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कुत्ता बहुत ही अच्छा साथी होता है। इन्हें पालने से घर का माहौल खुशनुमा रहता है। यह जानवर निस्वार्थ होकर प्यार, स्नेह और समर्पण देते हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कुत्ता पालने से मनुष्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

यदि कोई व्यक्ति कुत्ता पालने की इच्छा रखता है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि घर और जीवन शैली के अनुसार कौन-सा कुत्ता पालना सही होगा। कुत्तों में विभिन्न प्रकार की नस्लें होती हैं, यह व्यक्तिगत रूप और आकार में अलग-अलग होते हैं। इसलिए यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसके घर के परिवेश के अनुसार किस किस्म का कुत्ता सही रहेगा।

घर के अनुसार लें निर्णय :  घर में कितने कमरे हैं? कुत्ते के घूमने के लिए कितनी जगह है? घर में छोटे बच्चे हैं या नहीं? उसकी देखभाल के लिए समय दे सकते हैं या नहीं? या फिर कुत्ता पालने से समाज में किसी को दिक्कत तो नहीं है?

यह भी ध्यान देना जरूरी है कि किस प्रकार के स्वभाव वाले कुत्ते को घर लाने की सोच रहे हैं, क्योंकि हर नस्ल के कुत्ते का व्यक्तित्व अलग होता है। इनमें से कुछ रक्षण करने में अच्छे होते हैं, कुछ दूसरों से कई ज्यादा एक्टिव होते हैं और कुछ विनम्र होते हैं।

जितना जरूरी कुत्ते की नस्ल होती है उतना ही जरूरी पशुचिकित्सक या ब्रीडर (प्रजनक) भी होता है। मालिक को कुत्ता गोद लेने के लिए सिर्फ मान्यताप्राप्त ब्रीडर के पास ही जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अच्छे ब्रीडर के बारे में नहीं जानता है, तो ऐसे में सगे-संबंधियों या दोस्तों की मदद लें। इसके अलावा गोद लेने से पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री जरूर पता कर लें। यदि पिल्ले की उम्र दो या तीन महीने से अधिक हो चुकी है, तो ऐसे में वैक्सीनेशन (जरूरी इंजेक्शन) की रिपोर्ट की एक कॉपी प्राप्त कर लें।

आपको अपने लिए कौन-सा ब्रीड का कुत्ता लेना चाहिए, इस फैसले को आसान बनाने के लिए हम यहां 15 नस्लों के बारे में बता रहे हैं।

(आगे पढ़ें - कुत्ते का स्वास्थ्य और देखभाल)

  1. जायंट (विशालकाय) कुत्ते की नस्ल - Giant dog breed in Hindi
  2. बड़े नस्ल के कुत्ते - Large Breeds dogs in hindi
  3. मध्यम नस्ल के कुत्ते - Medium Breed Dogs in hindi
  4. छोटे नस्ल के कुत्ते - Small Breeds in hindi

बड़े आकार की नस्ल के कुत्ते 50 किलोग्राम से अधिक हो सकते हैं। ये शांत और वफादार स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। इन्हें छोटे आकार के कुत्तों की तरह अधिक शारीरिक गतिविधि की जरूरत नहीं होती है, लेकिन इन्हें अधिक खाने की आवश्यकता होती है।

ग्रेट डेन : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - Great Dane: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : विशालकाय

लंबाई और वजन : कंधों के स्तर से 2 से 3 फीट (36 इंच) ऊंचे और वजन 50 से 90 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न से मध्यम

बाल झड़ना : अधिक

स्वास्थ्य स्थिति : इनका जीवनकाल छोटा होता है। इनमें गठिया, हिप डिस्प्लासिया और पेट में सूजन की समस्या हो सकती है। यह कार्डियोमायोपैथी (दिल का बढ़ना) और थायराइड जैसी बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं।

जीवनकाल : 7 से 9 साल

रूप, आकृति : ग्रेट डेन काफी लंबे होते हैं, जब वे अपने पिछले पैरों पर खड़े होते हैं तो कई लोगों की तुलना में वे बड़े दिखाई देते हैं। ये भूरे, सफेद रंग के हो सकते हैं, इसके अलावा इन पर गहरे भूरे या काले रंग के धब्बे का निशान भी हो सकता है। इनके कान और गाल काफी बड़े होते हैं, इसलिए इनकी त्वचा मुंह के दोनों तरफ से लटकी हुई नजर आती है।

स्वभाव : आमतौर ये कोमल स्वभाव के होते हैं और अपनी ऊर्जा का कम इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते हैं। ये दिखने में थोड़े डरावने लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह बच्चों के साथ बहुत ही अच्छे, स्नेही और मिलनसार होते हैं।

ये अक्सर भौंकते नहीं है और काफी मधुर होते हैं। ये अच्छे रक्षक हो सकते हैं। इन्हें अधिक शारीरिक गतिविधि की जरूरत नहीं होती है, यदि कोई व्यक्ति रक्षण करने वाले कुत्ते की तलाश कर रहे हैं, तो ऐसे में ग्रेट डेन एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

जगह की जरूरत : इनका आकार बड़ा होता है, इसलिए इनका पालन पोषण किसी ऐसे स्थान पर नहीं किया जा सकता है, जहां जगह की कमी हो। बड़ी कद-काठी वाले कुत्ते को पालने से पहले उसके लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था होनी चाहिए।

आहार : इनमें पेट फूलने की आशंकाएं होती हैं, जिसे कम करने के लिए पशुचिकित्सक से इनके डाइट चार्ट के बारे में पता करें। पेट फूलने की समस्या अधिक खाने के साथ जुड़ा हुआ है, जब कुत्ते को खाने के लिए भोजन दिया जाता है, तो वो जल्दी में सब खा लेते हैं। इसलिए इन्हें छोटे बर्तन में खाना देना चाहिए।

अन्य बातें : ध्यान रहें, ग्रेट डेन बड़े आकार का कुत्ता होता है, जिसके पोषण में खर्च भी अधिक होता है। इन्हें अधिक भोजन की जरूरत होती है। अगर कोई व्यक्ति इस कुत्ते को सैर के लिए ले जाना चाहता है, तो उन्हें शुरुआती 18 महीनों के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें हड्डी और जोड़ों के विकास में अन्य कुत्तों की तुलना में अधिक समय लगता है। यदि इनके पैरों पर अत्यधिक तनाव पड़ेगा, तो ऐसे में फ्रैक्चर और विकलांगता का खतरा हो सकता है।

सेंट बर्नार्ड : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - St Bernard: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : विशालकाय

