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महिलाओं के जीवन में मां बनना सबसे बड़ा सुख माना जाता है लेकिन आजकल की आधुनिक जीवनशैली और अन्‍य कारणों की वजह से अब महिलाओं में बांझपन यानि इनफर्टिलिटी की समस्‍या बढ़ रही है। अगर आप भी बांझपन का शिकार हैं या इससे बचना चाहती हैं तो आइए जानते हैं इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

बांझपन वह स्थिति है जिसमें महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। अगर कोई महिला प्रयास करने के बाद भी 12 महीने से अधिक समय तक गर्भधारण नहीं कर पाती है तो इसका मतलब है कि वो महिला बांझपन का शिकार है। गौरतलब है कि गर्भधारण न हो पाने का कारण पुरुष बांझपन भी हो सकता है।

कुछ महिलाएं शादी के बाद कभी कंसीव नहीं कर पाती हैं तो कुछ स्त्रियों को एक शिशु को जन्‍म देने के बाद दूसरी बार गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। इस तरह बांझपन दो प्रकार का होता है।

पुरुषों में प्रजनन क्षमता उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्‍या पर निर्भर करती है। अगर संभोग के दौरान इरेक्‍शन होने पर पुरुष के शुक्राणुओं की संख्‍या कम होती है या स्‍पर्म कमजोर होते हैं तो इस परिस्थिति में उसकी महिला पार्टनर गर्भधारण कर पाने में असफल रहती है।

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक भारत में बांझपन से ग्रस्‍त महिलाओं की संख्‍या 9% से 16.8% के बीच है। भारतीय राज्यों में बांझपन की स्थिति हर राज्य में भिन्न है जैसे उत्तर प्रदेश में 3.7 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 5 प्रतिशत और कश्मीर में 15 प्रतिशत महिलाएं बांझपन से ग्रस्‍त हैं। 

  1. बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) के लक्षण - Infertility Symptoms in Hindi
  2. बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) के कारण - Infertility Causes in Hindi
  3. बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) से बचाव - Prevention of Infertility in Hindi
  4. बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) की जांच - Diagnosis of Infertility in Hindi
  5. बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) का इलाज - Infertility Treatment in Hindi
  6. प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार
  7. बांझपन (प्रजनन क्षमता बढ़ाने) के घरेलू उपाय
  8. क्या है संबंध बांझपन और वैरीकोसेल में?
  9. बांझपन की दवा - Medicines for Infertility in Hindi
  10. बांझपन की दवा - OTC Medicines for Infertility in Hindi

बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) के लक्षण - Infertility Symptoms in Hindi

महिलाओं में बांझपन के लक्षण - Female Infertility Symptoms in Hindi

  • लम्बे समय तक गर्भधारण में असमर्थता ही बांझपन का सबसे मुख्‍य लक्षण है।
  • अगर किसी महिला का मासिक धर्म 35 दिन या इससे ज्‍यादा दिन का हो तो ये बांझपन का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा बहुत कम दिनों की माहवारी या 21 दिन से पहले माहवारी का आना अनियमित माहवारी कहलाता है जोकि बांझपन बन सकता है।  
  • चेहरे पर अनचाहे बाल आना या सिर के बालों का झड़ना भी महिलाओं में इनफर्टिलिटी की वजह से हो सकता है।

पुरुषों में बांझपन के लक्षण - Male Infertility Symptoms in Hindi

  • पुरुषों में इनफर्टिलिटी का प्रमुख लक्षण उनकी महिला साथी का लंबे समय तक गर्भधारण ना कर पाना है।
  • स्खलन होने में दिक्‍कत आना या स्‍खलन के दौरान फ्लूइड का कम मात्रा में निकलना, यौन इच्‍छा में कमी आना या इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन की समस्‍या रहना पुरुषों में इनफर्टिलिटी के लक्षण हो सकते हैं।
  • टेस्टिकल के आसपस वाले हिस्‍से में गांठ, दर्द या सूजन होना।
  • बार-बार सांस से संबंधित संक्रमण होना।
  • असामान्‍य रूप से छाती का बढ़ना (गाइनेकोमास्‍टिया)
  • चेहरे और शरीर पर बालों का कम होना या क्रोमोसोमल या हार्मोनल असामान्‍य होना।
  • सामान्‍य से कम स्‍पर्म काउंट होना (वीर्य के प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से कम शुक्राणु या प्रति शुक्राणु की संख्या 39 मिलियन से कम होनी)।

बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) के कारण - Infertility Causes in Hindi

महिलाओं में बांझपन के कारण - Female Infertility in Hindi

  • फैलोपियन ट्यूब अंडे को अंडाशय से गर्भाशय तक पहुंचाती है, जहाँ भ्रूण का विकास होता है। पेल्विक में संक्रमण या सर्जरी के कारण फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंच सकता है जिससे शुक्राणुओं को अंडों तक पहुंचने में दिक्‍कत आती है और इसी वजह से महिलाओं में बांझपन उत्‍पन्‍न होता है।
  • महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। शरीर में सामान्‍य हार्मोनल परिवर्तन ना हो पाने की स्थिति में अंडाशय से अंडे नहीं निकल पाते हैं।
  • गर्भाशय की असामान्य संरचना, पॉलीप्स या फाइब्रॉएड के कारण बांझपन हो सकता है।
  • तनाव भी महिलाओं में बांझपन का प्रमुख कारण है।
  • महिलाओं की ओवरी 40 वर्ष की आयु के बाद काम करना बंद कर देती है। अगर इस उम्र से पहले किसी महिला की ओवरी काम करना बंद कर देती है तो इसकी वजह कोई बीमारी, सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन हो सकती है।
  • पीसीओएस की बीमारी के कारण भी आज अधिकतर महिलाएं बांझपन का शिकार हो रही हैं। इस बीमारी में फैलोपियन ट्यूब में सिस्‍ट बन जाते हैं जिसके कारण महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

पुरुषों में बांझपन के कारण - Male Infertility in Hindi

  • 90 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में बांझपन का कारण स्‍पर्म की खराब क्‍वालिटी और कम संख्‍या है। इसके अलावा किसी शारीरिक बीमारी, हार्मोंस में असंतुलन और अनुवांशिक विकार के कारण भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्‍या हो सकती है।
  • सबसे पहले पुरुषों में इनफर्टिलिटी का संबंध प्‍यू‍बर्टी की उम्र के दौरान जननांगों के विकास और बनावट पर निर्भर करता है। पुरुषों में कम से कम एक टेस्टिकल ठीक तरह से कार्य करना चाहिए और शरीर टेस्‍टोस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोन बना पाने में समर्थ हो ताकि स्‍पर्म के उत्‍पादन को ट्रिगर और बनाए रखा जा सके।
  • वीर्य में पर्याप्‍त मात्रा में शुक्राणुओं का बनना जरूरी है। अगर वीर्य में स्‍पर्म काउंट कम होता है तो इससे महिला को गर्भधारण करने में कठिनाई आती है। वीर्य में स्‍पर्म काउंट का कम बनना पुरुषों में इनफर्टिलिटी का कारण है।
  • स्‍पर्म क्रियाशील और एक जगह से दूसरी जगह पर जाने में समर्थ होने चाहिए। अगर स्‍पर्म का कार्य या मूवमेंट असामान्‍य होगी तो स्‍पर्म पार्टनर के अंडे तक पहुंच पाने में असमर्थ रहते हैं। स्‍पर्म के अक्रियाशील होने के कारण भी पुरुषों में बांझपन हो सकता है।
  • पुरुषों में वेरिकोसेल के कारण भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। इसमें नसों में सूजन होने के कारण टेस्टिकल सूख जाते हैं। वेरिकोसेल के कारण इनफर्टिलिटी होने के स्‍पष्‍ट कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है। वेरिकोसेल से स्‍पर्म की क्‍वालिटी पर भी खराब असर पड़ता है।
  • कुछ इंफेक्‍शन स्‍पर्म के उत्‍पादन या स्‍पर्म की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से घाव बन सकता है जोकि स्‍पर्म के रास्‍ते को बंद कर देता है। गोनोरिआ, एचआईवी या कोई यौन संक्रमित संक्रमण के कारण ऐसा हो सकता है। कुछ संक्रमण की वजह से तो टेस्टिकुली हमेशा के लिए क्षतिग्रस्‍त हो जाते हैं।
  • एंटी-स्‍पर्म एंटी-बॉडीज़ को इम्‍यून सिस्‍टम की कोशिकाएं माना जाता है। ये एंटी-बॉडीज़ गलती से स्‍पर्म को शरीर के लिए हानिकारक समझ लेती हैं और फिर उसे नष्‍ट करने का प्रयास करने लगती हैं। इस वजह से भी पुरुषों में बांझपन हो सकता है।
  • कैंसर या घातक ट्यूमर भी पुरुषों के प्रजनन अंगों को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है। प्रजनन से संबंधित हार्मोंस स्रावित करने वाली ग्रंथियों पर ट्यूमर या कैंसर का असर पड़ता है जिससे पुरुषों में इनफर्टिलिटी पैदा हो सकती है। कुछ मामलों में ट्यूमर का इलाज करने के लिए की गई सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है।
  • हार्मोंस में असंतुलन के कारण भी पुरुषों में बांझपन बढ़ सकता है। लो टेस्‍टोस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोंस में असंतुलन के कारण पुरुषों में बांझपन बढ़ सकता है।
  • शरीर में कई ट्यूब्‍स होती है जो स्‍पर्म को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती हैं। कई कारणों जैसे कि सर्जरी से लगी चोट, संक्रमण की वजह से ये ट्यूब्‍स बंद हो सकती हैं जिस वजह से टेस्टिकल सूख जाते हैं।
  • संभोग के लिए इरेक्‍शन ना हो पाने की स्थिति भी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है। इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन, प्री-मैच्‍योर इजैकुलेशन, संभोग के दौरान दर्द होने जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • ग्‍लूटन के प्रति संवेदनशील होने के कारण भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता कम हो सकती है। अपने आहार में ग्‍लूटन की मात्रा को कम कर इस समस्‍या से बचा जा सकता है।
  • टेस्‍टोस्‍टेरोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी, लंबे समय तक एनाबोलिक स्‍टेरॉएड का इस्‍तेमाल, कैंसर की दवाएं, एंटी-फंगल दवाएं, अल्‍सर की कुछ दवाओं के कारण भी पुरुषों में फर्टिलिटी पॉवर घट सकती है।

बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) से बचाव - Prevention of Infertility in Hindi

महिलाओं में इनफर्टिलिटी से बचाव 

बांझपन से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार करना सबसे जरूरी है। यहां कुछ ऐसे सरल सुझाव दिए गए हैं जिन्हें अपनाकर इनफर्टिलिटी से बच सकते हैं।   

संतुलित आहार खाएं

  • बांझपन को दूर करने के लिए उचित भोजन करना बहुत ज़रूरी है। अपने आहार में जस्ता, नाइट्रिक ऑक्साइड और विटामिन सी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्वों को शामिल करें।
  • ताजी फल-सब्जियां खाएं। शतावरी और ब्रोकली से फर्टिलिटी बढ़ती है। इसके अलावा बादाम, खजूर, अंजीर जैसे सूखे-मेवे खाएं।
  • आपको रोज़ कम से कम 5-6 खजूर या किशमिश खानी चाहिए। डेयरी उत्पाद, लहसुन, दालचीनी, इलायची  को अपने आहार में शामिल करें।
  • सूरजमुखी के बीज खाएं। चकोतरा और संतरे का ताजा रस पीएं। फुल फैट योगर्ट और आइस्‍क्रमी से भी फर्टिलिटी पॉवर बढ़ती है।
  • जो महिलाएं अपनी फर्टिलिटी पॉवर को बढ़ाना चाहती हैं उन्‍हें अपने आहार में टमाटर, दालें, बींस और एवोकैडो को शामिल करना चाहिए।
  • अनार में फोलिक एसिड और विटामिन बी प्रचुर मात्रा में होता है। फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए महिलाओं को अनार का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • विटामिन डी के लिए अंडे खाएं और ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्‍त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। कंसीव करने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए रोज़ एक केला खाएं।
  • अश्‍वगंधा शरीर में हार्मोंस के संतुलन को बनाए रखता है और प्रजनन अंगों की समुचित कार्यक्षमता को बढ़ावा देती है। बार-बार गर्भपात होने के कारण शिथिल गर्भाशय को समुचित आकार देकर उसे बनाने में अश्‍वगंधा मदद करता है। महिलाओं को अपने आहार में दालचीनी को भी जरूर शामिल करना चाहिए।

