Sadhana Fal ghrita 100 GM

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    Sadhana Fal ghrita की जानकारी

    Sadhana Fal ghrita बिना डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है, जो मुख्यतः कमजोर पाचन शक्ति, कमजोर इम्यूनिटी, थकान, पोषण की कमी के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। Sadhana Fal ghrita के मुख्य घटक हैं आंवला, हल्दी, हरीतकी (हरड़), जायफल, नगरामुस्ताका, मुलेठी, कुटकी जिनकी प्रकृति और गुणों के बारे में नीचे बताया गया है। Sadhana Fal ghrita की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है।

    Sadhana Fal ghrita की सामग्री - Sadhana Fal ghrita Active Ingredients in Hindi

    आंवला
    • पौधे पर आधारित घटक जो कि विषाक्त नहीं होते हैं और शरीर के कार्य में मदद करते हैं
    • ये दवाएं रोगी की जागृत अवस्था को प्रभावित किए बिना दर्द को कम कर सकती हैं।
    • खून में ग्लूकोज़ के स्तर को कम करने वाली दवाएं जो डायबिटीज के इलाज में भी उपयोग होती हैं।
    • सूजन को कम करने वाली दवाएं।
    • वो तत्व जो जीवित कोशिकाओं में मुक्त कणों के ऑक्सीकरण के प्रभाव को रोकता है।
    • ये एजेंट भोजन करने की इच्छा में सुधार करते हैं।
    • ये एजेंट हृदय के कार्य और कार्डियक आउटपुट (रक्‍त की वह मात्रा जो प्रति मिनट हृदय के दाएं अथवा बाएं वाल्व से मुक्‍त होती है) में सुधार करते हैं।
    • वो दवा जो पेट और आंत के काम को आसान कर पाचन तंत्र को बेहतर करती है।
    • पदार्थ या दवा जो लिवर के सामान्य कार्य की रक्षा करने में फायदेमंद है।
    • वे दवाएं जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर काम कर इम्‍यून की प्रतिक्रिया में सुधार लाती हैं।
    • मल को मुलायम करके मलत्याग को आसान बनाने वाली दवाएं।
    • वो पदार्थ जो गैस्ट्रिक रस के स्राव को बढाकर पाचन तंत्र को उत्तेजित करने में मदद करता है।
    • वे दवाएं जो शरीर में लिपिड की मात्रा और कोलेस्‍ट्रोल के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। ये दवाएं कार्डिएक से संबंधित विकारों को रोकने के लिए ली जाती हैं।
    • ऐसे सप्लीमेंट्स, जो मिनरल की कमी को पूरा करने का काम करते हैं, ताकि शरीर सही प्रकार से काम कर सके।
    • ऐसे सप्लीमेंट्स, जो शरीर को उसके समुचित कार्य के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन प्रदान करते हैं।
    • बढ़ती उम्र और उसके प्रभाव से बचाने वाले तत्व।
    • त्वचा को रूखेपन से बचाने और उसे नरम व मुलायम बनाने वाले एजेंट्स।
    • बालों के झड़ने से रोकने में मदद करने वाले एजेंट्स।
    • बालों को पुनर्जीवित कर उन्हें मुलायम, रेशमी व चमकदार बनाने वाले एजेंट्स।
    • स्कैल्प को पोषित करने वाले और इंफेक्शन से बचाने वाले एजेंट्स।
    हल्दी
    • चोट लगने के बाद सूजन को कम करने वाली दवाएं।
    • ये एजेंट रूमेटाइड आर्थराइटिस की वृद्धि को नियंत्रण में रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्री रेडिकल्स के बीच असंतुलन पैदा होना) को कम करने वाली दवाएं।
    • वो एजेंट जो हृदय से रक्तवाहिकाओं में रक्त प्रवाह को बेहतर करता है।
    • लीवर के कार्यों और उसे खराब होने से रोकने वाले एजेंट।
    • वे दवाएं जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर काम कर इम्‍यून की प्रतिक्रिया में सुधार लाती हैं।
    • वो दवा या एजेंट जो बैक्टीरिया को नष्‍ट या उसे बढ़ने से रोकती है।
    • सूक्ष्म जीवों को खत्म करने और उन्हें बढ़ने से रोकने वाले तत्व।
    • शरीर में फैट का स्तर कम करने वाली दवाएं, जिनका प्रयोग हाई कोलेस्ट्रॉल के लिए भी किया जाता है।
    • वे दवाएं जो शरीर में हिस्‍टामाइन (जो धूल-मिटटी जैसे बाहरी तत्वों से शरीर की रक्षा करता है) के स्राव को नियंत्रित कर एलर्जी को रोकती हैं।