लंबाई और वजन : कंधों से 27 इंच तक ऊंचे और वजन 60 से 80 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न से मध्यम 

बाल झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : सेंट बर्नार्ड कुत्तों में पेट फूलना, हाइपोथायरायडिज्म, आंख संबंधी समस्या, हड्डी का कैंसर और कार्डियोमायोपैथी का खतरा रहता है। छोटे आकार के कुत्तों की तुलना में इनमें विकास संबंधी समस्याएं होना सामान्य हैं। यदि इनका वजन नियंत्रित नहीं रहा, तो इन्हें गठिया रोग हो सकता है। इनमें हिपडिस्प्लासिया और एल्बोडिस्प्लासिया (जब इन जोड़ों की हड्डियां ठीक से फिट नहीं हो पाती) होना भी आम बात है।

जीवनकाल : 7 से 9 साल

रूप, आकृति : सेंट बर्नार्ड का बड़ा और गोल चेहरा, मुलायम कान, बड़ी आंखें, शांत और धीमी चाल होती है। आमतौर पर यह सफेद रंग के होते हैं और इनके फर पर गहरे भूरे रंग के धब्बे होते हैं।

स्वभाव : ये धैर्यवान होते हैं और किसी को काटते या नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इनका व्यवहार अच्छा होता है इसलिए इन्हें बच्चों के साथ अच्छा माना जाता है। ये ब्रीड लोगों, अन्य जानवरों, ध्वनियों और स्थिति के आधार पर अपने व्यक्तित्व को ढाल लेने में सक्षम होती है।

सेंट बर्नार्ड घर के अंदर शांत और आरामदायक वातावरण में रहना पसंद करते हैं, लेकिन मोटापे से बचने के लिए उन्हें नियमित शारीरिक गतिविधि की जरूरत होती है। इन्हें एक दिन में दो से तीन बार 20 से 30 मिनट्स की सैर करानी चाहिए। सेंट बर्नार्ड ज्यादातर समय परिवार के साथ बैठे-बैठे बिताना पसंद करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह बहुत एनर्जेटिक भी हो सकते हैं।

जगह की जरूरत : इनका आकार बड़ा होता है, जिस वजह से ये किसी छोटे स्थान पर नहीं रह सकते हैं।

ठंडी जलवायु है अनुकूल : सेंट बर्नार्ड कुत्तों के बाल अधिक झड़ते हैं और इनकी लार भी अधिक गिरती है। बाल अधिक गिरने के कारण निवास स्थान को स्वच्छ रखना मुश्किल होता है। इस ब्रीड का रखरखाव ज्यादा होता है, ऐसे में बाल झड़ने की समस्या होने पर, गिरे हुए बालों को तुरंत हटा देना चाहिए।

इनके लिए गर्म जलवायु अनुकूल नहीं होती है। इन्हें गर्मी में बहुत थकावट महसूस होती है, इसीलिए ये कूलर के आगे या ठंडे जलवायु में रहना पसंद करते हैं। ऐसे ब्रीड को ज्यादातर घर में ही रखना बेहतर होता है और ध्यान रहे, इन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी दिया जाता रहे, क्योंकि गर्मी से होने वाली थकावट से इन्हें गंभीर चिकित्सकीय समस्याएं हो सकती हैं।

आहार : इनमें पेट फूलने का खतरा रहता है। ऐसे में डाइट चार्ट के बारे में पशु चिकित्सक से पता कर लें। यदि कुत्ता भोजन के लिए अति-उत्साहित है, तो यह पेट के फूलने की समस्या से जुड़ा हो सकता है। सभी कुत्तों की तरह सेंट बर्नार्ड को भी दिन में 2 बार हेल्दी स्नैक्स के साथ खाना खिलाने की आवश्यकता होती है। यह छोटे कुत्ते की तुलना में थोड़ा अधिक भोजन करते हैं। इन्हें सूखा मेवा भी दिया जा सकता है। इसके अलावा घर में बने चिकनचावलसब्जियां जैसे गाजरमटरआलू और पालक भी दे सकते हैं।

अन्य बातें : सेंट बर्नार्ड का आकार बड़ा होता है, ऐसे में घुसपैठिए भी इनसे दूर रहते हैं। बावजूद इसके, इन्हें रक्षक कुत्तों के रूप में नहीं रखा जाता है, क्योंकि ये बहुत ही सुस्त होते हैं और शायद ही कभी भौंकते हैं। यदि कोई व्यक्ति घर में एक साथी चाहता है और उसके घर में बड़ी जगह है, तो ऐसे में इस ब्रीड को अपनाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 

इनके बाल बहुत गिरते हैं और इनके खाने पर भी बहुत खर्चा होता है। जब तक ये 18 महीने के नहीं हो जाते हैं, तब तक इन्हें अधिक शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से हड्डियों के विकास में समय लग सकता है। इस आयु सीमा को पार करने के बाद रोजाना इन्हें तीन बार बाहर टहलाने के लिए जाया जा सकता है।

(और पढ़ें - कुत्तों में कीड़े मारना)

यदि कोई व्यक्ति बड़ी नस्ल के कुत्ते को पालने के बारे में सोच रहा है, तो ऐसे में ध्यान रहे, इनके लिए घर में पर्याप्त जगह होना जरूरी है। इन्हें शारीरिक गतिविधि की जरूरत होती है। ये जायंट ब्रीड की अपेक्षा लंबे समय तक जीते हैं, लेकिन उनकी तरह ये शांत या विनम्र नहीं होते हैं। इन कुत्तों में सामान्य रूप से हिप डिस्प्लासिया, मोटापा और विकास संबंधी समस्याओं का खतरा रहता है।

यदि कोई व्यक्ति बड़ी नस्ल के कुत्ते को पालने के बारे में सोच रहा है, तो ऐसे में ध्यान रहे, इनके लिए घर में पर्याप्त जगह होना जरूरी है। इन्हें शारीरिक गतिविधि की जरूरत होती है। ये जायंट ब्रीड की अपेक्षा लंबे समय तक जीते हैं, लेकिन उनकी तरह ये शांत या विनम्र नहीं होते हैं। इन कुत्तों में सामान्य रूप से हिप डिस्प्लासिया, मोटापा और विकास संबंधी समस्याओं का खतरा रहता है।

जर्मन शेफर्ड और अल्सेशियन : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - German Shepherds and Alsatians: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : बड़ा

लंबाई और वजन : कंधों से लगभग 2 फीट ऊंचे और वजन 35 से 45 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : उच्च

