• हिं

कुत्ते में गुदा थैली रोग क्या होता है

कुत्ते के गुदा के दाएं और बाएं तरफ एक एक थैली या ग्रंथि होती है। यह नर और मादा दोनों में होती है। यह पसीना और तेल उत्पादन करने वाली ग्रंथियां हैं जो लुब्रिकेशन (एक तरह का चिकना पदार्थ) का रिसाव करने के साथ अत्यधिक गंधयुक्त द्रव छोड़ती हैं।

जब कुत्ते गुदा वाले हिस्से से बदबूदार तरल छोड़ते हैं तो माना जाता है कि इसका कारण अपने क्षेत्र को चिह्नित करना व दूसरे (अन्य) कुत्ते की पहचान या उनसे संवाद करना होता है। ये कुत्ते जब पहली बार आपस में मिलते हैं, तो पहले वे एक-दूसरे के चारों ओर घूमते हैं और नितंबों को सूंघते हैं। वास्तव में वे इस स्थिति में गुदा ग्रंथि से जारी होने वाली गैस को सूंघते हैं।

गुदा ग्रंथि तरल पदार्थ से भरी होती है और यह तब बाहर निकलती है जब कोई कुत्ता मल त्याग करता है। यदि मल त्याग होने के बाद भी गुदा थैली पूरी तरह से खाली नहीं होती है तो ऐसे में दबाव (बृहदान्त्र में मल फंस जाना) बनने लगेगा और संक्रमण का जोखिम हो सकता है। गुदा थैली में संक्रमण की वजह से फोड़े बनने की समस्या हो सकती है।

वैसे यह समस्या कुत्तों में काफी आम है और आमतौर पर अपने आप ही ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ ऐसे भी मामले पाए गए हैं, जहां ग्रंथियों में सूजन की वजह से कुत्ते को तेज दर्द हो सकता है और डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ सकती है।

(और पढ़ें - कुत्तों में सुस्ती का कारण)

  1. कुत्ते में गुदा थैली रोग के लक्षण क्या हैं - Kutte me guda thaili (granthi) rog ke lakshan kya hain
  2. कुत्ते में गुदा थैली रोग कैसे होता है - Kutte me guda thaili (granthi) rog ke karan kya hain
  3. कुत्ते में गुदा थैली रोग का निदान कैसे होता है - Kutte me guda thaili (granthi) rog ka parikshan kaise hota hai
  4. कुत्ते में गुदा थैली रोग का इलाज कैसे करें - Kutte me guda thaili (granthi) rog ka upchar kaise hota hai
  5. कुत्ते में गुदा थैली रोग का प्रबंधन कैसे किया जा सकता है - Kutte me guda thaili (granthi) rog ka management kaise kiya ja satka hai
  6. कुत्ते में गुदा थैली रोग से संंबंधित टिप्स - Kutte me guda thaili (granthi) rog se sambandhit tips

कुत्ते में गुदा थैली या गुदा ग्रंथि रोग काफी आम समस्या है। आमतौर पर इसके लक्षण आसानी से देखे जा सकते हैं :

नरम या मुलायम सतह पर नितंबों को घिसना : यदि आप अपने कुत्ते को उसके नितंबों को किसी मुलायम चीज जैसे बिस्तर पर खींचते या घिसते हुए देखते हैं, तो यह गुदा ग्रंथियों में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। प्रभावित हिस्से को रगड़ने से उन्हें अस्थाई रूप से आराम मिलता है और यदि गुदा वाले हिस्से पर कुछ गंदगी जमी या चिपकी है तो उसे हटाने में मदद मिलती है।

कब्ज और दर्द : मल त्याग करते समय यदि कुत्ते में कब्ज के लक्षण दिखाई देते हैं या वह दर्द से कराहता है, तो यह एनल ग्लैंड डिजीज का परिणाम हो सकता है।

प्रभावित हिस्से को बार बार चाटना : इसमें कुत्ता दर्द से राहत पाने के लिए गुदा के आसपास के हिस्से को बार-बार चाटने की कोशिश करता है।

