कुत्तों में अनैच्छिक और अनियंत्रित पेशाब का होना एक सामान्य समस्या है। यह आमतौर पर कम उम्र वाले कुत्तों में तब देखने को मिलती है जब वे अपने मालिक या दूसरे कुत्तों से डरे हुए अथवा अभिभूत होते हैं। आमतौर पर देखें तो कुत्तों में होने वाले असंयमित पेशाब के कई कारण हो सकते हैं। मादाओं में स्पयिंग-लिंक्ड (गर्भाशय निकालने की सर्जरी) मांसपेशियों की कमजोरी से लेकर नरों में होने वाले कई तरह के कैंसर इस बीमारी की वजह हो सकते हैं। कई कुत्तों में जन्म के वक्त से ही ब्लैडर में विकार के चलते भी यह समस्या बनी रहती है। यदि आपका कुत्ता चलते-चलते या फिर अक्सर बेड पर पेशाब करता है तो यह असंयमित पेशाब संबंधी बीमारी का संकेत हो सकता है।
अगर आपको लगता है कि आपका कुत्ता पेशाब को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है, तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर रहता है। समस्या के कारणों के आधार पर डॉक्टर इसका इलाज करते हैं। आम तौर पर दवाइयों और देखरेख से इसपर काबू पा लिया जाता है, लेकिन कुछ मामले गंभीर रूप भी ले लेते हैं, जिनमें सर्जरी भी करनी पड़ सकती है।
- किन कारणों से मूत्राशय हो जाता है अनियंत्रित - Kutton me Kin Wajahon se Mootrashay Aniyantrit hota hai
- कुत्तों में अनियंत्रित मूत्राशय के लक्षण - Kutton me Aniyantrit Mootrashay ke Lakshan
- कुत्तों में अनियंत्रित मूत्राशय की समस्या का निदान - Kutton me Loss of Bladder Control ka Nidaan
किन कारणों से मूत्राशय हो जाता है अनियंत्रित - Kutton me Kin Wajahon se Mootrashay Aniyantrit hota hai
मूत्रमार्ग में संक्रमण : उम्रदाज मादाओं के मूत्रमार्ग में संक्रमण (यूटीआई) होना एक आम समस्या है। आमतौर पर मूत्रमार्ग के आसपास गंदगी जम जाती है, जिससे कई तरह के बैक्टीरिया मूत्राशय में प्रवेश कर जाते हैं।
मूत्राशय का कमजोर होना : उम्र बढ़ने के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर पड़नी शुरू हो जाती हैं इसमें मूत्राशय भी शामिल है। लिहाजा पशु का मूत्राशय पर पहले जैसा नियंत्रण नहीं रह जाता है, जिसकी वजह से ऐसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
मूत्रमार्ग की रुकावट : कई बार कोई पत्थर नुमा चीज मूत्राशय में अटक जाती है। इसके चलते कुत्ता ठीक से पेशाब नहीं कर पाता है। ऐसी अवस्था में कुत्ते जोर लगाने की कोशिश करते हैं, जिससे मूत्रमार्ग के आसपास के ट्यूब प्रभावित होते है, इस वजह से भी अनियंत्रित पेशाब की समस्या हो सकती है।
मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी की बीमारी : रीढ़ की हड्डी संबंधी बीमारी कुत्तों में मांसपेशियों के नियंत्रण को प्रभावित करती है। यह मूत्राशय पर नियंत्रण को अवरोधित करती है।
मधुमेह : कुत्तों में भी इंसानों की तरह वजह बढ़ने से मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक वजन के कारण कई बार मूत्राशय अपने स्थान से और नीचे चला जाता है, जो कई प्रकार की जटिलताओं को जन्म देता है। उच्च मधुमेह में अधिक प्यास लगती है जो मूत्राशय पर दबाव डालती है। यह मूत्राशय पर नियंत्रण को कमजोर बनाती है।
कुत्तों में अनियंत्रित मूत्राशय के लक्षण - Kutton me Aniyantrit Mootrashay ke Lakshan
- बार-बार उकड़ू बैठना : अपने मूत्राशय को साफ करने और पूरी तरह से खाली करने के प्रयास में कुत्ते इधर-उधर घूमते हुए बैठने का प्रयास करते हैं। काफी प्रयासों के बाद भी वह पेशाब नहीं कर पाते हैं, जिससे पता चलता है कि मूत्रमार्ग में कोई रुकावट आ रही है।
- जननांगों के आसपास लालिमा : लगातार पेशाब होते रहने से जननांग क्षेत्र के पास संक्रमण का डर बना रहता है। खासकर तब जब कुत्ते सोते वक्त अनैच्छिक रूप से पेशाब करें।
- गुप्तांगों को चाटना या दबाना : संक्रमण की स्थिति में होने वाली खुजली को शांत करने के लिए कुत्ता जननांग के आसपास के हिस्सों को चाटता या दबाता हुआ दिखेगा।
कुत्तों में अनियंत्रित मूत्राशय की समस्या का निदान - Kutton me Loss of Bladder Control ka Nidaan
- अगर आपको कुत्ते में ब्लैडर के अनियंत्रण के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर को कुत्ते के शारीरिक जांच की पूरी रिपोर्ट दें।
- यदि कुत्ते को बुखार है, तो यह किसी तरह की सूजन या संक्रमण का संकेत हो सकता है।
- अगर डॉक्टर को कुत्ते के किसी ग्रंथि में कोई समस्या नजर आती है तो वह एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षणों की सलाह देते हैं।
- ट्यूमर के लक्षण दिखने पर बायोप्सी की सलाह दी जाती है।
संदर्भ
- Jason T. Crawford and William M. Adams. Influence of vestibulovaginal stenosis, pelvic bladder, and recessed vulva on response to treatment for clinical signs of lower urinary tract disease in dogs: 38 cases (1990-1999). Journal of the American Veterinary Medical Association, October 1, 2002; 221(7): 995-999
- Thomas PC and Yool DA. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20214729. The Journal of Small Animal Practice, March 1, 2010; 51(4): 224-6