व्यायाम करें

  • अर्धचक्रासन: ये आसन उन महिलाओं को करना चाहिए जिन्‍हें संतान की प्राप्‍ति नहीं हो पा रही है। इस योगासन को करने से शरीर के सभी अंगों की मांसपेशियों में रक्‍त संचार बेहतर हो जाता है और सभी ग्रंथियां भी हार्मोंस का स्राव बेहतर तरीके से कर पाती हैं।
  • बालासन: गर्भाशय के लिए बालासन बहुत फायदेमंद होता है। इस आसन में गर्भाशय पर दबाव पड़ता है जिससे उसकी अक्षमताएं दूर हो जाती हैं। इस तरह बालासन से गर्भधारण करने की संभावना बढ़ जाती है।
  • नौकासन: इस आसन को अधिक वजन वाली महिलाएं भी कर सकती हैं। इस आसन से भी गर्भाशय पर दबाव पड़ता है जिससे गर्भधारण में आ रही समस्‍याएं दूर हो जाती हैं।

इन खाद्य पदार्थों से रहें दूर

  • धूम्रपान और शराब बांझपन का प्रमुख कारण हैं इसलिए इनसे दूर रहें।
  • तैलीय भोजन और सफेद ब्रैड जैसे परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट से बचें।
  • प्रिज़र्वेटिव्स फूड, कैफीन और मांस का सेवन कम करें।
  • फ्रेंच फ्राइज़, तली हुई और मीठी चीज़ों का बहुत कम सेवन करें।
  • इसके अलावा कोल्‍ड ड्रिंक आदि भी ना पीएं। कॉफी और चाय भी कम पीएं क्‍योंकि इनमें कैफीन की मात्रा अधिक होती है जिसका फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है।

ये आदतें छोड़ दें

  • मासिक धर्म के दिनों में तैलीय और मसालेदार भोजन ना लें।
  • मारिजुआना या कोकेन का सेवन ना करें।
  • धूम्रपान करने से ओवरी की उम्र और अंडों की आपूर्ति कम हो जाती है। धूम्रपान फैलोपियन ट्यूब और सर्विक्‍स को भी नुकसान पहुंचाता है जिससे एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी या गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सिगरेट बिलकुल ना पीएं।
  • शराब का सेवन ना करें। गर्भधारण से पूर्व शराब का सेवन करने वाली महिलाओं में ऑव्‍यूलेशन विकार हो सकता है इसलिए शराब से दूर रहें।
  • अगर आपका वजन बहुत ज्‍यादा या कम है तो उसे भी संतुलित करें। इनफर्टिलिटी से जूझ रही महिलाओं को अपना वजन संतुलित रखना चाहिए।
  • आधुनिक युग में बांझपन का प्रमुख कारण तनाव है। तनाव से दूर रहकर बांझपन की समस्‍या से बचा जा सकता है। मानसिक शांति पाने के लिए रोज़ सुबह प्राणायाम करें।

पुरुषों में इनफर्टिलिटी से बचाव 

पुरुषों में होने वाली कई प्रकार की इनफर्टिलिटी को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, फिर भी कुछ चीज़ों से दूर रहकर पुरुष बांझपन की समस्‍या से बच सकते हैं। जैसे कि :

  • धूम्रपान ना करें।
  • शराब का सेवन कम या बिलकुल बंद कर दें।
  • गैरकानूनी ड्रग्स का इस्‍तेमाल ना करें।
  • वजन संतुलित रखें।
  • नसबंदी ना करवाएं।
  • टेस्टिकल्‍स पर लंबे समय तक हीट पैदा करने वाली चीज़ों से बचें।
  • तनाव से दूर रहें।
  • कीटनाशक, भारी धातु और अन्‍य विषाक्‍त चीज़ों से दूर रहें।

बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) की जांच - Diagnosis of Infertility in Hindi

महिलाओं में बांझपन की जांच 

अगर कोई महिला लंबे समय से गर्भधारण नहीं कर पा रही है तो उसे डॉक्‍टर के निर्देश पर निम्‍न जांच करवानी चाहिए:

