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भारत में सदियों से स्क्वाट्स व्यायाम के विभिन्न रूपों का चलन रहा है। उदाहरण के लिए स्वतंत्रता-पूर्व के समय में महान भारतीय पहलवान गामा प्रतिदिन 5000 स्क्वाट्स का अभ्यास किया करते थे। हां उस दर्जे की मेहनत और व्यायाम करने का जज्बा हर किसी में होना मुश्किल है, लेकिन स्क्वाट्स के व्यायाम आपको लंबे समय पर शक्तिशाली और ऊर्जावान बनाए रखते हैं, विशेषज्ञों का ऐसा मानना है।

पुश-अप व्यायाम की तरह ही स्क्वाट भी सबसे सामान्य और प्रभावी बॉडीवेट व्यायामों में से एक हैं। आमतौर पर जिम में इस व्यायाम को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्क्वाट्स व्यायाम को सही तरीके और तकनीक से किया जाए तो न सिर्फ इससे पैरों को मजबूती मलती है, साथ ही यह कई अन्य अंगों को दीर्घकालीन लाभ प्रदान करता है।

अन्य बॉडीवेट व्यायामों की तरह स्क्वाट करने के लिए आपको किसी उपकरण की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए बस आपको इतनी ही जगह की जरूरत होती है, जिसमें आप आराम से खड़े होकर इस व्यायाम को कर सकें। एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन के एक अध्ययन के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता प्रारंभिक मृत्यु दर के प्राथमिक लक्षणों में से एक है। इसके लिए स्क्वाट सबसे सरल और प्रभावी व्यायाम है, जिसे प्रयोग में लाकर आप आसानी से अपने शरीर के सभी अंगों को सक्रिय अवस्था में ला सकते है।

स्क्वाट्स व्यायाम से जोड़ों के साथ हड्डियों, मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है। शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को शक्ति देने में यह व्यायाम काफी कारगर होता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार से स्क्वाट्स व्यायाम को सही तरीके से करके इससे लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

  1. कितने प्रकार से होता है स्क्वाट्स व्यायाम - Squats exercise kitne tareeqo se hota hai in Hindi?
  2. स्क्वाट्स व्यायाम के लाभ - Squats exercise ke fayde in Hindi
  3. स्क्वाट्स की विविधताएं - Squats exercise ke variations in Hindi
  4. फ्रंट स्क्वाट्स बनाम बैक स्क्वाट्स - Front squats vs back squats in Hindi
  5. स्क्वाट्स व्यायाम के दौरान खतरे और सावधानियां - Squats exercise ke dauraan Risk factors aur precaution in Hindi

अन्य दूसरे व्यायामों के तरह ही स्क्वाट भी कई प्रकार से किया जा सकता है। मुख्यरूप से इस व्यायाम का असर पैरों पर होता है। अच्छे परिणामों के लिए स्क्वाट्स के निम्न प्रकार के अभ्यासों को प्रयोग में लाया जा सकता है।

बेसिक स्क्वाट : स्क्वाट्स के जटिल व्यायामों की ओर बढ़ने से पहले बेसिक स्क्वाट में खुद को पारंगत बना लेना जरूरी होता है। इससे जटिल अभ्यासों के दौरान ज्यादा कठिनाई नहीं आती है। बस सीधे खड़े होकर सीधे बैठने से ही स्क्वाट्स की शुरुआत की जा सकती है।

  • सीधे खड़े हो जाएं। हाथों को कंधे से थोड़ी चौड़ाई पर रखें।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए नीचे की ओर आएं।
  • इस दौरान अपना भार कूल्हों पर रखें। हाथों को सामने की ओर सीध में रखें।
  • पूरे व्यायाम के दौरान अपनी पीठ को सीधा रखें।
  • नीचे झुकने के दौरान जब आपकी जांघें फर्श के समानांतर हो जाएं तो कुछ सेकेंड के लिए उसी अवस्था में रुकें।
  • अब दोबारा उसी अवस्था में आएं, जैसे शुरुआत की थी। यह एक रैप है।

वेटेड स्क्वाट्स : इस व्यायाम को केटलबेल, डंबल, बारबेल या बैंड जैसे उपकरणों के साथ किया जा सकता है।

डीप स्क्वाट : इस स्थिति में आपके धड़ को स्क्वाट के दूसरे व्यायामों की अपेक्षा अधिक नीचे तक लाना होता है। इसमें जितना हो सके अपने घुटनों को मोड़ें।

हाफ स्क्वाट : शुरुआती लोगों के लिए एक बढ़िया व्यायाम है। दूसरे स्क्वाट्स व्यायामों की तुलना में इस भाग में आपको धड़ को सिर्फ आधी दूरी तक ही नीचे की ओर लाना होता है।

वॉल स्क्वाट : जिन लोगों को स्क्वाट व्यायाम के दौरान अपनी पीठ को सीधा रखने में कठिनाई होती है, उन लोगों के लिए इस तरह से स्क्वाट्स् शुरू करना बेहतर होता है। अपनी पीठ को दीवार के सहारे लगाकर सीधे खड़े हो जाएं और फिर व्यायाम को पूरा करें।

