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गाउट क्या है?

अचानक जोड़ों में तेज दर्द होना, जोड़ों में लालिमा और कोमलता तथा पैर के अंगूठों के जोड़ों पर दर्द आदि गाउट की पहचान होती है।

गाउट, गठिया का एक जटिल रूप होता है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकता है। पुरुषों को इस तरह के गठिया होने की अधिक संभावना होती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद महिलाएं भी गाउट की चपेट में आसानी से आ सकती हैं।

गाउट अचानक हो सकता है, इसमें प्रायः मध्य रात्रि के दौरान जागने पर आप पाते हैं कि आपके पैर के अंगूठे में गर्मी महसूस हो रही है। इसके अलावा इसके प्रभाव से आपके जोड़ों का गर्म होना, सूजन आना शामिल है। यहां तक कि आपके लिए बेड शीट का भार भी सहनीय हो जाता हैं। 

(और पढ़ें - पैरों में सूजन का इलाज

हालांकि, गाउट का उपचार किया जा सकता है। जिससे आप दोबारा गाउट होने के खतरे को कम कर सकते हैं।

  1. गाउट के लक्षण - Gout Symptoms in Hindi
  2. गाउट के कारण और जोखिम कारक - Gout Causes & Risk Factors in Hindi
  3. गाउट के बचाव के उपाय - Prevention of Gout in Hindi
  4. गाउट का निदान - Diagnosis of Gout in Hindi
  5. गाउट का उपचार - Gout Treatment in Hindi
  6. गाउट में परहेज़ - What to avoid during Gout in Hindi?
  7. गाउट में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Gout in Hindi?
  8. गाउट के घरेलू उपाय
  9. गाउट की दवा - Medicines for Gout in Hindi
  10. गाउट की दवा - OTC Medicines for Gout in Hindi
  11. गाउट के डॉक्टर

गाउट के लक्षण - Gout Symptoms in Hindi

गाउट के लक्षण क्या हैं?

गाउट आपकी हड्डी के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह आमतौर पर पैरों की उंगलियों, टखनों, घुटनों और हाथ की उंगलियों को प्रभावित करता है।

गाउट के लक्षण और संकेतों में शामिल हैं:

  • किसी एक या अधिक जोड़ों में गंभीर दर्द होना।
  • जोड़ों में जलन होना और नरम हो जाना। 
  • प्रभावित जोड़ों में और उनके आसपास सूजन होना। (और पढ़ें - पैरों में सूजन के घरेलू उपाय)
  • इसके लक्षण तेजी से विकसित होते हैं और जब तक आप इसको समझ पाते हैं तब तक मतलब कि 12 से 24 घंटों में यह समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है।
  • प्रभावित जोड़ में किसी भी हल्की चीज का स्पर्श भी बेहद दर्द भरा व असहनीय होता है। जैसे- चादर का भार या जुराब पहनना। 
  • इलाज न होने पर इसके लक्षण समय के साथ बढ़ जाते हैं।
  • यदि यूरिक एसिड के क्रिस्टल मूत्र पथ में जमा होते हैं, तो वे गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) बना सकते हैं।  (और पढ़ें - किडनी स्टोन से बचने के उपाय)
  • प्रभावित जोड़ की त्वचा लाल, चमकदार होना व इसकी खाल का उतरना।
  • इसके लक्षण कुछ घंटों में तेजी से विकसित होते हैं और आम तौर पर तीन से दस दिनों तक रहते हैं। यह सीधे तौर पर पैर की बड़ी अंगुली को प्रभावित करता हैं और आमतौर पर रात में शुरू होता हैं। इसके बाद इसमें तेज दर्द होता है और धीरे-धीरे यह सामान्य स्थिति में आता है।
  • गाउट से परेशान अधिकतर लोगों को एक साल के अंदर अंदर ही इसके और अटैक आते हैं।

(और पढ़ें - यूरिक एसिड टेस्ट क्या है)

गाउट के सामान्य लक्षण पैर की अंगुली में दिखाई देते हैं, लेकिन अन्य जोड़ भी इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:-

  • पैरों के जोड़,
  • टखने,
  • घुटने,
  • कोहनियां,
  • कलाई,
  • अंगुलियां।

बेहद ही दुर्लभ मामलों में गाउट शरीर के केंद्र जैसे रीढ़ की हड्डी, कंधों या कूल्हों को प्रभावित करता है। यह समस्या अमूमन शरीर के कई जोड़ों को एक साथ प्रभावित नहीं करती है, लेकिन दुर्लभ मामलों में ऐसा देखा भी जाता है। (और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी टूटने का इलाज)

