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 दांतों की कैविटी क्या होती हैं?

जब दांतों की सख्त सतह हमेशा के लिए नष्ट हो जाती है और छोटे छिद्र या छेद में विकसित हो जाती है, उसे दांतों की कैविटी कहा जाता है। कैविटी को दांतों का सड़ना (Tooth Decay) या दांतों में कीड़ा लगना (Caries) भी कहा जाता है।

दांत की तीन परतें होती हैं :-

  1. इनेमल (Enamel) - दांतों की बाहरी और रक्षा करने वाली परत 
  2. डेंटीन (Dentin) - इनेमल के निचे की नर्म परत 
  3. पल्प (Pulp) - डेंटिन के निचे मौजूद नस 

कैविटी तब होती है जब कार्बोहायड्रेट युक्त खाना जैसे कि ब्रेड, अनाज, दूध, पेप्सी या कोक जैसी सॉफ्ट ड्रिंक्स, फल, केक या टॉफ़ी हमारे दांतों में रह जातें हैं। हमारे मुँह में मौजूद बैक्टीरिया उसे अम्ल (एसिड) में तब्दील कर देते हैं। 

बैक्टीरिया, एसिड, दांतों में अटका हुआ खाना और लार मिलकर प्लाक (Plaque; दांतों की सतह पर चिपचिपी परत जिसमें बैक्टीरिया होते हैं) बनाता है जो कि दांतों के साथ चिपक जाता है। प्लाक में मिला एसिड इनेमल को ख़त्म कर देता है, और दांतों में छेद कर देता है जिसे कैविटी कहते हैं। शुरू में यह छेद बहुत छोटे होते हैं पर समय के साथ बड़े होते जाते हैं। 

यह अम्ल इनेमल के द्वारा दांतों की भीतरी सतह तक पहुंच सकता हैं। इसी तरह दांतों की नरम परत पर सड़न शुरू हो जाती है जो कि दांत का मुख्य भाग है। जैसे ही डेंटिन और इनेमल की परत टूट जातीं है वैसे ही कैविटी बननी शुरू जाती है। अगर सड़न को ना हटाया जाए तो बैक्टीरिया बढ़ता जाएगा और एसिड बनाता रहेगा जो की दांत की अंदरूनी परत तक पहुँच जाएगा। इस अंदरूनी परत में नर्म पल्प और संवेदनशील नर्व (नस) फाइबर शामिल होते हैं।

घटते हुए मसूड़ों की वजह से दिखाई देने वाली नसों में भी कैविटी पैदा हो सकती हैं। जड़ों की बाहरी सतह इनेमल जो कि पतली होती है। प्लाक बैक्टीरिया में मौजूद अम्ल उसे जल्दी नष्ट कर देता हैं। 

कैविटी और दांतों की सड़न दुनिया की सबसे आम स्वास्थय समस्याओं में से एक हैं। यह खासतौर पर छोटे बच्चों, किशोरों और कुछ हद तक वयस्कों में भी पाई जाती हैं। 

अगर कैविटी का इलाज ना कराया जाए तो यह बढ़ती जायेगी और दांतों की गहरी सतहों को भी प्रभावित कर सकती है। इससे दांतों में भयानक दर्द और संक्रमण भी हो सकता है, और यहाँ तक कि दांत भी टूट सकते हैं। नियमित रूप से दांतों की जांच, ब्रश करना और दांत साफ कराने की आदत सबसे बढ़िया तरीके हैं दांतों को कैविटी और सड़न से सुरक्षित करने का। 


भारत में कैविटी  

इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री ने सर्वेक्षण किया जिसमें पाया गया कि -

  1. 35–44 और 65–74 साल की आयु के लोगों में 54% और 42% लोगों में ख़राब मौखिक स्वछ्ता पाई गई। 
  2. बारह साल की उम्र के 51% बच्चों को कैविटी थी। 
  3. वयस्कों के लिए दांत निकालना सबसे ज़्यादा अपेक्षित इलाज था (52% के लिए)।
  4. पल्प का इलाज 16% बारह साल के बच्चों के लिए, और 16% 35–44 साल के लोगों के लिए अपेक्षित इलाज था। 
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  11. दांतों में कीड़े (कैविटी) की दवा - OTC Medicines for Cavities (Dental Caries) in Hindi

