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कुटकी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो कि मुख्य रूप से बार बार होने वाले बुखार, त्वचा विकार और मधुमेह के इलाज में उपयोग होती है। यह हिमालय में 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाई जाती है। यह आकार में छोटी होती है। इस के फूल ज्यादातर सफेद या नीले रंग में होते हैं। इस जड़ी बूटी की पत्तियां 5 से 15 सेंटीमीटर लंबी होती है। इस जड़ी बूटी की जड़ 15 से 25 सेंटीमीटर लंबी होती है। इस जड़ी बूटी के फल लगभग 1.3 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। कुटकी स्वाद में कड़वी होती है। यह कफ और पित्त को संतुलित करती है।

 

  1. कुटकी के फायदे - Kutki ke Fayde in Hindi
  2. कुटकी के नुकसान - Kutki ke Nuksan in Hindi

कुटकी के फायदे हैं लिवर के लिए उपयोगी - Kutki for Liver in Hindi

यह जड़ीबूटी लिवर सिरोसिस से राहत के लिए उपयोगी होती है। इसकी रूट के पाउडर को लिवर सिरोसिस के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। 1 चम्मच कुटकी को शहद के साथ मिलाकर दिन में 3 बार इस्तेमाल करना चाहिए।

(और पढ़े – मूली है लिवर के लिए उपयोगी)

कुटकी के लाभ करें पीलिया का इलाज - Kutki for Jaundice in Hindi

कुटकी सभी आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग की जाने वाली प्रमुख और आवश्यक घटक है जो पीलिया के इलाज के लिए भी उपयोग की जाती है। आमतौर पर, कुटकी के एक या दो चम्मच पाउडर को पानी के साथ पीलिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। साथ ही धनिया पाउडर और गुड़ को मिक्स करके लड्डू बनाएँ और दिन में 2 बार खाएं। इससे पीलिया 3-4 दिनों में ही ठीक हो जाता है।

कुटकी के गुण हैं कब्ज में सहायक - Kutki ke Fayde for Constipation in Hindi

यह कब्ज की समस्या का इलाज करने में भी बहुत सहायक है। कब्ज के लिए यह शहद के साथ मिलाकर दिन में लगभग 6 बार ली जाती है। इसके अलावा यह अपच के इलाज के लिए कुटकी बहुत मददगार होती है। यह गैस्ट्रिक रस का स्राव बढ़ाती है। यह भूख में सुधार करती है। यह पेट को मजबूत करके अपच के विभिन्न कार्यों को बढ़ावा देने में मदद करती है। 

और पढ़ें - अपच का घरेलू इलाज)

कुटकी का उपयोग है जलोदर में लाभकारी - Picrorhiza Kurroa Benefits for Ascites in Hindi

जलोदर या पेट में पानी भरने के इलाज के लिए इसका उपयोग किया जाता है। 50 ग्राम कुटकी को 200 मिलीलीटर पानी में उबाल लें और सुबह-शाम इसका सेवन करें।

कुटकी का लाभ उठाए बुखार के लिए - Kutki Capsules for Fever in Hindi

पित्त कफ असंतुलन की वजह से बुखार में भारीपन, आंतरिक जलन, सिरदर्द आदि महसूस होता है। कुटकी में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं, जिसके कारण इसे बहुत अधिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है। (और पढ़ें – बुखार का घरेलू इलाज)

1 ग्राम कुटकी पाउडर और 3 ग्राम चीनी को मिक्स कर लें। भोजन करने से 10 मिनट पहले इस मिश्रण को दिन में 1 या 2 बार लें। इसके अलावा आप कुटकी कैप्सूल भी उपयोग कर सकते हैं। प्रत्येक दिन एक शुगर कैंडी के साथ एक कैप्सूल ले सकते हैं।

यदि आप कुटकी कैप्सूल का उपयोग कर रहे हैं तो इन्हे 1 वर्ष तक रखा जा सकता है, लेकिन अगर यह पाउडर के रूप में है तो इसे केवल 3 से 5 महीनों के लिए स्टोर किया जा सकता है। इसके अलावा 3 से 4 ग्राम कुटकी पाउडर को सुबह-शाम शहद के साथ खाने से पुराना बुखार, सर्दियों में होने वाला बुखार और कब्ज के साथ होने वाले बुखार ठीक हो जाते हैं। 

(और पढ़े - बुखार में क्या खाना चाहिए)

कुटकी और चिरायता एक्जिमा के लिए - Kutki and Chirata for Eczema in Hindi

एक्जिमा को साफ करने के लिए कुटकी और चिरायता को हल्का गर्म करें। इससे एक्जिमा के रोग ठीक हो जाते हैं। रात में 5-5 ग्राम कुटकी और चिरायता को किसी कांच के बर्तन में रखें और उसमें 100 मिलीलीटर पानी डालें और सुबह उठने पर उस पानी को छानकर पी जाएं इससे एक्जिमा ठीक और खून साफ हो जाता है। 1 से 3 ग्राम कुटकी जड़ पाउडर को पानी के साथ दिन में 2 बार लेने से त्वचा के सभी रोग दूर हो जाते हैं। इसके अलावा छालरोग में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

कुटकी का प्रयोग करे सफेद दागो को ठीक - Picrorhiza Kurroa for Vitiligo in Hindi

कुटकी, मंजिष्ठा, त्रिफला, बच, दारू हल्दी, नीम की छाल और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और 40 दिनों तक इसका सेवन करें। इससे सफेद दाग ठीक हो जाते हैं।

