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  1. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन क्या होता है? - Inguinal Hernia Surgery kya hai in hindi?
  2. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन क्यों किया जाता है? - Inguinal Hernia Surgery kab ki jati hai?
  3. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन होने से पहले की तैयारी - Inguinal Hernia Surgery ki taiyari
  4. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - Inguinal Hernia Surgery kaise hoti hai?
  5. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन के बाद देखभाल - Inguinal Hernia Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन के बाद सावधानियां - Inguinal Hernia Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. वंक्षण हर्निया ऑपरेशन की जटिलताएं - Inguinal Hernia Surgery me jatiltaye

इनगुइनल हर्निया या वंक्षण हर्निया (Inguinal Hernia) तब होता है जब नरम ऊतक किसी क्षतिग्रस्त या कमज़ोर क्षेत्र से पेट की निचिली मांसपेशियों, ज्यादातर पेट और जांध के बीच के भाग में या उसके आसपास, से बाहर फ़ैल या उभर जाता है। यह किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज़्यादा आम है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए सर्जरी की जाती है।

हर बार सर्जरी की आवश्यकता नहीं भी होती, परन्तु आम तौर पर हर्निया बिना सर्जरी के ठीक नहीं होते। कई स्थितियों में हर्निया का उपचार न किया जाना जानलेवा भी हो सकता है। सर्जरी के साथ कई जोखिम और जटिलताएं जुड़ी होने के बावजूद भी ज़्यादातर मरीज़ों को सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

अगर हर्निया से कोई परेशानी न हो रही हो, तत्काल सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जैसा कि पहले बताया गया है, ज़्यादातर हर्निया बिना सर्जरी के पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते। ये समय के साथ बड़े और असुविधाजनक भी हो सकते हैं।

अधिकतर लोगों को हर्निया का उभार (Bulge) दर्दरहित लगता है। हालांकि खांसने, झुकने या कोई सामान उठाने में इसमें दर्द या परेशानी हो सकती है। आपको डॉक्टर द्वारा सर्जरी की सलाह दी जा सकती है अगर:

  1. हर्निया का आकार बढ़ जाए। 
  2. दर्द होने लगे या दर्द बढ़ जाए। 
  3. आपको दैनिक गतिविधियों को पूरा करने में परेशानी हो रही हो।

अगर मरीज़ की आंतें मुड़ जाती हैं या फंस जाती हैं तो हर्निया खतरनाक हो सकता है। ऐसा होने पर आपको निम्न परेशानियां हो सकती हैं:

  1. बुखार (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)
  2. ह्रदय गति का बढ़ना 
  3. दर्द
  4. मतली
  5. उलटी
  6. उभार का रंग गहरा होना 

इन में से कोई भी परेशानी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यह एक जानलेवा स्थिति है और इसमें आपातकालीन सर्जरी की आवशयकता हो सकती है।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग/ खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

वंक्षण हर्निया की सर्जरी दो प्रकार से की जा सकती है: ओपन सर्जरी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से। 

ओपन सर्जरी (Open Surgery)

इस प्रक्रिया को हर्नियोराफी (Herniorrhaphy) या हर्नियोप्लास्टी (Hernioplasty) भी कहा जाता है। एनेस्थीसिया का प्रभाव शुरू होते ही, सर्जरी शुरू की जाती है। सर्जन ऊसन्धि (Groin; पेट और जांध के बीच का भाग) में एक लम्बा चीरा काटते हैं। इसके बाद सर्जन हर्निया के स्थान का पता लगाते हैं। फिर उसे आसपास के अन्य ऊतकों से अलग किया जाता है। सर्जन हार्नियाग्रस्त ऊतक को पेट की ओर वापिस दबा देंगे। 

टांकों की मदद से चीरे को सिल दिया जाएगा और पेट की कमज़ोर मांसपेशियों को प्रबल किया जायेगा। कभी कभी सर्जन पेट के ऊतकों को मज़बूत करने के लिए और दोबारा हर्निया न बन जाए इसके जोखिम को कम करने के लिए एक मैश (Mesh; जाल) भी लगा सकते हैं।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic Surgery)

यह सर्जरी तब की जाती है जब हर्निया छोटा होता है और उस तक पहुंचना आसान होता है। इसमें ओपन सर्जरी की तुलना छोटे चीरे काटे जाते हैं लेकिन चीरों की संख्या ज़्यादा होती है। चीरों के माधयम से लैप्रोस्कोप (Laparoscope) डाला जाता है, जिससे एक वीडियो कैमरा जुड़ा होता है जो डॉक्टर को अंदरूनी अंगों को देखने और सर्जरी करने में मदद करता है, और अन्य सर्जिकल उपकरण डाले जाते हैं। आगे की प्रक्रिया ओपन सर्जरी के समान ही होती है।

आम तौर पर लैप्रोस्कोपी (Laparoscopy) ओपन सर्जरी से कम पीड़ादायक होती है।

यह सर्जरी अक्सर आउट-पेशेंट (Out-Patient; सर्जरी के बाद मरीज़ को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती) आधार पर की जाती है। हालांकि अगर कोई जटिलताएं हों तो, जब तक वे ठीक नहीं हो जाती तब तक मरीज़ को अस्पताल में ही रखा जायेगा। 

सर्जरी के बाद मूत्रत्याग करने में परेशानी न हो इसके लिए मूत्राशय में एक कैथेटर लगाया जा सकता है। पुरुषों में सर्जरी के कुछ घंटों तक मूत्रत्याग करने में परेशानी हो सकती है। यह कैथेटर द्वारा ठीक की जा सकती है। 

सर्जरी के बाद आप कुछ दिनों में सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। कम से कम चार से छह हफ़्तों तक कोई थकाने वाले व्यायाम न करें। आप करीब तीन हफ़्तों के बाद संभोग कर सकते हैं।

ओपन सर्जरी में पूरी तरह रिकवरी होने में छह हफ्ते लग सकते हैं और लैप्रोस्कोपी में करीब दो हफ्ते, इसलिए अपने डॉक्टर के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। 

इस सर्जरी के बाद निम्न जोखिम और जटिलताएं हो सकती हैं:

  1. श्वास सम्बन्धी समस्याएं
  2. रक्तस्त्राव
  3. एनेस्थीसिया या अन्य दवाओं के प्रति एलर्जिक रिएक्शन
  4. संक्रमण
  5. सर्जरी की जगह पर लम्बे समय तक दर्द
  6. रक्त वाहिकाओं की क्षति (इससे पुरुषों में अंडकोष को नुक्सान पहुँच सकता है)
  7. नस या आसपास के किसी अंग को क्षति 
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