कैविटी के प्रकार

कैविटी को चार कारको के आधार पर वर्गित किया जाता हैं:

1. कैविटी की जगह के अनुसार 

  1. प्राइमरी कैविटी (Primary Cavity) -
    1. स्मूथ कैविटी (Smooth Cavity) - कीड़ा चिकनी सतह पर लगता है।     
    2. पिट और फिशर कैविटी (Pit and Fissure Cavity) - कीड़ा जो पिट और फिशर (वह दांत  जिसके गहरे खांचे (deep grooves) मे दरार और छेद हो जाए) एरिया में लगता है।
    3. रुट सरफेस कैविटी - यह जड़ की सतह पर लगता है।
  2. सेकेंडरी या रिकरंट कैविटी (Secondary or Recurrent Cavity) - रिकरंट यानी बार-बार होने वाली कैविटी।दांतों की भराई करने के बाद जब कीड़ा लगता हैं, उसे सेकेंडरी कैविटी कहते हैं। 

2. कैविटी फैलने की दिशा के अनुसार

  1. बैकवर्ड कैविटी - जब कीड़े डेंटिन इनेमल जंक्शन से इनेमल तक फ़ैल जातें हैं। (भीतरी सतह से बाहरी सतह तक)
  2. फॉरवर्ड कैविटी - जब कीड़ा इनेमल से दांत की जड़ तक फ़ैल जाता है। (बाहरी सतह से भीतरी सतह तक)

3. कैविटी चरण के अनुसार

  1. इन्सिपिएंट कैविटी (रिवर्सेबल) -  पहली कीड़े की गतिविधि जो इनेमल में होती हैं। 
  2. कवितातेड़ कैविटी (इर्रिवर्सिबले) - जब इनेमल (बाहरी सतह) टूट जाता है और कैविटी डेंटिन (भीतरी सतह) तक पहुंच जाती है। 

4. कैविटी के गति अनुसार

  1. एक्यूट (रेम्पेंट) कैविटी - वह बिमारी जिसमे कीड़े बहुत तेज़ी से दांत को नष्ट कर देते हैं। 
  2. क्रोनिक (स्लो/ अरेस्टेड) - यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती हैं और थोड़े समय बाद रुक जाती है। 

डेंटल कैविटी के लक्षण 

डेंटल कैविटी के संकेत व लक्षण भिन-भिन प्रकार के होते हैं जो कि उसकी सीमा और जगह पर निर्भर करते हैं। कैविटी के शुरूआती स्तर पर लक्षण मिलना अनिवार्य नहीं हैं। जैसे ही सड़न बढ़ती जायेगी, वह संकेत और लक्षण दिखने शुरू हो जाएँगे -

  1.  दांतों में दर्द, स्वाभाविक दर्द या ऐसा दर्द जो बिना किसी कारण हो।
  2.  दांतों में झनझनाहट (टूथ सेंसिटिविटी)।
  3.  मीठा, गरम या ठंडा खाते या पीते वक़्त हल्के से तेज़ दर्द होना।  
  4.  दांतों में छेद और गड्ढे दिखाई देना।
  5.  दांतों की सतह पर काले, भूरे और सफ़ेद रंग के दाग दिखाई देना। 
  6.  चबाते वक़्त दर्द होना। 

 

दांतों में कीड़े लगने के कारण  

बैक्टीरिया सामान्य रूप से हमारे मुँह में पाएं जातें हैं। यह बैक्टीरिया खासतौर पर शुगर (और पढ़ें - मीठे की लत से छुटकारा पाने के लिए सरल तरीके) और स्टार्च को एसिड में तब्दील कर देतें हैं। बैक्टीरिया, एसिड, खाने के टुकड़े और लार मिलकर हमारे मुंह में एक चिपचिपा पदार्थ बनाते हैं जिसे प्लाक कहते हैं। प्लाक दांतों से चिपक जाता हैं। यह पीछे वाली दाड़ में बहुत आम होता है, यह मसूड़ों के बिल्कुल ऊपर और भराई की धार पर होता है। 
 
अगर प्लाक को दांतों पर से ना हटाया जाए तो वह एक तरह का पदार्थ बनाते हैं जिसे टार्टर​ (Tartar) कहतें हैं। प्लाक और टार्टर मिलकर मसूड़ों को परेशां करते हैं, जिसकी वजह से गिंगिविटीज़ (gingivitis) और पेरिओडोन्टीटीएस (periodontitis) हो जाता है।  