बाल झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : इन कुत्तों में हिप व एल्बो डिस्प्लासिया, मूत्र मार्ग संबंधी समस्या, डायबिटीज और पेट फूलने जैसी दिक्कतों के अलावा मोतियाबिंद का भी खतरा हो सकता है।

जीवनकाल : 9 से 13 साल

रूप, आकृति : ये मध्यम आकार के होते है व इनके कान नुकीले होते हैं। ये दिखने में सतर्क, बड़ी आंखों वाले, भूरे या काले रंग के लंबे बाल और मजबूत मांसपेशियों वाले होते हैं।

स्वभाव : जर्मन शेफर्ड या अल्सेशियन अपने समझने की क्षमता और अधिक वफादार होने के कारण भारत में सबसे लोकप्रिय ब्रीड में से एक हैं। इन्हें असिस्टेंट (सहायक), शिकारी और सुरक्षा बलों में बॉम्ब को सूंघकर पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनकी रक्षण करने की क्षमता की वजह से परिवार में इन्हें दोगुना प्यार मिलता है। ये बच्चों के साथ बहुत अच्छे होते हैं और घर की सुरक्षा भी कर सकते हैं। इसके अलावा यह बुद्धिमान भी होते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : इनमें अधिक ऊर्जा होती है और अधिक मात्रा में शारीरिक गतिविधि की जरूरत होती है। छोटा आवास जिसमें आसपास घूमने के लिए अगर बड़ी जगह नहीं है तो ये बेचैन हो सकते हैं और इनका मिजाज बिगड़ सकता है, जिस वजह से इनमें व्यवहारिक समस्याएं भी हो सकती हैं।

आहार : वयस्क जर्मन शेफर्ड को दिन में दो बार मटर और गाजर जैसी सब्जियों के साथ मांस दिया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन्हें सूखा खाना देता है, तो यह सुनिश्चित कर लें कि कुत्ते के वजन के हिसाब से उसे भोजन दिया जाए। (जानवरों को दिए जाने वाले खाद्य पैकेज के पीछे हमेशा मात्रा और पदार्थ के बारे में जानकारी होती है) बड़े कुत्तों के लिए शाकाहारी भोजन की सलाह नहीं दी जाती है। यदि किसी को अपने कुत्ते के पाचन, हृदय और हड्डी के स्वास्थ्य के लिए सप्लीमेंट की आवश्यकता हो, तो इस बारे में अपने पशुचिकित्सक से बात करें।

अन्य बातें : इस ब्रीड की विशेषता है कि यदि यह परिवार के सदस्यों के आसपास रहता है, तो इसकी नस्लें तेजी से पनप सकती हैं, लेकिन अगर इन्हें अकेला छोड़ दिया जाए, तो यह बहुत जल्दी चिंतित हो जाते हैं, जिसकी वजह से अधिक भौंकना, परेशान होना और पंजों से खुद को खरोंचने जैसा व्यवहार कर सकते हैं। ऐसे में यदि मालिक को यात्रा के लिए जाने की जरूरत है तो उसके लिए बैकअप प्लान तैयार कर लें।

सभी कुत्तों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें प्रशिक्षित और समाजीकृत (समाज के अनुकूल) किया जाए, इससे जब मेहमान, मित्र या अन्य कोई व्यक्ति घर के मालिक या बच्चे के आसपास होंगे, तो यह उग्र नहीं होता है। जर्मन शेफर्ड शिकार के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है, ये स्वभाविक रूप से थोड़े संदेहजनक और रक्षात्कम होते हैं, लेकिन समाजीकरण के माध्यम से इनके व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है।

जर्मन शेफर्ड के बाल बहुत गिरते हैं। इसलिए इनकी साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी होता है। ये बहुत ऊर्जावान होते हैं और ये भौंककर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं। इनकी जरूरतें पूरी न होने पर ये उत्तेजित हो जाते हैं। अगर घर में अधिक जगह है और सक्रिय जीवनशैली को पसंद करते हैं तो इन्हें पालना एक अच्छा निर्णय हो सकता है।

लैब्राडोर और गोल्डन रिट्रीवर : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - Labradors and Golden Retrievers: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : बड़ा

लंबाई और वजन : कंधों से 2 फीट लंबे और वजन 27 से 32 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : उच्च

बाल झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : इन कुत्तों में आंख से जुड़ी समस्या, पेट फूलना, हाइपोथायरायडिज्म, किडनी संबंधी समस्या और कान में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।

जीवनकाल : 10 से 13 साल

रूप, आकृति : ये ब्रीड कई रंगों में हो सकती हैं। इनका चेहरा त्रिकोणीय, छोटे कान, बड़ी आंखें और बाहर निकली हुई लंबी जीभ होती है।

स्वभाव : इस ब्रीड को पालने वालों का कहना है कि इनका व्यक्तित्व बहुत स्नेही और प्यार करने वाला होता है। लैब्राडोर कुत्ते को पारिवारिक पालतू जानवर माना जाता है, क्योंकि यह बच्चों के साथ बच्चे जैसे रहते हैं। यह वयस्कों के साथ बॉल व अन्य खेल भी खेल सकते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : लैब्राडोर बड़े आकार के कुत्ते होते हैं और इनमें ऊर्जा भी अधिक होती है, जिस कारण से इनको पालने के लिए एक बड़ी जगह का होना आवश्यक है।

आहार : लैब्राडोर कुत्ते मांस और चावल को बहुत पसंद करते हैं। वे घर पर बना खाना भी खा सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि उनके खाने में प्याज, लहसुन और नमक न दें। वे सेब व अन्य फल भी खा सकते हैं, लेकिन उन्हें अंगूर, किशमिश और चेरी जैसी चीजें नहीं देनी चाहिए।

अन्य बातें : लैब्राडोर को हर दिन बहुत अधिक शारीरिक गतिविधि और खेलने की आवश्यकता होती है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो वे उग्र हो सकते हैं और इनका मिजाज भी बदल सकता है। ऐसे में इन्हें शुरू से प्रशिक्षित करना बेहतर हो सकता है।

यह जरूरी है कि आप कुत्ते को खुद से अलग बाहर न छोड़ें, क्योंकि इन्हें गर्मी में थकावट हो सकती है और इन्हें परिवार से ज्यादा समय के लिए दूर रखना भी अच्छा नहीं है।

ज्यादातर कुत्तों की तरह इसके बाल भी गिरते हैं, इसीलिए पशुचिकित्सक इन पालतू जानवरों की हफ्ते में एक बार साफ-सफाई करने की सलाह देते हैं, ताकि वे साफ-सुथरे रहें और इनके बालों को मजबूती मिल सके।

