फांक (कटा) होंठ व तालु क्या है?

फांक होंठ व तालु ऊपर वाले होंठ, तालु या दोनों का ही कटा हुआ होना है। जब बच्चा पेट में बढ़ रहा होता है तो अगर उसकी शकल की बनावट में कुछ कमी रह जाए तो बच्चे का होंठ व तालु कटा हुआ होता है। 

जन्म से जितने विकार होते हैं, कटा होंठ और तालु सबसे ज़्यादा होने वाली समस्या है। ये समस्या ज़्यादातर होने वाली समस्या है पर कुछ मामलों में ये माता-पिता से भी हो सकती है। 

फांक होंठ या तालु से पीड़ित बच्चा होना एक दुखद समस्या है परन्तु इसका इलाज संभव है। बहुत सारे बच्चों में सर्जरी की मदद से ये समस्या ठीक हो सकती है। उससे बच्चे की शकल सामान्य हो जाती है और सर्जरी के निशान भी बहुत कम रहते हैं।   

  1. फांक (कटा) होंठ व तालू के लक्षण - Cleft Lip and Cleft Palate Symptoms in Hindi
  2. फांक (कटा) होंठ व तालू के कारण व जटिलताएं - Cleft Lip and Cleft Palate Causes and complications in Hindi
  3. फांक (कटा) होंठ व तालू के बचाव के उपाय - Prevention of Cleft Lip and Cleft Palate in Hindi
  4. फांक (कटा) होंठ व तालू का निदान - Diagnosis of Cleft Lip and Cleft Palate in Hindi
  5. फांक (कटा) होंठ व तालू का उपचार - Cleft Lip and Cleft Palate Treatment in Hindi
  6. फांक (कटा) होंठ व तालू के जोखिम- Cleft Lip and Cleft Palate Risks in Hindi
  7. फांक (कटा) होंठ व तालू के डॉक्टर

फांक (कटा) होंठ होने का पता कैसे लगाएं?

आमतौर पर, तालु या होंठ के कटे होने का पता बच्चे के पैदा होते ही चल जाता है। कटा होंठ या तालु इस प्रकार दिखता है-

  • होंठ या तालु का कटा होना जिससे चेहरे के एक या दोनों तरफ प्रभाव पड़ सकता है। 
  • होंठ कम भी कटा हुआ हो सकता है या फिर वो कट होंठ से होते हुए मसूड़े और नाक के निचली हिस्से तक जा सकता है। 
  • तालु कटा हुआ होना जिससे चेहरे की बनावट पर कोई असर नहीं पड़ता। 

बहुत ही कम बार, "सॉफ्ट पैलेट" (submucous cleft palate)  कटा हुआ हो सकता है, ये मुंह के पिछले हिस्से में होता है और ढका हुआ होता है जिससे इसका पता नहीं चल पाता। बाद में लक्षण दिखने पर इसका इलाज किया जाता है। "सबम्यूकस क्लेफ्ट पैलेट" के लक्षण :

डॉक्टर से सलाह कब लें : 

फांक (कटा) होंठ या तालु जन्म के समय ही दिखना शुरू हो जाता है। आपके डॉक्टर उसी समय से इस समस्या का ध्यान रखना शुरू कर सकते हैं। अगर आपको अपने बच्चे में सबम्यूकस क्लेफ्ट पैलेट के लक्षण दिखते हैं जैसे, स्तनपान में समस्या तो अपने बच्चे के डॉक्टर को दिखाएं। 

फांक (कटा) होंठ होने के कारण और जटिलताएं क्या हैं?

