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नींद की कमी क्या है ?

नींद की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। यह या तो लम्बे समय से चली आ रही दिक्क्त हो सकती है या अचानक से पनपी समस्या भी हो सकती है। अगर एक लंबे समय तक आप ठीक से पूरी नींद न लें तो थकान, दिन में नींद आना, बेचैनी के साथ साथ अचानक बहुत अधिक वजन घटना या वजन बढ़ना जैसी दिक्क्तें हो सकती है। नींद की इस बेहद कमी से मष्तिष्क के साथ -साथ यादास्त, एकाग्रता जैसे कई संज्ञानात्मक कार्य बुरी तरह प्रभावित होते है। हालांकि, कुछ मामलों में नींद की कमी के कारण ऊर्जा और सतर्कता में वृद्धि और मनोदशा में सुधार हो सकता है। इसका उपयोग डिप्रेशन के इलाज के लिए भी किया जाता है।

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आधुनिक समाज में नींद की कमी एक आम समस्या है, जिससे सब लोग अपने जीवन में किसी न किसी समय प्रभावित होते हैं।

नींद में कमी तब होती है जब एक व्यक्ति अपनी दैहिक आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त नींद नहीं ले पाता है। कुछ बड़े लोग नींद की कमी के प्रभावों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं, जबकि अन्य, विशेष रूप से बच्चे और युवा, अधिक संवेदनशील होते हैं। नींद की कमी से दिन में अत्यधिक नींद आना, भावनात्मक कठिनाइयां, नौकरी में खराब प्रदर्शन, मोटापा और जीवन की गुणवत्ता में कमी आ सकती है।

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  1. नींद की कमी के लक्षण - Sleep Deprivation Symptoms in Hindi
  2. नींद की कमी के कारण - Sleep Deprivation Causes in Hindi
  3. नींद की कमी से बचाव - Prevention of Sleep Deprivation in Hindi
  4. नींद की कमी का परीक्षण - Diagnosis of Sleep Deprivation in Hindi
  5. नींद की कमी का उपचार - Sleep Deprivation Treatment in Hindi
  6. नींद की कमी के जोखिम और जटिलताएं - Sleep Deprivation Risks & Complications in Hindi
  7. नींद की कमी के डॉक्टर

नींद की कमी के क्या लक्षण होते हैं ?

निरंतर नींद की कमी का मुख्य लक्षण होता है दिन में अत्यधिक नींद आना, लेकिन इसके अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

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यह लक्षण निम्नलिखित हैं -

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नींद की कमी क्यों होती है?

नींद की कमी के सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं -

स्वैच्छिक व्यवहार - यह आमतौर पर तब होता है जब व्यक्ति इस बात से अनजान होते हैं कि उनके शरीर को नींद की अधिक ज़रूरत है और वे सोते नहीं हैं। उत्तेजक का उपयोग करने से भी नींद पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ लोग सोते समय अल्कोहल या कैफीन का उपभोग करते हैं, जो नींद के लिए कठिनाई को बढ़ा सकते हैं।

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काम या पढाई - कुछ विशिष्ट कार्य वातावरण शरीर की प्राकृतिक नींद लेने और जागने के चक्र को बाधित कर सकते हैं और नींद की कमी पैदा कर सकते हैं। विशेष रूप से, शिफ्ट में काम करने वाले लोग और वो लोग जो अक्सर हवाई यात्रा करते हैं, वे अक्सर पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। बच्चों और किशोरों को वयस्कों की तुलना में अधिक नींद की आवश्यकता होती है, लेकिन ऑफिस व विद्यालय के कार्यों के कारण पर्याप्त नींद लेना मुश्किल हो सकता है।

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पर्यावरण और नींद की आदतें - कुछ मामलों में, व्यक्ति के सोने के आसपास की जगहों में उत्तेजनाओं के परिणामस्वरूप नींद की कमी हो सकती है। इसमें अधिक तापमान, आसपास शोर होना या साथी का खर्राटे लेना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नींद की आदतों से नींद की गुणवत्ता और मात्रा पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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अनिद्रा (नींद न आना) - अनिद्रा एक ऐसी समस्या है जिसमें रात में सोने में कठिनाई होती है, जो वयस्क आबादी के एक तिहाई हिस्से को प्रभावित करती है और नींद की कमी से सम्बंधित है।