तेज बदबू : गुदा ग्रंथियों द्वारा तेज गंध का स्राव होता है, लेकिन यदि कुत्ते को गुदा वाले हिस्से में कोई संक्रमण है, तो ऐसे में गंध और भी तेज हो सकती है। इसके अलावा प्रभावित थैलियों के अंदर मौजूद स्राव गाढ़ा हो जाता है और थैलियों में सूजन आ जाती है।

गुदा के आसपास सूजन : जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वह फोड़े का रूप ले सकता है, जिससे उस जगह पर सूजन की समस्या हो सकती है। यदि यह फोड़ा फूट गया तो खून निकलने लगेगा।

(और पढ़ें - कुत्तों के मुंह से लार आना)

कभी-कभी मल त्याग करने के बाद भी गुदा थैली पूरी तरह से खाली नहीं हो पाती है, जिसके वजह से बैक्टीरिया का जोखिम हो सकता है और यह फोड़े का रूप ले सकता है। यदि इस स्थिति का इलाज नहीं किया गया, तो यह फोड़े फट सकते हैं और खून निकल सकता है।

आमतौर पर, यह बीमारी सही से साफ-सफाई न होने की वजह से होती है। हालांकि, कम फाइबर वाला आहार लेने और लगातार ढीला मल त्याग करने से भी यह समस्या हो सकती है।

छोटी नस्ल के कुत्ते इस रोग के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं पाया गया है कि यह बीमारी किसी विशेष लिंग के कुत्तों को ज्यादा प्रभावित करती है। माना जाता है कि मोटे कुत्तों में इस बीमारी का ज्यादा जोखिम है, क्योंकि उनकी त्वचा में मोटापे के कारण सिलवटें पड़ जाती हैं जो गुदा के चारों ओर मौजूद होती हैं।

कुछ कुत्तों में जन्मजात रूप से पतली गुदा नलिकाएं होती हैं, जिनमें सूजन बन सकती है। इसके अलावा कुछ कुत्तों में गुदा वाले हिस्से में लड़ाई या दुर्घटना या किसी अन्य वजह से चोट के कारण नलिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और संक्रमण की समस्या हो सकती है। (और पढ़े - कुत्तों में कान के संक्रमण)

दुर्लभ मामलों में, रोग की स्थिति बदतर हो जाती है यह 'एनल सैक एडेनोकार्सिनोमा' का रूप ले सकता है, लेकिन यह आमतौर पर वयस्क कुत्तों में देखा जाता है। एनल सैक एडेनोकार्सिनोमा को 'एनल सैक ग्लैंड कार्सिनोमा' भी कहा जाता है। बता दें एनल सैक एडेनोकार्सिनोमा कुत्तों में गुदा थैली का एक घातक ट्यूमर है।

कुत्ते में बीमारी के निदान के लिए पशु चिकित्सक आपके कुत्ते की मेडिकल हिस्ट्री (उसकी पिछली बीमारियों और उपचारों के बारे में जानना) और उसमें दिखाई देने वाले शुरुआती लक्षणों के बारे में पूछेंगे। इस दौरान आपको निम्न बातों के बारे में जानकारी देने की जरूरत होती है :

  • कुत्ते का आहार
  • शारीरिक गतिविधि
  • व्यवहार में बदलाव

कुत्ते के परिवार में किसी और को गुदा ग्रंथि रोग हैं या नहीं, इस बारे में भी पशुचिकित्सक को सूचित करने की जरूरत होती है।

पशु चिकित्सक कुत्ते में किसी भी आकस्मिक या बड़ी समस्या का पता लगाने के लिए शारीरिक जांच भी कर सकते हैं। कुत्ते के गुदा वाले हिस्से में संक्रमण है या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए शरीर के तापमान को मापा जाता है और ब्लड टेस्ट किया जाता है।

पशुचिकिस्तक मेडिकल ग्लव (सर्जरी या चेकअप के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले दस्ताने) पहनकर गुदा ग्रंथि की जांच कर सकते हैं। यदि स्थिति गंभीर नहीं है और गुदा वाले हिस्से में गंदगी नहीं जम रही है, तो ऐसे में उपचार सरल तरीके से हो सकता है।

