गर्भावस्था के अठारहवें सप्ताह के दौरान, कुछ महिलाओं की भूख बढ़ जाती है। तो इस समय आप स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाने की कोशिश करें जिनमें फाइबर उच्च मात्रा में मौजूद होता है। इसके लिए आप हमारा गर्भावस्था में क्या खाएं और क्या न खाएं लेख पढ़ें। इससे आपको इस समय के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार जानने में मदद मिलेगी।

  1. 18वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव - Body changes during 18 week pregnancy in Hindi
  2. अठारहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास - Baby development in 18th week of pregnancy in Hindi
  3. अठारहवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड - Ultrasound in 18th week pregnancy in Hindi
  4. 18वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स - Tips for 18 week pregnancy in Hindi
  5. प्रेगनेंसी के अठारहवें हफ्ते की डाइट - Diet in 18th week of pregnancy in Hindi
  6. प्रेगनेंसी का अठारहवां सप्ताह के डॉक्टर

इस सप्ताह के दौरान आपकी कमर बढ़ने लगती है। यदि आप दो उंगलियों से अपने पेट के नीचे के हिस्से को स्पर्श करेंगी तो आप अपने गर्भाशय को महसूस कर सकती हैं।

यह खरबूजे के आकार का हो जाता है। कुछ महिलाओं का अठारहवें सप्ताह तक 5.8 किग्रा वज़न बढ़ जाता है। लेकिन हर महिला का इतना वज़न बढ़ना ज़रूरी नहीं है क्योंकि प्रत्येक महिला का शरीर अलग प्रकार का होता है।

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यदि आपका वज़न इससे अधिक या कम है तो अपने स्वास्थ्य की जानकारी के लिए डॉक्टर से बात करें। आपको जल्दी जल्दी बाथरूम के लिए जाना पड़ सकता है। इसलिए अपने आराम के लिए सोने या लेटने से पहले टॉयरूम का उपयोग करने की आदत डाल लें।

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कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के इस हफ्ते में चक्कर आने की अनुभूति हो सकती है। खड़े होने या बैठने की स्थिति में बदलाव लाकर और एकदम से आगे बढ़ने का प्रयास न करके इस समस्या को कम किया जा सकता है।

खिंचाव के निशान आपके पेट के बढ़ने के साथ साथ और अधिक हो जाते हैं और अगर चकत्ते (Rashes) और अधिक बढ़ेंगे तो उनमें खुजली भी बढ़ सकती है। इस चरण में कुछ गर्भवती महिलाएं बदहजमी, कब्ज और सीने में जलन का भी सामना करती हैं। इन लक्षणों को दूर करने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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जैसे जैसे आपके शिशु की हड्डियों का विकास होता है और उनमें कठोरता आती है, सबसे पहले पैर प्रभावित होते हैं। कानों की आंतरिक हड्डियां भी कठोर होने लगती हैं और बच्चे की सुनने की क्षमता भी बढ़ जाती है।

जैसे जैसे बच्चे का मस्तिष्क तंत्रिका संदेशों को भेजना और प्राप्त करना शुरु करता है, बच्चा और अधिक तेज़ी से सुनने और प्रतिक्रिया करने लगता है। साथ ही बच्चा किक भी मारना शुरु कर देता है।

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शिशु की लम्बाई 5½ इंच और वज़न इस सप्ताह तक लगभग 148 ग्राम हो जाता है। और इसके बाद कुछ हफ़्तों तक इन दोनों में धीमी गति से वृद्धि होती है। बच्चा अपने पैरों को क्रॉस करना अपने जोड़ों को मोड़ना और उलट फेर करना शुरु कर देता है।

यदि आपके गर्भ में पलने वाला शिशु लड़की है, तो उसके गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब्स का निर्माण इसी हफ्ते होगा।

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आपकी गर्भावस्था के 18-20 सप्ताह में डॉक्टर आपके बच्चे के आकार और शारीरिक संरचना का मूल्यांकन कर सकते हैं। इस दौरान अल्ट्रासाउंड में शिशु का सिर इस प्रकार दिखाई देता है कि उसके सिर की परिधि (Head circumference) या बाइपेरेटियल व्यास (Biparietal diameter- BPD) मापा जा सकता है।

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इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण चीज़ आपका बच्चा है, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर समय समय पर आवश्यक जाचें कराती रहें।

यदि यह आपकी पहली गर्भावस्था है और आप बच्चे की गतिविधियों (Movements) या संकेतों की प्रतीक्षा कर रही हैं लेकिन उन्हें महसूस करने में समय लग रहा है तो चिंता न करें। ज्यादातर महिलाओं को यह तब तक नहीं अनुभव होते जब तक बच्चा थोड़ा बड़ा नहीं हो जाता अर्थात कुछ समय और इंतज़ार करें परेशान न हों।

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बच्चे की गतिविधियों की परिभाषा के अनुसार, 23 सप्ताह तक कोई गतिविधियां अनुभव नहीं की जाती हैं, लेकिन कई महिलाओं को यह अनुभव जल्दी होता है। और जैसे जैसे हफ्ते बढ़ते जाते हैं और बच्चा बड़ा होता जाता है, महिलाओं को किक भी महसूस होती है।

गर्भावस्था के 18वें सप्ताह में आपके बच्चे के मस्तिष्क और आंखों का विकास होता है। इसलिए आपको अपने आहार में कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व शामिल करने चाहिए जैसे, ओमेगा-3 फैटी एसिड और आयोडीन आदि।

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  1. खाद्य पदार्थों में, टोफू, सोयाबीन, अखरोट, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे और दूध आदि में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है।
  2. ऑयली मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है, लेकिन कुछ कारणों से आपको सप्ताह में केवल दो बार ही इसका सेवन करना चाहिए।
  3. सैल्मन मछली, झींगा, सार्डिन और अंडों में आयोडीन होता है।
  4. पेय पदार्थो में, एप्पल स्मूदी (शेक) आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं।
Dr. Venkatesh

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Dr. Neethu Mary

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