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कभी ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल की गई एक दवा शराब पीने की लत कम करने या पूरी तरह छोड़ने में मददगार हो सकती है। अमेरिका स्थित याले यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है, जिसे मेडिकल पत्रिका अमेरिका जर्नल ऑफ साइकायट्री द्वारा प्रकाशित भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन में शोधकर्ताओं ने प्रैजोसिन नामक इस दवा को डबल-ब्लाइंड ट्रायल के तहत अल्कोहॉलिक या शराब पीने की लत या अल्कोहॉलिक डिसऑर्डर से ग्रस्त लोगों पर आजमाया था। चूंकि ट्रायल डबल-ब्लाइंड आधारित था, लिहाजा इन मरीजों पर दवा के प्रभावों की तुलना के लिए कुछ प्रतिभागियों को प्लसीबो ड्रग दिया गया।

खबर के मुताबिक, फॉलोअप के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रैजोसिन वाले ग्रुप के सभी मरीजों में ट्रायल से पहले कभी न कभी किसी न किसी स्तर पर शराब छोड़ने के लक्षण (अल्कोहल विदड्रॉल सिंप्टम) दिखे थे। दूसरे शब्दों में कहें तो इन लोगों ने पहले भी शराब छोड़ने की कोशिश की थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन लोगों में दिखे विदड्रॉल लक्षणों में थरथराहट, (शराब पीने की) प्रबल इच्छा (या क्रैविंग), एंग्जाइटी और सोने में परेशानी जैसे लक्षण शामिल थे। स्टडी के तहत के परिणामों के आधार पर बताया गया है कि ब्लड प्रेशर की दवा देने के बाद ऐसे प्रतिभागी मरीजों में ज्यादा मात्रा में शराब पीने के मामले, प्लसीबो वाले समूह के प्रतिभागियों की अपेक्षा तेजी से कम हुए थे। यह ट्रेंड कई दिनों तक देखा गया था। वहीं, जिन मरीजों में पहले से विदड्रॉल सिंप्टम मामूली या बिल्कुल भी नहीं थे, उन पर इस ड्रग ने थोड़ा बहुत ही प्रभाव डाला था।

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अध्ययन से जुड़े इन परिणामों पर बात करते हुए याले यूनिवर्सिटी के स्ट्रेस सेंटर में न्यूरोसाइंस और साइकायट्री की प्रोफेसर रजिता सिन्हा ने कहा, 'उन लोगों के लिए ऐसा कोई सहज उपचार नहीं हैं जो सिवियर विदड्रॉल सिंप्टम का सामना करते हैं। ऐसे में इन लोगों के फिर से बीमार होने (यानी फिर से शराब पीने के आदि होने) का खतरा सबसे ज्यादा होता है, जिसका अस्पताल के इमरजेंसी रूम जाकर अंत होता है।'

अध्ययन में इस्तेमाल हुई प्रैजोसिन को ऑरिजिनली हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए बनाया गया था। इसे प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं से ग्रस्त पुरुषों के इलाज के लिए अभी भी इस्तेमाल किया जाता है। याले यूनिवर्सिटी में ही हुए पिछले अध्ययनों में पता चला है कि यह ड्रग मस्तिष्क में तनाव से जुड़े हिस्सों में काम करता है और वर्किंग मेमरी सुधारने में मदद करता है। साथ ही, एंग्जाइटी और किसी प्रकार की प्रबल इच्छा को कम करने में भी प्रैजोसिन मददगार पाया गया था। यही कारण है कि रजिता सिन्हा की लैब में इस ड्रग को शराब की लत वाले लोगों के इलाज के लिए भी इस्तेमाल करने का फैसला किया गया।

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लैब में हुए टेस्ट में पता चला है कि मस्तिष्क के स्ट्रेस सेंटर्स शराब की लत से रिकवरी होने की शुरुआत में गंभीर रूप से अस्त-व्यस्त होते हैं। ऐसा उन लोगों में विशेष रूप से होता है जिनमें विदड्रॉल सिंप्टम और हाई क्रैविंग के अनुभव ज्यादा पाए जाते हैं। हालांकि यह अस्त-व्यस्तता या डिस्रप्शन पीड़ित को लंबे समय तक शराब से परहेज करने वाला बनाती हैं। इस बारे में प्रोफेसर सिन्हा ने कहा, 'प्रैजोसिन शुरुआती रिकवरी में (शराब की) प्रबल इच्छा और विदड्रॉल सिंप्टम को कम करती है और मरीजों को ज्यादा समय तक शराब से दूर रखने में मदद करती है। इस तरह यह दवा इस गैप को भरने का काम करती है।' हालांकि याले यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ ने दवा की एक कमी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए मरीजों को इसे रोजाना दिन में तीन बार देना पड़ता है।

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