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स्लीप एप्निया
स्लीप एप्निया एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें सोते समय साँस रूकती है, जिससे फेफड़ों में कम हवा जाती है। इसमें आमतौर पर अपर्याप्त ऑक्सीजन के कारण व्यक्ति बार-बार जागता है। इसके बाद, दिन के दौरान नींद आना सामान्य है।

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अल्पकालिक बीमारी
अल्पकालिक बीमारियां जैसे कि सर्दी जुकाम, फ्लू (इन्फ्लूएंजा) या टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के चलते सोते समय सांस लेने में दिक्क्त हो सकती है, जिसके कारण व्यक्ति को पूरी रात जागना पड़ सकता है जिससे नींद की कमी होती है।

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नींद की कमी किन किन कारणों से होती हैं ?

नींद के जोखिम कारक निम्नलिखित हैं -

  • जीवनशैली - जीवनशैली, नींद की कमी का एक प्रमुख कारण है। असंतुलित आहार और सोते समय अत्यधिक शराब या कैफीन का सेवन नींद की कमी के सामान्य कारण होते हैं। रात के समय काम करने से लोगों को सामान्य नींद की कमी हो सकती है। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करने से काफी संभावनाएं ठीक हो सकती हैं।
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  • आयु - नींद की कमी का एक जोखिम कारक उम्र भी है। बुजुर्ग, युवा लोगों की तुलना में कम नींद लेते हैं, इसलिए युवाओं की तुलना में उन्हें काफी कम नींद आती है और वे नींद न आने की समस्याओं से जूझते है। बुजुर्ग व्यक्तियों को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य समस्याएं जैसे शुगर, हाई बीपी और गैस्ट्रोइसोफ़ेगल रिफ़्लक्स (Gastroesophageal reflux), नींद को प्रभावित कर सकती है।
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  • दवाएं - कुछ दवाएं आपके शरीर की सामान्य नींद की लय को बदल सकती हैं, जिससे नींद की कमी हो सकती है। अगर आप नींद के विकारों से पीड़ित हैं, तो हमेशा अपने चिकित्सक को बताएं। खासकर यदि आप नई दवा ले रहे हैं या अपनी वर्तमान दवा की मात्रा बढ़ा रहे हैं।
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  • चिकित्सा समस्याएं - कुछ चिकित्सा समस्याएं आपकी मानसिक और शारीरिक स्थितियों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे नींद की कमी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर अस्थमा के चलते देर रात सांस की दिक्क्त होती है तो निश्चित रूप से रोगी के सोने के क्रम पर असर पड़ता है। इसी तरह अवसाद और किसी दुर्घटना होने के बाद पनपा तनाव भी लोगों से सुकून से सोने नहीं देता। मानसिक विकार जैसे रात को नींद में डरावने सपने आने से भी लोग नींद न आने की समस्या से जूझने लगते हैं। 

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नींद की कमी से बचाव कैसे होता है?

नींद की कमी से गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती है। साथ ही नौकरी या स्कूल में पीड़ित का प्रदर्शन खराब हो सकता है। इससे एक व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। नींद की कमी मस्तिष्क की भावनाओं और सोच को संतुलित करने की क्षमता को बाधित करती है, शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को कम करती है और इससे चिकित्सा समस्याओं के विकास की संभावना बढ़ जाती है।

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हालांकि, कभी-कभी नींद की कमी होना एक गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन नींद का ज्यादा अभाव समस्या पैदा कर सकता है।

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नींद की कमी से बचने का कोई विकल्प नहीं है। सभी उम्र के व्यक्तियों में होने वाली नींद की कमी को रोकने के लिए कुछ खास सावधानी बरती जानी चाहिए और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश की जानी चाहिए।

नींद की कमी का परीक्षण निदान कैसे होता है?