  • ओव्यूलेशन टेस्ट: इसमें किट से घर पर ही ओव्यूलेशन परीक्षण कर सकती हैं।
  • हार्मोनल टेस्‍ट: ल्‍युटनाइलिंग हार्मोन और प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन की जांच से भी बांझपन का पता लग सकता है। ल्युटनाइज़िंग हॉर्मोन का स्तर ओव्यूलेशन से पहले बढ़ता है जबकि प्रोजेस्टेरोन हार्मोन ओव्यूलेशन के बाद उत्पादित हार्मोन होता है। इन दोनों हार्मोंस के टेस्‍ट से ये पता चलता है कि ओव्यूलेशन हो रहा है या नहीं।  इसके अलावा प्रोलैक्टिन हार्मोन के स्तर की भी जांच की जाती है।
  • हिस्टेरोसल पिंगोग्राफी: ये एक एक्स-रे परीक्षण है। इससे गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और उनके आस-पास का हिस्‍सा देखा जा सकता है। एक्‍स-रे रिपोर्ट में गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब को लगी कोई चोट या असामान्‍यता को देखा जा सकता है। इसमें अंडे की फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय तक जाने की रूकावट भी देख सकते हैं।
  • ओवेरियन रिज़र्व टेस्ट: ओव्यूलेशन के लिए उपलब्ध अंडे की गुणवत्ता और मात्रा को जांचने में मदद करता है। जिन महिलाओं में अंडे कम होने का जोखिम होता है, जैसे कि 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, उनके लिए रक्त और इमेजिंग टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • थायरॉयड और पिट्यूटरी हार्मोन की जांच: इसके अलावा प्रजनन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले ओव्यूलेटरी हॉर्मोन के स्तर के साथ-साथ थायरॉयड और पिट्यूटरी हार्मोन  की जांच भी की जाती है।
  • इमेजिंग टेस्ट: इसमें पेल्विक अल्ट्रासाउंड होता है जोकि गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में हुए किसी रोग की जांच करने के लिए किया जा सकता है।

पुरुषों में बांझपन की जांच

इनफर्टिलिटी से ग्रस्‍त पुरुषों में इसके एक से ज्‍यादा कारण हो सकते हैं इसलिए महिला और पुरुष दोनों को ही फर्टिलिटी जांच करवानी चाहिए। बांझपन का पता लगाने के लिए कई टेस्‍ट होते हैं जिनमें निम्‍न टेस्‍ट शामिल हैं :

  • सामान्‍य शारीरिक परीक्षण या कोई पुरानी बीमारी: इस टेस्‍ट के अंतर्गत डॉक्‍टर आपके जननांगों की जांच करते हैं और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक जैसे कि किसी अनुवांशिक स्थिति, पुराने रोग, बीमारियों, चोट या सर्जरी के बारे में पूछते हैं। डॉक्टर आपसे प्‍यूबर्टी उम्र के दौरान आपकी यौन आदतों और यौन विकास के बारे में भी पूछ सकतें हैं।
  • वीर्य की जांच: पुरुषों के वीर्य का सैंपल लिया जाता है। पुरुष हस्‍तमैथुन या डॉक्‍टर के क्‍लीनिक में एक कंटेनर में इजैकुलेशन द्वारा वीर्य का सैंपल दे सकते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक मान्‍यता की वजह से कुछ पुरुष सीमन कलेक्‍शन के अन्‍य तरीके को अहमियत देते हैं। कुछ मामलों में संभोग के दौरान विशेष प्रकार के कंडोम द्वारा वीर्य का सैंपल लिया जाता है। इसके बाद शुक्राणुओं की संख्‍या की जांच करने के लिए वीर्य को लैब भेजा जाता है और उसके आकर और मूवमेंट की असामान्‍यता का पता लगाया जाता है। इसके अलावा वीर्य में संक्रमण आदि की भी जांच की जाती है। अगर पुरुषों का वीर्य का स्‍तर सामान्‍य आता है तो किसी और टेस्‍ट से पहले डॉक्‍टर उनकी महिला पार्टनर का फर्टिलिटी टेस्‍ट करवाने की सलाह देते हैं।

इसके अलावा इनफर्टिलिटी का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर आपको कई और टेस्‍ट करवाने की सलाह दे सकते हैं जिनमें निम्‍न जांच शामिल हैं:

