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ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है?

ऑस्टियोआर्थराइटिस को हिन्दी में अस्थिसंधिशोथ कहा जाता है, यह गठिया का सबसे आम रूप होता है। यह जोड़ों में दर्द और सूजन के साथ-साथ उनकी हिलने-ढुलने की गति में भी कमी कर देता है। यह शरीर के छोटे छोटे जोड़ों में भी हो सकता है, लेकिन आम तौर पर यह घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के जोड़ों को प्रभावित करता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों के कार्टिलेज (Cartilage) को क्षतिग्रस्त कर देता है। कार्टिलेज मजबूत तथा लचीले ऊतक होते हैं, जो जोड़ों में पाए जाते हैं, और दो हड्डियों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। एक स्वस्थ कार्टिलेज हड्डियों की गति के झटकों को अवशोषित कर लेता है। जोड़ों में हड्डी या कार्टिलेज जब टूटना शुरू हो जाते हैं, यह स्थिति समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है और समय के साथ-साथ बदतर हो जाती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस दर्द, अकड़न, सूजन जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है, और इसके परिणाम स्वरूप विकलांगता भी हो सकती है।

जब आपका कार्टिलेज खराब हो जाता है, तो दोनो हड्डियों के सिरे एक दूसरे से घिसने लग जाते हैं। समय के साथ-साथ ये रगड़ स्थायी रूप से जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। 60 साल के बाद ज्यादातर लोगों में कुछ हद तक ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या होने लग जाती है।

(और पढ़ें - विकलांगता का इलाज)

  1. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के लक्षण - Osteoarthritis Symptoms in Hindi
  2. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के कारण और जोखिम कारक - Osteoarthritis Causes & Risk Factors in Hindi
  3. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) से बचाव - Prevention of Osteoarthritis in Hindi
  4. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) का निदान - Diagnosis of Osteoarthritis in Hindi
  5. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) का उपचार - Osteoarthritis Treatment in Hindi
  6. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) की दवा - Medicines for Osteoarthritis in Hindi
  7. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Osteoarthritis in Hindi
  8. ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के डॉक्टर

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के लक्षण - Osteoarthritis Symptoms in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस के क्या लक्षण हो सकते हैं?

  • प्रभावित जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस के मुख्य लक्षण होते हैं। जोड़ों में दर्द जोड़ों को हिलाने पर या दिन के अंत में अधिक बढ़ जाता है, दर्द सोने में भी परेशानी उत्पन्न कर सकता है। (और पढ़ें - जोड़ों में दर्द के घरेलू उपाय)
  • कुछ देर आराम करके उठने के बाद जोडों में अकड़न बढ़ सकती है, पर जैसे ही आप जोड़ों को धीरे-धीरे हिलाना शुरू करेंगे तो 1 या 2 मिनट में अकड़न चली जाती है। अगर आपको गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस है, तो आपको और अधिक बार-बार दर्द महसूस होता रहेगा। सामान्य जोड़ों की तरह प्रभावित जोड़ों को स्वतंत्र रूप से हिलाया-ढुलाया जा सकता, हिलाने ढुलाने पर इनमें आवाज (माउस क्लिक या क्रंची आवाज) होने लगती है।
  • कई बार काम करने का तरीका भी बदल सकता है, क्योंकि मांसपेशियां अधिक कमजोर हो जाती है और जोड़ों की संरचनाओं की स्थिरता में कमी आ जाती है। प्रभावित जोड़ों पर हुई सूजन को खुद नोटिस किया जा सकता है, सूजन कठोर या नरम भी हो सकती है (जोड़ों में अतिरिक्त द्रव पदार्थ होने के कारण)। जोड़ों के आस पास की मांसपेशियां पतली व कमजोर दिखाई दे सकती हैं। (और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी का इलाज)
  • कुछ लोगों में मौसम के अनुसार भी कुछ बदलाव होते हैं, जो स्थिति को बदतर बना देते हैं, खासकर बारिश के दिनों में।
  • अधिक गंभीर मामलों में दर्द में कोई बदलाव नहीं आता, यह नींद में बाधा डालता है और अन्य रोजाना की गतिविधियां करने में भी परेशानी उत्पन्न कर देता है। उदाहरण के लिए अगर ऑस्टियोआर्थराइटिस नें कूल्हों और घुटनों के जोड़ों को प्रभावित किया है, तो सीढ़ीयां चढ़ने या कुर्सी पर बैठने के बाद खड़ा होने जैसी गतिविधियों में कठिनाई व दर्द अनुभव होता है।

(और पढ़ें - कूल्हे के दर्द  के लिए एक्सरसाइज)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

