अगर आप टाइप-2 डायबिटीज के रोगी हैं और इसके इलाज के लिए कई तरह की दवाओं का सेवन करते हैं तो आपको सचेत होने की जरूरत हैं। शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के आधार पर बताया है कि डायबिटीज के उपचार के दौरान ली गई दवाएं हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इनमें हार्ट फेल विशेष रूप से शामिल है। 

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  1. क्या कहती है रिसर्च?
  2. पहले भी किए गए कई शोध
  3. शोधकर्ताओं ने कैसे किया अध्ययन?

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी जानी-मानी पत्रिका 'ब्रिटिश मेडिकल जर्नल' (बीएमजे) में छपे हालिया शोध के मुताबिक, ब्लड शुगर की समस्या के दौरान दी जाने वाली 'रोजीग्लिटाजोन' दवा दिल की सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकती है। शोध में बताया गया है कि यह दवा ब्लड शुगर के मरीजों में टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने का काम करती है, लेकिन इसके सेवन से हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

myUpchar के डॉक्टरों ने अपने कई वर्षों की शोध के बाद आयुर्वेद की 100% असली और शुद्ध जड़ी-बूटियों का उपयोग करके myUpchar Ayurveda Madhurodh Capsule बनाया है। इस आयुर्वेदिक दवा को हमारे डॉक्टरों ने कई लाख लोगों को डायबिटीज के लिए सुझाया है, जिससे उनको अच्छे प्रभाव देखने को मिले हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब किसी अध्ययन के जरिये इस तरह की जानकारी चेतावनी के रूप में सामने आई है। साल 2007 के बाद से अब तक कई शोधों के माध्यम से शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं, कि रोजीग्लिटाजोन दवा से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इन शोधों की एक बड़ी कमी यह रही है कि इनमें शोधकर्ताओं के पास हरेक मरीज से जुड़े पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं थे। अगर आंकड़े उपलब्ध होते तो एक सटीक परिणाम निकाल कर यह पता लगाया जा सकता था कि यह दवा शरीर के लिए कितनी सुरक्षित है।

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दरअसल, रोजीग्लिटाजोन बनाने वाली फार्मास्युटिकल कंपनी 'ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन' (जीएसके) ने ही इस दवा से टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के हृदय पर होने वाले प्रभाव को जानने की इच्छा जाहिर की थी। इसी के चलते पत्रिका में प्रकाशित शोध की शुरुआत हुई। कंपनी ने दवा के विश्लेषण के लिए शोधकर्ताओं की टीम को आईपीडी (इंडिविजुअल पेशेंट लेवल डेटा) उपलब्ध कराया। 

इनसे मिली जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने 130 से ज्यादा क्लीनिकल परीक्षणों कर उनके नतीजों का विश्लेषण किया। इनमें 33 परीक्षण ऐसे थे, जिनमें आईपीडी के आंकड़ों के आधार पर 21,156 मरीजों को शामिल किया गया था। बाकी 97 ट्रायल में केवल सामान्य तरीके से किए गए, क्योंकि उनके लिए डेटा उपलब्ध नहीं था। वहीं, सभी परीक्षणों के लिए 48,000 से ज्यादा वयस्क रोगियों को शामिल किया गया था। अध्ययनकर्ताओं ने कम से कम 24 हफ्तों तक रोजीग्लिटाजोन और रोगियों पर उसके प्रभाव की तुलना की।

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कंपनी द्वारा दिए गए आईपीडी ट्रायल का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजीग्लिटाजोन दवा के सेवन से शुगर कंट्रोल होने की तुलना में हृदय रोग का जोखिम 33 प्रतिशत तक बढ़ गया था। इससे हार्ट अटैक और हार्ट फेल के साथ मृत्यु का जोखिम ज्यादा बढ़ गया।

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अध्ययन को लेकर शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके निष्कर्ष अलग-अलग डेटा स्रोतों के आधार पर निकाले गए हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि दवा से होने वाले अच्छे प्रभाव के सटीक आंकलन निकालने के लिए अभी और ट्रायल किए जाने की जरूरत है।

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