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  1. कंधे की आर्थोस्कोपी सर्जरी क्या होती है? - Shoulder Arthroscopy kya hai in hindi?
  2. कंधे की सर्जरी क्यों की जाती है? - Shoulder Arthroscopy kab kiya jata hai?
  3. कंधे के ऑपरेशन से पहले की तैयारी - Shoulder Arthroscopy ki taiyari
  4. कंधे की आर्थोस्कोपी कैसे की जाती है? - Shoulder Arthroscopy kaise hota hai?
  5. आर्थोस्कोपी कंधे की सर्जरी के बाद देखभाल - Shoulder Arthroscopy hone ke baad dekhbhal
  6. आर्थोस्कोपी कंधे की सर्जरी के बाद सावधानियां - Shoulder Arthroscopy hone ke baad savdhaniya
  7. कंधे की आर्थोस्कोपी सर्जरी की जटिलताएं - Shoulder Arthroscopy me complications aur risks in hindi

कंधे की अर्थरोस्कोपी (Shoulder Artroscopy) एक कम छेदकर या चीरकर की जाने वाली प्रक्रिया है जो कंधे के जोड़ों के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने के लिए की जाती है। सर्जरी को पूरा करने में दो घंटे से कम समय लगता है और यह कंधे की पारंपरिक ओपन सर्जरी से कम पीड़ायुक्त है। यह सर्जिकल प्रक्रिया कम छेदकर या चीरकर की जाती है इसलिए रिकवरी की अवधि भी कम होती है। यह एक जटिल प्रकार की सर्जरी नहीं है और कंधे के गंभीर दर्द का इलाज करने के लिए एक सामान्य उपचार है। 

यदि आपके कंधे में अत्यधिक दर्द है जो इंजेक्शन या दवाइयों से ठीक नहीं हो पा रहा है तो आपके डॉक्टर आपको सर्जरी करवाने के लिए कह सकते हैं। आम तौर पर, उम्र और चोट के कारण, कंधे की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और इससे गंभीर दर्द हो सकता है। कंधे के जोड़ों की सूजन की वजह से ऐंठन या अकड़न हो सकती है। निम्नलिखित कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से आपको यह सर्जरी करवानी हो सकती है:

  1. क्षतिग्रस्त लिगामेंट या उपास्थि (लैब्रम; Labrum)
  2. क्षतिग्रस्त बाइसेप (ऊपरी बांह की सामने वाली मांसपेशियां) कण्डरा। बाइसेप की मांसपेशिओं से दो कण्डरा जुड़ी होती हैं- एक बाइसेप की मांसपेशियों को कंधे की हड्डियों से जोड़ती है, जबकि अन्य मांसपेशियों को कोहनी की त्रिज्या हड्डी (Radius Bone) से जोड़ती है। यदि इनमें से कोई भी कण्डरा क्षतिग्रस्त है तो उन्हें ठीक करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  3. कंधे की अस्थिरता (कंधे के जोड़ों का अपनी जगह से खिसक जाना)
  4. ऊतक का खिसकने लगना या ढीला हो जाना जिससे दर्द हो और इसे हटाया जाना चाहिए। 
  5. क्षतिग्रस्त रोटेटर कफ (Rotator Cuff)
  6. रोटेटर कफ के आसपास सूजन या अस्थि स्कंध (Bone Spur)
  7. कंधे के जोड़ों की लाइनिंग में क्षति या सूजन, जिसका कारण रियुमेटोइड गठिया (Rheumatoid Artiritis) हो सकता है
  8. हंसली (कॉलरबोन) का गठिया 
  9. अगर आपको अपने कंधे को हिलाने में कठिनाई हो रही है तो इसका कारण कंधे में कम जगह भी हो सकता है। इसलिए ऐसी स्थिति में सर्जरी करवाई जा सकती है जिससे कंधे के जोड़ों को हिलाने में आसानी होगी।  

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

(इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी)

कंधे की अर्थरोस्कोपी में अर्थरोस्कोप (Artroscope) का प्रयोग होता है, जो एक छोटा फाइबर ऑप्टिक उपकरण होता है जिसमें कैमरा लगाया हुआ होता है और जिसके माध्यम से जोड़ों के आंतरिक भाग को अच्छे से देखा जा सकता है और सर्जरी की जा सकती है। कैमरे की मदद से वीडियो मॉनीटर पर चित्र प्रदर्शित किए जाते हैं और इन छवियों को विशेष सर्जिकल लघु-उपकरणों के मार्गदर्शन के लिए प्रयोग किया जाता है।

कंधे की आर्थोस्कोपी की प्रक्रिया निम्नलिखित क्रम में की जाती है:

