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आजकल आम आदमी की जीवनशैली काफी प्रभावित हो गई है, जिसमें वह काम के समय काम नहीं कर पा रहा है और न ही उसके भोजन करने का कोई निश्चित समय है। जीवनशैली में ऐसी आदतें ही गंभीर बीमारियों को जन्म देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और परिणामस्वरूप आजकल लाखों लोग कैंसर, स्ट्रोक, गुर्दे और हृदय से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे हैं। जिन लोगों को इनमें से कोई भी रोग हो जाता है, उन्हें सिर्फ रोग से ही नहीं लड़ना होता, बल्कि वित्तीय जोखिमों से भी निपटना होता है। भारत में अधिकतर आबादी मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास है, जिनके लिए किसी भी सामान्य बीमारी के इलाज का खर्च उठाना मुश्किल काम है। ऐसे में यदि कोई गंभीर रोग हो जाता है, तो उसके इलाज का मेडिकल खर्च परिवार की रीढ़ तोड़ देता है।

आजकल की महंगाई और गंभीर रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऐसी स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना ही बुद्धिमता है। इस आर्टिकल में आप क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के बारे में जानेंगे, जो ऐसी मुश्किल की घड़ी में आपकी वित्तीय रूप से मदद करता है, ताकि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से लड़ सकें। क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान आपको कुछ विशेष गंभीर रोगों के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्रिटिकल इलनेस में कौन-कौन सी बीमारियां आती हैं, क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स वास्तव में क्या है और इसे खरीदने पर आपको क्या लाभ मिल सकते हैं।

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  1. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स क्या है - What is Critical illness insurance in Hindi
  2. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के लाभ - Benefits of Critical illness insurance in Hindi
  3. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स क्या कवर करता है - What does Critical illness insurance covers in Hindi
  4. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में क्या कवर नहींं किया जाता - What does Critical illness insurance not covers in Hindi
  5. क्रिटिकल इलनेस में कौन-कौन सी बीमारियां आती हैं - List of Critical Illness in Hindi
  6. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स किसे खरीदना चाहिए - Who should buy Critical illness insurance in Hindi
  7. क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें - Things to consider before you buy Critical illness insurance in Hindi

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स किसे कहते हैं?

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स एक प्रकार का हेल्थ इन्शुरन्स है, जो बीमाधारक के किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने पर बीमित राशि प्रदान करता है। क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में किन-किन बीमारियों व स्वास्थ्य समस्याओं को शामिल किया गया है, यह मुख्य रूप से आपके द्वारा चुनी गई पॉलिसी पर निर्भर करता है। हालांकि, इसमें मुख्य रूप से कैंसर, गंभीर रूप से जलना और कोमा में  जाना आदि शामिल हैं।

आजकल हमारी जीवनशैली काफी बदल गई है और जंक फूड, तनावपूर्ण कार्य व पारिवारिक चिंताएं हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन गई हैं, जो गंभीर रोग होने के खतरे को बढ़ाती हैं। ऐसे में जब आपको अचानक से कोई गंभीर रोग हो जाता है, तो क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स आपके लिए एक जीवनरक्षक वरदान हो सकता है।

(और पढ़ें - सबसे अच्छा हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है?)

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के क्या फायदे हैं?

हेल्थ इन्शुरन्स लेना हर किसी के लिए एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह मेडिकल इमर्जेंसी के समय आपको वित्तीय रूप से कमजोर नहीं होने देता। जिन लोगों को गंभीर बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है, उनके लिए तो क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स बेहद आवश्यक है। क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान मेडिकल इमर्जेंसी में होने वाले खर्च को कवरेज प्रदान करता है, ताकि आप अपनी सेविंग को सुरक्षित रख सकें। ये हेल्थ इन्शुरन्स प्लान आपको अच्छे अस्पताल और गुणवत्ता वाली मेडिकल देखभाल उपलब्ध करवाने में भी मदद करता है।

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स से निम्न लाभ मिल सकते हैं -

