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आधुनिकता के इस युग में बढ़ता प्रदूषण, अनियमित दिनचर्या और खान-पान की खराब आदतों के चलते हम कई तरह की बीमारियों से घिर चुके हैं। इनमें शुगर या डायबिटीज सबसे आम बीमारी है। यह समस्या अधिकांश लोगों की हो सकती है। 

अभी तक ब्लड शुगर की जांच के लिए खून की जांच की जाती है। इस टेस्ट के दौरान उंगुली में सुई की नोंक से छोटा सा पंक्चर (फिंगरपिक टेस्ट) किया जाता है, इसके बाद खून को टेस्ट ट्यूब में डालने के बाद ब्लड शुगर के स्तर की जांच की जाती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने रिसर्च के जरिए शुगर लेवल की जांच का एक नया रास्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) खोज निकाला है, जिसके बाद अब इस समस्या से पीड़ित लोगों को फिंगरपिक टेस्ट से नहीं गुजरना होगा।

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क्या कहती है रिसर्च?
मेडिकल लाइफ साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन यानि इंग्लैंड की वारविक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने अध्ययन के जरिए इस नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई तकनीक को विकसित किया है। इस तकनीक में बिना फिंगरपिक टेस्ट के ही वेयरेबल के जरिए ईसीजी यानि इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के माध्यम से लो ग्लूकोज लेवल का पता चल सकेगा। यह उपकरण या डिवाइस नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी से जुड़ा हुआ है, जो ईसीजी से मिलने वाले सिग्नलों से हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) की समस्या का पता लगा सकेगा।

शोधकर्ताओं की यह तकनीक करीब 82 प्रतिशत विश्वसनीयता के साथ काम करती है और यह ब्लड शुगर को जांचने के उस तरीके की जगह ले सकती है, जिसमें अभी तक सुई उंगुली में चुभाकर खून निकाला जाता है। विशेषकर बच्चों के लिए यह तकनीक सही साबित होगी, जो सुई के जरिए होने वाले मौजूद टेस्ट (ब्लट ग्लूकोज टेस्ट) से थोड़े डरते हैं।

क्या होता है लो ब्लड ग्लूकोज या शुगर?
जब खून में शुगर का स्तर कम हो जाता है, तो इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब्लड शुगर कहते हैं। बता दें कि शुगर शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है। हाइपोग्लाइसीमिया का आमतौर पर सीधा संबंध डायबिटीज (शुगर) के उपचार से है, लेकिन कुछ दुर्लभ परिस्थितियों में डायबिटीज के बिना भी लोगों में लो ब्लड शुगर हो जाता है। जैसे- बुखार और हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति खुद एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत देती है। इसलिए हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में तुरंत उपचार जरूरी होता है।

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विशेषज्ञों की राय
नेचुरल स्प्रिंगर जरनल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग के डॉक्टर लिएंडरो पेकचिया का कहना है, “हमारी यह नई रिसर्च एआई का उपयोग करते हुए ईसीजी बीट्स के जरिए अपने आप (ऑटोमेटिक) हाइपोग्लाइसीमिया यानि ब्लड शुगर का पता लगाने के लिए है। यह उचित माध्यम है, क्योंकि ईसीजी किसी भी परिस्थिति में ब्लड ग्लूकोज या शुगर के स्तर का पता लगा सकती है। चाहे व्यक्ति नींद में ही क्यों ना हो”।

डॉक्टर लिएंडरो पेकचिया कहते हैं कि मौजूद समय में शुगर का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फिंगरपिक कभी भी आरामदायक नहीं हो सकती और कुछ स्थिति में इसके जरिए काफी दर्द महसूस होता है। इतना ही नहीं, रात के समय में फिंगरपिक लेना काफी दर्द भरा होता है। विशेषकर उन बच्चों के लिए, जो ब्लड शुगर की समस्या से ग्रसित हैं।

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ब्लड शुगर जांचने पर मिलेंगे यह संकेत
रिपोर्ट के माध्यम से शोधकर्ताओं ने बताया है कि उनकी यह तकनीक दो तरह से ब्लड शुगर के स्तर की जांच करेगी। इसके तहत अगर मशीन में हरी रेखा या लाइन दिखाई पड़ती है तो यह सामान्य ब्लड शुगर लेवल का संकेत होगा और अगर इसके बजाए लाल रेखा दिखाई देगी तो यह लाल संकेत आपके शरीर में लो ग्लूकोज लेवल को दर्शाएगा।

कुल मिलाकर देखें तो शोधकर्ताओं की यह नई तकनीक ब्लड शुगर की समस्या से परेशान लोगों के लिए सहायक साबित हो सकती है। इसके जरिए व्यक्ति को बिना किसी प्रकार के शारीरिक दर्द के अपने ब्लड शुगर के लेवल का पता चल सकेगा, जो कि सुई से खून निकालकर शुगर जांच करने के विकल्प के तौर पर सही साबित हो सकता है।

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