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अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसॉर्डर (एडीएचडी), तंत्रिकाओं संबंधी एक ऐसी स्थिति है, जो मस्तिष्क और केंद्रीय स्नायुतंत्र में शारीरिक विकास संबंधी किसी प्रकार की खराबी होने के कारण विकसित होती है। एडीएचडी से ग्रस्त बच्चा अपने पूरी दिनचर्या के दौरान किसी कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता रहता है। इस स्थिति में बच्चा बेचैन प्रतीत होता है और अतिसक्रिय या संवेगशील व्यवहार करने लगता है।

एडीएचडी से ग्रस्त बच्चों को स्कूल के कार्य करने में दिक्कत आने लगती है साथ ही साथ उनका अन्य लोगों से व्यवहार और खुद को दुनिया में देखने का नजरिया बदल जाता है। यह लक्षण आगे चल कर उनकी वयस्क अवस्था तक रह सकते हैं और उनके करियर और रिलेशनशिप को प्रभावित कर सकते हैं।

बच्चों में 3 प्रकार के एडीएचडी होते हैं:

  • हाइपरएक्टिव या इम्पल्सिव प्रकार
  • इनअटेंटिव प्रकार
  • कम्बाइंड प्रकार (हाइपरएक्टिव या इम्पल्सिव और इनअटेंटिव)

बच्चों में एडीएचडी के लक्षण

एडीएचडी से ग्रस्त बच्चों में विशिष्ट तरीकों में लापरवाही, सक्रियता और/या संवेगशीलता के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके साथ ही इनमें निम्न लक्षण भी दिखाई देते हैं।

  • खुद के बारे में सोचना:
    एडीएचडी का सबसे आम लक्षण हैं कि इससे ग्रस्त बच्चे दूसरे व्यक्ति की जरूरत और इच्छा को नहीं समझ पाते हैं और वे केवल अपने बारे में ही सोचते हैं।
     
  • दखल देना:
    खुद के बारे में सोचने की वजह से बच्चे में दूसरों के कार्यों में दखल देने की आदत भी आ सकती है, ऐसे में वह किसी अन्य व्यक्ति की बात को बीच में ही टोक देते हैं। वे अक्सर ऐसे खेल या बातचीत के बीच में भी हस्तक्षेप करने लगते हैं, जिनका वे हिस्सा भी नहीं होते हैं।
     
  • अपनी बारी का इंतजार न कर पाना:
    एडीएचडी से ग्रस्त बच्चे कक्षा में किसी गतिविधि या अन्य बच्चों के साथ खेलते समय अपनी बारी का इंतजार नहीं कर पाते हैं।
     
  • भावुक स्वभाव:
    इस स्थिति से पीड़ित बच्चे को अपनी भावनाओं को संभालने में दिक्कत होती है। इन्हें अनुचित समय पर क्रोध आ सकता है। ऐसे में छोटे बच्चों का गुस्सैल मिजाज हो सकता है।

इनके अलावा इन्हें शांति से खेलने में दिक्कत, अक्सर ज्यादा बातें करना, दूसरों के कार्यों में बाधा या उन्हें परेशान करना व आसानी से विचलित हो जाने जैसी दिक्कतों होती रहती है और साथ ही ये किसी भी कार्य को पूरा करने में असमर्थ रहते हैं।

सभी बच्चों में कभी न कभी इस प्रकार के व्यवहार जरूर दिखाई देते हैं। दिन में सपने देखना, चंचलता और लगातार दूसरों के कार्यों में दखल देना सभी बच्चों का सामान्य व्यवहार होता है। हालांकि, आपको इस बात को तब गंभीरता से लेना चाहिए जब आपके बच्चे में एडीएचडी के लक्षण काफी समय से दिखाई दे रहे हों। क्योंकि इस व्यवहार के कारण उसे स्कूल में असफलता और दोस्तों से कम बातचीत हो पाने जैसी समस्याएं हो सकती है।

बच्चों में एडीएचडी के कारण

5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में एडीएचडी के लक्षणों को पहचानना बेहद मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इतने छोटे बच्चों में एडीएचडी के लक्षण कई अलग-अलग स्थितियों में दिखाई देते हैं। साथ ही इतनी छोटी उम्र के बच्चे के व्यवहार में बदलाव भी तेजी से आता रहता है।

कुछ मामलों में एडीएचडी जैसा व्यवहार, किसी और कारणवश भी हो सकता है:

  • अचानक जिंदगी बदल देने वाली कोई घटना (जैसे माता-पिता का तलाक, परिवार में किसी की मृत्यु या घर बदलना)
  • मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला चिकित्सा विकार
  • चिंता
  • डिप्रेशन
  • बाइपोलर डिसआर्डर

बच्चों में एडीएचडी का इलाज

हाइपरएक्टिव या इम्पल्सिव प्रकार से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए कई ऐसी थेरेपी हैं, जो बेहद प्रभावित साबित हो सकती हैं। इनमें मुख्य रूप से पैरेंट-चाइल्ड इंटरेक्शन थेरेपी (PCIT), पैरेंट मैनेजमेंट ट्रेनिंग (PMT) और पॉजिटिव पेरेंटिंग प्रोग्राम (Triple P) आदि शामिल हैं। इन सभी थेरेपी में माता-पिता को सिखाया जाता है कि किस तरह प्रशंसा या सकारात्मक विचारों को और भी प्रभावशाली तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

इनअटेंटिव प्रकार से ग्रस्त बच्चे अधिकतर विद्यालय के कार्यों में पीछे होते हैं। इन बच्चों के कार्य करने की क्षमता सामान्य बच्चों से कम होती है। इस थेरेपी के दौरान माता-पिता को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिसकी मदद से वे अपने बच्चे की कार्य कुशलता में सुधार कर सकते हैं।

  1. बच्चों में एडीएचडी की ओटीसी दवा - OTC Medicines for ADHD (attention deficit hyperactivity disorder) in Children in Hindi
  2. बच्चों में एडीएचडी के डॉक्टर
Dr. Virender K Sheorain

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बच्चों में एडीएचडी की ओटीसी दवा - OTC medicines for ADHD (attention deficit hyperactivity disorder) in Children in Hindi

बच्चों में एडीएचडी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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