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  1. सिजेरियन ऑपरेशन क्या होता है? - C Section kya hota hai in hindi?
  2. सिजेरियन ऑपरेशन क्यों की जाती है? - C Section delivery kab hoti hai?
  3. सिजेरियन ऑपरेशन होने से पहले की तैयारी - C-Section ki taiyari
  4. सिजेरियन ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - Cesarean Delivery kaise hoti hai?
  5. सिजेरियन ऑपरेशन के बाद देखभाल - Cesarean Delivery ke baad dekhbhal
  6. सिजेरियन ऑपरेशन के बाद सावधानियां - Cesarean Delivery hone ke baad savdhaniya
  7. सिजेरियन ऑपरेशन की जटिलताएं - C-Section me jatiltaye

गर्भवती महिला के पेट और गर्भाशय में चीरा काटकर की जाने वाली डिलीवरी (प्रसव) को सी-सेक्शन या सिजेरियन सेक्शन कहा जाता है। कुछ स्थितियों में सी-सेक्शन सर्जरी की योजना पहले ही तय कर ली जाती है। अन्य स्थितियों में, यह अनपेक्षित जटिलताओं की प्रतिक्रिया के रूप में की जाती है। 

आम तौर पर जब तक गर्भावस्था को 39 हफ्ते पूरे नहीं हो जाते, तब तक यह प्रयास किया जाता है कि बच्चा नॉर्मल डिलीवरी से हो जाए। हालांकि कभी कभी जटिलताओं की वजह से 39 हफ़्तों से पहले ही सी-सेक्शन सर्जरी करनी पड़ सकती है।

(और पढ़ें: नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी में से क्या है अधिक बेहतर)

आम तौर पर, सी-सेक्शन का सहारा तब लिया जाता है जब प्रसव के पारम्परिक तरीके (योनि से) में कठिनाई हो रही हो या नार्मल डिलीवरी से माँ या शिशु या दोनों को स्वास्थ्य या जान का खतरा हो। कभी कभी सी-सेक्शन की योजना पहले से ही बना ली जाती है लेकिन ज़्यादातर स्थितियों में यह तब की जाती है जब लेबर में जटिलताएं हो रही हों। 

निम्न कारणों की वजह से सी-सेक्शन डिलीवरी की जा सकती है:

  1. शिशु के साथ विकास संबंधी परेशानियां हों
  2. बच्चे का सिर जन्‍म नली (Birth Canal) से बड़ा हो
  3. बच्चे के पैर पहले बाहर आ रहे हों (Breech Birth)
  4. माँ को कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी हो, जैसे गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर या ह्रदय की कोई बीमारी
  5. माँ को सक्रिय जननांग दाद (Genital Herpes) हों जो डिलीवरी के समय बच्चे को भी होने का खतरा हो
  6. पहले सी-सेक्शन डिलीवरी हो चुकी है
  7. प्लेसेंटा (Placenta) की कोई समस्या, जैसे प्लेसेंटा पृथक्करण (Placenta Abruption) या प्लेसेंटा प्रिविआ (Placenta Previa)
  8. गर्भनाल (Umbilical Cord; अम्बिलिकल कॉर्ड) की कोई परेशानी
  9. शिशु को ऑक्सीजन आपूर्ति कम होना
  10. स्टॉल्ड लेबर (Stalled Labor) - जब महिला सक्रिय लेबर में हो और लेबर धीमा या बंद हो जाए
  11. बच्चे का कन्धा पहले बाहर आ रहा हो (Transverse Labor)
  12. गर्भ में एक से ज़्यादा बच्चे होना
  13. एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy) - भ्रूण का गर्भाशय के अलावा कहीं और स्थित होना
  14. वेसिक्युलर मोल (Vesicular Mole) - भ्रूण का न बढ़ना बल्कि सिर्फ प्लेसेंटल ऊतकों का असामान्य रूप से बढ़ना और गर्भाशय की दीवार (भित्ति) तक चले जाना, किसी किसी स्थिति में गर्भाशय से भी आगे फ़ैल जाना
  15. अन्य अर्ली प्रेगनेंसी कॉम्प्लीकेशन्स (Early Pregnancy Complications)

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Surgery)
    प्रक्रिया के दौरान मूत्रत्याग करने के लिए मूत्रमार्ग में एक कैथेटर (Cathetar) लगाया जाएगा। सर्जरी से पहले प्यूबिक हेयर (Pubic Hair; गुप्तांग के बाल) का ऊपरी हिस्सा शेव (बाल हटाना) किया जाता है। 

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

सारी तैयारियां हो जाने के बाद, डॉक्टर आपके जननांग से ऊपर पेट के निचले हिस्से में चीरा काटते हैं, जिसे 'बिकिनी कट' भी कहा जाता है। आम तौर पर यह श्रोणि (Pelvis) के ऊपर आड़ा (Horizontally) काटा जाता है। आपातकालीन स्थितियों में यह चीरा लम्बाई (Vertically) में भी काटा जा सकता है। 