  • अगर दर्द और अकड़न अचानक से तुरंत महसूस होने लगे, चाहे वह किसी चोट के चलते हो या अंजान कारण के चलते।
  • अगर दर्द के साथ-साथ बुखार भी है। (और पढ़ें - बुखार दूर करने के घरेलू उपाय)
  • अगर दर्द तेजी से विकसित हो रहा है और उसके साथ जोड़ों में लालिमा आ गई है और हाथ लगाने पर दर्द होता है।
  • कुछ देर लगातार बैठने के बाद या रात को सोने के बाद उठने पर अगर आपको टांगों, बाजूओं और पीठ में दर्द व अकड़न महसूस हो। (और पढ़ें - पीठ दर्द दूर करने के घरेलू उपाय)
  • अगर दर्द या अकड़न अत्यधिक गंभीर हो गए है, और रोजाना की गतिविधियों में बाधा डालने लगे है। तो इन स्थितियों में आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

(और पढ़ें - टांगों में दर्द के घरेलू उपाय)

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के कारण और जोखिम कारक - Osteoarthritis Causes & Risk Factors in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण क्या हो सकते हैं?

सामान्य जीवन में आपके जोड़ निरंतर होने वाले नुकसान में कम स्तर के संपर्क में आते हैं। ज्यादातर मामलों में आपका शरीर नुकसान को खुद ही ठीक कर लेता है और आपको किसी प्रकार के लक्षण अनुभव नहीं होते।

लेकिन ऑस्टियोआर्थराइटिस में हड्डियों के सिरे पर बने सुरक्षात्मक कार्टिलेज टूट जाते हैं, जिस कारण से सूजन, दर्द अनुभव होता है, और जोड़ों को हिलाने-डुलाने में भी तकलीफ होती है। इससे हड्डियां बढ़ने लग जाती हैं (Bony growths), और प्रभावित जगह लाल होने लगती है और उसमें सूजन आने लग जाती है।

(और पढ़ें - सूजन को दूर करने के उपाय)

इसके वास्तविक कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन कुछ चीजें हैं, जो ऑस्टियोआर्थराइटिस विकसित होने के जोखिम को बढ़ाती हैं, जैसे:

  • उम्र:
    उम्र बढ़ने के साथ-साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस विकसित होने का जोखिम भी बढ़ता रहता है। (और पढ़ें - बढ़ती उम्र में होने वाली समस्या)
     
  • जोड़ों में चोट लगना:
    जोड़ों को सीमित सीमा से अधिक प्रयोग करना, जब चोट या ऑपरेशन के बाद उसे ठीक करने का पर्याप्त समय ना हो। (और पढ़ें - गुम चोट का इलाज)
     
  • पारिवारिक समस्या:
    परिवार में किसी को ऑस्टियोआर्थराइटिस होने पर दूसरे व्यक्ति में भी इसके जोखिम बढ़ जाते हैं। (और पढ़ें - परिवार चिकित्सा क्या है)
     
  • मोटापा:
    अधिक मोटापा होने के कारण घुटनों, टखनो व कूल्हे आदि के जोड़ों पर अत्यधिक वजन पड़ना। (और पढ़ें - मोटापा कम करने के नुस्खे)
     
  • अन्य परिस्थितियां:
    गाउट जैसी किसी स्थिति के कारण जोड़ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे जोड़ों में दर्द हो सकता है। (और  - यूरिक एसिड डाइट)
     
  • कोई भी गतिविधि जो आपके जोड़ों पर तनाव डालती है

(और पढ़ें - तनाव के लिए योग)

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) से बचाव - Prevention of Osteoarthritis in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस की रोकथाम कैसे की जा सकती है?

ऑस्टियोआर्थराइटिस की पूरी तरह से रोकथाम करना संभव नहीं है। हालांकि चोट आदि लगने से बचकर और संभावित रूप से स्वस्थ रहकर ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • व्यायाम:
    जिन व्यायाम से जोड़ों में तनाव बढ़े या  जिन व्यायामों में अत्यधिक वजन उठाना पड़े, उन व्यायामों को ना करें, जैसे दौड़ना या वेट लिफ्टिंग आदि। इनकी बजाए, तैरने या साइकिल चलाने जैसे व्यायाम करें। इसके अलावा आप वे व्यायाम भी कर सकते हैं जहां आपके जोड़ बेहतर स्थिति में होते हैं और आपके जोड़ों पर तनाव अधिक नियंत्रित होता है। (और पढ़ें - साइकिल चलाने के फायदे)
     