  • सस्ता प्रीमियम -
    जैसा कि ऊपर बताया गया है कि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स आपको कुछ विशेष गंभीर बीमारियों पर होने वाले खर्च के लिए कवरेज प्रदान करता है। इस वजह से इन प्लान का प्रीमियम अन्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान से काफी कम होता है। ऐसे में आप मेडिकल संबंधी किसी भी गंभीर स्थिति के लिए तैयार भी रह सकते हैं और साथ ही आपकी जेब पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ता है।
  • इस्तेमाल की स्वतंत्रता -
    यदि आपने क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान लिया है, तो आप उस राशि को मेडिकल खर्च के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए क्रिटिकल इलनेस का निदान होने के बाद आपको जो एकमुश्त राशि इन्शुरन्स कंपनी की तरफ से दी जाएगी आप उसका इस्तेमाल अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं।
  • टैक्स में लाभ -
    यदि आपने क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स का प्लान लिया हुआ है और नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं, तो आपको टेक्स में 25000 रुपये तक की छूट मिल सकती है। यदि बीमाधारक एक सीनियर सीटीजन है, तो आपको टैक्स में 50000 रुपये तक की छूट मिल सकती है। यदि आपने अपने माता-पिता के लिए क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लिया हुआ है और वे सीनियर सीटीजन की कैटेगरी में आते हैं, तो भी आपको टैक्स में 50000 रुपये तक की छूट मिल सकती है।

इसके अलावा क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स से आपको अन्य कई लाभ मिलते हैं, जैसे -

  • महंगे इलाज पर कवरेज
  • गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च की कवरेज
  • नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस सुविधा

(और पढ़ें - भारत में सबसे अच्छी कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी कौन सी है)

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में क्या शामिल है?

यदि आप भी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इस प्लान में क्या-क्या कवर किया जाता है। आपको इस बारे में किसी विशेषज्ञ से या फिर किसी ऐसे व्यक्ति से सलाह लेनी चाहिए, जिन्हें इसके बारे में जानकारी हो। ताकि आप यह सुनिश्चित कर सकें कि यह प्लान आपके लिए उपयुक्त है या नहीं। क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के कुछ मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं -

  • अस्पताल में भर्ती किए गए मरीज के इलाज के खर्च का कवर किया जाता है।
  • अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद में हुए मेडिकल खर्च को कवर किया जाता है।
  • यदि सिर्फ एक ही दिन का इलाज है और भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है यानी डे-केयर भी इस प्लान में शामिल है।
  • ओपीडी के खर्च को कवर किया जाता है।
  • आसीयू व अन्य मेडिकल मशीनों के खर्च को कवर किया जाता है।
  • एम्बुलेंस का खर्च भी इस प्लान में शामिल होता है।
  • अंग दानकर्ता (डोनर) का खर्च भी कवर किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के खर्च पर भी आपको पैसा लगाने की आवश्यकता नहीं है।
  • इंटरनेश्नल सेकेंड ओपीनियन को भी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स कवर करता है।

इसके अलावा आप समय-समय पर अपने हेल्थ चेकअप्स करवा सकते हैं, जिसके लिए आपको कोई भी अतिरिक्त पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। एक बार क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेने के बाद आपके उसके पूरे टेन्योर तक हर साल प्रीमियम अदा करके अपनी पॉलिसी को रिन्यु कर सकते हैं।

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स में क्या शामिल नहीं है?