खाना खाने के 20 मिनट के अंदर दांतों पर प्लाक बनना शुरू हो जाता है। अगर इसे न हटाया जाए तो दांतों में सड़न शुरू हो जाती हैं। एसिड जो की प्लाक में मिला होता है हमारे दांतों की कवरिंग (इनेमल) को नष्ट कर देता है और उसमें गड्ढे बना देता है। कैविटी आमतौर पर परेशान नहीं करती है, लेकिन जब वह बड़ी होती है, वह नसों को प्रभावित करती है जिससे की दांत खराब हो जाता है। अगर कैविटी का इलाज ना कराया जाए तो दांतों में फोड़ा भी हो सकता है। और अगर सड़न का इलाज ना कराया जाए, तो दांतों की भीतरी सतह को नुक्सान पहुँचता है जिसके कारनाप दांत खो सकते हैं।

कार्बोहायड्रेट (स्टार्च और शुगर) दांतों में कीड़े लगने के जोखिम को बढ़ा देतें हैं। चिपचिपा खाना हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह दांतों पर रह जाता है। बार बार खाने से दांत की सतह की अम्ल के संपर्क में आने की सम्भावना बढ़ जाती है। 

दांतों में कीड़े लगने के जोखिम के कारक 

दांत में कीड़ा किसी को भी लग सकता है, लेकिन निम्नलिखित कारक दांत में कीड़ा लगने की सम्भावना को और बढ़ा देते है :

  1. दांत की जगह - सड़न खासतौर पर पीछे वाले दांतों (जिन्हे मोलर और प्री-मोलर दांत कहते हैं) में होती है। इन दांतों में बहुत सारे गड्ढे, छेद और जड़े होती हैं जो कि खाने के कड़ों को इकट्ठा कर लेती हैं। परिणामस्वरूप, आगे के दांतों (आसानी से पहुंचने वाले और चिकने) से इनको सॉफ रखना ज़्यादा मुश्किल हैं। 
  2. कुछ खाने की और पेय वस्तु - खाना जो लम्बे समय के लिए दांतों में चिपक जाता है जैसे कि - दूध, आइस-क्रीम, शहद, चीनी, पेप्सी या कोक आदि कोल्डड्रिंक्स, सूखे मेवे, केक, बिस्किट, टॉफ़ी और चिप्स। 
  3. बार बार खाना या पीना - जब आप बार बार खाना या मीठी चीज़ों को खातें हैं, तब मुँह के बैक्टीरिया को दांतों पर हमला करने के ज़्यादा अवसर मिलते हैं। इसके अलावा पेओपसी और कोक जैसी एसिडिक ड्रिंक्स का बार बार सेवन करने से दांतों में निरंतर अम्ल की सतह बन जाती है।  
  4. सोते वक़्त नवजात शिशु को खिलाना - जब नवजात शिशु को सोते वक़्त दूध, जूस, या चीनी ये युक्त पेय पिलाया जाता है, यह घंटों सोते हुए बच्चे के दांतों पर रह जाते हैं जिसकी वजह से दांतों में सड़न होती है। इस तरह के दाँतों के सड़ने को "बेबी बोतल टूथ डीके" (baby bottle tooth decay) कहा जाता है । 
  5. अपर्याप्त दांतों की सफाई - अगर हम अपने दांतों को खाने और पीने के बाद साफ नहीं करते तो हमारे दांतों पर प्लाक बन जाता है जिससे कि दांतों की सड़न शुरू हो जाती है।
  6. दांतों को पर्याप्त फ्लोराइड नहीं मिलना - फ्लोराइड एक प्राकृतिक घटित खनिज है, जो कि कैविटी से बचाता है और दांतों की खराबी को पहले ही चरण पर ठीक कर देता है। इसके फायदें के कारण इसे सार्वजनिक पानी में शामिल किया जाता है। यह टूथपेस्ट और माउथ वाश में इस्तेमाल होने वाली बहुत आम सामग्री है। लेकिन आमतौर पर बोटल-बन्द पानी में यह नहीं पाया जाता।  
  7. बहुत छोटी या बहुत बड़ी उम्र - छोटें बच्चों और किशोरों में कैविटी आम बात है। पर बूज़रगों को भी कैविटी होने का जोखिम रहता है। समय के साथ दांत ख़राब हो जातें हैं और मसूड़ें घटने लगते हैं जिसकी वजह से दांतों की जड़े ख़राब होने के सम्भावना बढ़ जाती है। बुज़ुर्गों में दवाइयां लेने के कारण लार में कमी आ जाती है जिससे की सड़न होने की संभावना और बढ़ जाती है।
  8. शुष्क मुँह - शुष्क मुँह लार की कमी से होता है। लार दांत को खाने और प्लाक से होने वाली सड़न से बचाती है। लार में पाए जाने वाले पदार्थ भी बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित किये हुए एसिड से बचाते हैं। कुछ दवाइयां लार का उत्पादन कम करके कैविटी होने का जोखिम बढ़ा देती हैं।
  9. फिलिंग का ख़राब होना - समय के साथ दांतों की भराई (फिलिंग) कमज़ोर हो जाती है और टूटने लगती है। iski वजह से दांतों में कठोर किनारे बन जातें हैं और प्लाक बहुत आसानी से बन जाता है, जिसे हटाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  10. हार्टबर्न (सीने में जलन) - हार्टबर्न या गैस्ट्रोएसोफाजाल रिफ्लक्स डिजीज (gastroesophageal reflux disease) की वजह से पेट का अम्ल मुँह की ओर आ सकता है। यह दांतों के इनेमल को खराब कर देता है। ऐसा होने के बाद बैक्टीरिया डेंटिन पर और आसानी से हमला कर पाते हैं, और दांतों में सड़न पैदा करते हैं।  
  11. ईटिंग डिसऑर्डर - एनोरेक्सिया (anorexia) और बुलेमिअ (bulimia) दाँतों के घिसने और कीड़े लगने की सम्भावना को बढ़ा देते हैं। बार बार उलटी होने की वजह से पेट का एसिड दांतों में लग जाता है और इनेमल को ख़त्म कर देता है। ईटिंग डिसऑर्डर लार के बनने की क्षमता को भी कम करता है। 

