदूषण के साथ मिक्स हो जाता है तो यह बेहद हानिकारक होता है। इसके कारण यूवी किरणें हम तक पहुंचती हैं जो खतरनाक स्तर तक रेडियोएक्टिव होती हैं। डब्लूएचओ इस बात की पुष्टि कर चुका है कि पारा बच्चों में आटिज्म और कैंसर होने का सबसे बड़ा कारक होता है।

ग्रेथा ने कहा कि बालूर इलाज के जरिए शरीर में मौजूद पारा को बाहर निकाला जाता है। मरीज को तांबे के मेज पर लिटाया जाता है। दो चिकित्सक पोर्स को खोलने के लिए तेल के मिश्रण से मसाज करते हैं। इसके बाद वह एक बड़े से रबर के सिरिंज में सिगरेट का धुंआ भरते हैं और पूरे शरीर को धुएं से ढक देते हैं। आखिर में वह मरीज के ऊपर एल्यूमीनियम फॉइल लपेट देते हैं। आमतौर पर 3 महीने के इलाज के बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार दिखाई देने लगता है, लेकिन उन्हें फिर भी सावधान रहना होता है।

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