    • वे एजेंट्स जो एलर्जी के लक्षणों को रोकते हैं।
    • सूखी व क्षतिग्रस्त त्वचा को पोषित करने वाले तत्व।
    हरीतकी (हरड़)
    • चोट या संक्रमण के कारण होने वाली सूजन को कम करने वाली दवाएं।
    • ये एजेंट मुक्त कणों को साफ करके ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करते हैं।
    • ये दवाएं जठरांत्र में अल्सर को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती हैं।
    • शरीर में वायरस के गुणन को कम करने वाली दवाएं।
    • पाचन क्रिया को बेहतर करने वाले तत्‍व।
    • वो दवा जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर कार्य कर इम्यून को बेहतर करती है।
    • ये दवाएं मल त्याग करने की प्रक्रिया में सुधार करती हैं और कब्ज से राहत प्रदान करने में उपयोगी हैं।
    • मस्तिष्क पर काम करते हुए नसों को आराम देने वाले एजेंट।
    • बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकने या खत्म करने वाले पदार्थ।
    जायफल
    • एजेंट या तत्‍व जो सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
    • शरीर में मौजूद ऑक्सीजन के मुक्त कणों को निकालने के लिए उपयोग होने वाले पदार्थ।
    • वे दवाएं जो गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल मार्ग से अत्‍यधिक गैस को निकालने में मदद करती हैं।
    • पदार्थ या दवा जो लिवर के सामान्य कार्य की रक्षा करने में फायदेमंद है।
    • वे दवाएं जो वीर्य के संश्‍लेषण को उत्तेजित करती हैं और पुरुषों में यौन विकारों की एक श्रृंख्‍ला को नियंत्रित करने में असरकारी हैं।
    • ये एजेंट फंगल सूक्ष्मजीवों को प्रभावित करके फंगल विकास को रोकने में मदद करते हैं।
    • वो दवा या एजेंट जो बैक्टीरिया को नष्‍ट या उसे बढ़ने से रोकती है।
    नगरामुस्ताका
    • चोट या संक्रमण के कारण होने वाली सूजन को कम करने वाली दवाएं।
    • शरीर में मौजूद ऑक्सीजन के मुक्त कणों को निकालने के लिए उपयोग होने वाले पदार्थ।
    • दवाओं का एक वर्ग जो पेशाब आने की प्रक्रिया में सुधार करती है।
    • लिवर के कार्य को बढ़ाने और उसे हुए नुकसान को कम करने वाले पदार्थ।
    • बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकने या खत्म करने वाले पदार्थ।
    मुलेठी
    • चोट लगने के बाद सूजन को कम करने वाली दवाएं।
    • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्री रेडिकल्स के बीच असंतुलन पैदा होना) को कम करने वाली दवाएं।
    • वो तत्व जो वालेंटरी (जो मांसपेशियां हमारे नियंत्रण में हैं) और इनवालेंटरी (जो मांसपेशियां हमारे नियंत्रण में नहीं हैं) मांसपेशियों की ऐंठन व दर्द के इलाज में इस्तेमाल किये जाते हैं।
    • शरीर में वायरस के गुणन को कम करने वाली दवाएं।
    • पाचन क्रिया को बेहतर करने वाले तत्‍व।
    • पदार्थ या दवा जो लिवर के सामान्य कार्य की रक्षा करने में फायदेमंद है।
    • प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक करने वाले पदार्थ।
    • बैक्‍टीरिया को बढ़ने से रोकने वाली दवाएं।
    • सूक्ष्म जीवों को खत्म करने और उन्हें बढ़ने से रोकने वाले तत्व।
    • शरीर में फैट का स्तर कम करने वाली दवाएं, जिनका प्रयोग हाई कोलेस्ट्रॉल के लिए भी किया जाता है।
    कुटकी
    • दवाएं जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करके डायबिटीज का इलाज करती हैं।
    • उल्टी व मतली के लक्षणों से राहत देने वाली दवाएं।
    • ये एजेंट पाचन में सुधार करते हैं और भोजन के अवशोषण में सहायता करते हैं।
    • बुखार कम करने वाली दवा।
    • लिवर के कार्य को बढ़ाने और उसे हुए नुकसान को कम करने वाले पदार्थ।
    • वो दवा जो मल को मुलायम कर मल त्यागने में मदद करती है। इस तरह इससे कब्ज का उपचार होता है।
    • शरीर में हीमोग्लोबिन का उत्पाद बढ़ाने वाली दवाएं।
    • सूक्ष्म जीवों को बढ़ने से रोकने वाले या खत्म करने वाले एजेंट।