कैविटी से कैसे बचा जाए 

बहुत सारे तरीकों से कैविटी को होने रोका जा सकता है, जिसमे से कुछ यह हैं:

  1. रोज़ाना ब्रश और दांतों की सफाई करने से हमारे मुंह में पैदा होने वाले प्लाक और बैक्टीरिया की संख्या कम होती है। 
  2. मीठा कम खाने से हमारे मुँह में कम अम्ल बनता है। 
  3. फ्लोराइड युक्त पेस्ट का प्रयोग करना चाहिए, जो कि दांतों को मज़बूती देता है। फ्लोराइड ट्रीटमेंट डेंटिस्ट द्वारा भी दिया जाता है और डेंटिस्ट की सिफारिश से फ्लोराइड सप्लीमेंट्स का सेवन भी कर सकते हैं।
  4. एंटी-बैक्टीरियल माउथ वॉश का प्रयोग करना चाहिए जो कि बैक्टीरिया के स्तर को गिराता है और कैविटी होने से बचाता है।
  5. च्युइंग गम चबाना चाहिए क्योंकि इसमें क्सीलिटोल (xylitol) होता है जो कि बैक्टीरिया के विकास को कम करता है।

दांतों के कीड़ों का निदान 

डेंटिस्ट दांतों के कीड़े का पता निम्नलिखित बातों से करते हैं - 

  1. दांतों के दर्द और सेंसिटिविटी के बारे में पूछकर।
  2. मुंह और दांतों का परिक्षण करके। 
  3. दांतों की दन्त उपकरणों से जांच करके, जिससे की वह नर्म स्थान का पता लगा सकें।
  4. दांतों का एक्स-रे मशीन से जांच करके, जिससे कि दांतों की सड़न और कीड़ों का पता चल सके कि वह किस हद तक फैले हुए हैं। 
  5. डेंटिस्ट की जांच से यह भी पता चल जायेगा की कौन सी कैविटी हुई है - स्मूथ सरफेस (smooth surface), पिट्स और फिशर (pits and fissure) या रूट्स (roots)।   