कटा होंठ या तालु की समस्या तब होती है जब बच्चे के मुंह और चेहरे की कोशिकाएं ढंग से नहीं बन पाती। गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे महीने में होंठ और तालु बनाने वाली कोशिकाएं आपस में जुड़ जाती हैं। परन्तु जिन बच्चों में फांक होंठ और तालु होता है, उनमें ये कोशिकाएं आपस में कभी नहीं जुड़ती और अगर जुड़ती भी हैं तो थोड़ी जगह छोड़ देती हैं। 

विशेषज्ञों का मानना है कि फांक होंठ और तालु जेनेटिक और पर्यावरण कारणों की वजह से होता है। बहुत सारे बच्चों में कोई मुख्य कारण पता नहीं चल पाया है।  

  • माता-पिता से बच्चों में आने वाले जीन्स-
    माता-पिता अपने बच्चों में कटा होंठ या तालु होने की समस्या का जीन भेज सकते हैं। इस जीन से या तो सिर्फ फांक होंठ या तालु हो सकता है या कोई और ऐसा विकार जिसमें ये समस्या भी होती है। कुछ मामलों में, बच्चे अपने माता-पिता से फांक होंठ और तालु का जीन लेते हैं और कुछ पर्यावरण कारणों की वजह से ये समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
     
  • गर्भावस्था के दौरान लापरवाही-
    जो गर्भवती महिलाएं घूम्रपान करती हैं, शराब पीती हैं या अन्य कोई दवाइयां लेती हैं, उनके बच्चों में फांक होंठ और तालु होने की समस्या हो जाती है। 
    जिन बच्चों को फांक होंठ की समस्या के साथ फांक तालु की समस्या चाहे हो या न हो, उन्हें  बहुत परेशानियां आती है। परेशानी, कट के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करती है। 
     
  • बच्चे को स्तनपान करते समय समस्या आना-
    बच्चे के पैदा होने के बाद उसे स्तनपान करना एक बड़ी समस्या हो सकती है। फांक होंठ से पीड़ित कई बच्चे स्तनपान कर लेते हैं, परन्तु जिन्हे फांक तालु की समस्या हो वो दूध ढंग से नहीं पी पाते। दूध उनके नाक से बाहर आ सकता है। आपके डॉक्टर आपको स्तनपान कराने के तरीकों के बारे में बताएंगे। 
     
  • कानों में संक्रमण और सुनने की क्षमत ख़तम हो जाना-
    कटे तालु से पीड़ित बच्चों को मध्य कान में संक्रमण होने की ज़्यादा संभावना है। अगर बहुत समय से ये समस्या चली आ रही हो तो सुनने की क्षमता जा सकती है। आपके डॉक्टर आपको कान, गले, नाक के या बोलने की समस्या आ रही हो तो उसके डॉक्टर के पास जाने की सलाह दे सकते हैं। वो आपको नियमित चेक-अप के लिए बुलाते रहेंगे। फांक होंठ या तालु से पीड़ित बहुत बच्चों के कान में एक नली डाली जाती है जिससे तरल पदार्थ बाहर निकलती रहे और कान में संक्रमण न हो। 
     
  • दांतों की समस्या-
    कट अगर ऊपरी मसूड़ों तक बढ़ गया है तो दांतों के बढ़ने में समस्या हो सकती हो सकती है। अपने डॉक्टर से एक बच्चों के डेंटिस्ट से चेक-अप करने के बारे में सलाह लें। वो शुरुआत से आपके बच्चे की दांतों से जुडी समस्याओं का इलाज करेंगे। 
     
  • बोलने में परेशानी-
    आवाज़ें बनाने में तालु का काम होता है। फांक तालु होने के कारण बच्चा ढंग से बोलना नहीं सीख पाता। आपके डॉक्टर आपको किसी  "स्पीच पैथोलॉजिस्ट" (बोलने में सहायता करने वाले डॉक्टर) के पास भेज सकते हैं। 
     
  • अन्य समस्याएं-
    फांक होंठ या तालु से पीड़ित बच्चे सामाजिक और अपने बर्ताव से कई समस्याएं झेलते हैं। कटे होंठ या तालु की वजह से उनके चेहरे की बनावट में जो असामान्यता आती है, उस वजह से वो अक्सर तनाव में रहते हैं इसलिए उनका मुख्य रूप से ध्यान रखना चाहिए। मानसिक विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता आपके बच्चे की तनाव मुक्त होने में मदद कर सकता है। 
     

फांक (कटा) होंठ व तालु से कैसे बचें?

