जोड़ों में दर्द बढ़ती उम्र के लक्षणों में से एक है. वहीं इसके पीछे कुछ अन्य कारण जैसे फ्रैक्चर, वायरल संक्रमण, ओस्टियोआर्थराइटिस, सेप्टिक अर्थराइटिस, गाउट, घुटनों में टिशू की क्षति, हड्डियों का संक्रमण, जोड़ों में संक्रमण आदि हो सकते हैं.

हालांकि इसके लक्षण गंभीर और आम दोनों हो सकते हैं. इन लक्षणों में सूजन, जोड़ों के आसपास गर्माहट महसूस करना, जोड़ों की बाहरी त्वचा का लाल होना, चलने में दिक्कत, जोड़ों को हिलाने में दर्द आदि शामिल हैं. इस दर्द के कारण लोगों के रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं.

ऐसे में सवाल ये है कि जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए कौन-से प्राकृतिक तरीके अपनाएं जाएं? जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए दवाइयों से ज्यादा योग काम आ सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से योग जोड़ों के दर्द को दूर करने में उपयोगी हैं और उसे किस प्रकार किया जा सकता है.

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इस लेख में हम आपको बताएंगे जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए योग.

  1. जोड़ों के दर्द में कौन सा योग करना चाहिए? - Which yoga poses help in joint pain in Hindi?
  2. सारांश - Takeaway
जोड़ों के दर्द के लिए योगासन के डॉक्टर

वीरभद्रासन 1 और 2

वीरभद्रासन (Warrior pose) दो तरीकों से किया जाता है - वीरभद्रासन 1 और वीरभद्रासन 2. दोनों तरीकों को करने से न केवल जोड़ों का दर्द दूर हो सकता है बल्कि टखनों, जांघों और पिंडलियों को मजबूती भी मिल सकती है. वीरभद्रासन साइटिका से भी राहत दिला सकता है. ऐसे करें ये आसन -

  • इसे करने के लिए जमीन पर योगा मैट बिछाएं और उस पर ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं.
  • अब गहरी लंबी सांस लें और अपने दोनों पैरों और हाथों को खोलें.
  • बाएं पैर को अंदर की तरफ मोड़ें और दाएं पैर को 90 डिग्री बाहर की तरफ मोड़ें. (ध्यान रहे इस दौरान बाई और दाई एड़ी सीधी होनी चाहिए)
  • अपनी पीठ को सीधा रखें और अपना सिर दाईं और 90 डिग्री तक घुमाएं. (आपकी नजरें दाएं हाथ की उंगलियों पर होनी चाहिए)
  • गहरी लंबी सांस लें और 30 से 40 सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें.
  • पुरानी स्थिति में आने के लिए सबसे पहले अपने सिर को सामने की तरफ लाएं और अपने दोनों हाथों को नीचे करें.
  • अपने दोनों पैरों को सीध में लाएं और फिर से ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं.

नोट - वीरभद्रासन 1 और 2 दोनों ही एक तरीके से किए जाते हैं. फर्क बस इतना होता है कि वीरभद्रासन 1 में व्यक्ति का सिर और दोनों हाथ ऊपर की तरफ होते हैं जबकि वीरभद्रासन 2 में व्यक्ति का सिर और दोनों हाथ कंधे की सीध में खुले होते हैं.

(और पढ़ें - जोड़ों में दर्द की होम्योपैथी दवा)

उत्तानासन

उत्तानासन (Standing forward bend) को अगर नियमित रूप से किया जाए तो ना केवल जोड़ो के दर्द से राहत मिलेगी बल्कि कूल्हे की हड्डी, पिंडलियां और घुटनों की मांसपेशियों में मजबूती भी आएगी. ऐसे करें ये आसन -

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर योगा मैट बिछाएं और सीधे खड़े हो जाएं.
  • उसके बाद कूल्हों के जोड़ों को झुकाने की कोशिश करें. इस दौरान ध्यान रहे कि आपकी कमर के जोड़ नहीं झुकने चाहिए.
  • झुकते वक्त अपनी सांस छोड़ें और अपनी उंगलियों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें. शुरुआत में अगर आप पूरे हाथ को जमीन पर नहीं टिका पा रहे हैं तो आप केवल उंगलियों को टीका सकते हैं.
  • गहरी लंबी सांस लेते रहे और अपने सिर को घुटनो के नीचे टच करने की कोशिश करें.
  • इस स्थिति में तकरीबन 30 से 40 सेकेंड तक रहें. (आप अपनी क्षमता के अनुसार भी समय निश्चित कर सकते हैं)
  • इस दौरान आपकी पीठ और टांगें दोनों एकदम सीधी होनी चाहिए.
  • पुरानी स्थिति में आने के लिए सबसे पहले सांस अंदर ले और उसके बाद अपने पीठ को सीधा करें. फिर से सीधे खड़े हो जाएं.