यूरेट क्रिस्टल जोड़ों के बाहर भी इकट्ठा हो सकते हैं और यहां तक कि इनको त्वचा के नीचे सफेद आकार में देखा भी जा सकता है। आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता लेकिन जब यह फुटते हैं तो इनमें से सफेद तरल पदार्थ सा निकलता है। 

गाउट होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको संदेह है कि आपको गाउट है और आपने इसके लिए पहले कोई परीक्षण नहीं करवाया हो, तो ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर के पास जाकर इस बारे में बात करनी चाहिए।

यदि आप इससे जुड़े निम्न लक्षणों को अनुभव करे रहें हैं, तो तत्काल एक डॉक्टर को दिखाएं-

इसका मतलब यह है कि आपके जोड़ों में संक्रमण हो चुका है।

यदि आपका पहले ही गाउट का इलाज चल रहा हो और अचानक आपको फिर से इसका अटैक आए तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिल कर इस बारे में बात करनी चाहिए और जानना चाहिए कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं ने अपना काम करना शुरू भी किया है या नहीं।

(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)

गाउट के कारण और जोखिम कारक - Gout Causes & Risk Factors in Hindi

गाउट के कारण क्या हैं?

खून में यूरिक एसिड की अधिक मात्रा व ऊतकों (tissues) में यूरिक एसिड क्रिस्टल का बनना गाउट होने का मुख्य कारण होता है। जोड़ो में यूरिक एसिड क्रिस्टल इकट्ठा होने से दर्द, लालिमा (redness) आना, जलन व सूजन की समस्या होने लगती है। यूरिक एसिड सामान्य रूप से हमारे शरीर में पाया जाता है। इसका निर्माण शरीर में मौजूद प्रोटीन के टूटने से होता है। शरीर के रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के कारणों में शामिल हैं:

  • मोटापा, (और पढ़ें - मोटापा कम करने के उपाय)
  • डियूरिटिक्स (diuretics) जैसी कुछ दवाओं का इस्तेमाल।
  • लंबे समय से गुर्दे की कार्य क्षमता में कमी आना।
  • चतुर्थ कॉन्ट्रास्ट डाई का उपयोग करना (सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन के लिए उपयोग की जाने वाली डाई)
  • आनुवंशिक कारण- यदि आपके माता-पिता को गाउट है, तो आप में इस समस्या के होने की संभावनाएं किसी अन्य के मुकाबले काफी अधिक होती है।

गाउट का खतरा कब बढ़ जाता है?

  • सर्जरी
  • आघात (कोई गंभीर चोट) (और पढ़ें - मस्तिष्क की चोट के लक्षण)
  • निर्जलीकरण (dehydration) (और पढ़ें - पानी की कमी को दूर करने के उपाय)
  • भूखे रहना (और पढ़ें - उपवास क्यों रखते हैं)
  • आयु और लिंग के आधार - पुरुषों में गाउट होने के मामले अधिक पाए जाते हैं, क्योंकि महिलाओं में मुख्यतः यूरिक एसिड का स्तर कम रहता है। हालांकि रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं का यूरिक एसिड स्तर पुरूषों की ही तरह हो जाता है। आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच पुरुषों में गाउट होने की संभावना अधिक होती है, जबकि महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद इस तरह के लक्षण और संकेत विकसित करती हैं। (और पढ़ें - यूरिक एसिड में परहेज)
  • शराब पीना - शराब का सेवन करना व विशेष रूप से बीयर गाउट के जोखिम को बढ़ाती है। (और पढ़ें- शराब की लत छुड़ाने के घरेलू उपाय)
  • कुछ दवाएं जो उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) का इलाज करती हैं, खून में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ाती हैं। यह दवाएं गाउट के लिए जोखिम कारक होती हैं। (और पढ़ें - bp kam karne ke upay)
  • कम खुराक की एस्पिरिन का सेवन करने से भी गाउट हो सकता है।
  • कीमोथेरेपी - कैंसर को खत्म करने के लिए की गई कीमोथेरेपी भी गाउट होने का कारण बन सकती है, क्योंकि इसके द्वारा नष्ट हुई कैंसर कोशिकाएं उच्च मात्रा में यूरिक एसिड बनाती है और यह गाउट का कारण बना जाती हैं।
  • भोजन में लाल मांस (red meat), समुद्री आहार (शेलफिश, और तेलयुक्त मछली) व ज्यादा मीठे फलों की चीनी (फ्रुक्टोज) से भी गाउट का जोखिम बढ़ जाता हैं।

(और पढ़ें - यूरिक एसिड के घरेलू उपाय)

गाउट के बचाव के उपाय - Prevention of Gout in Hindi

गाउट में बचाव कैसे करें?