जब एक बच्चा कटे होंठ या तालु के साथ पैदा हो जाता है तो माता-पिता को दूसरे बच्चे के लिए डर रहता है कि कहीं उसे भी ये समस्या न हो जाए। कटे होंठ और तालु का बहुत सारे मामलों में बचाव कर पाना मुश्किल है। परन्तु आप निम्नलिखित चीज़ें अपना कर ये समस्या होने का जोखिम घटा सकते हैं। 

  • जेनेटिक काउंसलिंग कराएं-
    अगर आपके परिवार में पहले से फांक होंठ या तालु की समस्या है तो गर्भवती होने से पहले अपने डॉक्टर को उसके बारे में बताएं। आपके डॉक्टर आपको किसी जेनेटिक काउंसलर के पास जाने की सलाह दे सकते हैं। 
     
  • गर्भावस्था से पहले विटामिन खाएं-
    गर्भवती होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान, मल्टीविटामिन की गोलियां खाएं। ऐसे करने से आपके बच्चे में कटा होंठ और तालु होने का जोखिम कम हो सकता है। अगर आप जल्द ही गर्भवती होने वाली हैं तो अभी ही मल्टीविटामिन लें। 
     
  • शराब और तम्बाकू का सेवन न करें-
    गर्भावस्था के दौरान शराब पीने और तम्बाकू लेने से कटा होंठ और तालु से पीड़ित बच्चा होने की संभावना है। 

कटे होंठ का परीक्षण कैसे कराएं?

कटे होंठ का बहुत सारे मामलों में बचपन से ही पता चल जाता है और परीक्षण के लिए किसी टेस्ट की ज़रुरत नहीं होती। 

जन्म से पहले फांक (कटे) होंठ और तालु का पता अल्ट्रासाउंड से कराएं:

आजकल, कटे होंठ और तालु का पता अल्ट्रासाउंड के कारण जन्म से पहले ही चल जाता है। अल्ट्रासाउंड एक ऐसा टेस्ट है जिसमें पेट में बढ़ रहे बच्चे का चित्र ध्वनि तरंगो द्वारा बनाया जाता है। उन चित्रों को देख कर, डॉक्टर आपके बच्चे की शकल की बनावट में असामान्यता देख सकते हैं। 

गर्भावस्था के 18वें हफ्ते में अल्ट्रासाउंड कराके आप कटे होंठ का पता लगा सकते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है वैसे कटे होंठ का और आसानी से पता चलता जाता है। फांक तालु जो अपने आप बनता है उसका अल्ट्रासाउंड से पता लग पाना मुश्किल है क्यूंकि उससे बच्चे के मुंह के अंदर नहीं देखा जा सकता।  

अगर अल्ट्रासाउंड करने पर बच्चे के होंठ व तालु में कट मिले तो डॉक्टर "एम्निओसेंटेसिस" (amniocentesis) करने की सलाह दे सकते हैं। इस तकनीक में गर्भाशय से तरल पदार्थ निकाल कर जांचा जाता है जिससे बच्चे में किसी असामान्यता का पता चल जाए। इससे पता चल जाता है कि बच्चे को कोई जेनेटिक विकार है या नहीं। हालाँकि, ज़्यादातर फांक होंठ और तालु अपने आप होते हैं किसी जेनेटिक समस्या से नहीं। (और पढ़ें- गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से चेकप)

फांक होंठ व तालु का इलाज कैसे कराएं?

