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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए एंटी-मलेरिया दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को लेकर सभी देशों को चेतावनी दी है। डब्ल्यूएचओ के हेल्थ एमरजेंसी प्रोग्राम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. माइकल रयान का कहना है कि कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल करने के बजाय इन ड्रग्स को क्लिनिकल ट्रायलों तक ही सीमित रखना चाहिए। इस हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइकल रयान ने कहा कि फिलहाल इन दोनों ड्रग्स के कोविड-19 के इलाज में प्रभावी होने के सबूत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'कई (स्वास्थ्य) संस्थाओं ने इनके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चेतावनियां दी हैं। कई देशों ने इसके इस्तेमाल को क्लिनिकल ट्रायल तक सीमित भी किया है। इसलिए हरेक देश के शीर्ष अधिकारियों को यह राय फिर दी जाती है कि वे इस ड्रग के पक्ष और विपक्ष में पर्याप्त सबूतों का आंकलन करें।'

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चेतावनी के बावजूद एचसीक्यू को बढ़ावा
दुनियाभर के मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा है कि एंटी-मलेरिया दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में कोई खास मददगार नहीं है, लिहाजा स्वास्थ्यकर्मियों और कोविड-19 के मरीजों को यह दवा देने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत है। लेकिन दुनिया के कई ताकतवर देशों की सरकारें कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए न सिर्फ एचसीक्यू के इस्तेमाल को मंजूरी दे रही हैं, बल्कि कुछ तो इसका प्रसार भी कर रही हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार इसकी मिसाल है। वहां हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोविड-19 के खिलाफ 'गेम चेंजर' तक बताया गया था, जबकि इसके इस्तेमाल के दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे थे। हाल में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे खुद कोरोना वायरस से बचने के लिए एचसीक्यू का सेवन कर रहे हैं।

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उधर, ब्राजील में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या प्रतिदिन हजारों में बढ़ती देख वहां की सरकार ने इस दवा के इस्तेमाल को बकायदा कानून बना कर इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। बीते अप्रैल में रूस ने भी इस दवा को मंजूरी दी थी। वहीं, भारत में भी स्वास्थ्यकर्मियों को वायरस से बचाने के लिए एचसीक्यू के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। यहां कहीं-कहीं पुलिसकर्मियों और आम लोगों को भी यह दवा दिए जानें की रिपोर्टों आई हैं। हालांकि अब इस बारे में पुनर्विचार किया जा रहा है। बताया गया है कि हो सकता है भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद इस संबंध में अपने प्रोटोकोल में बदलाव कर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दे।

लेकिन यूरोप में एचसीक्यू और क्लोरोक्वीन के ट्रायल किए जाने की तैयारी हो रही है। खबर है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में करीब 40,000 हेल्थकेयर वर्कर्स पर ये दवाएं आजमाई जाएंगी और देखा जाएगा कि कोविड-19 के खिलाफ ये कितनी कारगर हैं। खबरों के मुताबिक, इस ट्रायल को लेकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोलस वाइट का कहना है कि उनके यहां यह नहीं पता है कि क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन फायदेमंद है या नुकसानदेह। निकोलस ने कहा, 'यह जानने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके क्लिनिकल ट्रायल किए जाएं।'

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