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एक दो बार मिले लोगों के नाम भूल जाने की समस्या लगभग हर किसी में होती है, फिर भी चेहरा लोगों के जेहन से लंबे समय तक नहीं उतरता है। हालांकि, कुछ ऐसी मानसिक बीमारियां हैं जिनके कारण लोगों को चेहरे तक याद नहीं रह जाते हैं। प्रोसोपेग्नोसिया, ऐसा ही एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसके कारण हाल ही में मिले लोग, दोबारा मिलने पर अनजानों जैसे लगते हैं। इस स्थिति में रोगी को अपने परिवार वालों और प्रियजनों तक को पहचानने में समस्या हो सकती है। प्रोसोपेग्नोसिया वाले लोग अपने परिचितों के चेहरे को नहीं पहचान पाते हैं। उनके लिए अजनबियों के चेहरे में अंतर कर पाना भी कठिन हो जाता है।

प्रोसोपेग्नोसिया को फेस ब्लाइंडनेस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी समस्या है जिसके कारण व्यक्ति के व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों को स्थापित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं यह चिंता और अवसाद का कारण भी बन सकती है। यदि आपको फेस ब्लाइंडनेस की समस्या के कारण चिंता या अवसाद का अनुभव होता हो तो इस बारे में चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें। समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर कुछ तकनीकों को प्रयोग में ला सकते हैं।

इस लेख में हम प्रोसोपेग्नोसिया के लक्षण, कारण और इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

  1. प्रोसोपेग्नोसिया के लक्षण - Prosopagnosia ke kya lakshan ho sakte hain?
  2. प्रोसोपेग्नोसिया का कारण - Prosopagnosia ki samsya kyon hoti hai?
  3. प्रोसोपेग्नोसिया का निदान - Prosopagnosia ka diagnosis kaise kiya jata hai?
  4. प्रोसोपेग्नोसिया का इलाज - Prosopagnosia ka treatment kaise kiya jata hai?
  5. प्रोसोपेग्नोसिया (फेस ब्लाइंडनेस) के डॉक्टर

प्रोसोपेग्नोसिया के लक्षण - Prosopagnosia ke kya lakshan ho sakte hain?

प्रोसोपेग्नोसिया यानी फेस ब्लाइंडनेस का सबसे आम लक्षण विभिन्न चेहरों के बीच अंतर न कर पाना होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत और पेशेवर, दोनों तरह के संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। जिन लोगों में प्रोसोपेग्नोसिया के हल्के लक्षण होते हैं उनके लिए अजनबी लोगों के चेहरे में भेद कर पाना अथवा उन्हें पहचान पाना मुश्किल होता है। वहीं ​जिन लोगोंं को मॉडरेट प्रोसोपेग्नोसिया की शिकायत होती है वह उन लोगों के भी चेहरे नहीं पहचान पाते हैं जिनको वह नियमित रूप से देखते हैं, जैसे परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त आदि। इसके अलावा जिन लोगों को गंभीर स्तर के प्रोसोपेग्नोसिया की शिकायत होती है उनके लिए खुद का चेहरा पहचान पाना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति व्यक्ति के लिए कई प्रकार से चिंता और अवसाद का कारण बन सकती है।

जिन लोगों को फेस ब्लाइंडनेस की शिकायत हो उनमें निम्न प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • परिवार के लोगों, करीबी रिश्तेदारों या दोस्तों को न पहचान पाना
  • सार्वजनिक स्थानों पर जाने से हिचक होना
  • फिल्मों या टीवी शो में किरदारों को पहचान पाने में कठिनाई
  • दोस्त बनाने दिक्कत होना
  • बाहर जाने से बचना, घर पर ही अधिक समय व्यतीत ​करना

प्रोसोपेग्नोसिया का कारण - Prosopagnosia ki samsya kyon hoti hai?