जीवनशैली में थोड़े से बदलाव करने से ही आप गाउट के जोखिम कारकों से और इसके दोबारा अटैक के खतरों से बच सकते हैं। चलिए जानते हैं इसके बचाव के लिए क्या करें-

  • उच्च स्तर के प्यूरीन (यूरिक एसिड को बनाने वाले रसायन) युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। इसके लिए आपको लाल मांस (red meat), बासी खाना, तेल से बनी हुई मछली, समुद्री भोजन और खमीर उठने के बाद बनने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
  • शक्कर युक्त पेय पदार्थ और स्नैक्स न खाएं, क्योंकि यह भी गाउट को बढ़ाने का काम करते हैं। (और पढ़ें - सर्दियों के लिए स्नैक्स)
  • आपके शरीर के लिए जरूरी वजन को बनाएं रखें और संतुलित आहार का सेवन करें। (और पढ़ें - संतुलित आहार के फायदे)
  • नियमित व्यायाम करें और ऐसी गतिविधियों को करें, जो आपके जोड़ों पर ज्यादा तनाव न डालें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी का सही स्तर बनाएं रखने से आपके जोड़ों में क्रिस्टल बनने का जोखिम कम हो जाता है। (और पढ़ें - पानी पीने का सही तरीका)
  • शराब का सेवन कम करें। बीयर और अन्य शराब के सेवन से बचें।

(और पढ़ें - शराब की लत का इलाज)

गाउट का निदान - Diagnosis of Gout in Hindi

गाउट का निदान कैसे करें?

गाउट का दर्द आमतौर पर लगभग 3 से 10 दिनों में चला जाता है। लेकिन अगर आप इसका इलाज करते हैं तो आप जल्द ही बेहतर महसूस करने लगेंगे। जोड़ों के संक्रमण में गाउट की तरह ही समान लक्षण हो सकते हैं।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट लिस्ट)

नीचे बताए कुछ परीक्षण से आपके डॉक्टर को पता चल जाएगा कि आपके लक्षण गाउट से संबंध रखते हैं या यह किसी और समस्या की ओर संकेत करते हैं:

  • जोड़ों के द्रव का परीक्षण-  गाउट का निदान करने के लिए यह सबसे विश्वसनीय तरीका है। इसमें सुई की मदद से दर्द होने वाले जोड़ से द्रव का नमूना लिया जाता है। इसके बाद इस द्रव का अध्ययन माइक्रोस्कोप में करके यह देखा जाता है कि इसमें यूरेट क्रिस्टल मौजूद हैं या नहीं। (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या होता है)
  • रक्त परीक्षण - रक्त परीक्षण में यूरिक एसिड के स्तर की जांच हो सकती है। ध्यान दें कि हमेशा यूरिक एसिड के उच्च स्तर का मतलब गाउट ही नहीं होता। (और पढ़ें - पैप स्मीयर टेस्ट क्या होता है
  • एक्स-रे- जोड़ों की एक्स-रे छवि से गाउट की सही समस्या का पता चलता है। (और पढ़ें - लेप्रोस्कोपी क्या है)
  • अल्ट्रासाउंड - यह दर्द रहित परीक्षण होता है। इसमें यूरिक एसिड की मात्रा को देखने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।

(और पढ़ें - बोन डेंसिटी टेस्ट)

गाउट का उपचार - Gout Treatment in Hindi

गाउट के लिए क्या इलाज करें?

गाउट के उपचार में आमतौर पर दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कौन सी दवाएं आपके लिए सही होंगी इसका निर्धारण आपकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आपके डॉक्टर द्वारा किया जाता है।

गाउट की दवाओं के इस्तेमाल से इसके मौजूदा स्थिति के साथ ही इससे भविष्य में होने वाले खतरों को भी कम किया जा सकता है।

गाउट का इलाज करने के लिए इन दवाओं को इस्तेमाल किया जाता है:

ये दवाएं इस समस्या से होने वाली परेशानियों को कम करती है और इसके भविष्य में न होने के लक्षणों को भी दूर करती है।

एंटी इंफलामेट्री दवाएं

  • आईबुप्रोफेन (ibuprofen )
  • नेप्रोक्सीन सोडियम (naproxen sodium)
  • सेलीकोसिब (celecoxib)

