भारत में कोविड-19 के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी जारी है। अभी तक 11,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी से ग्रस्त पाए गए हैं। इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल (आईसीएमआर) लोगों की जांच कर संक्रमितों की पहचान करने में जुटा है। लेकिन अब जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश है। यही वजह है कि आईसीएमआर ने देश में 'पूल टेस्टिंग' को लागू करने का सुझाव दिया। खबरें हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य में इस व्यवस्था को पहले ही लागू किया जा चुका है। वहीं, दुनिया के कुछ देशों (जैसे जर्मनी और इजरायल) में पूल टेस्टिंग के जरिए ही कोविड-19 के नए मरीजों की पहचान की जा रही है।

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क्या है पूल टेस्टिंग?
पूल टेस्टिंग के तहत एक से ज्यादा लोगों के सैंपलों को एक ही ट्यूब में रखा जाता है और पीसीआर परीक्षण के माध्यम से उनकी जांच की जाती है। अगर इस तरह किए गए टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो व्यक्तिगत रूप से नमूनों की जांच की जाती है। इसे पूल डी-कन्वेंशन कहा जाता है। वहीं, अगर कोई पॉजिटिव नतीजा नहीं मिलता तो पूल में सभी व्यक्तिगत नमूनों को नेगेटिव माना जाता है। कम लागत की वजह से यह ज्यादा खर्चीला भी नहीं है।

वैज्ञानिक शोधों के प्रकाशन के लिए शोधपत्र प्रदान करने की सेवा से जुड़े एक प्रीप्रिंट सर्वर ‘मेडरिक्स्व’ की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि जब कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या कम हो तो पूल टेस्टिंग एक प्रभावी परीक्षण हो सकता है। यानी इस दौरान हर सैंपल को व्यक्तिगत रूप से परीक्षण करने की जरूरत नहीं है।

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आईसीएमआर ने सुझाव में क्या कहा?
आईसीएमआर ने अपने सुझाव में कहा है कि पूल टेस्टिंग के तहत दो से अधिक नमूनों को पूल में एक साथ रखा जा सकता है, लेकिन इनकी संख्या पांच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे जांच रिपोर्ट ‘फॉल्स नेगेटिव’ (गलत) हो सकती है। आईसीएमआर ने कहा कि इस मेथड का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में किया जा सकता है, जहां कोविड-19 के मामले पाए जाने जाने की दर दो प्रतिशत से कम है। वहीं, जिन इलाकों में यह दर दो से पांच प्रतिशत है, वहां बिना लक्षण वाले संदिग्धों के सामुदायिक सर्वेक्षण के आधार पर (पूल टेस्टिंग के तहत) पीसीआर स्क्रीनिंग किए जाने पर विचार किया जा सकता है।

पूल टेस्टिंग की जरूरत क्यों?
दरअसल पूल टेस्टिंग से बीमारी की जांच की प्रक्रिया में आने वाला खर्च तो बचता ही है, साथ ही टेस्टिंग किट की खपत भी कम होती है। उदाहरण के लिए, अगर एक पूल में पांच व्यक्तियों के नमूने रखें गए हैं और इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो चार टेस्टिंग किट पर होने वाला खर्च बचेगा। इस तरह कम संसाधनों के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकेगी।

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