डेंटल कैविटीज़ के इलाज

नियमित रूप से दांतों की जांच से कैविटी और दूसरी दांतों की बीमारियों को शुरूआती स्तर पर पहचाना जा सकता है। इससे कोई परेशानी पैदा होने और उसके किसी गंभीर मुसीबत का रूप लेने से पहले उसका इलाज किया जा सकता है। अगर कोई परेशानी शुरू हो गयी है तो जितनी जल्दी चिकित्सीय मदद ली जाए, उतना बेहतर है। ऐसा करने से दांतों की सड़न को शुरूआती अवस्था में ही रोका जा सकता है। अगर कैविटी की वजह से दर्द शुरू होने से पहले उसका इलाज कर दिया जाए, तो व्यापक इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती।

इलाज इस बात पर निर्भर करता हैं कि आपकी कैविटी कितनी कठोर है और आपकी दशा कैसी हैं। इलाज के विकल्प इस प्रकार हैं -

  1. भराई (फिलिंग) - डेंटिस्ट दांतों में हुए गड्ढों को भरते हैं। वह दांतों में जमी कैविटी को ड्रिल मशीन द्वारा निकालते हैं और उसकी जगह सिल्वर एलाय (silver alloy), गोल्ड(gold), पोर्सिलेन (porcelain) या कम्पोजिट रेसिन (composite resin) से बदलते हैं। पोर्सिलेन और कम्पोजिट रेसिन असली दांतों जैसे दिखाई देते हैं और इनका प्रयोग आगे के दांतों में भी किया जाता है। ज़्यादातर डॉक्टर सिल्वर एलाय और गोल्ड को ज़्यादा मजबूत मानते हैं और इनका इस्तेमाल पीछे वाले दांतों को बनाने में करते हैं। आजकल पिछले दांतों को बनाने के लिए ज़्यादा मज़बूत कम्पोजिट रेसिन का इस्तेमाल करने का प्रचलन काफी ज़्यादा है। 
  2. क्राउन या कैप - दांतों के ज़्यादा सड़ने पर क्राउन या कैप का इस्तेमाल किया जाता है। जब दाँत ज़्यादा साद जाते हैं, तब उनका ढाँचा बहुत सीमित रह जाता है और वा कमजोर हो जाते हैं। ज़्यादा फिलिंग और दांतों के कमजोर होने से उनके टूटने का जोखिम बढ़ जाता है। खराब और कमजोर हुई जगह को हटाया और ठीक किया जाता है। बचे हुए दांत पर क्राउन लगाया जाता है। क्राउन ज़्यादातर गोल्ड, पोर्सिलेन या पोर्सिलेन और धातु के मिश्रण से बनाया जाता है।
  3. रुट कैनाल - इसकी तब ज़रूरत पड़ती है जब दांत की नस सड़न या फिर किसी चोट से खत्म जाती है। दांत का बीच वाले भाग के साथ नस, ब्लड वेसल टिश्यू (पल्प) और सड़े हुए हिस्से को हटा दिया जाता है। जड़ों को सीलिंग सामग्री से भर दिया जाता है। दांत की भराई की जाती है जिसमें अक्सर क्राउन की आवश्यकता होती है।
  4. फ्लोराइड से इलाज - अगर आपकी कैविटी बस शुरू ही हुई हैं तो फ्लोराइड आपके इनेमल को वापस लाने में मदद कर सकता है और कभी-कभी कैविटी को शुरूआती स्तर पर भी ठीक कर सकता है। 
  5. दांत को निकालना - कुछ दांत इतनी बुरी तरह सड़ जातें हैं की उन्हें वापस ठीक नहीं किया जाता और अंत में निकाल दिया जाता है। दांत के निकलने से खाली स्थान रह जाते हैं जिसमें की बाकी के दांत खिसक सकते हैं। अगर मुमकिन हो तो, ब्रिज लगा लेना चाहिए या डेंटल इम्प्लांट कराना चाहिये जो कि खाली जगह को भर सकें। 

कैविटी का इलाज न करने की जटिलताएं

कैविटी और दांतों की सड़न इतनी आम है कि आप इसे गंभीरता से न लें। कई लोग यह मान लेते हैं कि अगर एक बच्चे को कैविटी हो जाती है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं हैं। लेकिन अगर बच्चे के परमानेंट दांत नहीं है तो भी कैविटी और दांतों की सड़न बहुत गंभीर रूप ले सकती है। कैविटी की जटिलताओं में शामिल हैं :

