शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का निर्माण होता है. यह खाने में मौजूद शर्करा या चीनी को एनर्जी के रूप में बदलता है या उपयोग करता है. इंसुलिन का निर्माण प्रभावित होने से डायबिटीज की समस्या होती है. डायबिटीज मुख्य रूप से दो तरह की मानी गई है - टाइप 1 व टाइप 2. इन दोनों अलग-अलग स्थितियों में मरीजों का इलाज अलग-अलग किया जाता है. वहीं, दवाइयां भी अलग-अलग होती हैं. टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीज को ट्रेसिबा व लेवेमीर जैसी दवाइयां दी जाती हैं. वहीं, टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को मेटफोर्मिन-एलोग्लिप्टिन (कजानो) व मेटफोर्मिन-कैनाग्लिफ्लोज़िन दी जा सकती है.
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आज हम इस लेख में हम डायबिटीज को ठीक करने वाली बेहतरीन दवाओं के बारे में बताएंगे -
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टाइप 1 डायबिटीज के लिए दवा
जिस व्यक्ति को टाइप 1 डायबिटीज होती है, उसे मुख्य रूप से इंसुलिन दी जाती है. इसके अलावा, अन्य दवाएं भी हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है -
इंसुलिन - Insulin
इंसुलिन टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए सबसे सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली दवा है. टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीज का शरीर इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है. ऐसे में मरीज को समय-समय पर इंसुलिन दी जाती है. इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा दी जाती है. साथ ही यह मार्केट में विभिन्न प्रकार में भी उपलब्ध है. मरीज को किस प्रकार के इंसुलिन की आवश्यकता है, यह शरीर में इंसुलिन की कमी पर निर्भर करता है. ऐसे ही कुछ इंसुलिन की दवाओं के बारे में नीचे बताया गया है -
शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन
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रेगुलर इंसुलिन (ह्यूमुलीन और नोवोलिन)
रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन
- इन्सुलिन लिसप्रो (ह्यूमालोग)
- इंसुलिन एस्पार्ट (नोवोलॉग, फ्लेक्स पेन)
- इंसुलिन ग्लुलिसिन (एपिड्रा)
लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन
- इंसुलिन डिग्लुडेक (ट्रेसिबा)
- इंसुलिन डिटैमर (लेवेमीर)
- इंसुलिन ग्लार्गिन (लैंटस)
- इंसुलिन ग्लुक (ट्रेसिबा)
कॉम्बिनेशन इंसुलिन
- नोवोलॉग मिक्स 70/30 (इंसुलिन एस्पार्ट प्रोटामाइन-इंसुलिन एस्पार्ट)
- ह्यूमालोग मिक्स 75/25 (इंसुलिन लिस्प्रो प्रोटामाइन-इंसुलिन लिस्प्रो)
- ह्यूमालोग मिक्स 50/50 (इंसुलिन लिस्प्रो प्रोटामाइन-इंसुलिन लिस्प्रो)
- ह्यूमुलीन 70/30 (ह्यूमन इंसुलिन एनपीएच-ह्यूमन इंसुलिन रेगुलर)
- नोवोलिन 70/30 (ह्यूमन इंसुलिन एनपीएच-ह्यूमन इंसुलिन रेगुलर)
- रिजोडेग (इंसुलिन डिग्लुडेक-इंसुलिन एस्पार्ट)
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अमाइलिनोमिमेटिक ड्रग - Amylinomimetic Drug
टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए प्राम्लिंटाइड (SymlinPen 120, SymlinPen 60) एक अमाइलिनोमिमेटिक दवा है. यह दवा इंजेक्शन के जरिए दी जाती है, जिसे मरीज को खाने से पहले लेना होता है.
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टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों के लिए दवा
टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों का शरीर इंसुलिन का निर्माण करता है, लेकिन इसका सही से उपयोग नहीं कर पाता है. हालांकि, कुछ स्थितियों में अगर टाइप-2 मरीज का शरीर इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है या फिर कम करता है, तो इस स्थिति में मरीज को इंसुलिन दी जाती है. इसके अलावा, टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को खाई जाने वाली दवा दी जाती है. वहीं, कुछ स्थितियों में इंजेक्शन भी दिया जाता है. इन दवाओं के बारे में नीचे बताया गया है -
मौखिक दवाएं
खाई जाने वाली दवाओं के तहत निम्न प्रकार की दवाएं शामिल हैं -
मेग्लिटिनाइड्स
- नाटेग्लाइनाइड
- रेपाग्लिनाइड
सल्फोनिलयूरिया
- ग्लिपिजाइड (ग्लूकोट्रॉल)
- ग्लिमेपाइराइड (एमरिल)
- ग्लाइबराइड (डियाबेटा, ग्लाइनेज)
डाइपेप्टिडाइल-पेप्टिडेज़ 4 (DPP-4) इन्हिबिटर्स
- सैक्सग्लिप्टिन (ओंग्लीज़ा)
- सीटाग्लिप्टिन (जैनुविया)
- लिनाग्लिप्टिन (ट्रेडजेंटा)
- एलोग्लिप्टिन (नेसिना)
बिगुआनाइड्स
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मेटफोर्मिन (ग्लूमेटजा, रियोमेट, फोर्टामेट)
थियाजोलिडाइनायड्स
- रोजिग्लिटाजोन (अवंडिया)
- पियोग्लिटाजोन (एक्टोस)
अल्फा-ग्लूकोसिडेस इन्हिबिटर्स
सोडियम-ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्टर 2 (SGLT2) इन्हिबिटर्स
- कैनाग्लिफ्लोजिन (इन्वोकना)
- डपगलफ्लोजिन (फार्क्सीगा)
- एम्पाग्लिफ्लोजिन (जार्डियन्स)
बाइल एसिड एक्यूट्रांस
- कोलीसेवेलम (वेल्चोल)
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सारांश
डायबिटीज मरीजों के लिए मार्केट में कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं. यह दवाइयां डायबिटीज की स्थिति और टाइप पर निर्भर करता है. टाइप -1 डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन दी जाती है. वहीं, टाइप-2 मरीजों को कई तरह की मौखिक रूप से खाई जाने वाली दवा जैसे- कोट्रोल, ग्लिमेपाइराइड (एमरिल), ग्लाइब इत्यादि दी जाती है. ध्यान रखें कि डायबिटीज होने पर नियमित रूप से अपना चेकअप कराएं. वहीं, किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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डायबिटीज के लिए अच्छी दवा, टेबलेट, मेडिसिन के डॉक्टर
Dr. Narayanan N K
एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
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Dr. Tanmay Bharani
एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
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