फ्रंट स्क्वाट : इसमें में बारबेल को आपके कॉलरबोन के ऊपर कंधों के समानांतर रखकर व्यायाम किया जाता है।

बैक स्क्वाट : स्क्वाट करने वाले लोगों के बीच यह सबसे लोकप्रिय है। इसमें बारबेल को गर्दन के पीछे कंधों पर रखा जाता है। पूरे व्यायाम के दौरान पीठ को सीधा और छाती को बाहर रखना होता है।

मांसपेशियों का वर्कआउट : इस व्यायाम के दौरान पैर की ज्यादातर मांसपेशियों जैसे कि क्वाड्रिसेप्स, हैमेस्ट्रिंग, कोर, बैक आदि का भी व्यायाम हो जाता है।

स्क्वाट को प्रमुख बॉडीवेट व्यायामों में से एक माना जाता है। इसे कंपाउंड एक्सरसाइज के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इस एक व्यायाम के करने से शरीर की कई मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। स्क्वाट्स व्यायाम करने से आपको क्या-क्या फायदे हो सकते हैं वह निम्नलिखित हैं :

किसी भी उपकरण की आवश्यकता नहीं : स्क्वाट्स को बिना किसी उपकरण के ही कहीं भी किया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ आपको खड़े होने और व्यायाम करने के लिए पर्याप्त जगह की आवश्यकता होती है।

एक साथ कई मांसपेशियों का व्यायाम : स्क्वाट करने से एक ही समय में अपके पैरों और कोर मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। सीधे और स्थिर मुद्रा में खड़े होकर जब आप इस व्यायाम को करते हैं तो इस दौरान सारी कोर मांसपेशियां सक्रिय अवस्था में आ जाती हैं। यह व्यायाम पीठ के निचले हिस्से को मजबूती देने में भी मदद करता है।

चोट लगने का खतरा कम : चूंकि पूरे व्यायाम के दौरान पैर स्थिर अवस्था में रहते हैं ऐसे में चोटों का जोखिम कम हो जाता है। पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करने से अन्य दूसरे व्यायाम करते समय भी लगने वाले चोटों का खतरा कम हो जाता है। अमेरिकन काउंसिल ऑन एक्सरसाइज के अनुसार, बॉडीवेट व्यायाम लिगामेंट्स, टेंडन्स और जोड़ों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं, इसलिए चोट के जोखिम अन्य व्यायामों के दौरान भी कम ​हो जाते हैं।

कैलोरी बर्न : आप सोच रहे होंगे कि बॉडीवेट एक्सरसाइज से कितनी कैलोरी बर्न हो सकती है? हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, किसी भी बॉडीवेट व्यायाम के दौरान केवल 30 मिनट में 56-70 किलोग्राम वजन वाले लोग 110 से 220 कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

व्यायाम की कई शैलियां : स्क्वाट्स व्यायाम को कई तरीकों से किया जा सकता है। यदि आप एक तरीके का व्यायाम करते-करते ऊब गए हैं तो अन्य शैलियों को अपना सकते हैं। इस व्यायाम की कई शैलियां हैं जो रुचि को बनाए रखती हैं।

सबसे बेहतर वार्मअप व्यायाम : व्यायाम की दिनचर्या शुरू करने से पहले चोटों के जोखिम को कम करने के लिए आपको वार्मअप करना होता है। स्क्वाट्स वार्मअप के लिए सबसे बेहतर व्यायाम हो सकता है, जिसमें शरीर के लगभग सभी अंगों को सक्रियता मिलती है। वार्म-अप के लिए आप स्क्वाट्स की किसी भी शैली के 15-20 रैप वाले तीन सेट कर सकते हैं।

शरीर के हर अंग को सक्रिय अवस्था में लाने के लिए स्क्वाट्स व्यायाम के कई सारे रूप हैं। सामान्य रूप से किए जाने वाले स्क्वाट व्यायाम भी कितने प्रभावशाली होते हैं, सभी को पता है। सामान्य रूप से होने वाले स्क्वाट्स व्यायामों के साथ अगर आप कुछ अन्य विविधता वाले स्क्वाट्स व्यायामों को शामिल करते हैं तो न सिर्फ यह आपके दैनिक व्यायाम को दिलचस्प बनाता है साथ ही इससे शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

सूमो स्क्वाट : सामान्य रूप से किए जाने वाले स्क्वाट्स से थोड़ा सा अलग इस व्यायाम में कूल्हों के समानांतर दोनों पैरों को खोलकर बारी-बारी से दोनों पैर की ओर झुकाव डालना होता है।

साइड स्क्वाट : इस व्यायाम में आपके पैर एक त्रिकोण की अवस्था में होने चाहिए। सबसे पहले अपने दाहिने घुटने को मोड़ते हुए अपना वजन उस ओर डालें। घुटने को मोड़ते हुए, जितना आप झुक सकें उतना झुकें। अब यही अभ्यास अपने दूसरे पैर के साथ भी करें।