नींद की समस्या के समाधान के लिए सबसे जरूरी है कि नींद आने और नींद न आने के क्रम को समझा जाएं। इस क्रम को पहचानने के लिए सबसे पहला कदम है नींद का एक लिखित इतिहास रखना। प्रत्येक दिन के आधार पर लिखिए कि आप कितने घंटे सोते हैं, कितनी बार रात को जागते हैं, जागने के बाद आपको कैसा महसूस होता है और दिन के दौरान आपको नींद की कमी या पर्याप्तता संबंधी कैसी भावना महसूस होती है।

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अगर आपका कोई साथी है, तो उनसे नींद में आपके द्वारा खर्राटे लेना, हांफना या किसी अंग को मरोड़ने के बारे में पूछें, क्योंकि डॉक्टर भी इस बारे में पूछ सकते हैं। जब आपके पास ये सूचनाएं होगी तो आप इन्हें आसानी से अपने डॉक्टर से शेयर कर सकेंगे और इससे डॉक्टर को आपकी समस्या का निदान करने में सहायता मिलेगी। 

  1. नींद के विशेषज्ञ एक पॉलीसौमनोग्राम (Polysomnogram) का उपयोग करके आपकी नींद के एक पैटर्न की पहचान कर सकते हैं या नींद का अध्ययन कर सकते हैं। यह टेस्ट नींद की प्रयोगशाला में किया जाता है।
  2. आपके शरीर पर विभिन्न जगहों पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जिसमें खोपड़ी और चेहरा भी शामिल होते हैं। नींद की कमी से ग्रस्त व्यक्ति को स्लिप क्लिनिक में रात भर सुलाया जाता है और यह मॉनिटर श्वास, रक्त, हृदय की गति और ताल, मांसपेशियों की गतिविधि और नींद के दौरान मस्तिष्क व आंखों की गति को मापता है। (और पढ़ें - अनियमित हृदय गति के कारण)
  3. जो लोग जान-बूझकर बहुत कम सोते हैं, उनका निदान मात्र इस बात को समझा कर किया जाता है कि आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं और इसमें बदलाव करने की आवश्यकता है।

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नींद की कमी का इलाज कैसे होता है?

नींद के विकारों का उपचार उनके प्रकार और अंतर्निहित कारणों के आधार पर भिन्न हो सकता है। हालांकि, इसमें आमतौर पर चिकित्सा उपचार और जीवन शैली में बदलाव शामिल होते हैं।

चिकित्सा उपचार
नींद की कमी के लिए निम्नलिखित चिकित्सा उपचार हो सकते हैं -

  • नींद की गोलियां।
  • मेलेटोनिन (Melatonin) की खुराक।
  • दांत पीसने और किटकिटाने की बिमारी से ग्रस्त लोगों के लिए डेंटल गार्ड। 
  • एलर्जी या सर्दी की दवा। (और पढ़ें - एलर्जी का इलाज)
  • किसी भी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवाएं।

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जीवनशैली में परिवर्तन
जीवनशैली में परिवर्तन आपकी नींद की गुणवत्ता में काफी सुधार कर सकते हैं, खासकर जब वे चिकित्सा उपचार के साथ किए जाते हैं। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं -

  • आहार में सब्जियों और मछली का सेवन करना और चीनी का सेवन कम करना।
  • सोने से पहले कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करना। 
  • (और पढ़ें - मछली के तेल के गुण)
  • कैफीन का सेवन सीमित करना, विशेष रूप से दोपहर या शाम के समय। 
  • तम्बाकू और अल्कोहल का उपयोग कम करना। (और पढ़ें - सिगरेट छोड़ने के तरीके)
  • कसरत द्वारा तनाव और चिंता को कम करना।  (और पढ़ें - चिंता कैसे दूर करे)
  • सोने का नियम बनाना और उसका पालन करना।
  • सोने से पहले कम पानी पीना।  (और पढ़ें - पानी कितना पीना चाहिए)
  • रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने से आपकी नींद की गुणवत्ता में भी काफी सुधार हो सकता है। हो सकता हो कि सप्ताहांत में काफी सोकर आप अपनी नींद पूरी लें लेकिन इससे भी आपका क्रम बिगड़ जाएगा और सप्ताह भर (काम के बाकी दिनों में) आपको ठीक समय पर सोने और जागने में काफी दिक्क्तें होगी। 

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नींद की कमी की क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं ?