यदि पशु चिकित्सक को बहुत गंभीर स्थिति महसूस होती है, तो वह लैब टेस्ट के लिए ग्रंथि का एक नमूना लेकर उसकी जांच कर सकते हैं। कैंसर के संकेतों की जांच के लिए इमेजिंग टेस्ट भी किया जा सकता है, लेकिन इसकी आशंका कम होती है और ज्यादातर मामलों का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

(और पढ़ें - कुत्ते का स्वास्थ्य और देखभाल)

प्रभावित हिस्से का शारीरिक परीक्षण करने के बाद गुदा थैली रोग का उपचार निर्धारित किया जाता है। यदि ग्रंथि में अधिक मात्रा में तरल का जमाव है, तो ऐसे में पशु चिकित्सक ग्रंथियों को दबाकर अंदर भरे तरल को बाहर निकालने की कोशिश करेंगे। हालांकि, यह प्रक्रिया आपके पालतू जानवर के लिए काफी असुविधाजनक हो सकती है इसलिए डॉक्टर जरूरत समझने पर कुत्ते को बेहोश करके यह प्रक्रिया अपना सकते हैं। यह एक सीधी व आसान प्रक्रिया है जिसे आप पशु चिकित्सक से सीखकर घर पर खुद से कर सकते हैं।

यदि कुत्ते के गुदा वाले हिस्से में संक्रमण या कोई अन्य परेशानी का पता चलता है तो ऐसे में पशुचिकित्सक को एक छोटी सी प्रक्रिया की जरूरत होती है, जिसमें मृत ऊतक को हटाना और अच्छे से जल निकासी के लिए नलिकाओं को चौड़ा करना शामिल है।

यदि कोई संक्रमण मौजूद है, तो ऐसे में एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं और कुत्ते को रातभर रुकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

यदि समस्या बार-बार होती है, तो आप गुदा ग्रंथियों को हमेशा के लिए बाहर निकालने के बारे में अपने पशु चिकित्सक से विचार विमर्श कर सकते हैं। यह एक नाजुक प्रक्रिया है जिसमें मूत्राशय पर नियंत्रण की कमी जैसी दिक्कत हो सकती है। ग्रंथियों को हटाना अंतिम उपाय है और इसका उपयोग केवल तभी किया जाता है जब ग्रंथियां जख्मी हो जाती हैं और कार्य करने में सक्षम नहीं होती हैं।

(और पढ़ें - कुत्ते में रेबीज का इलाज)

इंसान हो या जानवर, फाइबर वाला आहार लेने से उसमें पाचन तंत्र ठीक तरह से काम करता है। इसके अलावा न उसे अत्यधिक सख्त मल की शिकायत होती है और न ही अत्यधिक ढीले मल की समस्या होती है। ऐसे में आप अपने कुत्ते को फाइबरयुक्त आहार दें, ताकि मल का गठन सही से हो।

फाइबर वाले आहार का एक और फायदा होता है कि मल की गुणवत्ता सही होने से गुदा थैलियों पर दबाव पड़ता है, जिससे स्वभाविक रूप से थैलियों को खाली होने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, अतिरिक्त दबाव की वजह से गुदा ग्रंथियों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।

यदि आपके कुत्ते को गुदा ग्रंथि रोग है तो आपको डॉक्टर के पास जाकर यह पता करने की जरूरत है कि भविष्य में यदि कुत्ते के गुदा वाले हिस्से में कोई समस्या (जैसे संक्रमण) होती है तो उसके लिए क्या करना चाहिए। हो सकता है डॉक्टर आपको मालिश करने की सलाह दें, जो कि एक निवारक कदम हो सकता है।