यदि इन कुत्तों को ऐसा वातावरण मिलता है, जिनमें यह अतिउत्साहित और शारीरिक गतिविधि कर सकते हैं और चिंता से दूर रहते हैं तो यह परिवार के लिए एक बेहतर कुत्ता हो सकता है।

रॉटविलर : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - rottweiler: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : बड़ा

लंबाई और वजन : कंधों से लगभग 2 फीट ऊंचे और वजन 40 से 60 किलोग्राम

बालों का गिरना : मध्यम

स्वास्थ्य स्थिति : हिप डिस्प्लासिया, आंखों से जुड़ी समस्या, कार्डियोमायोपैथी और पेट में सूजन

जीवनकाल : 9 से 11 साल

रूप, आकृति : रॉटविलर बड़े और बलशाली कुत्ते होते हैं, इनकी पीछे की टांगें मजबूत, सिर बड़ा और त्वचा पर काले व भूरे रंग के निशान होते हैं।

स्वभाव : ये अपने परिवार के सदस्यों के प्रति भरोसेमंद होते हैं। इन्हें अधिक आक्रामक और अप्रत्याशित व्यवहार वाला माना जाता है, जिस वजह से कुछ लोग इन्हें नकारात्मक रूप से देखते हैं। इनका व्यक्तित्व अन्य कुत्तों की तुलना में अलग है। यदि इन्हें शुरू से प्रशिक्षण और पर्याप्त समाजीकरण दिया जाता है, तो यह बुद्धिमानी से रह सकते हैं।

रॉटविलर मजबूत व्यक्तित्व और स्वतंत्र दिमाग वाले होते हैं, इसके अलावा यह सीखने और समझने में भी तेज होते हैं। वास्तव में, यदि इन्हें स्पष्टता के साथ सही ढंग से प्रशिक्षित किया जाता है, तो इन्हें विभिन्न प्रकार के आदेश और व्यवहार सिखाए जा सकते हैं।

रॉटविलर को अधिक शारीरिक गतिविधि की जरूरत नहीं होती है। इन्हें बस आधा घंटा टहलने और दिन में एक बार सैर कराना काफी है।

रॉटविलर कुत्तों में बाल गिरने की समस्या होती है, इसके प्रबंधन के लिए नियमित रूप से ब्रशिंग और साफ-सफाई की जरूरत होती है।

आहार : इन्हें दिन में दो बार खाने को दें, इसके अलावा बीच-बीच में हेल्दी स्नैक भी दिया जा सकता है। स्नैक्स में इन्हें कद्दू, गाजर, शकरकंद को उबालकर या पकाकर खाना शामिल है। फलों में इन्हें संतुलित मात्रा में सेब और केला दिया जा सकता है, इन्हें पपीता भी बहुत पसंद है। इनके लिए ये भोजन सुरक्षित हैं, लेकिन इनमें पेट दर्द का जोखिम रहता है ऐसे में कम मात्रा में ही भोजन दिया जाना उचित होता है।

डालमेशियन : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - dalmatian: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : बड़ा

लंबाई और वजन : 2 फीट लंबे और वजन 15 से 30 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : बहुत अधिक

बाल झड़ना : बहुत अधिक

स्वास्थ्य स्थिति : इनमें बहरेपन की समस्या के अलावा मूत्र मार्ग में भी संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके मूत्र मार्ग की संरचना दूसरे कुत्तों से अलग है। इनमें यूरिक एसिड का उत्पादन होता है, जिसे नियमित रूप से शरीर से बाहर निकलने की आवश्यकता होती है। इस स्थिति में कुत्ते को प्यूरीन (एक जैविक यौगिक, जो लाल मांस और अन्य जानवरों के प्रोटीन में पाया जाता है) की सीमित मात्रा के साथ विशेष आहार की जरूरत होती है। इसके अलावा हर समय पीने के लिए साफ पानी की सुविधा होनी चाहिए।

(और पढ़ें - कुत्तों के कान में कीड़े के लक्षण)

जीवनकाल : 11 से 14 साल 

रूप, आकृति : इनके शरीर की त्वचा सफेद होती है, जिस पर काले धब्बे होते हैं। यह बहुत ही लोकप्रिय पालतू जानवर है।

स्वभाव : डालमेशियन कुत्तों में ऊर्जा का स्तर अधिक होता है, इसलिए इन्हें नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने में परेशानी नहीं होती है। इन्हें बंद जगह या लंबे समय तक एक ही जगह पर नहीं बांधना चाहिए, इससे इनके व्यवहार में बदलाव आ सकता है।

अगर इस ब्रीड के कुत्ते को शुरू से ही समाजीकरण सिखाया जाता है, तो इन्हें छोटे बच्चों और जानवरों के साथ किसी तरह की समस्या नहीं होती है। ध्यान रखें, ये थोड़े बड़े और अधिक ऊर्जावान होते हैं, इसलिए ये छोटे बच्चों और फर्नीचर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : यदि घर में जगह कम है, तो इस कुत्ते को गोद लेने की सलाह नहीं दी जाती है।

आहार : डालमेशियन जैसे अधिक ऊर्जा वाले कुत्तों को हेल्दी कार्बोहाइड्रेट युक्त एक संतुलित आहार की जरूरत होती है, जिसमें जौ का आटा, आलू, मटर, चावल और सेब जैसे फल शामिल हैं। इन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है। इनके आहार में रेड मीट को सीमित रखना चाहिए और स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए भोजन में अंडे, सफेद मछली और चिकन देना चाहिए।

अन्य बातें : यदि कोई व्यक्ति सैर-सपाट जैसी गतिविधियों का शौकीन है, तो ऐसे लोगों के लिए इस कुत्ते को पालना एक अच्छा निर्णय हो सकता है। इसे प्रशिक्षित करना चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए इन्हें कम उम्र में ही प्रशिक्षण दिया जाना उचित होता है, क्योंकि कम उम्र में ये जल्दी सीखते हैं। डालमेशियन कुत्तों के साथ थोड़ा सख्त रहने की जरूरत होती है क्योंकि यदि अधिक दुलार-प्यार दिया गया तो ये जिद्दी हो सकते हैं।

डालमेशियन के बाल पूरे साल झड़ते हैं। हालांकि, अगर आप इनके फर को हफ्ते में एक बार साफ करते हैं, तो इनके बाल गिरने की संख्या काफी कम हो सकती है।