कुटकी चूर्ण है गठिया में सहायक - Kutki Powder for Arthritis in Hindi

गठिया के रोग में कुटकी बहुत ही अधिक लाभकारी होती है। कुटकी के साथ 480 से 960 मिलीग्राम शहद सुबह-शाम लेने से गठिया रोग ठीक हो जाता है। इससे रोगी का बुखार भी खत्म हो जाता है।

कुटकी जड़ी बूटी दिलाए रक्त विकार से मुक्ति - Kutki Herb Uses For Bleeding Disorder in Hindi

मुलैठी के साथ इसका प्रयोग करने से यह एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लॉमरेटरी गुण देती है जिससे रक्त विकार, बुखार और हृदय रोग से मुक्ति मिलती है। 10 ग्राम मुलैठी पाउडर और 10 ग्राम कुटकी पाउडर को मिक्स करें। अब इस मिश्रण को 500 मिलीग्राम या 1 ग्राम गुनगुने पानी के साथ मिलाकर दिन में एक या दो बार लें। इसके अलावा 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम कुटकी पाउडर को शहद के साथ सुबह-शाम खाने से हृदय की दुर्बलता दूर हो जाती है।

(और पढ़े - अडुळसा काढा है ब्लीडिंग में उपयोगी)

कुटकी का सेवन है हिचकी और उल्टी का इलाज- - Kutki Root Powder for Vomiting And Hiccups in Hindi

अनुसंधान के अनुसार यह जड़ी बूटी सभी लिवर संबंधी समस्याओं के लिए बहुत उपयोगी है। इसलिए यह पीलिया के कारण हिचकी और उल्टी का इलाज करने में सहायक होती है।

एक चम्मच शहद में 1 ग्राम कुटकी को मिलाएं। और दिन में 2 बार इसका सेवन करें।

नोट: गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही इसका सेवन करें।  

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कुटकी के औषधीय गुण करें मधुमेह में मदद - Kutki Herb for Diabetes in Hindi

इसके मुख्य गुणधर्म पाचन स्राव को उत्तेजित करते हैं जो बदले में अग्नाशयी इंसुलिन स्राव को उत्तेजित करते हैं। यह ग्लाइकोजन के रूप में रक्त शर्करा के संचय में लीवर की सहायता करती है, जो मधुमेह प्रबंधन में आवश्यक है।

कुटकी पाउडर है वजन कम करने में उपयोगी - Kutki for Weight Loss in Hindi

कुटकी का उपयोग किसी भी वजन कम करने के कार्यक्रम के लिए एक मुख्य हर्बल घटक के रूप में उपयोग किया जा सकता है क्योंकि यह कड़वा एजेंट पाचन अग्नि, स्वस्थ उन्मूलन और चयापचय को बढ़ावा देने के लिए बहुत ही अच्छा है। कुटकी, चित्रक और त्रिकटु के पाउडर को समान मात्रा में मिलाएं। मिक्स करने के बाद इस मिश्रण को लगभग आधा चम्मच गर्म पानी के साथ लें। आपको इस मिश्रण को एक बार अपने मुँह में घुमा कर फिर निगलना चाहिए। यदि आप अधिक वजन वाले हैं तो दिन में एक बार और अगर अधिक मोटापे से ग्रस्त हैं तो दिन में दो बार इसका सेवन करें। 

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कुटकी के अन्य फायदे - Other Benefits of Kutki in Hindi

कुटकी और काले जीरे को पीसकर कान के अंदर की गांठों पर गर्म करके लगाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। इसके अलावा दैनिक रूप से कुटकी के काढ़े से 2-3 बार कान धोने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

कुटकी, अतीस, हल्दी, पाढ़ल, नागरमोथा तथा जौ का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मुंह के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

कुटकी को पीसकर गर्म लेप बनाकर घाव पर लगाने से आराम मिलता है। घाव को कुटकी के काढ़े से धोने से भी लाभ होता है। इससे घाव धोने पर घाव का दर्द दूर हो जाता है।

कुटकी वायरल हेपेटाइटिस के इलाज के लिए बहुत मददगार होती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देती है।

10 ग्राम कुटकी पाउडर को 240 मिलग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम बच्चे को सेवन कराने से बच्चों के रोग ठीक हो जाते हैं। कुटकी को पानी में पीसकर बच्चों के शरीर पर लेप लगाने से बच्चों का बुखार समाप्त हो जाता है। इसके अलावा कुटकी पाउडर में मिश्री और शहद मिलाकर चटाने से भी बच्चों का बुखार समाप्त होता है।

गर्भावस्था के दौरान इसके उपयोग को लेकर पूर्ण जानकारी नहीं है तो आपको इसे गर्भावस्था के दौरान लेने से बचना चाहिए।

यह जड़ीबूटी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय बनाती है इसलिए यदि आपको मल्टीपल स्केलेरोसिस या ल्यूपस जैसी समस्याएं हैं तो इसका इस्तेमाल करने से बचने का प्रयास करें।

कुटकी आपके रक्त में शर्करा के स्तर को कम करती है इसलिए यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो इसे लेने के दौरान शर्करा के स्तर में परिवर्तन की जांच करें और यदि आप देख रहे हैं कि यह आपके स्तर को कम कर रही है तो इससे बचने का प्रयास करें।

यदि आप कोई सर्जिकल ऑपरेशन कराने जा रहे हैं, तो शल्यक्रिया के पूरा होने के दो सप्ताह के बाद ही इसका सेवन करें।

अगर कुटकी को उचित देखभाल के साथ नहीं लिया जाता है तो यह उल्टी, मतली और चकत्ते का कारण बन सकती है।

यह दस्त को बिगाड़ सकती है।

इसका उपयोग बच्चों में बहुत कम खुराक में किया जा सकता है।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कुटकी है

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