आपके लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि आप क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स का जो प्लान खरीदने की सोच रहे हैं, उसमें क्या-क्या कवर नहीं किया जा रहा है। प्लान लेने से पहले इस बारे में जानना बेहद महत्वपूर्ण कार्य है। वैसे इसमें भी अलग-अलग बीमाकर्ता कंपनियों के अलग-अलग मानदंड होते हैं, लेकिन फिर भी हम आपको कुछ चीजों को बताने की कोशिश करेंगे, जिन्हें आमतौर पर बीमाकर्ता कंपनियां क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान से अलग कर देती हैं -

  • दांतों से संबंधित कोई भी समस्या या इलाज (और पढ़ें - दांत में दर्द के लक्षण)
  • कॉस्मेटिक सर्जरी पर होने वाला खर्च
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से होने वाला मेडिकल खर्च
  • बांझपन या प्रजनन से संबंधित किसी भी इलाज का खर्च
  • यौन संचारित रोग का मेडिकल खर्च
  • ऐसे गंभीर रोगों पर होने वाला खर्च जो आमतौर पर तंबाकू, धूम्रपान, शराब या अन्य किसी मादक पदार्थ को लेने से विकसित होते हैं।
  • लड़ाई-झगड़े या सैन्य हमलों आदि के कारण होने वाली गंभीर बीमारियों आदि पर होने वाला मेडिकल खर्च
  • अंदरूनी या बाहरी जन्मजात स्थितियों के कारण होने वाली गंभीर बीमारियों पर खर्च

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या-क्या कवर होता है)

किन बीमारियों को क्रिटिकल इलनेस कहा जाता है
myUpchar बीमा प्लस हेल्थ इन्शुरन्स सहित तमाम हेल्थ इन्शुरन्स में भी कुछ गंभीर बीमारियों के लिए क्लेम दिया जाता है। हालांकि, इसके लिए अलग से क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेने का सुझाव दिया जाता है। अलग-अलग इन्शुरन्स कंपनियां क्रिटिकल इलनेस के तहत कई तरह की बीमारियों को कवर करती हैं। आमतौर पर कुछ गंभीर बीमारियों को सभी कंपनियां कवर करती हैं, जबकि इन्शुरन्स कंपनियां अपने स्तर पर कुछ अन्य बीमारियों को भी क्रिटकल इलनेस कैटेगरी में रखती हैं, जबकि कुछ आम गंभीर बीमारियों को नीचे दी गई लिस्ट में से निकाल भी सकती हैं।

1 कैंसर से कभी प्रमुख प्रकार
2 खास गंभीरता तक के हार्ट अटैक
3 कोरोनरी आर्टरी बाई-पास सर्जरी
4 स्ट्रोक या आघात
5 किडनी फेलियर
6 कोमा
7 लकवा या पैरालिसिस (हाथ या पैर का बेकार होना)
8 हार्ट वाल्व सर्जरी
9 अंधापन (दृष्टि खो देना)
10 बहरापन (सुनवाई न देना)
11 बोलने में असमर्थ होना
12 मल्टीपल स्क्लेरोसिस
13 फुलमिनेंट हेपेटाइटिस
14 मेजर ऑर्गन या बोन मैरो ट्रांसप्लांट
15 प्राइमरी पल्मनरी हाइपरटेंशन
16 अल्जाइमर रोग / गंभीर मनोभ्रंश (डिमेंशिया)
17 महाधमनी के लिए सर्जरी
18 गंभीर रूप से जलना
19 लाइलाज बीमारियां (टर्मिनल इलनेस)
20 रक्तधान के कारण या व्यवसाय के कारण एचआईवी होना
21 अंतिम चरण की फेफड़ों की बीमारी
22 अंतिम चरण की लिवर की बीमारी
23 मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
24 पार्किंसंस रोग
25 अप्लास्टिक एनीमिया
26 कोरोनरी आर्टरी की एंजिप्लास्टी और अन्य सर्जिकल ट्रीटमेंट
27 बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस
28 बिनाइन ब्रेन ट्यूमर
29 वायरल एन्सेफलाइटिस
30 मोटर नूरोन रोग
31 अपैलिक सिंड्रोम
32 स्वयं कार्य करने में असमर्थ होना
33 मेजर हेड ट्रॉमा
34 अन्य गंभीर कोरोनरी धमनी रोग
35 पोलियो
36 प्रोग्रेसिव स्क्लेरोडर्मा
37 ल्यूपस नेफ्रैटिस के साथ सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स और लाइफ इन्शुरन्स में अंतर होता है)

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स किसके लिए अच्छा विकल्प है?

