भारत में लगभग आधे मिलियन लोग हैं जिनको अंग ट्रांसप्लांट ऑपरेशन की आवश्यकता होती है लेकिन अंग दाताओं की कमी के कारण ये जरूरत पूरी नहीं हो पाती है। कई सर्वेक्षणों ने पाया है कि भारतीय अभी तक अंगदान के बारे में शिक्षित नहीं हैं और अंगदान से जुड़े कई तथ्यों के प्रति जागरूक नहीं हैं। क्या आप जानते हैं भारत में हर साल अंग दान की कमी के कारण लगभग 5,00,000 लोग मर जाते हैं? भारत में अंग दान दर दुनिया में सबसे कम है। आइए जानते है किन मिथकों के कारण भारत में अंगदान इतना कम है और क्या ये मिथक सही है? 

1. अंगदान के लिए आप कभी भी युवा या बहुत वृद्ध नहीं होते हैं। एक नवजात शिशु से लेकर 75 साल की आयु तक, कोई भी व्यक्ति अपने अंगों को दान कर सकता है।

2. एक अंगदाता 8 लोगों को जीवन दे सकता है। अपनी मृत्यु के बाद आप न केवल अपना लिवर, फेफड़े, हृदय, किडनी, अग्न्याशय और छोटी आंत दान कर सकते हैं बल्कि आप त्वचा, कॉर्नियास, हड्डियों के ऊतक और कार्टिलेज, हृदय वाल्व और रक्त वाहिकाओं को भी दान कर सकते हैं। 

3. कुछ लोगों को लगता है कि अगर आपकी कोई मेडिकल हिस्ट्री रही है तो आप अंगदान नहीं कर सकते हैं। (और पढ़ें - रक्तदान के फायदे, नुकसान, तथ्य और मिथक)

ऐसा हो सकता है कि कुछ अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए अस्वस्थ हो लेकिन किसी के जीवन को बचाने के लिए अन्य अंगों और ऊतकों का उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अधिकांश कैंसर रोगी कॉर्निया को दान करने के लिए एलिजिबल है। (और पढ़ें – कैंसर का इलाज)

4. कुछ लोगों का मानना है कि यदि आप एक अंगदाता हैं और किसी इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट होते हैं तो डॉक्टर आपके जीवन को नहीं बचाएंगे।

लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है। कोई ट्रांसप्लान्ट टीम आपको एप्रोच नहीं करेगी जब तक चिकित्सकों द्वारा जीवन को बचाने के सभी प्रयास विफल न हो गए हो और आपको ब्रेन डेड घोषित न कर दिया गया हो। फिर भी, ट्रांसप्लान्ट टीम कोई कदम नहीं उठा सकती है जब तक कि आपका परिवार दान करने के लिए सहमति ना दें, भले ही आपके पास कोई डोनर कार्ड क्यों न हो।

इसके अलावा कुछ लोगों को लगता है कि ब्रेन डेड होने के बाद भी रिकवर किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है।  क्योंकि ब्रेन डेड होने के बाद रिकवर होना मुमकिन ही नहीं है - यह कोमा की तरह समान नहीं है। जब कोई व्यक्ति कोमा में चला जाता है तो उसके ब्रेन चलता रहता है लेकिन ब्रेन डेथ में व्यक्ति मर चुका होता है।

5. अधिकांश लोगों को लगता है कि सिर्फ मरने के बाद ही अंगों को दान किया जा सकता है।

लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि कुछ अंग हैं जो आप जीवित रहते दान कर सकते हैं। सबसे अधिक है आप एक गुर्दे को दान कर सकते हैं। इसके अलावा पार्शियल लिवर, फेफड़ों के एक लोब, अग्न्याशय या आंत का दान किया जा सकता है जब आप जिंदा होते हैं। 

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6. जीवित दाताओं के मामले में, यह सच है कि सभी प्रमुख सर्जरी संक्रमण, रक्त के थक्के और दर्द जैसी कुछ जटिलताओं से जुड़ी हुई हैं। कुछ दीर्घकालिक जटिलताओं भी हैं जो दाता के स्वास्थ्य, अंग और प्रक्रिया के आधार पर उत्पन्न हो सकती हैं।