आप चाहें तो पशुचिकित्सक से अपने कुत्ते के लिए बेहतर रूटीन के बारे में भी बात कर सकते हैं क्योंकि डॉक्टर ब्रीड के अनुसार तय करते हैं कि उसके लिए कितनी मात्रा में शारीरिक गतिविधि उचित रहेगी। एक हेल्दी रूटीन होने से आपका कुत्ता गुदा थैली रोग के अतिरिक्त अन्य कई बीमारियों से भी बच सकता है।

इसके अलावा नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना आपके कुत्ते के लिए बेहतर हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार बीमारियों को रोकने के लिए शारीरिक गतिविधि एक बेहतर निवारक कदम है।

यदि शरीर के निचले हिस्से में पर्याप्त वजन है तो ऐसे में गुदा ग्रंथि डिजीज की रोकथाम की जा सकती है।

हालांकि, यदि डॉक्टर कुत्ते के गुदा में दवाई लगाने की सलाह दे सकते हैं तो यह आप और आपके कुत्ते दोनों के लिए संकोच या असुविधा महसूस करने जैसी स्थिति हो सकती है, लेकिन यह आपके पालतू जानवर के स्वास्थ के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।

जिन मामलों में समस्या का निदान जल्दी हो जाता है, उनमें उपचार आसान होता है। यदि बहुत लंबे समय तक बीमारी की पहचान नहीं की जाती है तो ऐसे में स्थिति बदतर हो जाती है।

(और पढ़ें - भारत में  कुत्तों की नस्ल और प्रकार)

इलाज संबंधी ऊपर बताए गई जानकारी को बेहद सावधानीपूर्वक फॉलों करें, क्योंकि कुत्ते की गुदा की जांच व इलाज के दौरान वह दर्द से कराह सकता है और ऐसे में वह मालिक को भी काटने की कोशिश कर सकता है।

इलाज के बाद आप चाहें तो डॉक्टर से सिकाई के बारे में पूछ सकते हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में गर्म सिकाई से दर्द और सूजन से राहत मिल सकती है।

हर उपाय कर लेने के बाद यदि कुत्ते में गुदा थैली डिसीज पूरी तरह से ठीक नहीं होता है तो आखिर में सर्जरी की मदद ली जाती है, जिसमें डॉक्टर गुदा थैली को निकाल देते हैं। इससे दोबारा इस समस्या के ट्रिगर होने का ​जोखिम भी खत्म हो जाता है।

यदि आपका कुत्ता छोटी नस्ल का है और मोटापे से ग्रस्त है तो ऐसे कुत्ते में गुदा थैली रोग होने का जोखिम ज्यादा रहता है।

अधिकांश परिस्थितियों में, गुदा ग्रंथि से स्राव बेहद कम होता है, इसलिए कुत्ते का मालिक आमतौर पर इस समस्या को नोटिस नहीं कर पाते हैं। हालांकि, कुत्ते का बिस्तर धोते समय आपको कुछ बदबूदार एहसास हो सकता है।

कुछ मामलों में कुत्ते को गुदा थैली रोग होने पर भी वह बिना किसी समस्या के जीवनभर रह सकता है, जबकि कुछ में ट्रीटमेंट की तत्काल जरूरत हो सकती है।

इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक्स अक्सर मौखिक रूप से दी जाती हैं, लेकिन कुछ मामलों में गुदा थैली में भी सीधे लगाई जा सकती है।

अधिकांश कुत्तों को कई दिनों तक दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है, यह दवाई तब तक देने की जरूरत होती है जब तक कि सूजन में कमी नहीं आ जाती है।

संदर्भ

  1. Washington State University, College of Veterinary Science [Internet]. Washington State University. Seattle; Anal Sac Disease
  2. Veterinary Partner. [Internet]. Veterinary Information Network. Davis, California; Emptying a dog's anal sacks
  3. MSD Veterinary Manual [Internet]. Merck & Co., Inc.; Anal Sac Disease
  4. van Duijkeren EJ. Disease conditions of canine anal sacs. Small Anim Pract. 1995 Jan;36(1):12-6. PMID: 7815780 .
  5. Pet MD. [Internet]. Pet MD, LLC; Anal Gland Problems in Dogs (and Cats)
ऐप पर पढ़ें
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