मस्तिष्क के एक हिस्से जिसे फ्यूसीफॉर्म गाइरस कहा जाता है, उसमें किसी प्रकार की असामान्यताओं, कमी या क्षति हो जाने के कारण प्रोसोपेग्नोसिया की समस्या देखन को मिल सकती है। मस्तिष्क में यह हिस्सा उन तंत्रिका तंत्र के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो चेहरों को याद रखने और उनके बारे में धारणा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। मुख्य रूप से स्ट्रोक, मस्तिष्क में चोट या कुछ न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के कारण प्रोसोपेग्नोसिया की समस्या के कारक विकसित हो सकते हैं।

कुछ मामलों में प्रोसोपेग्नोसिया की समस्या जन्मजात विकारों के रूप में दिखाई दे सकती है। इस आधार पर शोधकर्ता इसे आनुवंशिक भी मानते हैं। फेस ब्लाइंडनेस को ऑटिज्म विकार का लक्षण नहीं माना जा सकता है, लेकिन जिन लोगों को ऑटिज्म विकार होता है उनमें यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। आमतौर पर इस समस्या को याददाश्त की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यहां ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दृष्टिहीनता, सीखने की अक्षमता या याददाश्त में कमजोरी का प्रोसोपेग्नोसिया की समस्या से कोई संबंध नहीं है। यह एक अलग ही समस्या है।

प्रोसोपेग्नोसिया का निदान - Prosopagnosia ka diagnosis kaise kiya jata hai?

प्रोसोपेग्नोसिया के निदान के लिए डॉक्टर कई प्रकार के परीक्षणों को प्रयोग में ला सकते हैं। जिन लोगों को इस तरह की समस्या हो उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। न्यूरोलॉजिस्ट, चेहरे की पहचानने की क्षमता का मूल्यांकन करके आपकी स्थिति को जानने की कोशिश करते हैं। मूल्यां​कन के लिए इन उपायों को प्रयोग में लाया जाता है।

  • परिवार के लोगों और कुछ अनजाने लोगों की तस्वीरें दिखाकर पहचानने की क्षमता का मूल्यांकन
  • चेहरे के सेट से भावनात्मक संकेतों का पता लगाना
  • चेहरे के सेट से उम्र या लिंग जैसी जानकारी का आकलन करना

इसके अलावा जिन दो परीक्षणों को प्रोसोपेग्नोसिया के निदान में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है वह हैं— बेंटन फेशियल रिकॉग्निशन टेस्ट (बीएफआरटी) और वैरिंगटन रिकॉग्नाइज मेमोरी ऑफ़ फेसेस (आरएमएफ)। हालांकि, इनके परिणाम ​कितने विश्वसनीय हैं, इसपर अब भी शोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इलाज कर रहे चिकित्सक की राय इस मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

प्रोसोपेग्नोसिया का इलाज - Prosopagnosia ka treatment kaise kiya jata hai?

फेस ब्लाइंडनेस का कोई इलाज नहीं है। विभिन्न प्रकार की थेरेपी और इलाज की प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाकर रोगी में चेहरे को पहचानने की क्षमता को विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

उदाहरण के लिए चिकित्सक कई प्रकार की तस्वीरों और ध्वनियों की मदद से चीजों की पहचान कराने में रोगी की मदद कर सकते हैं। विशेष व्यक्तियों की पहचान करने के लिए उसकी शारीरिक विशेषताओं जैसे घुंघराले सुनहरे बाल, औसत से छोटा कद या किसी व्यक्ति की आवाज़ पर ध्यान केंद्रित कराया जा सकता है। इन चिन्हों के आधार पर रोगी के लिए लोगों की पहचान कर पाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

समस्या के उपचार की यह विधियां रोगी की स्थिति को थोड़ी बेहतर जरूर कर सकती हैं, लेकिन इसका प्रभाव एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न हो सकता है। फेस ब्लाइंडनेस के विशिष्ट कारणों को समझने और उनके उपचार की विधियों का पता लगाने पर शोध चल रहा है।

Dr. Virender K Sheorain

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