नींद की कमी से दिमाग का वह हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित होता है जो तर्कशीलता को नियंत्रित करता है। इसे प्रेफेंटाल कोर्टेक्स कहा जाता है। इसके साथ ही भावुकता को नियंत्रित करने वाले हिस्से पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। इन सभी कारणों के चलते पीड़ित अपनी भावनाओं को ले कर नियंत्रित नहीं हो पाता एवं बेहद मूडी हो जाता है। 

दिमाग को कुछ सीखने के लिए तैयार करने में भी नींद का खासा योगदान होता है। जब आप ठीक से नहीं सोते हैं तो एकाग्र होने और कुछ नया सीखने में दिमाग सहयोग नहीं कर पाता है।

जब हम सारी रात नहीं सोते हैं या अपने सोने के घंटे काफी कम कर लेते हैं तो शरीर से विकास और पाचन के लिए उत्तरदायी हार्मोन्स निकलने की गति और गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी के साथ कई बार तनाव को जन्म देने वाले कैमिकल की शरीर में अधिकता बढ़ जाती है, जैसे कि नोरेपेनेफ़्रिन और कोर्टिसोल। तनाव हार्मोन जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हो। 

रिसर्च से पता चला है कि पूर्ण वयस्क और बच्चें जब कम नींद लेते हैं तो उनका वजन बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। गौरतलब है कि करीब एक घंटा कम सोने से शरीर का 0.35 किलोग्राम वजन बढ़ता है। इसके चलते अत्यधिक तनाव, मधुमेह, मोटापा, हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी कई दिक्क्तें हो जाती है।

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नींद की कमी से होने वाली समस्याएं निम्नलिखित हैं -
  • भावनाओं का असामान्य होना।
  • ध्यान देने और नई यादों का निर्माण करने में कठिनाई।
  • सकारात्मक सोचने की कम प्रवृत्ति।
  • खराब मनोदशा और समस्याओं को हल करने की इच्छा में कमी। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में क्‍यों होता है मूड में बदलाव)
  • अंधविशवास और जादू संबंधी सोच के प्रति खिंचाव।
  • असहिष्णुता और दूसरों के प्रति कम सहानुभूति।
  • आवेग नियंत्रण में कमी।
  • दुर्घटनाओं के जोखिम में वृद्धि।
  • रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने से आपकी नींद की गुणवत्ता में भी काफी सुधार हो सकता है। हो सकता हो कि सप्ताहांत में काफी सोकर आप अपनी नींद पूरी लें लेकिन इससे भी आपका क्रम बिगड़ जाएगा और सप्ताह भर (काम के बाकी दिनों में) आपको ठीक समय पर सोने और जागने में काफी दिक्क्तें होगी। (और पढ़ें - कम सोने के नुकसान)

जो लोग बेहद कम सोते हैं उनका अपनी काम में तो प्रदर्शन बिगड़ता ही है, साथ ही सहकर्मियों के साथ मधुर संबंध नहीं बन पाते हैं। इसके अलावा जीवन शैली की निम्नता, कम आत्म सम्मान, कमजोर महसूस करना जैसी कई दिक्क्तें इन लोगों के साथ होती है। कई बार यह सारी दिक्क्तें कैफीन के अधिक प्रयोग से महसूस तक नहीं होती है। अवसाद और बेचैनी जैसी दिक्क्तें भी कम नींद लेने वालों को अधिक तंग करती है।  

Dr. Deepak Waghmare

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सामान्य चिकित्सा

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