गंभीर रोग किसी को भी हो सकते हैं और जिस प्रकार हमारा लाइफस्टाइल खराब होता जा रहा है व साथ ही नई-नई बीमारियां दस्तखत दे रही हैं, ऐसे में हर किसी के लिए क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स कवर जरूरी हो गया है। जब परिवार में किसी व्यक्ति को अचानक से कोई गंभीर रोग हो जाता है, तो उसके इलाज पर होने वाला खर्च आपकी वित्तीय स्थिति को कमजोर बना देता है। गरीब या मध्यम वर्ग के लोगों के लिए किसी गंभीर रोग का इलाज करवाना असंभव हो जाता है।

इस प्रकार यह हेल्थ इन्शुरन्स ऐसी स्थितियों में वित्तीय रूप से मददगार साबित होता है। अपने व परिवार के अनुसार एक उचित क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेना हर किसी के लिए एक अच्छा विकल्प है, ताकि आप असामान्य स्थितियों में स्वास्थ्य और वित्तीय रूप से सुरक्षित रह सकें। नीचे कुछ मुख्य पॉइंट बताए गए हैं, जो बताते हैं कि क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स खरीदना किनके लिए जरूरी है -

  • जिनके परिवार में पहले किसी को गंभीर रोग रह चुका है -
    जिनके परिवार में किसी विशेष रोग की फैमिली हिस्ट्री रही है, उनमें उस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स एक लाभदायक ऑप्शन हो सकता है, जो स्वास्थ्य और फाइनेंशियल कंडीशन दोनों के लिए जरूरी है।
     
  • जिन पर पर पैसे की जिम्मेदारियां हैं -
    यदि आप अपने परिवार में अकेले ही कमाने वाले हैं और सारे घर का खर्च आपके ऊपर ही है, तो क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान आपके लिए बेहद जरूरी है।
     
  • महिलाएं -
    पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कैंसर व अन्य कई गंभीर रोगों के मामले अधिक पाए जाते हैं, इसलिए उनके लिए भी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स एक अच्छा विकल्प हो सकता है। भारत में अधिकतर महिलाएं घर का कामकाज संभालती हैं, ऐसे में कोई मेडिकल इमर्जेंसी होने पर उन्हें वित्तिय रूप से परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
     
  • एक विशेष आयु वर्ग के व्यक्ति -
    जब आप एक निश्चित उम्र (आमतौर पर 40) पार कर लेते हैं, तो गंभीर रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स की मदद से आप इन बीमारियों से लड़ने के लिए खुद को वित्तिय रूप से तैयार रख सकते हैं।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या कवर नहीं होता है?)

क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स लेने से पहले ध्यान देने योग्य बातें क्या हैं?

गंभीर रोगों का इलाज आमतौर पर लंबे समय तक चलता है। आनुवंशिक रोगों के अलावा एक व्यस्त जीवनशैली भी कई गंभीर रोग होने के खतरे को बढ़ा सकती है। इसलिए ऐसी अचानक से आने वाली समस्याओं के लिए आपको पहले से ही तैयार रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स का कोई भी प्लान लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • इस बात पर गौर करें कि यदि आपको किसी विशेष रोग का खतरा है, तो वह क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के प्लान में शामिल है या नहीं।
  • इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल खर्च का अंदाजा लगाएं, ताकि उसके अनुसार क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के उपयुक्त प्लान का चुनाव किया जा सके।
  • इन्शुरन्स का प्लान लेने से पहले उसके वेटिंग पीरियड का पता लगा लें, ताकि आप यह सुनिश्चित कर सकें कि आवश्यकता पड़ने पर आप कितने समय बाद क्लेम कर सकते हैं।
  • किसी अच्छे क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स प्लान का चुनाव करें, जो अन्य कई लाभ व सुविधा दे, जैसे ऑर्गन डोनर कवर और वैकल्पिक उपचार आदि।

(और पढ़ें - फैमिली फ्लोटर हेल्थ इन्शुरन्स क्या होता है)

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