डालमेशियन में कुछ तरह की आनुवंशिक समस्याएं हो सकती हैं, जिस वजह से इनमें सुनने संबंधी समस्या या बहरेपन का खतरा होता है। इसलिए इन स्थितियों को लेकर जागरुक रहें और पशुचिकित्सक से इस बारे में सलाह लें, क्योंकि जिन कुत्तों को सुनाई नहीं देता है, वे कभी-कभी आक्रामक भी हो सकते हैं।

मध्यम नस्ल के कुत्ते आम घरेलू पालतू जानवर होते हैं। ये व्यवहार से चंचल व सक्रिय होते हैं और मालिक के साथ सैर पर भी आसानी से जा सकते हैं। इसके अलावा ये बिस्तर में घर के सदस्यों के साथ लेट सकते हैं। इनमें से कुछ को रखवाली करने वाले कुत्तों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि ये तेज आवाज में भौंक सकते हैं। ये कुत्ते उन लोगों के साथ भी रह सकते हैं, जिनके घर में ज्यादा जगह नहीं होती है, इसके अलावा इन्हें बच्चों के साथ अच्छे व्यवहार के लिए भी जाना जाता है।

बीगल : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - beagle: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से 12 से 15 इंच लंबे और वजन 8 से 12 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : मध्यम

स्वास्थ्य स्थिति : बीगल कुत्तों में स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है, जिसमें आंख से जुड़ी समस्या, बहरापन, इंटरवर्टेब्रल डिस्क रोग और मिर्गी शामिल है। कुछ बीगल हिप डिस्प्लासिया के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। इसके अलावा इन्हें हाइपरथायरायडिज्म, डायबिटीज, कान का संक्रमण और उम्र के साथ वजन बढ़ने जैसा खतरा भी रहता है। इसलिए इन्हें स्वस्थ आहार और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करवानी चाहिए।

जीवनकाल : 10 से 13 साल

रूप, आकृति : इनके कान लटकते हुए होते हैं और मुंह थोड़ा चौड़ा होता है। ये स्वभाविक रूप से अपने आकार की तुलना में भारी और मजबूत होते हैं। ज्यादातर ये सफेद रंग के होते हैं और इनके पूरे शरीर पर भूरे रंग के धब्बे होते हैं।

स्वभाव : बीगल मध्यम आकार की नस्ल का एक लोकप्रिय कुत्ता है। इसका व्यवहार अनुकूल होता है और इसका रखरखाव कम होने के कारण इसे पसंद भी किया जाता है।

चूंकि बीगल में शिकार करने की क्षमता होती है इसलिए वह अपने लक्ष्य को सूंघकर ढूंढ सकता है। जब मालिक अपने कुत्ते को सैर के लिए ले जाते हैं तो ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि कभी भी दिलचस्प चीज कुत्ते को उकसा सकती है और वह अचानक उसके पीछे दूर भाग सकता है।

बीगल को हर दिन मध्यम मात्रा में शारीरिक गतिविधियों में शामिल होने की जरूरत होती है। इस ब्रीड के लिए लगभग आधे घंटे की शारीरिक गतिविधि पर्याप्त है।

स्थानीय आवश्यकता : इसके मध्यम आकार, कम वजन और मनुष्यों के प्रति स्नेहपूर्ण व्यवहार को देखते हुए, इसे एक अच्छा पारिवारिक पालतू जानवर माना जाता है। यदि इसे नियमित रूप से सैर के लिए ले जाने में कोई दिक्कत नहीं है, तो इसे छोटी जगह में भी रखा जा सकता है।

अन्य बातें : इसकी त्वचा छोटी और चिकनी होती है और इसके बाल कभी-कभार ही गिरते हैं। हालांकि, बाल गिरने की समस्या गर्मियों में अन्य मौसम की तुलना में अधिक होती है। इनके रखरखाव में ज्यादा खर्च नहीं होता है। इसके अलावा इसके फर में रूसी और धूल के कणों के घुसने का जोखिम भी कम होता है और हफ्ते में दो बार ब्रशिंग करना पर्याप्त होता है।

बॉर्डर कोली : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - Border Collie: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से लगभग 1.5 फीट लंबे और वजन 12 से 20 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : बहुत ही अधिक

बालों का झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : बॉर्डर कोली कुत्तों में कुछ आनुवंशिक बीमारियां जैसे हिप डिस्प्लासिया, आंख का संक्रमण और मिर्गी होने का खतरा होता है। यदि कोई व्यक्ति इस कुत्ते को गोद लेने की सोच रहा है, तो सुनिश्चित करें कि केवल मान्यताप्राप्त जगह से ही इसे गोद लें, ताकि वह निजी लाभ की जगह कुत्ते के स्वास्थ के बारे में सही जानकारी दे सके।

जीवनकाल : 12 से 16 साल

रूप, आकृति : इसका रंग काला और सफेद होता है, इसकी आंखें सामान्य और चेहरा हमेशा एक्टिव दिखता है। इसके अलावा इसका आकार मध्यम होता है।

स्वभाव : बॉर्डर कोली को बुद्धिमान कुत्तों की श्रेणी में रखा जाता है। इन्हें उच्च स्तर पर प्रशिक्षित किया जा सकता है। ये संकेतों को समझने में जन्मजात माहिर होते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : इन कुत्तों को स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक दिन अधिक गतिविधि और कार्य करने की जरूरत होती है।

अन्य बातें : ये वातावरण के अनुसार चीजे सीखते हैं और इनके साथ थोड़ा धैर्य से पेश आने की जरूरत होती है। यह बहुत स्नेही और प्यारे होते हैं, फिर भी लोग इन्हें आसानी से गोद लेने का विचार नहीं करते हैं। यह मेहमान या किसी बाहरी व्यक्ति के घर आने पर होशियार हो जाते हैं। यदि इन्हें शुरू से ही समाजीकरण सिखाया जाता है, तो यह दूसरे लोगों के साथ भी मिलनसार हो सकते हैं। इनके भी थोड़े बाल गिरते हैं, खासकर गर्म वातावरण या गर्मी के मौसम में। इनके बाल गिरने की आशंकाओं को कम करने के लिए इन्हें साफ करते रहें या पशुचिकत्सक की सलाह लें।

इंग्लिश कॉकर स्पैनियल : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - English Cocker Spaniel: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से 15 से 17 इंच लंबे और वजन लगभग 12 से 15 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : मध्यम

बालों का झड़ना : मध्यम

स्वास्थ्य स्थिति : कॉकर स्पैनियल के कान लंबे और लटके हुए होते हैं, जिसकी वजह से उन्हें कान का संक्रमण होने का खतरा होता है। इन्हें लिवर रोग, हिप या एल्बो डिस्प्लासिया और हाइपोथायरायडिज्म का भी खतरा रहता है। इन्हें नियमित रूप से देखभाल की जरूरत होती है इसके अलावा इनके कानों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होता है। इनमें मोतियाबिंद का भी जोखिम होता है।

