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  1. अंडाशय कैंसर की सर्जरी क्या है? - Ovarian Cancer Surgery kya hai in hindi?
  2. बच्चेदानी के कैंसर की सर्जरी क्यों की जाती है? - Ovarian Cancer Surgery kab kiya jata hai?
  3. अंडाशय कैंसर की सर्जरी होने से पहले की तैयारी - Ovarian Cancer Surgery ki taiyari
  4. अंडाशय में कैंसर का ऑपरेशन कैसे किया जाता हैं? - Ovarian Cancer Surgery kaise hota hai?
  5. बच्चेदानी के कैंसर का ऑपरेशन होने के बाद देखभाल - Ovarian Cancer Surgery hone ke baad dekhbhal
  6. अंडाशय कैंसर की सर्जरी के बाद सावधानियां - Ovarian Cancer Surgery hone ke baad savdhaniya
  7. ओवेरियन कैंसर के ऑपरेशन की जटिलताएं - Ovarian Cancer Surgery me jatiltaye

अंडाशय महिला प्रजनन प्रणाली का अभिन्न हिस्सा हैं और ये एस्ट्रोजेन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का उत्पादन करते हैं। ये हार्मोन यौवनारम्भ (प्यूबर्टी; Puberty) में महिला के विकास को नियंत्रित करते हैं। वे गर्भाशय के दोनों तरफ स्थित अंडाकार अंग हैं। विभिन्न रोग अंडाशय को प्रभावित कर सकते हैं और अंडाशय का कैंसर उनमें से एक है।

ये कैंसर एक प्राथमिक विकार हो सकता है या किसी कैंसरग्रस्त अंग से कैंसर फैलने के कारण हो सकता है। अंडाशय कैंसर सर्जरी इस कैंसर में अपनाई जाने वाली मुख्य उपचार विधि है। कैंसर कितना फैला है इसके अनुसार सर्जरी का चुनाव किया जाता है। गाइनोकोलोजिक (Gynecologic; स्त्री रोग विशेषज्ञ) ऑन्कोलॉजिस्ट (Oncologist; ट्यूमर का निदान और उपचार करने वाले विशेषज्ञ) के द्वारा ही यह सर्जरी की जानी चाहिए। (और पढ़ें – कैंसर का इलाज)

इस कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी, सर्जरी और कभी कभी विकिरण तकनीक शामिल हैं। ज़्यादातर महिलाओं में कीमोथेरेपी के साथ सर्जरी की आवश्यकता होती ही है। निम्नलिखित कुछ मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से यह सर्जरी की जाती है:

शुरूआती स्टेज पर ही निदान हो जाना
इमेजिंग टेस्ट्स हमेशा इस कैंसर के निदान के लिए और यह कितना फैला है यह जांच करने के लिए काफी नहीं होते। ऐसे समय में सर्जरी कैंसर के ठीक स्टेज का पता लगाने और कैंसर किसी और अंग तक तो नहीं फैला यह जानने में उपयोगी होती है।

कैंसर के ट्यूमर को हटाने के लिए
सर्जरी के द्वारा सर्जन अंडाशय से कैंसर के हर चिह्न को हटा सकते हैं। अधिकतर समय ट्यूमर के आकर को कम करने के लिए ही यह सर्जरी की जाती है। 

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

अंडाशय के कैंसर के उपचार के लिए उपरोक्त सर्जिकल समाधानों के अलावा साइटोरेडक्शन (Cytoreduction), कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा जैसे चिकित्सीय विधियों का उपयोग भी किया जाता है।

  1. द्विपक्षीय सैल्पिंगो डिम्बाशय-उच्छेदन (Bilateral Salpingo-Oopherectomy, BSO)

    यह अंडाशय के कैंसर के इलाज का एक उपचार है। यह दोनों अंडाशयों और फैलोपियन ट्यूबों को सर्जरी से हटाता है। यह प्रक्रिया पेट की लैप्रोस्कोपी (Laparoscopy) का उपयोग कर की जाती है। इसमें लैप्रोस्कोप (Laparoscope) का प्रयोग किया जाता है जो एक पतला, रोशनी वाला कैमरा और सर्जिकल उपकरण है जो पेट में चीरा करके उस चीरे के माध्यम से शरीर में डाला जाता है।

    सफलतापूर्वक ढंग से किए जाने की इस प्रक्रिया के लिए पेट के निचले हिस्से में कुछ छोटे चीरों की भी आवश्यकता हो सकती है। इससे ऐसे मरीज़ों में जल्दी मेनोपॉज़ (Menopause; मासिक धर्म का बन्द होना) होने की सम्भावना होती है जिनकी उम्र अभी तक मेनोपॉज़ की नहीं हुई है।