  • मुद्रा (आसन, पोश्चर):
    एक अच्छा और सुरक्षित पोश्चर मेंटेन करके रखे साथ ही काफी लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें। अगर आप किसी कुर्सी पर बैठ के काम करते हैं, तो सुनिश्चित कर लें की आपकी कुर्सी ठीक उंचाई पर है, और साथ ही इधर-उधर घूम कर समय-समय पर ब्रेक लेते रहें। (और पढ़ें - ज्यादा देर तक बैठने के नुकसान)
     
  • वजन कम करना:
    मोटा होने या वजन बढ़ने से शरीर के जोड़ों में तनाव बढ़ जाता है, जिस कारण से ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम भी बढ़ जाते हैं। अगर आपका वजन ज्यादा है, तो वजन कम करके इस स्थिति के विकसित होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। 

(और पढ़ें - पेट कम करने के उपाय)

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) का निदान - Diagnosis of Osteoarthritis in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस का निदान कैसे किया जाता है?

  • खून टेस्ट से ऑस्टियोआर्थराइटिस का निदान नहीं किया जाता, लेकिन इसकी मदद से उन समस्याओं की पहचान कर ली जाती है, जो ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी ही लगती हैं। (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस का निदान करने के लिए प्रभावित जोड़ों का एक्स-रे किया जाता है। (और पढ़ें - एमआरआई स्कैन क्या है)
  • ऑर्थरोसेंटिसिस (Arthrocentesis) प्रक्रिया का प्रयोग जोड़ों में से द्रव को निकालने के लिए किया जाता है, उस द्रव का विशलेषण किया जाता है। गाउट, संक्रमण और गठिया के अन्य कारणों का पता लगाने के लिए द्रव का विश्लेषण करना जरूरी होता है। (और पढ़ें - गठिया का अचूक इलाज)
  • ऑर्थरोस्कोपी (Arthroscopy) यह एक सर्जिकल तकनीक है, जो कार्टिलेज व लिगामेंट्स में किसी प्रकार की असामान्यता का पता लगाने में मदद करती है। (और पढ़ें - गठिया को दूर करने के उपाय)
  • जोड़ों के लक्षण व स्थान, अवधि और प्रकार का सावधानीपूर्वक विश्लेषण ऑस्टियोआर्थराइटिस का निदान करने में डॉक्टर की मदद करता है।

(और पढ़ें - अल्ट्रासाउंड क्या है)

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) का उपचार - Osteoarthritis Treatment in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस का उपचार कैसे किया जा सकता है?

ऑस्टियोआर्थराइटिस का कोई इलाज नहीं है, पर इसकी स्थिति में समय-समय पर सुधार किया जा सकता है, और इसके लक्षणों को कम करने के लिए भी कई प्रकार के इलाज उपलब्ध हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस के मुख्य उपचारों में निम्न उपलब्ध हैं:

  • जीवन शैली में बदलाव, जैसे स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित रूप से व्यायाम करना। (और पढ़ें - वेट लॉस डाइट चार्ट)
  • दवाएं, लक्षणों और दर्द को कम करने के लिए।
  • सहायक थेरेपी, दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने में मदद करने के लिए।

(और पढ़ें - थेरेपी के फायदे)

कुछ ही मामलों में जहां पर दवाएं मदद नहीं कर पाती तो वहां पर क्षतिग्रस्त जोड़ों की मरम्मत करने, उन्हें मजबूत करने या बदलने के लिए सर्जरी का भी विचार किया जा सकता है।

जीवनशैली में बदलाव:

  • व्यायाम करना ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए सबसे बेहतर उपचारों में से एक है, चाहे उसकी उम्र व वजन कितना भी हो। (और पढ़ें - व्यायाम छोड़ने के नुकसान)
  • नियमित व्यायाम जो आपको सक्रिय रखता है, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाता है, और आमतौर पर लक्षणों को सुधारने में मदद करता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों को मजबूत करने के उपाय)
  • व्यायाम करना वजन घटाने, मुद्रा में सुधार करने और तनाव से राहत देने में काफी मदद करता है, और ये सभी लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। (और पढ़ें - वजन घटाने के लिए व्यायाम)
  • इसमें कुछ प्रकार के जोखिम भी हैं, जैसे अत्यधिक और जल्दी-जल्दी व्यायाम करना या गलत तरह का व्यायाम करना जोड़ों को क्षति पहुंचा सकता है। किस प्रकार के व्यायाम आपके लिए फायदेमंद होते हैं, ये बाते जानने के लिए आप फिजियोथेरेपिस्ट  की सलाह लें। (और पढ़ें - एक्सरसाइज करने का सही टाइम)

वजन घटाना:

दवाएं:

कई बार थेरेपी के संयोजन - आपके दर्द को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए दवाएं, व्यायाम और सहायक उपकरणों या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। (और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