  1. जैसे ही एनेस्थीसिया अपना काम करना शुरू करदे उसके बाद सर्जरी शुरू की जाती है। सर्जरी के दौरान या तो मरीज़ को एक तरफ करके लिटाया जायेगा जिससे क्षतिग्रस्त कन्धा, जिसपर प्रक्रिया की जानी है, ऊपर की तरफ हो और डॉक्टर द्वारा ढंग से देखी जा सके, या डेकचेयर पोजीशन (Deckchair Position) में बिठाया जाएगा।
  2. कंधे के जोड़ों पर एक चीरा काटा जायेगा जिसके माध्यम से अर्थरोस्कोप अंदर डाला जाएगा।
  3. क्षतिग्रस्त भागों की छवियों की सर्जन द्वारा जांच की जाती है। फिर, जोड़ों के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने के लिए चीरे से विशेष उपकरणों को डाला जाता है। क्षतिग्रस्त ऊतकों, जिनसे कंधे को हिलाने में परेशानी हो या जिनमें दर्द हो, को हटा दिया जाता है।
  4. चीरों को टाँके या चिपकने वाला स्ट्रिप्स के साथ बंद कर दिया जाएगा। डॉक्टर कंधे के चारों ओर ड्रेसिंग करेंगे और पट्टियों से उसे लपेट देंगे। 

अगर सर्जन को जोड़ों के क्षतिग्रस्त हिस्से पर हुई क्षति के आधार पर ओपन सर्जरी करनी है, तो वह आपकी सहमति पाने के लिए आपको पहले ही बताएगा और आपको कंधे की ओपन सर्जरी से जुड़े जोखिमों के बारे में बताएगा।

सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए डॉक्टर द्वारा बताई बातों का ध्यान रखें:

स्लिंग पहनें: मरीज़ को कुछ दिन तक सर्जरी किये हुए हाथ पर स्लिंग पहनने के लिए कहा जा सकता है। लेकिन अगर सर्जरी में ज़्यादा मरम्मत की गयी है तो हो सकता है कि आपको इसे ज़्यादा दिनों तक पहनना पड़े।

दर्द निवारक: सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक कंधे में दर्द हो सकता है। अगर दर्द गंभीर है तो अपने डॉक्टर को बताएं। डॉक्टर आपको दर्द निवारक गोलियां निर्धारित कर सकते हैं।

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy): रोगी कंधे की मांसपेशियों और जोड़ों की ताकत को पुनः प्राप्त करने के लिए फ़िज़ियोथेरेपिस्ट की सहायता ले सकते हैं। इससे कंधे की मूवमेंट में आसानी होगी। फिजियोथेरेपिस्ट आपकी आवश्यकताओं के अनुसार प्लान किया गया व्यायाम करवाएंगे जिससे रिकवरी में आसानी होगी और दर्द से निजात पाया जा सकता है। अगर आप किसी खेल से जुड़े हैं तो अपने डॉक्टर से पूछें कि आप फिर से खेलना शुरू कर सकते हैं या नहीं। रिकवरी की शुरुआत में ऐसे व्यायाम न करें जिनसे आपके कंधे के जोड़ों पर ज़्यादा बल पड़े। धीरे धीरे आप अपने कंधे की गतिविधि बढ़ा सकते हैं।

सर्जरी के बाद रूटीन जांच (फॉलो-अप): जब आपको कहा जाये तब अपने डॉक्टर से मिलें और अपने कंधे की जांच कराएं क्योंकि डॉक्टर आपकी रिकवरी की जांच करेंगे और सर्जरी के परिणाम को आंकेंगे। सर्जरी के बाद होने वाले जोखिमों से बचने के लिए भी ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर से संपर्क में रहें। 

पूरी तरह रिकवरी में 1 से 6 महीने लग सकते हैं। रिकवरी का समय मरीज़ के शरीर, वह किस प्रकार अपना ध्यान रखते हैं और डॉक्टर द्वारा बताये गयी सारे नियमों का पालन करते हैं पर निर्भर करता है।

हर सर्जरी के कुछ जोखिम हो सकते हैं। इस सर्जरी से जुड़े जोखिम निम्नलिखित हैं:

  1. सर्जरी के और एनेस्थीसिया के जोखिमों में श्वास सम्बन्धी परेशानियां, रक्त के थक्के बनना, संक्रमण, एलर्जी (निर्धारित दवाओं से), रक्तस्त्राव आदि शामिल हैं। सर्जरी के बाद आप चक्कर आना या नींद महसूस कर सकते हैं, एनेस्थीसिया के बाद ऐसा होना सामान्य है।
  2. इस सर्जरी से जुड़े अन्य जोखिम हैं: अकड़न, कंधे की या उसके आसपास की किसी रक्त वाहिका या तंत्रिका में क्षति, जोड़ों में कमज़ोरी, या कंधे को हिलाने में परेशानी, या जिन लक्षणों की वजह से आपने सर्जरी करवाई थी वे अभी भी मौजूद हैं। 
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