  2. ओमेन्टेक्टॉमी (Omentectomy)

    डिम्बग्रंथि के कैंसर से पीड़ित रोगियों में ओमेन्टेक्टॉमी को हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy), उफेरेक्टॉमी (Oopherectomy) और साल्पिंगक्टॉमी (Salpingectomy) के साथ संयोजन में किया जाता है। इस प्रक्रिया के दो प्रकार हैं - टोटल ओमेन्टेक्टॉमी (पूरा) और आंशिक ओमेन्टेक्टॉमी (पार्शियल)। यह एक सर्जिकल उपचार पद्धति है जिसमें ओमेंटम (Omentum) को हटाया जाता है जो कि पेट का एक ऊतक है। यह इस क्षेत्र में कैंसर के प्रसार से बचने के लिए किया जाता है। ओमेन्टेक्टॉमी लैप्रोस्कोपिक तरीके या पारंपरिक तरीके से कई छोटे चीरों का उपयोग करके की जाती है। आमतौर पर, कीमोथेरेपी दवाओं को ओमेन्टेक्टॉमी के बाद कैथेटर (Cathetar) या इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।

  3.  डेबल्किंग सर्जरी (Debulking Surgery)

    इस तरह के सर्जिकल उपचार का उपयोग तब किया जाता है जब अंडाशय का कैंसर पेट या श्रोणिक (Pelvic; पैल्विक) क्षेत्र में फैल गया हो। इस सर्जरी का लक्ष्य है जितने संभव हो उतने कैंसरयुक्त ऊतकों को निकालना और अप्रत्‍यक्ष रूप से अन्य उपचारों की प्रभावशीलता में वृद्धि करना।

  4. हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy)

    मरीज को धड़ और चेहरे को ऊपर की तरफ करके लिटाया जाता है। एनेस्थीसिया अपना काम शुरू करदे उसके बाद गर्भाशय (Uterus) और सर्विक्स (Cervix) को हटाया जाता है। यह दो प्रकार की होती है - टोटल हिस्टेरेक्टॉमी और सब-टोटल हिस्टेरेक्टॉमी। 

    कई मामलों में अंडाशय के कैंसर की सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी का सुझाव दिया जाता है। हिस्टेरेक्टॉमी न केवल निदान की पुष्टि करता है बल्कि ट्यूमर को भी हटाता है जो गर्भाशय में और अंडाशय के अन्य स्वस्थ भाग में फैल सकता है।

  1. सर्जरी के बाद एक इन्ट्रावेनस (Intravenous; नसों के अंदर) ट्यूब को आपकी नस से जोड़ा जाता है जिससे की जब तक आप कुछ खा नहीं पाते तब तक आपको भोजन और दवाएं दी जा सकती हैं। सामन्य तौर पर सर्जरी के कुछ दिनों के बाद खाना-पीना संभव हो जाता है। 
  2. मूत्र त्याग के लिए मूत्राशय से एक कैथेटर को जोड़ा जाता है। 
  3. सर्जरी के बाद किसी भी तरह का दर्द होने पर अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं। डॉक्टर आपको दर्द निवारक दवाएं दे देंगे।

सर्जरी के बाद क्या करें और क्या न करें

जल्दी रिकवरी पाने के लिए ज़रूरी है कि आप अपना ध्यान रखें और डॉक्टर द्वारा दी गयी हर सलाह का पालन करें:

  1. अपने डॉक्टर से पूछें कि आप कब ड्राइविंग शुरू कर सकते हैं।
  2. सर्जरी के 3-4 हफ़्तों के बाद यौन-संबंध बना सकते हैं।
  3. इस सर्जरी में गर्भ को हटा दिया जाता है जो एक महिला के लिए भावनात्मक अशांति का कारण बन सकता है। अगर आपको रिकवरी की अवधि के दौरान तनाव महसूस हो तो आप कॉउंसलर की सहायता भी ले सकते हैं। 
  4. अगर सर्जरी के दौरान दोनों अंडाशय को हटा दिया गया है तो यह मेनोपॉज़ का कारण बन सकता है। ऐसे में कैल्शियम स्तर को बढ़ाने के लिए आपको विटामिन के पूरक और टेबलेट्स दी जा सकती हैं। इस स्थिति में आप थकान, Hot Flashes (चेहरे, गर्दन, कान और धड़ में गर्मी का महसूस होना), रूखी त्वचा या घबराहट महसूस कर सकते हैं। (और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)
  5. जल्दी रिकवरी के लिए ज़रूरी है की आप कम थकाने वाले व्यायाम और योग आदि करें जिससे हड्डियां, मांसपेशियां मज़बूत होंगी। सर्जरी के बाद शारीरिक गतिविधि बनाये रखना आवश्यक है।

