नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी एक तरह का इनाम है, जो कि बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसीधारक को दिया जाता है। स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस केवल उसी स्थिति में बीमित व्यक्ति को दिया जाता है, जब वह पॉलिसी ईयर के दौरान किसी तरह का क्लेम नहीं करता है। एनसीबी का फायदा दो तरह से मिल सकता है - पहला, बीमा राशि में इजाफा/कवरेज बढ़ना और दूसरा पॉलिसी रिन्यूअल के दौरान डिस्कांउट।

इसी के विपरीत जो पॉलिसीधारक अपने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर क्लेम करते हैं, वे इस तरह के लाभों का फायदा नहीं ले सकते हैं। इसके अलावा कई लोग एनसीबी के बारे में ज्यादा न जानने के कारण भी उचित कदम नहीं उठा पाते हैं। इसलिए नीचे लेख में बताया गया है कि स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस क्या है, इसके लाभ व प्रकार क्या हैं, जिसे पढ़कर एनसीबी को और अच्छे से समझा जा सकता है।

  1. नो-क्लेम बोनस के प्रकार - Types of No-claim bonus in Hindi
  2. स्वास्थ्य बीमा में एनसीबी कैसे काम करता है? - How does NCB work in Health Insurance in Hindi
  3. स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस की विशेषताएं - Features of No Claim Bonus in Health Insurance in Hindi
  4. स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस के लिए ऐड-ऑन कवर - Add-on Cover for NCB in Health Insurance in Hindi
  5. स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस के फायदे - Benefits of No Claim Bonus in Health Insurance in Hindi
  6. निष्कर्ष - Conclusion

नो-क्लेम बोनस के दो मुख्य तरीके हैं, जिनके माध्यम से बीमा कंपनियां नो-क्लेम बोनस का लाभ देती हैं :

  • बीमा राशि में इजाफा (क्यूमुलेटिव बेनिफिट)
  • प्रीमियम पर छूट

प्रीमियम पर छूट
जैसा कि नाम से पता चलता है, इस प्रकार के नो क्लेम बोनस में प्रीमियम पर छूट मिल सकती है। यह छूट पॉलिसी रिन्यू के समय मिलती है, इस प्रकार, पॉलिसीधारकों को अपने हेल्थ इन्शुरन्स प्लान को रियायती दर पर जारी रखने का मौका मिलता है।

क्यूमुलेटिव बेनिफिट
इस प्रकार के नो क्लेम बोनस के तहत, कोई छूट नहीं दी जाती है, लेकिन बीमा राशि में वृद्धि की जाती है। इस प्रकार, पॉलिसीधारकों को क्लेम नहीं करने पर पॉलिसी रिन्यू के दौरान बढ़ी हुई बीमा राशि इनाम के रूप में दी जाती है।

हेल्थ इन्शुरन्स का उद्देश्य किसी मेडिकल कंडीशन के समय बीमित व्यक्ति या उसके परिवार को वित्तीय सुरक्षा देना है। नो क्लेम बोनस दिए जाने का कारण बीमाकर्ता द्वारा उपभोक्ताओं को स्वस्थ बने रहने और आवश्यक होने पर ही क्लेम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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चूंकि पॉलिसीधारकों के सामने आने वाली मेडिकल कंडीशन हमेशा बड़ी व गंभीर नहीं होती है, ऐसे में वे छोटे-मोटे खर्चों को अपनी जेब से निपटा देते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर पॉलिसीधारक हर साल क्लेम नहीं करते हैं, और वे नो क्लेम बोनस के पात्र बन जाते हैं।

उदाहरण के लिए, मान लें कि आपने पास एक हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी है, जिसका सम-इनश्योर्ड पांच लाख रुपये है और पॉलिसी अवधि के दौरान किसी तरह का क्लेम भी नहीं किया है। ऐसे में बीमाकर्ता आपको प्रत्येक क्लेम-फ्री ईयर (ऐसा साल जिसमें क्लेम न किया हो) के लिए 5% का अतिरिक्त लाभ देता है। इस प्रकार, प्रत्येक क्लेम-फ्री ईयर के बाद कुल बीमा राशि इस प्रकार होगी-

  • पहले क्लेम - फ्री ईयर के बाद बीमा राशि = 5 लाख 25 हजार
  • दूसरे क्लेम - फ्री ईयर के बाद बीमा राशि = 5 लाख 50 हजार
  • तीसरे क्लेम - फ्री ईयर के बाद बीमा राशि = 5 लाख 75 हजार