शुरुआत में आपके डॉक्टर गाउट के प्रभाव को तुरंत कम करने के लिए इन दवाओं की अधिक मात्रा आपको दें सकते हैं। जिसके बाद इन दवाओं की खुराक को धीरे-धीरे कम किया जाता है।  

  • कॉलचिसाइन (Colchicine) - यह एक प्रकार की दर्द निवारक दवा है जो गाउट के दर्द को प्रभावी रूप से कम करती है। लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि मतली, उल्टी और दस्त
    गाउट के तीव्र दर्द का समाधान होने के बाद, आपके चिकित्सक भविष्य में इसके होने की संभावनाओं को रोकने के लिए कोलचिसाइन की हर रोज ली जाने वाली खुराक को कम कर देते हैं। (और पढ़ें - दस्त लगने के उपाय)
     
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids) - कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा, प्री़डनाईसोन (prednisone) की तरह ही दवा है, जो गाउट की सूजन और दर्द को नियंत्रित करती हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड की दवा को आप गोली के रूप या फिर इंजेक्शन के माध्यम से भी अपने जोड़ों में ले सकते हैं।
    कॉर्टिकोस्टेरॉइड आमतौर पर उन लोगों के लिए आरक्षित होती हैं जो एनएसएआईडी (NSAIDs) या कॉलचिसाइन नहीं ले सकते हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड के दुष्प्रभाव में मूड (सोच की वर्तमान स्थिति) में बदलाव आना, हाई बीपी होना और शुगर के स्तर में बढ़ोतरी होना शामिल होता हैं। (और पढ़ें - इंफ्लेमेटरी डिजीज का इलाज)

गाउट की जटिलताओं को रोकने के लिए दवाएं:

यदि आप हर वर्ष कई बार गाउट के दर्द का अनुभव करते हैं या आपको इस दौरान बहुत ही अधिक दर्द होता है तो आपके डॉक्टर गाउट संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए कुछ अन्य दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दे सकते हैं।  (और पढ़ें - हाथ में दर्द का इलाज)

इन विकल्पों में शामिल हैं:

  • यूरिक एसिड को कम करने वाली दवाएं- ऑलोप्यूरिनोल (Allopurinol) व फेब्यूक्सोस्टेट (febuxostat) से आपके शरीर के यूरिक एसिड की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है। यह आपके रक्त के यूरिक एसिड के स्तर को कम कर, गाउट के जोखिम को भी दूर कर देती है।
     
  • शरीर से यूरिक एसिड को हटाने वाली दवा- प्रोबीनीसिड (Probenecid) आपके शरीर से यूरिक एसिड को हटाने के लिए आपकी किडनी की कार्यक्षमता में सुधार करती है। यह आपके यूरिक एसिड स्तर को कम करती है और गाउट के जोखिम दूर करती है, लेकिन इससे आपके मूत्र में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है। इसके दुष्प्रभावों में दाने, पेट दर्द और किडनी में पथरी होना शामिल है। (और पढ़ें - पेट दर्द में क्या खाना चाहिए)
     
  • गाउट सर्जरी - गाउट होने पर सर्जरी की जरूरत तब तक नहीं होती जब कि आपके कई उपचारों को अपनाने के बाद भी जोड़ों को नुकसान होना बंद न हुआ हो। जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल का संग्रह होने पर सर्जरी की सहायता ली जाती है।

(और पढ़ें - घुटनों के जोड़ बदलने की सर्जरी)

गाउट में परहेज़ - What to avoid during Gout in Hindi?

गाउट में क्या चीजें नहीं खानी चाहिए?

जो भी आप खाना खाते हैं इसका सीधा संबंध आपके गाउट पर व आपके रक्त के यूरिक एसिड के स्तर के बढ़ने और कम होने पर पड़ता है। गाउट के लिए आहार से संबंधित प्राथमिक लक्ष्य ये होता है कि आप उन चीजों का सेवन सीमित कर दें, जिसमें प्यूरिन (यूरिक एसिड बढ़ाने वाला तत्व) मौजूद हो।

आपको निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए:

(और पढ़ें - पौष्टिक आहार के फायदे)

गाउट में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Gout in Hindi?

गाउट की समस्या में क्या खाएं ?

कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन यूरिक एसिड के स्तर को कम करता है, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • कॉफी- कुछ अध्ययनों में कॉफी पीने और यूरिक एसिड के कम स्तर के बीच संबंधों का पता चला है।
  • विटामिन सी - विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से खून में यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है।
  • चेरी (Cherries)- कई अध्ययन में चेरिज को यूरिक एसिड के स्तर को कम करने वाला पाया गया है। इससे गाउट होने के खतरे भी कम हो जाते हैं।

(और पढ़ें - कैल्शियम युक्त भारतीय आहार)

Dr. Vivek Dahiya

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ओर्थोपेडिक्स

Dr. Vipin Chand Tyagi

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Dr. Vineesh Mathur

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ओर्थोपेडिक्स

गाउट की दवा - Medicines for Gout in Hindi

गाउट के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Diclogesic RrDiclogesic Rr 75 Mg Injection25
DivonDIVON GEL 10GM0
VoveranVOVERAN 1% EMULGEL 30GM105
DolserDolser 400 Mg/50 Mg Tablet Mr0
Renac SpRenac Sp Tablet51
Unofen KUnofen K 50 Mg Tablet0
ExflamExflam 1.16%W/W Gel48
Rid SRid S 50 Mg/10 Mg Capsule32
Diclonova PDiclonova P 25 Mg/500 Mg Tablet13
ValfenValfen 100 Mg Injection10
FeganFegan Eye Drop16
RolosolRolosol 50 Mg/10 Mg Tablet67
DiclopalDiclopal 50 Mg/500 Mg Tablet16
VivianVivian 1.16% Gel0
I GesicI Gesic 0.1% Eye Drop26
Rolosol ERolosol E 50 Mg/10 Mg Capsule51
DicloparaDiclopara 50 Mg/500 Mg Tablet0
Vivian PlusVivian Plus 50 Mg/500 Mg Tablet13
Instanac TpmInstanac Tpm 1.16% W/W Gel76
Rolosol RbRolosol Rb 50 Mg/10 Mg Tablet55
Diclopil PlusDiclopil Plus 50 Mg/500 Mg Tablet3
Vivogesic(Bes)Vivogesic 25 Mg Injection3
LofenLofen 1% Gel0
Saral DSaral D 50 Mg/10 Mg Tablet49

गाउट की दवा - OTC medicines for Gout in Hindi

गाउट के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Baidyanath Kaishore GugguluBaidyanath Kaishore Guggulu171
Dabur Shilajit GoldDabur Shilajit Gold Capsule172
Baidyanath Artho TabletBaidyanath Artho Tablet99
Baidyanath Mahayograj GugguluBaidyanath Mahayograj Guggulu153
Patanjali Shilajit CapsulePatanjali Shilajeet Capsule68
Baidyanath Punarnavadi GugguluBaidyanath Punarnavadi Guggulu105
Divya PunarnavarishtaDivya Punarnavarishta48
Baidyanath Rasnadi GugguluBaidyanath Rasnadi Guggulu106
Divya Ksirabala TailaDivya Ksirabala Taila104
Baidyanath Vatrina TabletBaidyanath Vatreena Tablets101
Baidyanath Erand PakBaidyanath Erand Pak110
Divya Gokshuradi GuggulDivya Gokshuradi Guggul56
Baidyanath Muktadi BatiBaidyanath Muktadi Bati With Gold and Pearl221
Baidyanath Rheumartho Gold PlusBaidyanath Rheumartho Gold Plus Cap448
Dabur Simhanad GugguluDabur Simhanad Guggulu55
Baidyanath Singnad GugguluBaidyanath Sinhanad Guggulu156
Dabur Rheumatil GelDABUR RHEUMATIL GEL 30GM PACK OF 2113
Dabur Maha NarayanDabur Maha Narayan Tail73
Baidyanath Chopchinyadi ChurnaBaidyanath Chopchinyadi Churna76
Dabur Swarna Guggulu GoldDABUR SWARNA GUGGULU TABLET 25S440
Himalaya Hadjod TabletsHadjod Tablet120

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References

  1. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Gout
  2. tional Institutes of Health; [Internet]. U.S. National Library of Medicine. Gout
  3. Dinesh Khanna. et al. 2012 American College of Rheumatology Guidelines for Management of Gout Part I: Systematic Non-pharmacologic and Pharmacologic Therapeutic Approaches to Hyperuricemia. Arthritis Care Res (Hoboken). 2012 Oct; 64(10): 1431–1446. PMID: 23024028
  4. Newberry SJ. Diagnosis of Gout: A Systematic Review in Support of an American College of Physicians Clinical Practice Guideline.. Ann Intern Med. 2017 Jan 3;166(1):27-36. PMID: 27802505
  5. National Health Service [Internet] NHS inform; Scottish Government; Gout
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