फांक होंठ या तालु का इलाज इसलिए कराया जाता है ताकि तो ढंग से खा सकें, बोल सकें, सुन सकें, सांस ले सकें और उनकी चेहरे की बनावट सामान्य हो सके। फांक होंठ या तालु का इलाज सर्जरी द्वारा किया जाता है और अन्य समस्याएं सुधारने के लिए थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। 

सर्जरी 

आपके बच्चे की अवस्था देख कर सर्जरी की जाती है। शुरुआती सर्जरी के हिसाब से, डॉक्टर आगे की सर्जरी करते हैं। आगे की सर्जरी नाक और होंठों की बनावट ठीक करने के लिए और बच्चे का बोलना ठीक करने के लिए की जाती है। सर्जरी निम्नलिखित तरीके से की जाती है:

  • कटे होंठ का इलाज- 1 से 4 महीने की उम्र में किया जाता है 
  • कटे तालु का इलाज- 5 से 15 महीने की उम्र में किया जाता है 
  • आगे की सर्जरी- 2 से किशोरावस्था की उम्र तक 

कटे होंठ और तालु की सर्जरी अस्पताल में की जाती है। डॉक्टर आपके बच्चे को "एनेस्थीसिया" दते हैं जिससे उसे सर्जरी के दौरान कोई दर्द महसूस ना हो। सर्जरी करने के लिए अलग-अलग तरीके और तकनीक इस्तेमाल की जाती है। जिन हिस्सों में हानि पहुंची हो उनका इलाज किया जाता है और उससे होने वाली जटिलताओं का भी इलाज किया जाता है। सामान्य तरीका:

  • कटे होंठ का इलाज-
    होंठों के बीच के कट को बंद करने के लिए डॉक्टर दोनों तरफ कट लगाते हैं और कोशिकाओं को सील देते हैं। इस इलाज से होंठ का अाकार बन जाता है और इंसान सामान्य रूप से होंठों से होने वाले काम कर सकता है। 
  • कटे तालु का इलाज-
    आपके बच्चे की अवस्था को देख कर, ​तालु में लगे कट का इलाज करने के लिए कई तरीके इस्तेमाल किये जा सकते हैं। डॉक्टर कट के दोनों तरफ कट लगाकर मांसपेशियों और कोशिकाओं को ठीक करते हैं। फिर उसे वापस सिल दते हैं। 
  • कान की नली की सर्जरी-
    जिन बच्चों का तालु कटा हुआ होता है उनके कान का भी इलाज किया जाता है जिससे बार-बार कान में संक्रमण ना हो। संक्रमण होने से सुनने की क्षमता जा सकती है। इस प्रक्रिया में कान में छोटे-छोटे ट्यूब डाले जाते हैं जिससे तरल पदार्थ इकठ्ठा न हो। 
  • चेहरे की बनावट सुधारने के लिए सर्जरी-
    मुंह,नाक और होंठों की बनावट सुधारने के लिए अन्य सर्जरी भी की जाती है। 

सर्जरी करने के कारण आपके बच्चे के चेहरे की बनावट, जीवनशैली, खाना खाने की क्षमता, सांस लेने की क्षमता और बोलने की क्षमता सुधर जाती है। सर्जरी करने से खून निकल सकता है, घाव भरने में समय लग सकता है और नसों को कुछ समय या ज़िन्दगी भर के लिए नुकसान पहुँच सकता है।  

फांक (कटे) होंठ व तालु के जोखिम क्या हैं?

कुछ कारकों की वजह से बच्चे में फांक होंठ होने का जोखिम बढ़ जाता है। जैसे:

  • जेनेटिक-
    जिन लोगों के परिवार में पहले भी किसि को कटे होंठ की समस्या हो उनके बच्चों में ये समस्या होने की ज़्यादा संभावना होती है। 
  • सेक्स-
    पुरुषों में कटा होंठ होने की दोगुनि संभावना होती है। महिलाओं में कटा तालु होता है कटा होंठ नहीं। 
  • गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान और शराब पीना-
    जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं या शराब पीती हैं उनके बच्चों को ये समस्या होने की ज़्यादा संभावना है। 
  • गर्भावस्था के दौरान मोटापा-
    अध्ययन करने से पता चला है कि जिन औरतों को गर्भावस्था के दौरान मोटापा होता है उनके बच्चों को ये समस्या होने की संभावना है। 
    (और पढ़ें- गर्भावस्था में सावधानियां)
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