फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम - Fetal Retinoid Syndrome in Hindi

Dr. Pradeep JainMD,MBBS,MD - Pediatrics

December 31, 2020

December 31, 2020

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम
फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम क्या है?
फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम बच्चे में शारीरिक जन्म दोषों का एक विशिष्ट पैटर्न है। यह समस्या बच्चे को तब आती है जब वह गर्भावस्था के दौरान रेटिनोइड के संपर्क में आता है। दरअसल आइसोट्रेटिनोईन (एक्यूटेन) सबसे प्रसिद्ध रेटिनोइड है। इसका इस्तेमाल गंभीर सिस्टिक एक्ने (मुंहासे) के इलाज के लिए किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान रेटिनोइड्स के संपर्क में आने से भ्रूण को यह बीमारी होती है और शिशुओं में कई प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि कुछ बच्चों में फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम से जुड़े कोई लक्षण दिखायी नहीं देते जबकि अन्य बच्चों में केवल बौद्धिक और सीखने संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। तो वहीं बीमारी से पीड़ित अन्य बच्चों में बहुत गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान 20-35 फीसदी भ्रूण जो रेटिनोइड के संपर्क में आते हैं उनमें कोई न कोई जन्म दोष जरूर विकसित होता है।

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फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम के लक्षण - Fetal Retinoid Syndrome Symptoms in Hindi

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम से पीड़ित शिशुओं में क्रैनियोफेशियल (खोपड़ी और चेहरे से संबंधित क्षेत्र), सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) यानी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और कार्डियोवास्कुलर सिस्टम (हृदय संबंधी) से जुड़ी असामान्यताएं देखने को मिलती हैं। एक नवजात शिशु से दूसरे में बीमारी के स्पष्ट लक्षण और शारीरिक बदलाव अलग-अलग हो सकते हैं। बीमारी से पीड़ित कुछ शिशुओं के कान बेहद छोटे हो सकते हैं, सामान्य जगह से नीचे स्थित हो सकते हैं (माइक्रोटिया), कान की नली संकुचित हो सकती है (स्टेनोसिस) या फिर कुछ बच्चे बिना कान के भी पैदा हो सकते हैं।

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इसके अलावा मध्य और आंतरिक कान की असामान्यताओं के कारण सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। अतिरिक्त क्रैनियोफेशियल यानी चेहरे से संबंधित लक्षणों में दोनों आंखों के बीच अधिक जगह का होना (हाइपरटेलोरिज्म), मुंह के ऊपरी हिस्सा का पूरी तरह से बंद ना होना (फांक तालु), ऊपरी होंठ में असामान्य खांचा होना (फांक होंठ) और चेहरे के मध्य क्षेत्र का कम विकसित होना (मिडफेस हाइपोप्लासिया) शामिल है। वहीं, कुछ पीड़ित बच्चे चेहरे का लकवा जैसे स्थिति का भी अनुभव कर सकते हैं।

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम का कारण - Fetal Retinoid Syndrome Causes in Hindi

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला द्वारा सिंथेटिक विटामिन ए (रेटिनोइड्स) जैसे आइसोट्रेटिनॉइन (एक्यूटेन) का उपयोग करने की वजह से विकसित हो रहे भ्रूण पर कई तरह का असर पड़ सकता है। इसके अलावा  गर्भपात, समय से पहले प्रसव (प्रीमैच्योर डिलिवरी) और कई तरह के जन्म दोषों की आशंका भी बढ़ जाती है। मार्केट में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध आइसोट्रेटिनोईन ब्रांड उत्पादों में ऐब्सोरिका, ऐमनेस्टीम, क्लाराविस, मायोरिसन और जेनाटिन शामिल है। इसके अलावा दुनियाभर में विभिन्न प्रकार की जेनरिक दवाएं भी हैं जो फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम का कारण बन सकती हैं।

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम का निदान - Diagnosis of Fetal Retinoid Syndrome in Hindi

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम की पहचान के लिए कोई डायग्नोस्टिक टेस्ट उपलब्ध नहीं है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान रेटिनोइड जोखिम से जुड़े इतिहास के साथ पीड़ित बच्चे में खास लक्षणों की पहचान के आधार पर ही क्लीनिकल ​निदान किया जाता है। वहीं, अल्ट्रासाउंड की मदद से प्रसव यानी डिलीवरी से पहले भी बीमारी को डायग्नोज किया जा सकता है। इस दौरान भ्रूण में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और हृदय की असामान्यताओं का पता लगाया जाता है।

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम का इलाज - Fetal Retinoid Syndrome Treatment in Hindi

फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम का इलाज हर बच्चे को प्रभावित करने वाली विशिष्ट समस्याओं की ओर निर्देशित है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता होती है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन और हृदय रोग विशेषज्ञों की जरूरत होगी जो पीड़ित के उपचार में सहायक होंगे। इनके साथ ही कान संबंधी समस्याओं के विशेषज्ञ यानी ऑडियोलॉजिस्ट, नेत्र विशेषज्ञों और अतिरिक्त स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की भी जरूरत पड़ेगी जो पीड़ित बच्चे के उपचार के लिए व्यवस्थित और व्यापक योजना तैयार करें। उपचार के अन्य तरीके भी सिम्प्टोमैटिक यानी लक्षणों के आधार पर ही होते हैं। 



फीटल रेटिनोइड सिंड्रोम के डॉक्टर

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