दर्दनिवारक दवाएं:

डॉक्टर मरीज के लिए कुछ दर्दनिवारक दवाएं लिख सकते हैं, दवाओं के प्रकार मरीज के लक्षणों की गंभीरता और अन्य समस्याएं जो आपको महसूस हो रही हैं उसके आधार पर निर्धारित किए जाएंगे।  (और पढ़ें - दर्द निवारक के साइड इफेक्ट

पैरासिटामोल:

अगर ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण आपको दर्द अनुभव हो रहा है, तो डॉक्टर पैरासिटामोल लेने का सुझाव देते हैं।

नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लामेट्री दवाएं (NSAIDs):

अगर पैरासिटामोल दवाएं ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को नियंत्रित ना कर पाए तो डॉक्टर थोड़ी शक्तिशाली दवाएं लिख सकते हैं। ये नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लामेट्री दवाएं हो सकती हैं।

ओपिऑइड्स (Opioids):

यदि पैरासिटामोल काम ना कर पाए तो ओपिऑइड्स भी एक दर्दनिवारक वैकल्पिक दवा है, जो दर्द को कम कर देती है।

कैप्साएसिन क्रीम (Capsaicin cream):

यदि ओस्टियोर्थराइटिस आपके बाजूओं या घुटनों में है, जिसपर NSAIDs दवाएं काम नहीं कर पाई हैं, तो डॉक्टर कैप्साएसिन क्रीम लिख सकते हैं।

कोर्टिकोस्टेरॉयड इन्जेक्शन:

अगर ऑस्टियोआर्थराइटिस गंभीर है, तो दर्द और सूजन आदि को कम करने के लिए शायद ऐसे उपचार की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें प्रभावित जगह पर दवा का इंजेक्शन लगाया जाता है।

वैकल्पिक तकनीकें:

  • योग:
    योग में गहरी सांसें लेने के साथ-साथ सौम्य व्यायाम और स्ट्रेच आदि शामिल होते हैं।  हालांकि उस प्रकार की गति ना करें जो जोड़ों में दर्द का कारण बनती हैं। (और पढ़ें - योग के लाभ)
     
  • ठंड व गर्मी से सेकना:
    गर्मी व ठंडी सेकने की चीजों से अपने जोड़ों को सेकना ऑस्टियोआर्थराइटिस के कुछ मरीजों के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
     
  • मैनुअल थेरेपी:
    यह उपचार फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा प्रदान किया जाता है, इसमें स्ट्रेच आदि करने की तकनीकें शामिल होती हैं, जिससे जोड़ों को लचीला बनाकर रखा जाता है। (और पढ़ें - भौतिक चिकित्सा उपचार क्या है)
     
  • सहायक उपकरण:
    अगर ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण चलने-फिरने में या अन्य रोजाना के काम पूरा करने में दिक्कत आने लगी है, तो कुछ प्रकार के उपकरण उपलब्ध हैं जो ऐसी स्थितियों में मदद करने के लिए डिजाइन किए गए होते हैं।

न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स:

ओस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए अतीत में कई पोषक तत्वों का उपयोग किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • कोन्ड्रोइटिन
  • ग्लूकोसामाइन

(और पढ़ें - दवा की जानकारी)

सर्जरी:

सर्जरी का इस्तेमाल बहुत ही कम मामलों में किया जाता है, जहां पर अन्य उपचार काम ना कर पाएं या फिर अगर जोड़ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो तो ऐसे मामलों में सर्जरी के विकल्प को चुना जाता है।

ओस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए सर्जरी होने से उसके लक्षण, चलने-फिरने और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। 

(और पढ़ें - सर्जरी कैसे होती है)

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ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) की दवा - Medicines for Osteoarthritis in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Zerodol खरीदें
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Dolowin खरीदें
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Zerodol SP खरीदें
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Hifenac P Tablet खरीदें
Ibicox खरीदें
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Algeclo SP खरीदें

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) की ओटीसी दवा - OTC medicines for Osteoarthritis in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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Zandu Rhumayog खरीदें
Himalaya Rumalaya Tablets खरीदें
Zandu Rhumasyl खरीदें

References

  1. National Health Service [Internet]. UK; Osteoarthritis.
  2. American College of Rheumatology. Osteoarthritis. Georgia, United States [Internet]
  3. National Institute on Aging [internet]: US Department of Health and Human Services; Osteoarthritis
  4. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Osteoarthritis (OA)
  5. National Health Portal [Internet] India; Osteoarthritis
  6. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Osteoarthritis
  7. healthdirect Australia. Osteoarthritis treatment. Australian government: Department of Health
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