जीवनकाल : 12 से 14 साल

रूप, आकृति : कॉकर स्पैनियल एक लोकप्रिय पालतू जानवर है। यह सुंदर, मिलनसार और ऊर्जा से भरे हुए होते हैं। अपनी इच्छा अनुसार इन्हें घर पर भी रखा जा सकता है और इन्हें बाहर सैर के लिए भी ले जाया जा सकता है। इनके बाल सुनहरे भूरे रंग, काले या सफेद रंग के होते हैं।

स्वभाव : परंपरागत रूप से, कॉकर स्पैनियल को छोटे जीव के शिकार के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। इस नस्ल को नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने की जरूरत होती है। इन कुत्तों को रक्षक कुत्तों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये मनुष्यों के प्रति बहुत ही मिलनसार होते हैं।

कॉकर स्पैनियल को प्रशिक्षित करना काफी हद तक चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए इन्हें शुरुआती दिनों से ही प्रशिक्षित करने की सलाह दी जाती है, इससे इनके आवेगी और उत्तेजित व्यवहार को रोकने में मदद मिलती है।

अन्य बातें : कॉकर स्पैनियल की त्वचा कोमल, बालों की लंबाई मध्यम और घुंघरालापन होता है, जिसकी वजह से ये आकर्षक लगते हैं। इनके बाल आसानी से गंदे हो सकते हैं और थोड़े गिरते हैं, इसलिए महीने में एक बार साफ-सफाई करना जरूरी है।

यह नस्ल बहुत ही मिलनसार होती है, इसलिए यदि इन्हें लंबे समय तक अकेला छोड़ दिया जाए, तो इनके व्यवहार में बदलाव आ सकता है।

डैकशुंड : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - dachshund: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से 10 इंच ऊंचे और वजन 8 से 14 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न से मध्यम

बालों का झड़ना : मध्यम

स्वास्थ्य स्थिति : डैकशुंड कुत्तों को उनकी संरचना की वजह से पीठ में चोट, मोटापे और मिर्गी जैसी समस्या का खतरा रहता है। इस ब्रीड की वजह से घर में कुछ बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है: जैसे बेड या सोफे पर इनके चढ़ने के लिए स्टूल की व्यवस्था करना। इन्हें उठाते समय सावधान रहने की जरूरत होती है क्योंकि इनकी संरचना की वजह से इनके गिरने का खतरा रहता है।

जीवनकाल : 12 से 15 साल

रूप, आकृति : यह नस्ल दिखने में पतली होती है। इनके पैर छोटे होते हैं और शरीर सिलेंडर के आकार का होता है। मूल रूप से इस नस्ल को खुदाई करने और छोटे जानवरों का शिकार करने के लिए जाना जाता है। 

स्वभाव : यह वफादार होते हैं। इन्हें अपने परिवार से बहुत लगाव होता है और अगर इन्हें ऐसा महसूस होता है कि इनका मालिक इन पर ज्यादा ध्यान नहीं देता है, तो इनके व्यवहार में बदलाव आ सकता है। इनके मामूली रूप से बाल भी गिरते हैं और इन्हें ज्यादा गतिविधि करने की भी जरूरत नहीं होती है। इन्हें अच्छा पहरेदार माना जाता है और इलाके में घुसपैठियों के घुसने पर भौंकने से पड़ोसी को सचेत भी कर सकते हैं।

इन कुत्तों को घर पर प्रशिक्षित करना आसान नहीं होता है, इन्हें सिखाने के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत पड़ती है।

आश्चर्यजनक रूप से, इनके भौंकने की आवाज तेज होती है। इनमें वजन बढ़ने का खतरा होता है, इसलिए इन्हें अत्यधिक मात्रा में खाना नहीं देना चाहिए।

स्थानीय आवश्यकता : डैकशुंड बहुत ही सुंदर और आकर्षक पशु होते हैं। इन्हें बहुत ज्यादा देखभाल की भी जरूरत नहीं है। कम जगह में रहने वाले व्यक्ति भी इनका पालन कर सकते हैं। इसके अलावा पड़ोसियों को भी कोई दिक्कत नहीं होती है क्योंकि यह कभी-कभार ही भौंकते हैं। 

फ्रेंच बुलडॉग : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - French Bulldog: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से एक फीट लंबा और वजन लगभग 7 से 12 किलोग्राम 

ऊर्जा का स्तर : मध्यम

बालों का झड़ना : निम्न

स्वास्थ्य स्थिति : फ्रेंच बुलडॉग को ब्रैकीसफैलिक सिंड्रोम, आंखों से जुड़ी समस्या, हीट सेंसिविटी और हिप डिस्प्लासिया होने का खतरा रहता है। ब्रैकीसफैलिक सिंड्रोम से ग्रस्त कुत्तों में श्वसन संबंधी समस्या का भी खतरा रहता है। शारीरिक गतिविधि या तनाव में होने पर ये हांफने लगते हैं और इनकी नाक से आवाज आने लगती है। ब्रैकीसफैलिक सिंड्रोम में वायुमार्ग में संकुचन हो जाता है, जिसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ या फेफड़े खराब हो सकते हैं।

जीवनकाल : 10 से 13 साल

रुचि, आकृति : फ्रेंच बुलडॉग के चमगादड़ जैसे कान, चपटा झुर्रीदार चेहरा और उभरी हुई आंखें होती हैं। बुलडॉग बाकी कुत्तों से अलग नजर आते हैं और भारत में पालतू जानवर के रूप में काफी पसंद किए जाते हैं। मध्यम नस्ल के इस ब्रीड को कम रखरखाव की जरूरत होती है। इसके अलावा इनका स्वभाव मिलनसार होता है, जिसकी वजह से ये परिवार में आसानी से घुल-मिल जाते हैं। 

स्वभाव : फ्रेंच बुलडॉग को अधिक गतिविधि करवाने की जरूरत नहीं होती है। इस ब्रीड के लिए दिन में एक बार सैर करवाना और आधे घंटे की शारीरिक गतिविधि पर्याप्त होती है। इन्हें गर्मी की वजह से थकावट महसून होने लगती है। चूंकि ये ज्यादा भौंकते नहीं हैं, इसलिए इन्हें रक्षक कुत्ते की तरह ज्यादा प्रभाशाली नहीं माना जाता है।