  1. दर्द
  2. दांतों के पास फोड़ा होना
  3. सूजन और दांतों के आस पास पस होना
  4. दांत टूटना
  5. चबाने में दिक्कत
  6. दांत टूटने के बाद दाँतों की पोजिशन बदलना
  7. बहुत कम मामलों में, दांतों का फोड़ा बैक्टीरियल संक्रमण पैदा कर सकता है जिससे बहुत ही गंभीर और जान लेवा संक्रमण हो सकता है।

क्या खाने से बचे

  1. टॉफ़ी या मिठाई - अगर आप मिठाई खातें है, तो ऐसी मिठाई खानी चाहिए जो कि मुँह से आसानी से निकल जाए। लोली-पॉप, मिठाइयां और टॉफ़ी दांतों में चिपक जाती है और लार के लिए उसे बाहर निकालना मुश्किल कर देती है। बिस्किट, केक में बहुत ज़्यादा मात्रा में चीनी होती है, जो कि दांतों में सड़न पैदा कर देती है। इस तरह के भोजन सीमित मात्रा में लेने चाहियें।
  2. स्टार्ची, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स - चिप्स, ब्रेड, पास्ता, जैसे चीज़ें उतनी ही खतरनाक है जितनी की टॉफ़ी या मिठाई। स्टार्च सफ़ेद आटे से बनता है और सिंपल कार्बोहायड्रेट होता है जो मुँह में रह जाता है और टूट कर "सिंपल शुगर" बन जाता है। बैक्टीरिया इन्ही शुगर पर पैदा होते हैं और अम्ल बनाते हैं, जिसकी वजह से दांतों में सड़न होने लगती है। (और पढ़े - जनक फ़ूड की जगह खाएं यह हैल्थी चिप्स
  3. कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स - सिर्फ रेगुलर पेप्सी या कोक में ही ज़्यादा मात्रा में शुगर नहीं होती, बल्कि डाइट और पेप्सी या कोक में भी फॉस्फोरस और कार्बोनेशन होता है जो कि दांतों की इनेमल को ख़राब कर देता है। इसकी वजह से वह दागनुमा और भूरे रंग के हो जातें हैं। बहुत सारी ऊर्जा वाले पेय पदार्थ, बोतलबंद शिकंजी में काफी ज़्यादा मात्रा में चीनी और अम्ल होता है जो दांतों की इनेमल को ख़राब कर देता है। अगर आप निरंतर इन चीज़ों का सेवन करते हैं, तो आपको स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे काफी हद तक आपके दांतों से सीधा संपर्क कम हो जाएगा।
  4. फ्रूट जूस - हालाँकि फल अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं, लेकिन फ्रूट जूस दांतों के लिए मुसीबत पैदा कर सकता है। फलों में फाइबर होता है और शुगर बहुत कम मात्रा में होता है। इनके साथ साथ जूस में चीनी मिली होती है जो दांतों को और नुक्सान पहुँचाती हैं। अगर आप निरंतर जूस का सेवन करते हैं, तो आपको स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना चाहिए इससे काफी हद तक आपके दांतों से सीधा संपर्क कम हो जाएगा। 
  5. निम्बू, खट्टे फल - ऐसे भोजन को ज़्यादा वक़्त के लिए अपने मुँह में रखने से बचे अगर आप निरंतर सेवन करते हैं, तो आपको स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना चाहिए इससे काफी हद तक आपके दांतों से सीधा संपर्क कम हो जाएगा।

