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संसद की एक चयन समिति ने सरोगेसी विधेयक को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सुझाव यह है कि सरोगेट मदर बनने के लिए किसी करीबी जान-पहचान वाली महिला के चयन की शर्त को हटा दिया जाए। समिति के सुझावों के मुताबिक सरोगेट मदर बनने की इच्छा रखने वाली हर महिला को इसका अधिकार मिलना चाहिए।

बिल की जांच करने वाली राज्यसभा की समिति ने तर्क दिया कि सरोगेट मां को 'करीबी रिश्तेदार' तक सीमित रखने से सरोगेट मांओं की उपलब्धता प्रभावित होती है। यानी जो महिलाएं इस काम के लिए इच्छुक हैं वो इससे वंचित रह जाती हैं। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि एक इच्छुक महिला एक सरोगेट मां के रूप में बेहतर काम कर सकती है, लिहाजा इन सुझावों को गौर करते हुए अन्य महिला को सरोगेसी की अनुमति दी जाएं।

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क्या है संसदीय पैनल की सिफारिश?
सुझावों के तहत संसदीय समिति ने 'सरोगेसी (रेगुलेशन) बिल 2019' में कुछ बदलाव करने की बात कही है। कमिटी का कहना है कि जिन दंपतियों की संतान नहीं है, उनके लिए सरोगेट मदर विकल्प केवल जान-पहचान या करीबी महिलाओं तक सीमित न रहना चाहिए। यानी जो भी महिला सरोगेट मदर बनने की इच्छा रखती है, उसे यह भूमिका निभाने की अनुमति दी जानी चाहिए। इससे ऐसे दंपतियों के लिए नए विकल्प खुलेंगे और वे माता-पिता बनने की बेहतर उम्मीद करेंगे।

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इसके अलावा पैनल ने 35 से 45 साल के बीच की उम्र वाली महिलाओं, सिंगल महिलाओं (चाहे विधवा हो या तलाकशुदा) और भारतीय मूल की किसी भी महिला को सरोगेसी की सुविधा का इस्तेमाल करने की छूट देने का सुझाव दिया है।

बीमा कवर को भी बढ़ाया जाए
संसदीय समिति का कहना है कि सरोगेट मदर की भूमिका निभाने के लिए ‘करीबी रिश्तेदार’  को ही चुनने वाली शर्त जरूरतमंद दंपती के लिए लगभग सभी रास्ते सीमित कर देती है। इससे वास्तव में इस सुविधा का लाभ उठाने के इच्छुक दंपतियों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी कारण समिति ने बिल में शामिल इस अनिवार्यता को हटाने का सुझाव दिया है। इतना ही नहीं कमिटी का नेतृत्व कर रहे बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव ने सरोगेट मदर के लिए प्रस्तावित बीमा कवर को बढ़ाने की बात की है। समिति के पैनल ने सुझाव दिया है कि बीमे की अवधि 16 महीने से बढ़ाकर 36 महीने की जानी चाहिए।

क्या है सरोगेसी?
सरोगेसी संतान प्राप्त करने का प्रबंध है। इस आमतौर पर कानूनी समझौते के तहत अंजाम दिया जाता है। इसके तहत एक महिला किसी और व्यक्ति को संतान देने के लिए अपनी सहमति से अपनी कोख किराए पर देती है। वह उस व्यक्ति को बच्चा प्रदान करने के लिए गर्भधारण करती है। समझौते के तहत बच्चे पर सरोगेट महिला का किसी प्रकार का दावा नहीं हो सकता। बच्चे के जन्म के बाद सरोगेट मां को कानूनन उस दंपती को वह बच्चा सौंपना होता है, जो बाद में उसके मां-पिता बनते हैं।

सरोगेट मदर के पोषण का ध्यान रखना जरूरी
समिति ने सरोगेट मां को उचित चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज देने के अलावा अलग से मुआवजा देने की भी सिफारिश की है। इस विकल्प के कारणों में सरोगेट महिला की पोषण संबंधी आवश्यकताओं और गर्भावस्था के दौरान पहने जाने वाले कपड़े आदि चीजें शामिल हैं।

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