उदाहरण के लिए, जीवित किडनी दाता उच्च रक्तचाप और भविष्य में गुर्दे की विफलता से ग्रस्त हो सकते हैं। लिवर डोनर को गुर्दे की विफलता, गैस्ट्रिक की समस्या हो सकती है, जबकि अग्न्याशय के दाता मधुमेह से पीड़ित हो सकते हैं।

7. कुछ लोगों को लगता है कि अंग दान करने के बाद उनके अंगों को बेचा जाता है।

लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होता है क्योंकि वे सबसे अधिक जरूरत वाले उन मरीजों को अपने अंग "दान" कर रहे हैं, जिन्हें तत्काल प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।

8. कुछ लोगों को लगता है कि अंगों को निकालने के बाद आपके शरीर को विकृत किया जाता है लेकिन यह सच नहीं है।

अंगों को निकालते समय एक ऐसी चीरा प्रक्रिया की जाती है जिसमें अंग को निकालने के बाद स्टिच करके आपके शरीर को पूरे सम्मान के साथ आपके परिवार को सौंप दिया जाएगा।

स्टिच मार्क्स के अलावा, कोई भी यह नहीं बता पाएगा कि आपका कोई अंग गायब है।

9. हमारे जीवन के अंत तक कोई अंग स्वस्थ नहीं रहता है। इसलिए आयु और अंगों से संबंधित कुछ दिशानिर्देश हैं।

उदाहरण के लिए, जब तक आप 100 वर्ष के नहीं हो जाते तब तक आप कॉर्निया, 70 साल की उम्र तक लिवर और त्वचा, 50 साल की उम्र तक हार्ट और लंग्स और 40 साल की उम्र तक आप हार्ट वाल्व का दान दिया जा सकता है।

10. कुछ लोगों को लगता है कि डोनर की फॅमिली को हॉस्पिटल में अधिक पैसे का भुगतान करना होता है।  (और पढ़ें - कही आप भी तो नहीं कर रहे हैं वजन कम करने के लिए ये डाइट मिस्टेक)

लेकिन ऐसा नहीं है , मस्तिष्क की मृत्यु की घोषणा के बाद यदि आप अंगों को दान करना चाहते हैं तो हॉस्पिटल ही सारे खर्च को उठाता है।

11. एक अंग दाता के रूप में पंजीकरण (registering) करके और डोनर कार्ड ले जाने से अपने अंगों को दान करने की शपथ लीजिए, इससे चिकित्सा टीमों को यह पता चलता है कि संभावित दाता कौन हैं और वे कहां स्थित हैं। इसके अलावा, यह एक आंशिक कानूनी दस्तावेज के रूप में भी सर्वर है।

12. कुछ लोगों को लगता है अगर वे अपने अंग दान करते हैं तो वो अगले जन्म में बिना अंगों के पैदा होंगे।

जब आपका अंतिम संस्कार किया जाता है तो आपके सारे अंग नष्ट हो जाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर जीवित नहीं होता है। इसलिए अंगों को निकाल कर रखने से इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, भले ही आप पुनर्जन्म में विश्वास करते हों।

13. कुछ लोगों के अनुसार धर्म अंग दान और प्रत्यारोपण करने से मना करते हैं।

सभी प्रमुख धर्म मानवतावादी कार्यों के रूप में अंग दान का समर्थन करते हैं। हिन्दु, मुस्लिम, सिख, बुद्ध, ईसाई एवं अन्य धर्म के प्रमुख धार्मिक नेता अंगदान की भावना से सहमत हैं।

14. कुछ लोगों को लगता है कि अगर वे एक बार ऑर्गन डोनर बन जाते हैं तो वे उससे पीछे नहीं हट सकते हैं।

लेकिन यह सच नहीं है। आप कभी भी अपना माइंड चेंज कर सकते हैं। आप अपना रजिस्ट्रेशन कभी भी रद्द कर सकते हैं, अपना डोनर कार्ड फाड़ सकते हैं और अपने परिवार को बताये कि आपने अपना मन बदल लिया है। आप अपने परिवार में सबसे निकट सदस्य को बताये यदि आप अंग दान करना चाहते हैं।

अब तो आप जान गए हैं कि अंग दान को महादान क्यों कहा जाता है क्योंकि अंगदान करके एक व्यक्ति कई जिंदगियों को बचा सकता है। 

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