शरीर में मौजूद एक हार्मोन को नियंत्रित या रेग्युलेट कर मोटापे को कंट्रोल और कम किया जा सकता है। इस हार्मोन का नाम है लीपोकैलिन-2 या एलसीएन2। मेडिकल पत्रिका ईलाइफ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलसीएन2 एक एंडोजीनस हार्मोन है जो चूहों और नर वानरों (प्राइमेट), जिनमें इन्सान भी शामिल हैं, में पाया जाता है। यह हड्डियों के निर्माण से संबंधित प्रमुख कोशिकाओं ओस्टियोब्लास्ट से निकलता है। पिछले अध्ययनों में भी बताया गया है कि एलसीएन2 न सिर्फ भूख को दबाने और तृप्ति के संकेतक भेजने का काम करता है, बल्कि वजन कम करने और शुगर मेटाबॉलिज्म को सुधारने में भी मददगार हो सकता है। हालांकि ये पुराने अध्ययन चूहों पर किए गए थे। ऐसे में यह अभी तक स्पष्ट नहीं था कि इन्सान और अन्य प्राइमेट में एलसीएन2 के चलते समान प्रतिक्रिया होती है या नहीं।

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इस सवाल के जवाब की खोज में शोधकर्ताओं ने अब एक डबल स्टडी को अंजाम दिया है। एक में उन्होंने इन्सानों में एलसीएन2 के प्रभाव को जानने का प्रयास किया है। वहीं, दूसरे अध्ययन में इस हार्मोन को अन्य प्राइमेट प्रजातियों पर आजमाया गया है। इन्सानों पर किए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चार दूसरे अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया है। इन आंकड़ों में सामान्य वजन वाले स्वस्थ प्रतिभागियों, ज्यादा वजन वाले लोगों, मोटापे से जूझ रहे मरीजों और गंभीर ओबेसिटी से ग्रस्त लोगों की जानकारियां शामिल थीं। अध्ययन में प्रयोग के तहत प्रतिभागियों को एक रात के उपवास के बाद खाना दिया जाता था और उनके मेटाबॉलिक बायोमार्कर्स का आंकलन किया जाता था।

इस प्रयोग के निरीक्षण और दूसरे अध्ययन के परिणामों की जांच में वैज्ञानिकों को पता चला है कि सामान्य वजन वाले लोगों के शरीर में उपवास के बाद वाला खाना खाने से एलसीएन2 के सर्कुलेशन में बढ़ोतरी हुई थी। एलसीएन2 के लेवल बढ़ने का स्वस्थ और सामान्य वजन वाले लोगों में भूख का एहसास खत्म होने से संबंध था। दूसरी तरफ, ज्यादा वजन, मोटापे और गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों में एलसीएन2 का लेवल एक मील के बाद कम हुआ था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भूख और तृप्ति के रेग्युलेशन में एलसीएन2 की भूमिका अहम होती है और जिन लोगों में यह हार्मोन ठीक प्रकार से नहीं निकलता, उनमें मोटापे से ग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

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इसके बाद शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की क्या ज्यादा वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त लोगों का मेटाबॉलिज्म एलसीएन2 के साथ दिए गए ट्रीटमेंट से सुधर सकता है। इसके लिए उन्होंने दूसरे अध्ययन पर काम करना शुरू किया। वैज्ञानिकों ने बबून्स और रीसस मकैक (बंदरों की एक प्रजाति) को दो समूहों में बांटा। उनमें से एक समूह के जानवरों को एलसीएन2 दिया गया है। वहीं, इसके प्रभावों की तुलना के लिए दूसरे समूह के जानवरों को दूसरे प्रकार का लवण दिया गया। इस ट्रीटमेंट के दो राउंड पूरे होने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि एलसीएन2 के उपयोग से पहले समूह के जानवरों ने अध्ययन की शुरुआत की अपेक्षा 28 प्रतिशत कम खाना शुरू कर दिया था। दूसरे सेलाइन ट्रीटमेंट वाले समूह की तुलना में एलसीएन2 वाले समूह के जानवरों की भूख में 21 प्रतिशत की कमी हो गई थी। 

इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में यह भी पाया कि एलसीएन2 वाले समूह के जानवरों का वजन, बॉडी फैट और ब्लड लिपिड लेवल कम हो गया था। एक और अच्छी बात यह रही कि एलसीएन2 के चलते किसी भी जानवर में कोई भी साइड इफेक्ट नहीं दिखा, जो अध्ययन की एक और बड़ी सफलता बताई जा रही है। कुल-मिलाकर इस अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि एलसीएन2 आधारित ट्रीटमेंट मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए एक इस समस्या से निजात पाने का एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि आगे चलकर और बड़े और ज्यादा नियंत्रित अध्ययनों से यह बात साबित करने में मदद मिलेगी यह भरोसेमंद ट्रीटमेंट मोटापे के खिलाफ कितना सक्षम है।

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