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एक अभिभावक के रूप में, क्या आप अक्सर अपने बच्चे को हेडफोन या इयरफोन को हटाने के लिए कहते हैं? यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार अधिक देर तक तेज आवाज में इयरफोन लगाकर सुनने से आपके बच्चे को बहरेपन की समस्या हो सकती है। 

यदि आप किसी किशोर बच्चे के माता-पिता हैं, तो आपको हेडफोन और सुनने की समस्या के बीच लिंक के बारे में चिंता होना स्वाभाविक हैं। आज के किशोर बच्चों में 20 साल पहले की तुलना में सुनने की समस्या का अनुभव होने की दर लगभग 30% अधिक है। कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह वृद्धि हेडफोन या इयरफोन के अधिक उपयोग के कारण हो रही है।

एक विशेषज्ञ का कहना है कि इयरफोन के माध्यम से बहुत तेज आवाज में लंबे समय तक सुनने से बच्चे और किशोर हमेशा के लिए अपनी सुनने की क्षमता खो सकते हैं। यहां तक ​​कि अत्यधिक शोर के कारण सुनने की हल्की समस्या भी बच्चे के बोलने और भाषा में परेशानी पैदा कर सकती है।

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इयरफोन कितनी तेज आवाज में सुन सकते हैं?
अधिकांश एमपी 3 प्लेयर आज एक रॉक कॉन्सर्ट की ध्वनि स्तर के बराबर आवाज देते हैं, लगभग 120 डेसिबल तक ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस स्तर पर, केवल एक घंटे और 15 मिनट में ही सुनने की समस्या पैदा हो सकती है। वे इसे इस तरह समझाते हैं कि यदि आप इयरफोन लगाकर सुनते समय अपने आसपास की कोई आवाज नहीं सुन पा रहे हैं तो आपके इयरफोन की ध्वनि का डेसीबल स्तर बहुत अधिक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हेडफोन के माध्यम से कुछ भी सुनने वाले लोगों को आवाज 60% से अधिक तेज नहीं रखनी चाहिए।

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इयरफोन कितनी देर तक इस्तेमाल करें?
इयरफोन से सुनने की समस्या के पीछे आपके द्वारा इयरफोन का इस्तेमाल करने की अवधि भी एक प्रमुख कारक है। विशेषज्ञ कहते हैं, आपको अधिकतम 60% के स्तर पर लगातार केवल 60 मिनट के लिए ही एमपी 3 उपकरणों का उपयोग करना चाहिए। इस तरह आवाज जितनी अधिक हो, आपकी सुनने की अवधि उतनी ही कम होनी चाहिए। यदि आप 100% आवाज में सुन रहे हैं तो आपको दिन में केवल पाँच मिनट ही इयरफोन लगाकर सुनना चाहिए।

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इयरफोन लगाने से नुकसान के लक्षण क्या हैं?
विशेषज्ञ बताते हैं कि हेडफोन के इस्तेमाल से नुकसान आमतौर पर धीरे धीरे होता है, जिसके स्पष्ट संकेत नहीं दिखते हैं। वास्तव में डॉक्टर द्वारा जांच ही सुनने की क्षमता में नुकसान के बारे में पता लगाने का एकमात्र तरीका है। हालांकि, यदि आप या आपके बच्चे को निम्नलिखित लक्षणों में से कोई भी लक्षण अनुभव होता है, तो विशेषज्ञों का मानना हैं कि आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए:

  • कान बजना, कान में अजीब आवाजें आना
  • शोर शराबे वाली जगहों पर सुनाई देने में कठिनाई
  • आवाज बहुत दबी हुई सुनाई देना और ऐसा एहसास होना जैसे कान बंद हो
  • पहले की तुलना में अधिक तेज आवाज में टीवी या रेडियो सुनना

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हेडफोन से होने वाले नुकसान से कैसे बचे?
विशेषज्ञों का कहना हैं कि दुर्भाग्य से, बहुत तेज शोर के संपर्क में रहने से होने वाली सुनने की क्षमता का नुकसान ठीक नहीं किया जा सकता है। वे कहते हैं कि श्रवण यंत्र और प्रत्यारोपण कुछ हद तक सुनना आसान बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे केवल कान के क्षतिग्रस्त या काम नहीं करने वाले हिस्सों की भरपाई कर सकते हैं, उन्हें ठीक नहीं कर सकते।

विशेषज्ञ कहते हैं कि आप जब भी इयरफोन का इस्तेमाल करते हैं तो आवाज का स्तर और सुनने के समय के संबंध में 60/60 नियम का पालन करें। इसका मतलब है कि यदि आप 60 मिनट तक सुनते हैं तो आवाज का स्तर 60% से अधिक नहीं होना चाहिए। आवाज तेज करते हैं तो सुनने का समय उसी अनुपात में कम कर दें।

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इसके अलावा, वे पुरानी शैली के बड़े हेडफोन का उपयोग करने का सुझाव देते हैं। हेडफोन आपके कान के अंदर की बजाय सीधे आपके कान पर रखे जाते हैं। लेकिन यह एक मामूली उपाय है जिससे बहुत अधिक फायदा नहीं होने वाला इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि आप इयरफोन या हेडफोन जैसे सुनने के उपकरणों का अधिक उपयोग न करें।

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