पेट में चीरा काटने के बाद, जब गर्भाशय दिखने लगे, सर्जन गर्भाशय पर एक चीरा काटते हैं। इस चीरे के माध्यम से शिशु को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है। इस क्षेत्र को सर्जरी के दौरान ढक कर रखा जाता है ताकि आप प्रक्रिया न देख पाएं।

पहले डॉक्टर शिशु की नाक और मुँह को पोछेंगे जो द्रव से भरे हुए होते हैं। इसके बाद गर्भनाल को काटा जाता है। फिर नवजात शिशु को नर्सों को सौंप दिया जाता है ताकि वो उसे आपकी गोद में देने के लिए तैयार (साफ़) कर दें। 

इस दौरान, डॉक्टर महिला के गर्भाशय को और पेट को टांकों से सिल देते हैं। 

Procedure

  1. सर्जरी के बाद आपको आमतौर पर तीन से चार दिनों तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता होती है।
  2. गर्भाशय पर इस्तेमाल किये गए टाँके शरीर में स्वयं घुल जायेंगे। पेट पर लगाए टाँके कुछ दिनों में हटा दिए जायेंगे। 
  3. सर्जरी के बाद आपको रिकवरी रूम में ले जाया जायेगा जहां आपकी स्वास्थ्य अवस्था को मॉनिटर किया जायेगा। अगर शिशु पूरी तरह स्वस्थ है, तो वह भी आपके साथ रिकवरी रूम में रहेगा अन्यथा उसे नर्सरी या किसी अन्य वार्ड में रखा जायेगा जहाँ उसकी स्थिति पर भी निगरानी रखी जाएगी। 
  4. आपको IV द्वारा द्रव दिए जाएंगे जब तक आप खुद खाने या पीने में समर्थ नहीं हो जातीं। 
  5. आप शिशु को स्तनपान करवाने का भी प्रयास कर सकतीं हैं। 
  6. आपको दर्द के लिए भी दवाएं दी जा सकती हैं।
  7. सर्जरी के बाद जितना हो सके उतना आराम करें। सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी है और शरीर को इसके बाद आराम की बहुत आवश्यकता होती है। प्रयास करें कि आप कुछ महीनों तक घरेलु काम न करें और सिर्फ अपना और अपने बच्चे का ध्यान रखें। अगर सर्जरी के बाद, पूरी तरह रिकवर होने से पहले ही आप ज़्यादा थकाने वाले कार्यो करने लगतीं हैं और आराम नहीं करतीं तो इससे भविष्य में जटिलताएं हो सकती हैं। 
  8. बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें। सर्जरी के बाद, किसी भी प्रकार के तनाव से बचें।
  9. सर्जरी के बाद पोषण और आहार का ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है।
    (जानिये- डिलीवरी के बाद क्या खाएं क्या न खाएं)
  10. इस समय के बाद घाव का ध्यान रखें। घाव को साफ़ रखें और। घाव को गीला किया जा सकता है। हलके साबुन से घाव को धोएं। घाव को मिटने के लिए विटामिन ई क्रीम्स का भी प्रयोग किया जा सकता है। अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

scar after c-section

निम्न परेशानियां होने पर अपने डॉक्टर को सूचित करें:

  1. चीरे की जगह पर सूजन या जगह का लाल होना
  2. चीरे की जगह पर दर्द 100 °F से ज़्यादा बुखार होने पर (और पढ़ें – बुखार का घरेलू इलाज)
  3. योनि से बदबूदार स्त्राव
  4. योनि से भारी रक्तस्त्राव (और पढ़ें - योनि से रक्तस्राव के कारण)
  5. सांस लेने में परेशानी
  6. पैरों में सूजन या पैरों का लाल होना
  7. छाती में दर्द
  8. स्तन में दर्द

हर सर्जरी की तरह इस सर्जरी के बाद भी रिकवरी का समय इस पर निर्भर करता है कि सर्जरी के बाद मरीज़ की देखभाल कितने अच्छे से की जाती है। कम से कम छह हफ्ते लग सकते हैं पूर्ण रूप से रिकवर होने में। इस सर्जरी में रिकवरी में नार्मल डिलीवरी से ज़्यादा समय लगता है।

  1. सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी है और यह नॉर्मल डिलीवरी से ज़्यादा जोखिम भरी होती है।
  2. इस सर्जरी के बाद महिलाओं में संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्त्राव, रक्त के थक्के, प्रसवोत्तर के बाद ज़्यादा दर्द या रिकवरी में ज़्यादा समय लगने की संभावना ज़्यादा है। मूत्राशय या आँतों में भी चोट लग सकती है, हालांकि यह एक दुर्लभ स्थिति है। 
  3. अगर निर्वाचित सी-सेक्शन 39 हफ़्तों से पहले की गयी हो तो ऐसे में शिशु को श्वास सम्बन्धी परेशानी हो इसका जोखिम रहता है। 
  4. अगर आप फिर गर्भावस्था की योजना बना रहें हों तो हर सी-सेक्शन में जोखिमों और जटिलताओं का खतरा बढ़ता जाता है।
  5. सर्जरी के दौरान अन्य अंगों को क्षति पहुँच सकती है।
और पढ़ें ...

References

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