रात को सोते समय अचानक कुछ सेकंड के लिए सांस रुक जाने की समस्या को स्लीप एपनिया कहा जाता है. स्लीप एपनिया के मुख्य तौर पर 3 प्रकार माने गए हैं ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, सेंट्रल स्लीप एपनिया व कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम. अगर बात सिर्फ कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम की हो, तो सोते हुए अचानक से जाग जाना और अगले दिन थकान महसूस होना इसके लक्षण हैं. वहीं, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया व सेंट्रल स्लीप एपनिया एक साथ होना इसका मुख्य कारण माना गया है.

आज इस लेख में आप कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में मुख्य रूप से जानेंगे -

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  1. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम क्या है?
  2. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया के लक्षण
  3. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम के कारण
  4. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम का उपचार
  5. सारांश
कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम के डॉक्टर

इसे स्लीप एपनिया का ही प्रकार माना गया है. यह तब होता है जब व्यक्ति को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया व सेंट्रल स्लीप एपनिया दोनों एक साथ हो जाते हैं. बता दें कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया को स्लीप एपनिया का सबसे सामान्य प्रकार है और इस दौरान व्यक्ति को सोते वक्त सांस लेने में रुकावट महसूस होती है. वहीं, सेंट्रल स्लीप एपनिया में व्यक्ति का मस्तिष्क मांसपेशियों को सांस लेने का संकेत नहीं दे पाता है. 

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कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया का इलाज सही वक्त पर करने के लिए इसके लक्षणों को जानना व समझना आवश्यक है. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया के लक्षण कुछ इस प्रकार से हो सकते हैं -

बता दें कि साल 2006 में 223 लोगों पर हुए अध्ययन में पाया गया कि 15% व्यक्तियों को कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम था, जबकि 84% को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सिर्फ 0.4% को सेंट्रल स्लीप एपनिया था.

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कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम के कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी है कि यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया के साथ में होने के कारण हो सकता है. इसके अलावा, इन दोनों विकारों के कारणों को ही कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम का कारण माना जा सकता है. इसी आधार पर हम यहां ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया के कारण बता रहे हैं -

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण निम्न प्रकार से हैं -

  • व्यक्ति के निचले जबड़े का ऊपर के जबड़े की तुलना में छोटा होना.
  • गर्दन का बड़ा होना.
  • जीभ का लंबा होना.
  • पीठ के बल सोना.
  • टॉन्सिल का बढ़ना.
  • अधिक वजन होना या मोटापा.

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सेंट्रल स्लीप एपनिया के कारण

आइए, अब सेंट्रल स्लीप एपनिया के कारणों के बारे में जानते हैं -

  • सेंट्रल स्लीप एपनिया तब होता है, जब मस्तिष्क सांस को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को अस्थायी रूप से सिग्नल भेजना बंद कर देता है.
  • कुछ खास तरह की दवाइयों के सेवन करने पर, जैसे - दर्दनिवारक दवाइयां.

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कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम का इलाज इसके कारणों के आधार पर यानी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया को ध्यान में रखते हुए किया जाता है. ऐसे में डॉक्टर नीचे बताए गए इलाज कर सकते हैं -

  • कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम से ग्रस्त मरीज को रात को सोते समय कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) मशीन लगाने के लिए कहा जा सकता है. यह मशीन मरीज को नींद के दौरान सांस लेने में मदद कर सकती है.
  • डॉक्टर दवाइयों के जरिए इलाज कर सकते हैं. इसके तहत डॉक्टर थियोफाइलिइन या फिर एसिटाजोलामाइड दे सकते हैं. ये दवा सांस लेने की कार्यप्रणाली को कुछ बेहतर कर सकती है.
  • जीवनशैली में बदलाव करके भी इस समस्या को कम किया जा सकता है. इसके तहत अगर अधिक वजन है तो उसे कम किया जा सकता है. साथ ही डॉक्टर की सलाह पर सोने से पहले ऐसी दवाइयों के सेवन पर रोक लगाई जा सकती है, जिससे नींद आती हो. इसके अलावा, पीठ के बल सोने की जगह करवट लेकर सोने का प्रयास करना चाहिए.

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ये थी कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां. स्लीप एपनिया चाहे किसी भी प्रकार का हो, ये जोखिमभरा हो सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि वक्त रहते इसके लक्षणों को पहचानकर इस समस्या का समाधान यानी इलाज आवश्यक है. कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम का इलाज आसान है. इसके लिए समय रहते डॉक्टर के पास जाएं और अपना उचित इलाज करवाएं.

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