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त्रिकोणासन

त्रिकोणासन (Triangle pose) यानि तीन कोणों वाला आसन. इस आसन को करने से न केवल पैरों की अकड़न दूर हो सकती है बल्कि यह घुटने के दर्द से राहत और जोड़ों में मजबूती भी बनाएं रख सकता है. ऐसे करें ये आसन-

  • सबसे पहले आप जमीन में योग मैप बिछाएं और ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाएं.
  • फिर अपने दोनों पैरों के बीच में कुछ दूरी बनाएं और इस दौरान लंबी गहरी सांस लेते रहें
  • अपने शरीर को दाएं तरफ झुकाएं और दाएं हाथ को पंजे के पास जमीन पर टिकाएं. ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने नहीं मुड़ने चाहिए.
  • आप अपने बाएं हाथ को ऊपर की तरफ कान की सीध में रखें और अपनी नजरों को बाएं हाथ की उंगलियों पर रखें.
  • कुछ सेकेंड तक इस मुद्रा में खड़े रहे (अपनी क्षमता के अनुसार समय निर्धारित करें) और उसके बाद यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं.

(और पढ़ें - घुटनों में दर्द का आयुर्वेदिक इलाज)

मलासन

मलासन (Garland pose) यानि मल त्यागने की स्थिति में बैठना. यह आसन न केवल जोड़ों के दर्द को दूर करने में उपयोगी है बल्कि इससे ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्या में भी लाभ मिल सकता है. ऐसे करें ये आसन-

  • इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाएं और उस पर सीधे खड़े हो जाएं.
  • अपने दोनों पैरों को खोलें और प्रार्थना की मुद्रा बनाएं.
  • इस दौरान आपके हाथ सीने के पास होने चाहिए.
  • अब धीरे-धीरे नीचे बैठें और मल त्यागने जैसी मुद्रा बनाएं.
  • इस स्थिति में लंबी गहरी सांस छोड़ते रहे.
  • आपकी दोनों जांघें 90 डिग्री के एंगल पर होनी चाहिए लेकिन शुरुआत में आप जितना बैठ पा रहे हैं केवल अपना ही बैठें.
  • अब कुछ सेकेंड बाद फिर से पुरानी स्थिति में आ जाएं.

(और पढ़ें - घुटनों के दर्द के लिए व्यायाम)

गरुड़ासन

गरुड़ासन (Eagle pose) से भी घुटने के दर्द को दूर किया जा सकता है. बता दें कि गरुड़ एक पक्षी का नाम है जो भगवान विष्णु का वाहन है. इस आसन को करने से न केवल पैरों और जांघों की मांसपेशियों में मजबूती आती है बल्कि घुटनों का दर्द, जोड़ों का दर्द, गठिया आदि से भी राहत मिल सकती है. यह आसन मोटापे को कम करने में भी उपयोगी है. ऐसे करें ये आसन-

  • सबसे पहले जमीन पर योगा मैट बिछाएं और उस पर सीधे खड़े हो जाएं.
  • अब आप दाएं घुटने को थोड़ा सा मोड़ें और बाएं पैर पर खड़े होने का प्रयास करें.
  • अपने मुड़े हुए पैर को बाएं पैर के चारों तरफ लपेटें. 
  • अपनी दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रॉस की मुद्रा बनाएं.
  • इस मुद्रा में दाएं बाजू को बाएं बाजू पर रखें फिर हाथों को प्रणाम करने की स्थिति में लाने की कोशिश करें. 
  • अब कुछ सेकेंड बाद फिर से पुरानी स्थिति में आ जाएं.

(और पढ़ें - आर्थराइटिस के लिए योग)

जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए कुछ योग बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं जैसे वीरभद्रासन 1 और 2, उत्तानसन, त्रिकोणासन, मलासन और गरुड़ासन.

लेकिन अगर जोड़ों में दर्द ज्यादा है तो इन योग का प्रयोग करने से पहले एक्सपर्ट की राय लेनी जरूरी है. साथ ही शुरुआत में योग करने में दिक्कत महसूस हो तो सही गाइडेंस के लिए आप एक्सपर्ट की राय ले सकते हैं.

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