    Sadhana Fal ghrita के लाभ - Sadhana Fal ghrita Benefits in Hindi

    Sadhana Fal ghrita इन बिमारियों के इलाज में काम आती है -



    Sadhana Fal ghrita की खुराक - Sadhana Fal ghrita Dosage in Hindi

    यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Sadhana Fal ghrita की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Sadhana Fal ghrita की खुराक अलग हो सकती है।

    आयु वर्ग खुराक
    व्यस्क(महिला)
    • मात्रा: निर्धारित खुराक का उपयोग करें
    • खाने के बाद या पहले: खाने के बाद
    • अधिकतम मात्रा: 2 Tablespoon
    • लेने का तरीका: दूध
    • दवा का प्रकार: घृत
    • दवा लेने का माध्यम: मुँह
    • आवृत्ति (दवा कितनी बार लेनी है): दिन में दो बार


    Sadhana Fal ghrita के नुकसान, दुष्प्रभाव और साइड इफेक्ट्स - Sadhana Fal ghrita Side Effects in Hindi

    चिकित्सा साहित्य में Sadhana Fal ghrita के दुष्प्रभावों के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, Sadhana Fal ghrita का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूर करें।



    Sadhana Fal ghrita से सम्बंधित चेतावनी - Sadhana Fal ghrita Related Warnings in Hindi

    • क्या Sadhana Fal ghrita का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?


      प्रेग्नेंट महिला पर Sadhana Fal ghrita के अच्छे या बुरे प्रभाव के बारे में चिकित्सा जगत में कोई रिसर्च न हो पाने के चलते पूरी जानकारी मौजूद नहीं हैं। इसको जब भी लें डॉक्टर से पूछने के बाद ही लें।

      अज्ञात
    • क्या Sadhana Fal ghrita का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?


      Sadhana Fal ghrita का स्तनपान कराने वाली औरतों के शरीर पर किस तरह का प्रभाव होगा रिसर्च न हो पाने की वजह से कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसलिए दवा लेने से पूर्व डॉक्टर से मिलें।

      अज्ञात
    • Sadhana Fal ghrita का पेट पर क्या असर होता है?


      बिना किसी डर के आप Sadhana Fal ghrita ले सकते हैं। यह पेट के लिए सुरक्षित है।

      सुरक्षित
    • क्या Sadhana Fal ghrita का उपयोग बच्चों के लिए ठीक है?


      इस विषय में वैज्ञानिक शोध मौजूद न होने की वजह से Sadhana Fal ghrita का बच्चों पर क्या दुष्प्रभाव होता है, इसकी जानकारी नहीं है।

      अज्ञात
    • क्या Sadhana Fal ghrita का उपयोग शराब का सेवन करने वालों के लिए सही है


      इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Sadhana Fal ghrita का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा।

      अज्ञात
    • क्या Sadhana Fal ghrita शरीर को सुस्त तो नहीं कर देती है?


      Sadhana Fal ghrita के सेवन के बाद चक्कर आना या झपकी आना जैसी दिक्कतें नहीं होती हैं। इसलिए आप वाहन चला सकते हैं या मशीनरी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

      नहीं
    • क्या Sadhana Fal ghrita का उपयोग करने से आदत तो नहीं लग जाती है?


      नहीं, Sadhana Fal ghrita लेने से कोई लत नहीं पड़ती। फिर भी, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह पर ही Sadhana Fal ghrita का इस्तेमाल करें।

      नहीं

    इस जानकारी के लेखक है -

    Dr. Braj Bhushan Ojha

    BAMS, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, डर्माटोलॉजी, मनोचिकित्सा, आयुर्वेद, सेक्सोलोजी, मधुमेह चिकित्सक
    10 वर्षों का अनुभव


    संदर्भ

    Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 5-8

    Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 60-61

    Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 62-63

    Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 69-70

    Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No - 168 - 169



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