बच्चों के साथ इनका स्वभाव बहुत अच्छा होता है और अगर शुरुआत से इन्हें समाजीकरण सिखाया जाए व प्रशिक्षण दिया जाए, तो यह परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : फ्रेंच बुलडॉग मध्यम आकार के होते हैं, इन्हें अधिक शारीरिक गतिविधि की भी जरूरत नहीं होती और ये बहुत मिलनसार भी होते हैं।

अन्य बातें : इनमें बाल गिरने की समस्या अधिक नहीं होती है, लेकिन इनके मुंह से लार गिरती है, इसलिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि परिवार के सदस्य कुत्ते के साथ खेलने के बाद संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हाथों को अच्छी तरह से धो लें।

देसी भारतीय कुत्ता (इंडी या इंडॉग) : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - Native Indian Dog (Indie or INDog): size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : लगभग 1.5 फीट लंबे और वजन 14 से 18 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : उच्च

बालों का झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : इंडी (देसी) कुत्तों को खुजली, एलर्जी, आंख व कान संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसा माना जाता है कि देसी कुत्ते अन्य कुत्तों की तुलना में ज्यादा ताकतवर होते हैं। ये भारतीय परिस्थितियों को बहुत अच्छे से समझते हैं। इनकी त्वचा की बनावट ऐसी होती है, जिससे ये गर्म जलवायु में भी खुद को ढाल सकते हैं। वास्तव में, विदेशों से लाए गए कुत्तों की तुलना में इनकी इम्युनिटी बहुत अच्छी होती है और इनमें आनुवंशिक समस्याएं भी कम होती हैं।

जीवनकाल : 10 से 14 साल 

रूप, आकृति : आमतौर पर देसी कुत्तों का जीवन कठिन होता है। यह भोजन प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक मेहनत करते हैं और कई बार इन्हें कूड़े में भोजन की तलाश करनी पड़ती है। इंडी कुत्ते ज्यादातर हल्के भूरे रंग के दिखते हैं। इसके अलावा यह सफेद, काले, धब्बों के साथ या धारियों वाले पैटर्न में भी दिखाई दे सकते हैं।

जगह के अनुसार इनकी कदकाठी में बदलाव हो सकता है। हालांकि, ये मध्यम नस्ल के कुत्ते हैं जिनके कान खड़े, आकर्षक आंखें और बड़ा मुंह होता है।

स्वभाव : इंडीज कुत्तों को पालतू कुत्तों के रूप में काफी अच्छा माना जाता है। ये कुत्ते समझदार होते हैं और इनका रखरखाव भी कम होता है। ये वफादार होते हैं और बच्चों के साथ इनका स्वभाव अच्छा रहता है। अगर इन्हें कम उम्र से ही समाजिकृत और प्रशिक्षित किया जाए, तो यह कई तरह के संकेतों या ईशारों को सीखने में सक्षम हो सकते हैं।

इंडीज कुत्तों को अच्छी मात्रा में शरीरिक गतिविधि की जरूरत होती है और इनमें बाल गिरने की भी समस्या होती है।

इंडीज ब्रीड में लैब्राडोर या कॉकर स्पैनियल की तरह परिवार के सदस्यों को खुश रखने की प्रवृत्ति नहीं होती है। इसलिए इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए उदारतापूर्वक व्यवहार से पेश आने की जरूरत होती है।

आहार : इंडीज कुत्ते सख्त होते हैं और ये घर पर बना खाना या पैकेज फूड भी खा सकते हैं। इन्हें प्रोटीन से भरपूर संतुलित भोजन देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन्हें सप्लीमेंट देने की सोच रहा है, तो ऐसे में पशुचिकित्सक से सलाह करें। ध्यान रहे, इन कुत्तों को प्याज, लहसुन, नमक, चीनी, अंगूर और किशमिश खाने को नहीं देना चाहिए।

अन्य बातें : इंडीज कुत्ते अपने समकालीन की तुलना में ताकतवर और बुद्धिमान होते हैं, इसी वजह से इन्हें पालतू जानवर के रूप में पसंद किया जाता है। ये वफादार होते हैं और इन्हें बेहतरीन रक्षक कुत्ता भी माना जा सकता है। इसके अलावा इनमें भौंकने की आवाज भी तेज होती है, जो पड़ोसियों को भी जागरुक करने के लिए पर्याप्त है।

इन्हें धैर्य के साथ समाजीकृत और प्रशिक्षित करने की जरूरत होती है क्योंकि यह नस्ल कुछ तरह के व्यवहार को नहीं समझ सकती है, ऐसे में निराश न हों क्योंकि प्रशिक्षण के परिणाम तुरंत नहीं मिलते हैं।

पग : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - pug: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : मध्यम

लंबाई और वजन : कंधों से एक फुट लंबा और वजन 8 से 12 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न से मध्यम

बालों का झड़ना : उच्च

स्वास्थ्य स्थिति : पग की आंखें उभरी हुई होती हैं, जिस वजह से इनको आंख संबंधी समस्या जैसे मोतियाबिंद, अचानक आंखों का लाल होना, आंख पर चोट लगना या अंधेरे में न दिखने जैसी समस्या का खतरा रहता है। इनकी नाक चपटी होती है, जिस वजह से इनमें ब्रैकीसफैलिक सिंड्रोम और श्वसन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस ब्रीड को गर्मी से थकावट लग सकती है और यह अधिक तापमान में सहज नहीं हो पाते हैं।

जीवनकाल : 12 से 14 साल

रूप, आकृति : पग कुत्तों के चेहरे पर झुर्रियां, चपटी नाक और इनकी त्वचा पर गहरे रंग के भूरे धब्बे होते हैं। यह दुर्लभ रूप से काले रंग के भी हो सकते हैं। पग अन्य कुत्तों की तुलना में बहुत अलग और आकर्षक होते हैं और ज्यादातर लोग इन्हें पसंद करते हैं। 

स्वभाव : ये विशेष रूप से एक्टिव नहीं होते हैं, इन्हें रोजाना आधे घंटे की सैर और शारीरिक गतिविधि करने की जरूरत होती है। यह वफादार होते हैं, जिस वजह से ये बच्चों के साथ चंचलता से रहते हैं और खुशी से मालिक की बातों का पालन करते हैं। चूंकि यह स्वतंत्र इच्छा शक्ति वाले होते हैं, जिन्हें आसानी से प्रशिक्षित नहीं किया जा सकता है।

स्थानीय आवश्यकता : इनका आकार छोटा होता है और इनका रखरखाव भी कम होता है। यदि घर में ज्यादा जगह नहीं है, तो भी इन्हें आसानी से पाला जा सकता है।