हिंदू स्क्वाट (उठक-बैठक) : स्क्वाट्स का यह सबसे पुराना भारतीय स्वरूप है। इसमें कंधे और हाथों दोनों का व्यायाम हो जाता है। पारंपरिक रूप से किए जाने वाले स्क्वाट की तरह इसमें नीचे जाते समय अपनी बाहों को भी नीचे की ओर झुकाएं और अपने टो को ऊपर उठाएं। प्रारंभिक स्थिति में वापस आते समय तक अपने पैर की उंगलियों को उठाए रखें।

पिस्टल स्क्वाट : यह स्क्वाट्स व्यायाम का सबसे उन्नत और कठिन रूप है। पिस्टल स्क्वाट केवल पेशेवर एथलीटों या विशेषज्ञों के संरक्षण में करना चाहिए। इसमें सिर्फ एक पैर पर स्क्वाट करना होता है। इसमें नीचे जाते समय अपने बाएं पैर को उठाकर रखना होता है।

स्प्लिट स्क्वाट : स्क्वाट्स के इस व्यायाम को स्टैंडिंग लंग्स के रूप में भी जाना जाता है। इसमें नीचे की ओर आते वक्त एक पैर पीछे की ओर ले जाना होता है।

कर्टसी स्क्वाट : स्प्लिट स्क्वाट्स के तरह ही यह लगभग एक डांस मूव की तरह है। इस व्यायाम के दौरान अपने दाहिने पैर को बाईं ओर ले जाएं और क्रॉस जैसा बनाएं। अब दूसरे पैर से भी इसे दोहराएं।

जंप स्क्वाट : सामान्य रूप से किए जाने वाले स्क्वाट्स की तरह ही यह भी होता है। इस व्यायाम में सिर्फ आपको कूदते हुए स्क्वाट करना होता है। शैली वही रहती है।

थ्रस्टर : वेटेड फ्रंट स्क्वाट की तरह ही इस व्यायाम में भी अपने सिर के ऊपर की ओर बारबेल उठाना होता है।

ओवरहेड स्क्वाट्स : थ्रस्टर की तुलना में इस व्यायाम के दौरान पूरे समय बारबेल को उठाकर रखना होता है।

किसी भी जिम या फिटनेस सेंटर में बैक स्क्वाट सबसे सामान्य व्यायाम है। बैक स्क्वाट आपके ग्लूट्स, कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से के लिए सबसे बेहतर व्यायाम है। वहीं फ्रंट स्क्वाट, जिसमें कॉलरबोन पर बारबेल को रखकर व्यायाम किया जाता है, उसमें क्वाड्रिसेप्स और पीठ के ऊपरी हिस्से का व्यायाम होता है। फ्रंट स्क्वाट करने के लिए आपको अधिक स्थिरता और गतिशीलता की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसके लिए शरीर में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होती है। हालांकि, ये दोनों व्यायाम काफी प्रभावी होते हैं।

स्क्वाट के दोनों ही रूप कई मामलों में लाभदायक हैं। यदि आप पैरों में अधिक मांसपेशियां चाहते हैं तो बैक स्क्वाट्स काफी फायदेमंद हैं, वहीं यदि आपका लक्ष्य शरीर को गतिशील बनाना है, तो आपको फ्रंट स्क्वाट्स करने चाहिए।

अन्य व्यायामों की तरह यदि आप गलत तरीके से स्क्वाट्स व्यायाम करते हैं तो इससे आपको इंजरी का खतरा बना रहता है। हालांकि, चोट कई प्रकार के कारकों पर निर्भर करती है। व्यायाम के दौरान निम्न वजहों से आपको चोट लग सकती है।

  • सही तकनीक के बारे में पता न होना।
  • अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाना।
  • रीढ़, कंधे या हाथों पर अनावश्यक तनाव डालना।
  • स्थिरता और गतिशीलता सही न होना।
  • शरीर की स्थिति सही न होना।

स्क्वाट्स व्यायाम के दौरान किसी भी तरह की चोट से बचने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार ही वजन उठाएं और हमेशा विशेषज्ञ की निगरानी में व्यायाम करें।

किन बातों का रखें ध्यान

स्क्वाट सबसे आम और बेहतर बॉडीवेट अभ्यासों में से एक है। इसके अलग-अलग तरीकों से शरीर के प्रत्येक मांसपेशी समूह का व्यायाम हो सकता है। आमतौर पर दर्द के कारण कई लोग लेग-डे पर पैरों के व्यायाम करने से बचते हैं, लेकिन अगर आप स्क्वाट करते हैं तो आपको इसके जबरदस्त फायदे मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस व्यायाम से मांसपेशियों का निर्माण होने के साथ उन्हें शक्ति मिलती है। शरीर के निचले हिस्से को बेहतर आकार देने और मजबूती देने में यह व्यायाम सबसे फायदेमंद होता है। इसके विभिन्न प्रकारों को प्रयोग में लाकर आप खुद को प्रेरित भी कर सकते हैं।

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References

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