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निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की अत्यधिक सिजेरियन सेक्शन या सी-सेक्शन आधारित डिलिवरी से भारत के परिवारों पर 5,000 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है। देश में बच्चों की जन्म दर, मृत्यु दर आदि से जुड़े डेटा इकट्ठा करने वाले तीन विश्वसनीय सरकारी संस्थानों सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस), सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) और राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) से लिए गए आंकड़ों की विश्लेषण रिपोर्ट से यह जानकारी निकलकर सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में भारत के निजी अस्पतालों में जितने सिजरेयिन बर्थ हुए, वे इस संबंध में निर्धारित सामान्य अंतरराष्ट्रीय अनुपात से 28.5 लाख ज्यादा थे। विश्लेषण के मुताबिक, ऐसे हरेक ऑपरेशन की औसत लागत 18 हजार रुपये आई है। इसका मतलब है कि 28.5 सिजेरियन डिलिवरी के लिए देशभर के परिवारों ने 5,130 करोड़ रुपये चुकाए थे।

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सीआरएस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में भारत में 2.6 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ था। वहीं, एसआरएस के मुताबिक, उस साल ग्रामीण भारत की जन्म दर 21.6 प्रतिशत रही थी, जबकि शहरी इलाकों में यह दर 16.7 प्रतिशत दर्ज की गई थी। उधर, स्वास्थ्य खर्च से जुड़ी एनएसओ की रिपोर्ट बताती है कि साल 2018 में ग्रामीण भारत की 21.3 प्रतिशत डिलिवरी और शहरी भारत की 47.8 प्रतिशत डिलिवरी प्राइवेट अस्पतालों में हुईं। इस तरह शहरों में स्थित निजी स्वास्थ्य संस्थानों में पैदा हुए बच्चों की संख्या 39.6 लाख रही, जबकि ग्रामीण भारत में 35.4 लाख बच्चे पैदा हुए। इस तरह प्राइवेट अस्पतालों ने उस साल 75 लाख बच्चों की डिलिवरी कराई।

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विश्लेषण रिपोर्ट कहती है कि प्राइवेट हेल्थ फैसिलिटी में सिजेरियन डिलिवीर की दर 55 प्रतिशत है, जबकि सरकारी अस्पतालों में केवल 17 प्रतिशत बच्चे ऑपरेशन के जरिये हुए। अगर इसे सिजेरियन डिलिवरी का मापदंड माना जाए तो पता चलता है कि प्राइवेट अस्पतालों में ऐसे 28.5 लाख अतिरिक्त ऑपरेशन किए गए, जोकि इससे जुड़े स्वीकार्य रेट से कहीं ज्यादा है। शहरों और ग्रामीण इलाकों में होने वाली ऐसी डिलिवरी की लागत में भी अंतर है। गांवों में जहां प्रत्येक सी-सेक्शन डिलिवरी की औसत कीमत 16,475 रुपये पाई गई, वहीं शहरों में इसकी औसत लागत 19,548 दर्ज की गई। सभी डिलिवरी के हिसाब से हरेक सिजेरियन ऑपरेशन की कीमत 18 हजार रुपये रही, जिसे 28.5 लाख से गुणा करने पर कुल लागत 5,130 करोड़ रुपये बैठती है।

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विश्लेषण से यह तो स्पष्ट हो गया कि प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन से होने वाली डिलिवरीज की संख्या तय मानक से कहीं ज्यादा है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में हुए 17 प्रतिशत सिजरेयिन ऑपरेशन भी अंतरराष्ट्रीय मापदंडों से अधिक ही हैं। रिपोर्ट कहती है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1985 में सिजेरियन सेक्शन के लिए 10 से 15 प्रतिशत तक का मापदंड तय किया था और सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन वाली डिलिवरी की दर इसे दो प्रतिशत ज्यादा है। बीते दो दशकों में देश में ऐसी डिलिवरी की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि 2005-06 में देशभर में हुई डिलिवरी में से नौ प्रतिशत सी-सेक्शन से की गई थीं। 2015 में यह दर 18 प्रतिशत हो गई, जो एनएसओ की ताजा रिपोर्ट में 28 प्रतिशत हो गई है।

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