क्या खाना चाहिए

  1.  कैल्शियम - दांतों को सड़ने से बचाने के लिए कैल्शियम एक मुख्य सामग्री हैं, खासतौर पर बढ़ते हुए बच्चों के लिए। दूध, दही और चीज़ कैल्शियम के बहुत ही अच्छे स्त्रोत हैं। मलाई निकला हुआ दूध और कम चिकनाई waale दही में भी कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है। हरे पत्तेदार सब्ज़ी जैसे ब्रोकली, बादाम जैसे और भी विकल्प hain।
  2. फलफाइबर और सब्ज़ियां - फाइबर युक्त खाना खाने से लार लगातार बनती रहती है जो दाँतों में सड़न लगने से बचाती है। सूखे मेवें जैसे की खजूर, किशमिश, अंजीर और ताज़े फल जैसे केले, सेब और संतरा फाइबर के बहुत अच्छे स्त्रोत माने जातें हैं। सब्ज़ियां जैसे फलिया, अंकुरित अनाज, मटर और मूंगफली, बादाम, चोकर जैसे और भी विकल्प है।
  3. साबुत अनाज - साबुत अनाज में विटामिन बी और आयरन होता है जो मसूड़ों को स्वस्थ रखता है। साबुत अनाज में मैग्नीशियम जैसा ज़रूरी तत्व भी होता है जो दांतों और हड्डियों के लिए अच्छा होता है। इनके साथ साथ साबुत अनाज फाइबर युक्त भी होता है। चोकर, भूरे चावल, पास्ता जैसे चीज़ें बहुत अच्छा स्त्रोत है साबुत अनाज का।
  4. चीनी रहित च्युइंग गम - खाना खाने के बाद च्युइंग गम खाने से दांतों पर से एसिडिक परत हट जाती है जो कि टूथ इनेमल का बचाव करती है।
  5. काली चाय और हरी चाय - चाय में ऐसे तत्व होते हैं जो बैक्टीरिया को दबाते हैं, जो दांतों की सड़न और मसूड़ों की बिमारी करने वाली गतिविधि को धीमा कर देतें हैं। चाय बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी पर यह निर्भर करता है की आपकी चाय में कितनी फ्लोराइड की मात्रा है, चाय भी फ्लोराइड का अच्छा स्त्रोत है। याद रखें - चाय में चीनी ना डालें।

दांतों में कीड़े (कैविटी) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
AflurAflur 0.03%W/V Ear Drops36.51
Bellflur Eye DropBellflur Eye Drop38.71
CadiflurCadiflur 0.03% Eye Drops57.1
EyeflurEyeflur 0.03% Eye Drops53.0
Flubi (Entod)Flubi 0.03% Eye Drops46.0
FlubifenFlubifen 0.03% Eye Drops30.0
FludropFludrop 0.03% Eye Drops35.0
FlufenFlufen 0.03% Eye Drops50.0
FlurbirenFlurbiren 0.03% Eye Drops50.19
FlurbitopFlurbitop Eye Drops26.97
FlurFlur Eye Drop121.88
KaziflurKaziflur 0.03%W/V Eye Drops66.0
LufenLufen Eye Drops28.0
Migrid (Crescent)Migrid 10 Mg Tablet36.7
OptifenOptifen 0.03% Eye Drops32.06
Profen Eye DropProfen 0.03% Eye Drops50.0
SioflurSioflur 0.03% Eye Drops44.27
FlbFlb Eye Drops89.06
Flu BiFlu Bi Eye Drops35.0
Froben FrFroben Fr Powder28.0
HylurHylur Eye Drops25.2
Ocuflur OntOcuflur Ont Eye Ointment40.66
BrugelBrugel 5% W/W Gel108.5
FbnFbn 0.03% Eye Drop52.94
FlurbinFlurbin 0.03% W/V Eye Drop53.9
OcuflurOcuflur Eye Drop42.2
Fluoritop SrFluoritop Sr Paint 1.5 Ml471.76
NunafNunaf Tablet49.5
OtoflourOtoflour 20 Mg Tablet49.19
Florocid 1%W/V/2%W/V InjectionFlorocid 1%W/V/2%W/V Injection14.85
FlubichlorFlubichlor 0.5%W/V/0.03%W/V Eye Drops0.0
FlubigatFlubigat 0.3 Mg/3 Mg Eye Drops58.0
FlurgatFlurgat 0.3 Mg/3 Mg Eye Drop71.5
Gatiaid FGatiaid F 0.03%/0.3% Eye Drops72.0
ProflurProflur Eye Drop40.0
SaplureSaplure Eye Drop38.0
ToflerTofler Eye Drop35.0
RayflurRayflur Eye Drops49.5
TakflurTakflur 0.03%W/V/0.25%W/V/0.001%W/V Eye Drop60.0
PenfenPenfen Eye Drop59.0
NitraNitra Oral Solution46.0
TriguardTriguard 0.2% Mouth Wash39.5

दांतों में कीड़े (कैविटी) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Baidyanath Khadiradi Bati Combo Pack Of 2Baidyanath Khadiradi Bati Combo Pack Of 2124.0

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

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