प्रीमियम पर छूट के लिए उदाहरण, मान लीजिए कि मिस्टर X के पास पांच लाख रुपये की बीमा पॉलिसी है, जिसमें पांच हजार रुपये प्रीमियम के रूप में भरने होते हैं। चूंकि पॉलिसी अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की ओर से कोई दावा नहीं किया गया, इसलिए बीमा कंपनी ने उन्हें प्रीमियम पर 10% की छूट की पेशकश की। इस तरह, मिस्टर X को पांच हजार रुपये की जगह अब 4500 रुपये प्रीमियम के रूप में भरने होंगे।

कुल मिलाकर दोनों तरह से, आप किसी भी मेडिकल इमर्जेंसी/कंडीशन में अपने परिवार व खुद के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। नो-क्लेम बोनस का लाभ पॉलिसीधारक को स्वस्थ और फिट रहने के लिए प्रोत्साहित करता है, इसके अलावा यह लोगों को जागरुक करता है कि मेडिकल क्लेम तभी किए जाने चाहिएत जब इसकी बहुत आवश्यकता हो। भारत में ज्यादातर स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा पर्सनल हेल्थ इन्शुरन्स और फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स में नो-क्लेम बोनस का लाभ दिया जाता है। हालांकि, पॉलिसी व बीमा कंपनी के आधार पर दी जाने वाली छूट में कुछ अंतर हो सकता है।

स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस की विशेषताओं में शामिल हैं -

  • भारतीय बीमा कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला नो क्लेम बोनस औसतन 5 से 20% के बीच होता है।
  • यदि आप किसी अन्य स्वास्थ्य बीमा कंपनी में जाना चाहते (पोर्टेबिलिटी) हैं, तो ऐसे में भी नो क्लेम बोनस सक्रिय रहता है।
  • फैमिली फ्लोटर पॉलिसी के मामले में परिवार के किसी भी सदस्य ने यदि क्लेम किया है तो आप नो क्लेम बोनस राशि का लाभ नहीं ले सकते।
  • यदि आपकी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ड्यू डेट यानी प्रीमियम जमा करने की तारीख से पहले रिन्यू नहीं होती है, तो आप बोनस के लिए पात्र नहीं होंगे।

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ऐड-ऑन एक तरह से अतिरिक्त लाभ है, यूं समझिए आपने कोई पॉलिसी ली है और कुछ समय बाद उसमें आप नई सर्विस जोड़ना चाहते हैं तो ऐसे में आपको उस नई सर्विस के लिए अतिरिक्त राशि देनी होगी। यदि कोई बीमित व्यक्ति क्लेम नहीं करता है तो 'नो क्लेम बोनस ऐड-ऑन' नवीनीकरण के समय बोनस के प्रतिशत में वृद्धि कर सकता है।

ध्यान दें कि इस ऐड-ऑन को खरीदने से देय प्रीमियम बढ़ जाएगा। इसलिए, ऐड-ऑन खरीदने से पहले प्रीमियम और आपकी स्वास्थ्य स्थिति का विश्लेषण करने का सुझाव दिया जाता है।

स्वास्थ्य बीमा में नो क्लेम बोनस के फायदों में शामिल हैं -

  • नो क्लेम बोनस का सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि आप पॉलिसी को नवीनीकृत करते समय पैसे बचा सकते हैं या आपकी बीमा राशि को बढ़ाया जा सकता है, जो कि एक तरह की बचत भी है।
  • बीमित राशि में वृद्धि की दर 5% से 50% तक हो सकती है।
  • यदि अस्पताल का बिल बहुत अधिक नहीं है, तो ऐसे में खुद से भुगतान किया जा सकता है क्योंकि ऐसा करने से आप नो क्लेम बोनस के हकदार बने रहेंगे। इसके अलावा आप क्यूमुलेटिव बेनिफिट का भी अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।

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बोनस हर रूप में खुशी लाता है और यदि बिना अतिरिक्त कोशिश किए बोनस मिल जाए, तो यह और भी अच्छा है। ऐसे में नो क्लेम बोनस के बारे में जानना जरूरी है। भारत में ज्यादातर हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां नो-क्लेम बोनस की सुविधा देती हैं, लेकिन ऐसा सभी कंपनी नहीं करती हैं। इसके अलावा जो देती हैं, उनके नियम व शर्तों में अंतर हो सकता है, यही वजह है पॉलिसी खरीदते समय पॉलिसी बॉन्ड को ध्यानपूर्वक पढ़ने की सलाह दी जाती है, ताकि आप जान सकें कि पॉलिसी नो-क्लेम बोनस सुविधा प्रदान करती है या नहीं, और यदि करती है तो कितने प्रतिशत के साथ बीमा राशि को बढ़ा सकती है।

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