सर्जरी के बाद डाइट (आहार)

सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए ज़रूरी है कि आप सही और स्वस्थ भोजन करें। अपने डॉक्टर और डायटीशियन से इस बारे में बात करें कि आप क्या खा सकते हैं और क्या नहीं। सर्जरी के बाद शरीर का वज़न एक स्वस्थ स्तर पर रहे यह बहुत ज़रूरी है।

  1. फलों और सब्जिओं का सेवन करना बहुत आवश्यक है क्योंकि फाइबर से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली और बेहतर होगी जिससे रिकवरी में मदद होगी। 
  2. मीट, अंडे और चिकन जैसे प्रोटीन युक्त आहार खाएं। 
  3. सैल्मन (एक प्रकार की मछली), टूना मछली और अन्य ओमेगा 3 (Omega 3) युक्त भोजन आपके लिए बहुत अच्छा है। 
  4. प्रोबायोटिक पूरक और दही, ऑलिव आदि जैसे पाचन शक्ति को बढ़ाने वाले भोजन का सेवन करें। 
  5. दूध और अन्य डेरी उत्पाद, कैफीन और कार्बोनेटेड सोडा जैसी चीज़ें जिनसे पाचन में समस्या हो, का सेवन न करें।

ये डाइट ताउम्र पालन करने की कोशिश करें जिससे आप आगे आने वाले समय में रोगमुक्त रह सकें। 

सर्जरी के बाद करीब 6 हफ़्तों में आप सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। रिकवर होने में कितना समय लगेगा यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किस तरह सर्जरी के बाद अपनी देखभाल करते हैं। इसलिए डॉक्टर  निर्देशों का सही से पालन करें। 

हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) के बाद आमतौर पर कोई जटिलताएं नहीं होती हैं। इससे जुड़े कुछ जोखिम और जटिलताएं निम्न हैं:

  1. मरीज़ को बुखार हो सकता है। (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)
  2. इस प्रक्रिया के बाद मरीज़ों को मूत्र त्याग करने में कठिनाई हो सकती है।
  3. अगर प्रक्रिया के बाद 4 से 6 हफ़्तों से ज़्यादा समय तक योनिक क्षेत्र से रक्तस्त्राव हो तो ये सामन्य नहीं हैl अगर रक्तस्त्राव ज़्यादा है तो अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ।
  4. ऑपरेशन के बाद दर्द और संक्रमण का खतरा रहता है।
  5. पैरों या फेफड़ों में रक्त के थक्कों का गठन हो सकता है।
  6. रक्तगुल्म (सर्जरी की जगह पर रक्त संचय या रक्त के थक्कों की सूजन; Hematoma) होना इस सर्जरी के बाद एक आम दुष्प्रभाव है।
  7. इसके बाद मेनोपॉज़ होने की सम्भावना रहती है।
  8. इस सर्जरी के बाद अन्य शारीरिक परेशानियां जैसे श्रोणिक मांसपेशियों में कमज़ोरी जिससे आंत के विकार हो सकते हैं, हो सकती हैं। इसके बाद अन्य सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

द्विपक्षीय सैल्पिंगो डिम्बाशय-उच्छेदन (Bilateral Salpingo-Oopherectomy, BSO) से जुड़े कुछ जोखिम और जटिलताएं निम्न हैं:

  1. इसके बाद आँतों में ब्लॉकेज हो सकती है जिससे मल त्याग में कठिनाई महसूस हो सकती है।
  2. इसके बाद हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी परेशानियां होने का जोखिम रहता है।
  3. सर्जरी की जगह पर ऊतक थिक हो सकते हैं
  4. इस सर्जरी के बाद हर्निया (Hernia), संक्रमण, बुखार जैसे दुष्प्रभाव होने का खतरा रहता है। (और पढ़ें - हर्निया के लक्षण)

ओमेन्टेक्टॉमी (Omentectomy) से जुड़े कुछ जोखिम और जटिलताएं निम्न हैं:

  1. सर्जरी के दौरान आसपास के अंग, जैसे पेट, अग्नाशय का अंतिम हिस्सा, क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
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