  • स्‍क्रोटल अल्‍ट्रासाउंड: इस जांच से डॉक्टर को अंडकोष और सहायक संरचनाओं में अवरोधों या अन्य समस्याओं के बारे में पता चलता है। इससे टेस्टिकल्‍स के अंदर या सहायक संरचना में किसी दिक्‍कत का पता चल पाता है।
  • हार्मोंस की जांच: पिट्यूट्री ग्‍लैंड, हाइपो-थैलेमस द्वारा हार्मोंस का उत्‍पादइन किया जाता है और यौन विकास और शुक्राणुओं के उत्‍पादन में टेस्टिकल्‍स अहम भूमिका निभाते हैं। अन्‍य हार्मोनल या अंग की कार्यप्रणाली में असामान्‍यता होने पर भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। टेस्‍टेस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोंस के स्‍तर को मापने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट करवाया जाता है।
  • पोस्ट ईजैक्यूलैशन यूरीनालिसिस: मूत्र में उपस्थित शुक्राणुओं से ये पता लगाया जा सकता है कि शुक्राणु इजैकुलेशन के दौरान लिंग से बाहर निकलने की बजाय मूत्राशय में वापिस जा रहे हैं।
  • आनुवंशिक टेस्‍ट: किसी अनुवांशिक कारण की वजह से भी स्‍पर्म की संख्‍या कम हो सकती है। ब्‍लड टेस्‍ट द्वारा पता लगाया जा सकता है कि किस आनुवांशिक कारण की वजह से पुरुष में इनफर्टिलिटी हो रही है। कई जन्‍मजात या आनुवांशिक सिंड्रोम का पता लगाने के लिए जेनेटिक टेस्‍ट करवाया जाता है।
  • टेस्टिकुलर बायोप्‍सी: इस जांच में सुईं की मदद से टेस्टिकल से सैंपल लिए जाते हैं। अगर टेस्टिकुलर बायोप्‍सी में स्‍पर्म का उत्‍पादन सामान्‍य रहा तो इसका मतलब है कि पुरुष में इनफर्टिलिटी कारण ब्‍लॉकेज या स्‍पर्म के स्‍थानांतरण से संबंधित कोई अन्‍य समस्‍या है।

बांझपन (प्रजनन क्षमता में कमी) का इलाज - Infertility Treatment in Hindi

महिलाओं में बांझपन का इलाज - Female Infertility Treatments in Hindi

चूंकि बांझपन एक जटिल विकार है इसलिए डॉ नरूला कहती हैं कि, “इनफर्टिलिटी का इलाज इसके होने के कारण, आयु, यह समस्या कितने समय से है और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। बांझपन के इलाज में वित्तीय, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति महत्‍व रखती है।“

आइए जानें आपके पास क्या विकल्प हैं इनफर्टिलिटी को दूर करने के लिए:

  • दवाएं: ओव्यूलेशन विकार के कारण गर्भधारण ना हो पाने की स्थिति में दवाओं से इलाज किया जाता है। ये दवाएं प्राकृतिक हार्मोन फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) की तरह काम करती हैं। इन दवाओं से ओव्यूलेशन को ट्रिगर किया जाता है।
  • आधुनिक तकनीक: प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किए गए तरीकों में शामिल हैं -
    • इन्ट्रायूट्राइन गर्भाधान (आईयूआई) - आईयूआई के दौरान, लाखों स्वस्थ शुक्राणुओं को गर्भाशय के अंदर ओव्यूलेशन के समय रखा जाता है।
    • आईवीएफ – इस प्रक्रिया में अंडे की कोशिकाओं को महिला के गर्भ से बाहर निकालकर उसे पुरुष के स्‍पर्म के साथ निषेचित किया जाता है। ये पूरी प्रक्रिया इनक्‍यूबेटर के अंदर होती है और इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन दिन का समय लगता है। भ्रूण के पर्याप्‍त विकास के बाद इसे वापिस महिला के गर्भ में पहुंचा दिया जाता है। इस प्रक्रिया के 12 से 15 दिनों तक महिला को आराम करने की सलाह दी जाती है।
  • सर्जरी: कई सर्जिकल प्रक्रियाएं बांझपन को ठीक या महिला प्रजनन क्षमता में सुधार ला सकती हैं। हालांकि, बांझपन के इलाज में अब ऊपर बताई गयी नई पद्धतियां आ चुकी हैं जिनके कारण सर्जरी बहुत ही कम की जाती है। गर्भधारण की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए लैप्रोस्कोपिक या हिस्ट्रोस्कोपी सर्जरी की जा सकती है। इसके अलावा फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध होने पर ट्यूबल सर्जरी भी की जा सकती है।