अन्य बातें : पग की त्वचा पतली और बाल मुलायम होते हैं, लेकिन फिर भी इनमें बाल गिरने की समस्या अधिक होती है। जिन लोगों को एलर्जी है और अधिक साफ-सफाई पसंद करते हैं उनके लिए यह कुत्ता थोड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। इनके गिरते बालों को कम करने के लिए बार-बार ब्रश करने की जरूरत होती है।

(और पढ़ें - कुत्तों में खाने के प्रति अरुचि के कारण)

आमतौर पर छोटे कुत्तों का वजन 5 किलोग्राम से कम होता है और अच्छे पालतू जानवरों के रूप में इन्हें काफी पसंद किया जाता है। इनका रखरखाव कम होता है और ये स्वतंत्र होते हैं, इसलिए इन्हें कुछ समय के लिए अकेला भी छोड़ा जा सकता है। यह बहुत तेज भौंक सकते हैं, जिस वजह से घुसपैठियों के बारे में जागरुक करने में ये सक्षम होते हैं। इन्हें भी कम उम्र से प्रशिक्षित करना जरूरी होता है।

पोमेरेनियन : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - pomeranian: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : छोटा

लंबाई और वजन : कंधों से 20 सेंटी मीटर लंबे और वजन लगभग 2 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न

बालों का झड़ना : निम्न

स्वास्थ्य स्थिति : इनकी त्वचा कोमल होती है और गर्म तापमान में यह असहज हो सकते हैं। इन कुत्तों में आंख संबंधी समस्याएं, श्वसन नली प्रभावित होना और हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा हो सकता है। इन जानवरों के कटोरे में हमेशा पर्याप्त मात्रा में पानी रखने की जरूरत होती है। इसके अलावा इन्हें कभी घर पर अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहिए।

जीवनकाल : 11 से 15 साल

रूप, आकृति : किसी खिलौने जैसे दिखने वाले इन कुत्तों का वजन लगभग दो किलोग्राम होता है। इनके फर वाले बाल चेहरे सहित पूरे शरीर पर होते हैं। इनकी आंखें छोटी, सुंदर और आकर्षक होती हैं, इसके अलावा इनके कान छोटे और चेहरा भरा हुआ होता है।

स्वभाव : ये बहुत अधिक भौंकते हैं, जिस वजह से यह रखवाली करने में सक्षम होते हैं। किसी अपरिचित को देखकर यह मालिक को जागरुक करते हैं।

दिन में इन कुत्तों को व्यस्त और खुश रखने के लिए छोटी सैर और खेल-कूद पर्याप्त होता है। यदि रोजाना सैर पर जाना सरल नहीं है, तो घर में ही इनके साथ खेला जा सकता है। इससे यह काफी खुश रहते हैं।

इन कुत्तों के बाल ज्यादा नहीं गिरते हैं और इनके रखरखाव में भी ज्यादा खर्च नहीं होता है, इसलिए इन्हें पालतू जानवर के रूप में अच्छा माना जाता है। इन्हें ज्यादा खाने की जरूरत नहीं होती है और कुछ समय के लिए इन्हें अकेला छोड़ा जा सकता है।

यह बहुत मिलनसार कुत्ते होते हैं। यदि घर में छोटे बच्चे हैं, तो थोड़ा ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि बच्चे इन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।

स्थानीय आवश्यकता : ये कुत्ते छोटी जगह और किसी अपार्टमेंट में भी रह सकते हैं और इन्हें अधिक गतिविधि की भी जरूरत नहीं होती है।

अन्य बातें : पोमेरेनियन कुत्ते के साथ स्नेहपूर्ण संबंध रखना चाहिए। इन्हें अन्य कुत्तों की तरह शुरू में ही प्रशिक्षित करना उचित होता है। ये जल्दी भौंकना शुरू कर देते हैं और देर तक भौंकते रहते हैं, जिसकी वजह से पड़ोसियों को परेशानी हो सकती है।

ल्हासा एप्सो : आकार, वजन, गुण, आहार और जीवनकाल - Lhasa Apso: size, weight, qualities, diet, lifespan in hindi

आकार : छोटा

लंबाई और वजन : 26 से 28 सेंटी मीटर लंबे और वजन 5 से 7 किलोग्राम

ऊर्जा का स्तर : निम्न

बालों का झड़ना : निम्न

स्वास्थ्य स्थिति : इन कुत्तों में आंख संबंधी समस्या, हिप डिस्प्लासिया और इंटरवर्टेबल डिस्क रोग का खतरा रहता है।

जीवनकाल : 12 से 14 साल

रूप, आकृति : ये दिखने में शाही और राजसी लगते हैं। इनका चेहरा सहित पूरा शरीर फर से ढका होता है। भले ही ये दिखने में सुंदर होते हैं, लेकिन इनका रखरखाव निम्न मध्यम परिवार के लिए आसान नहीं होता है। इनके बाल आसानी से गंदे या उलझ सकते हैं, इसलिए इनका विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसलिए इन पर खर्च भी बहुत अधिक होता है।

स्वभाव : ल्हासा एप्सो ब्रीड स्वभाव में दिलचस्प होते हैं। यह वफादार होते हैं और अपने परिवार की रक्षा के लिए चरम सीमा तक जा सकते हैं। वे खुद ही खेलना पसंद करते हैं और कुछ समय के लिए इन्हें घर पर अकेला भी छोड़ा जा सकता है। अजनबियों के सामने ये थोड़े सावधान हो सकते हैं, लेकिन यदि इन्हें छोटी उम्र से समाजीकृत किया जाए तो यह मिलनसार हो सकते हैं।

इन्हें अधिक मात्रा में शारीरिक गतिविधि की जरूरत नहीं होती है। इन्हें परेशान करने पर या चोट लगने पर ये उग्र हो सकते हैं। 

स्थानीय आवश्यकता : ल्हासा एप्सो छोटे आकार के कुत्ते होते हैं और इनमें ऊर्जा भी कम होती है, जिस वजह से यह छोटे या बड़े घर में आसानी से रह सकते हैं।

अन्य बातें : ल्हासा एप्सो कुत्तों को शारीरिक व्यायाम और ध्यान रखने के मामले में कम रखरखाव की जरूरत होती है। इन्हें प्रशिक्षित करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसा माना जाता है कि बच्चों के साथ इन कुत्तों का व्यवहार हमेशा सही नहीं होता है।

कुत्ते को गोद लेने से पहले यह जरूरत पता कर लें कि इससे पहले उसका मालिक कौन था और उसने जरूरी टीके लगवाएं हैं या नहीं।

(और पढ़ें - कुत्तों में वजन बढ़ने के कारण)

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