पुरुषों में बांझपन का इलाज - Male Infertility Treatments in Hindi

पुरुषों में बांझपन को दूर करने के लिए कई इलाज पद्धतियां मौजूद हैं। बांझपन के मामलों में महिला पार्टनर की भी जांच की जानी जरूरी है। पुरुषों में इनफर्टिलिटी का इलाज करने के निम्‍न तरीके हैं:

  • सर्जरी: वेरिकोसेले को सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। स्‍खलन में शुक्राणु मौजूद ना होने पर स्‍पर्म रिट्रीवल तकनीकों के ज़रिए टेस्टिकल्‍स या एपिडिडाइमिस के ज़रिए सीधे शुक्राणु डाले जाते हैं।
  • संक्रमण का इलाज: एंटी-बायोटिक इलाज से प्रजनन प्रणाली में हुए संक्रमण को ठीक किया जा सकत है लेकिन ये हर मामले में फर्टिलिटी पॉवर को दोबारा ला पाने में असमर्थ है।
  • संभोग समस्याओं का इलाज: दवाओं और काउंसलिंग से फर्टिलिटी से संबंधित बीमारियां जैसे कि इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन या प्रीमैच्‍योर इजैकुलेशन को ठीक किया जा सकता है।
  • हार्मोन ट्रीटमेंट और दवाएं: शरीर में किसी हार्मोन के कम या ज्‍यादा या उसके कार्य करने के तरीके में समस्‍या होने पर डॉक्‍टर आपको हार्मोन रिप्‍लेसमेंट या दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • सहायक प्रजनन तकनीक: इसे एआरटी भी कहा जाता है। इसमें सामान्‍य वीर्यस्‍खलन, सर्जिकल निष्कर्षण या डोनर से शुक्राणु प्राप्‍त किए जाते हैं। इसके बाद स्‍पर्म को महिला यौन मार्ग में डाल दिया जाता है।

जब ट्रीटमेंट काम नहीं कर पाती

कुछ दुर्लभ मामलों में पुरुषों के बांझपन का इलाज हो पाना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्‍टर किसी डोनर से स्‍पर्म लेने या बच्‍चा गोद लेने की सलाह देते हैं।

बांझपन की दवा - Medicines for Infertility in Hindi

बांझपन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
NorprogestNorprogest Tablet44
Humog HpHumog Hp 150 Iu/150 Iu Injection1399
MenopurMenopur Injection1176
SBL Adlumia fungosa DilutionSBL Adlumia fungosa Dilution 1000 CH86
Busag InjectionBusag 0.5 Mg Injection284
BusarlinBusarlin 0.5 Mg Injection329
BuselinBuselin 7 Mg Injection2317
GynarichGynarich Injection160
SupradopinSupradopin 0.5 Mg Injection307
Bjain Adlumia fungosa DilutionBjain Adlumia fungosa Dilution 1000 CH63
ZerelinZerelin 5 Mg Injection1760
SBL Quarz DilutionSBL Quarz Dilution 1000 CH86
Schwabe Adlumia fungosa CHSchwabe Adlumia fungosa 12 CH96
Bjain Quarz DilutionBjain Quarz Dilution 1000 CH63
MenogonMenogon 75 Iu/75 Iu Injection749
Schwabe Quarz CHSchwabe Quarz 1000 CH96

बांझपन की दवा - OTC medicines for Infertility in Hindi

बांझपन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Himalaya Speman TabletsHimalaya Speman Tablets112
Dabur Ashwagandha ChurnaDABUR ASHWAGANDHA CHURNA 100GM88
Hamdard Tila AzamHamdard Tila Azam40
Baidyanath Chandraprabha VatiBaidyanath Chandra Prabha Bati88
Dabur Stimulex OilDabur Stimulex Oil76
Hamdard Majun Shabab AwarHamdard Majun Shabab Awar151
Baidyanath Poorna ChandrodayaBaidyanath Poorna Chandrodaya Table164
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References

  1. American College of Obstetricians and Gynecologists. Evaluating Infertility. Washington, DC; USA
  2. National Institutes of Health. How is infertility diagnosed?. Eunice Kennedy Shriver National Institute of Child Health and Human Development. [internet].
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  4. MedlinePlus Medical: US National Library of Medicine; Infertility
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