अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी को फाइब्रोस्कैन के नाम से भी जाना जाता है, जो अल्ट्रासाउंड डिवाइस के ब्रांड का नाम है। यह लीवर की लोच यानी इलास्टीसिटी या कठोरता की जांच के लिए किया जाता है।

इस परीक्षण में, लो-फ्रीक्वेंसी वाइब्रेशन को लिवर में भेजा किया जाता है और एक अल्ट्रासाउंड मशीन उस दर को मापती है, जिस दर से यह वाइब्रेशन लिवर से होकर गुजरती है। इस टेस्ट के जरिए लीवर की लोच के बारे में जानकारी मिलती है, जिसे कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

लिवर फाइब्रोसिस के मामले में यह टेस्ट किया जाता है। फैटी लीवर के कारण फाइब्रोसिस हो सकता है (यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फैट लिवर के सामान्य ऊतकों की जगह ले लेता है)। इससे लिवर में खून के प्रवाह में कमी के कारण स्कार टिश्यू इकट्ठा होने लगते हैं। यदि इसका इलाज न किया जाए, तो इसके कारण लिवर फेल हो सकता है। इसलिए, इसका शीघ्र निदान और उपचार जरूरी है।

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  1. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी कौन नहीं करवा सकता - Who cannot have an ultrasound elastography in Hindi?
  2. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी क्यों की जाती है - Why is ultrasound elastography done in Hindi?
  3. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी की तैयारी - How should one prepare for ultrasound elastography in Hindi?
  4. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी कैसे की जाती है - What is the procedure for ultrasound elastography in Hindi?
  5. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के दौरान कैसा लगता है - How does ultrasound elastography feel in Hindi?
  6. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के परिणामों का क्या मतलब है - What do the results of ultrasound elastography mean in Hindi?
  7. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के जोखिम और लाभ - What are the risks and benefits of ultrasound elastography in Hindi?
  8. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के बाद क्या होता है - What happens after ultrasound elastography in Hindi?
  9. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के साथ और कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं - What other tests can be done with ultrasound elastography in Hindi?
  10. अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के डॉक्टर

निम्नलिखित स्थितियों वाले लोगों में अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी से बचा जाता है :

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निम्नलिखित स्थितियों में आपके डॉक्टर इस टेस्ट का सुझाव दे सकते हैं :

  • निम्नलिखित लिवर की बीमारियों का पता लगाने के लिए, यदि आपमें निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं तो :
  • उपचार प्रतिक्रिया की निगरानी के लिए
  • लिवर की बायोप्सी का मार्गदर्शन करने के लिए
  • जलोदर जैसी जिगर की बीमारी से संबंधित जटिलताओं के जोखिम का पता लगाने के लिए

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अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी की तैयारी के लिए आपसे निम्नलिखित कुछ तरीके अपनाने को कहा जा सकता है :

  • टेस्ट के लिए आपको ढीले और आरामदायक कपड़े पहनने को कहा जाएगा, अस्पताल का गाउन भी दिया जा सकता है।
  • डॉक्टर आपको टेस्ट से पहले मीठे पेय पदार्थ लेने से मान कर सकते हैं।
  • टेस्ट से पहले छह-आठ घंटे तक उपवास रखने को कहा जा सकता है।
  • आपको टेस्ट से पहले वसा रहित भोजन के सेवन के लिए कहा जा सकता है।
  • यदि आप गर्भवती हैं तो अपने डॉक्टर को पहले ही सूचित कर दें।

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अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है :

  • डॉक्टर आपको टेस्ट के लिए टेबल पर लेटने के लिए कहेगा, पेट का दाहिना हिस्सा खुला रखने के लिए कहा जाएगा।
  • जिस हिस्से की जांच की जानी है, उस पर पानी आधारित जेल फैला दिया जाता है।
  • दाईं तरफ, छाती की निचली दीवार में पसलियों के बीच जांच के लिए एक ट्रांसड्यूसर को रखा जाता है।
  • यह ट्रांसड्यूसर ध्वनि तरंगें भेजता है, जो लीवर तक पहुंचती हैं और वहां से वापस आती हैं।
  • वापस आने वाली ध्वनि तरंगों को एक कंप्यूटर मापता है और उन्हें तस्वीर में बदल देता है।

अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी में लगभग 30 मिनट का समय लगता है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन के दौरान आपको कोई दर्द महसूस नहीं होगा। हालांकि, आपके लिवर तक जाने वाली ध्वनि तरंगों को आप महसूस कर सकते हैं।

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इलास्टोग्राफी के परिणामों को किलोपास्कल (केपीए) में मापा जाता है। इसकी सामान्य सीमा 2 से 7 केपीए के बीच होती है, जिसका मतलब है कि स्कार बनने के संकेत नहीं हैं। 7 केपीए से अधिक होना एक संकेत है कि फाइब्रोसिस मौजूद है।

रैंज के आधार पर फाइब्रोसिस को विभिन्न चरणों में विभाजित किया जा सकता है :

  • F0: कोई स्कार नहीं
  • F1: शुरुआती फाइब्रोसिस
  • F2: मध्यम स्तर का फाइब्रोसिस
  • F3: गंभीर फाइब्रोसिस
  • F4: एडवांस स्टेज का फाइब्रोसिस या सिरोसिस

निम्नलिखित कुछ स्थितियां फाइब्रोसिस दिखा सकती हैं :

  • नॉन एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (असामान्य चयापचय के कारण होने वाली स्थिति)
  • हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी (हेपेटाइटिस वायरस के कारण होने वाले रोग)
  • एल्कोहल हेपेटाइटिस (शराब के अधिक सेवन के कारण होने वाली लिवर की बीमारी)
  • कोलेस्टेटिक लिवर (ऐसी स्थिति जिसमें पित्त जैसे तरल पदार्थ का प्रवाह लिवर में अवरुद्ध हो जाता है)

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अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी करने के लाभ निम्नलिखित हैं :

  • यह एक गैर-आक्रामक इमेजिंग प्रक्रिया है।
  • इस टेस्ट में किसी प्रकार के रेडिएशन का कोई जोखिम नहीं है।
  • यह बायोप्सी की तुलना में लीवर के एक बड़े हिस्से को दिखाता है।

अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी कराने का कोई ज्ञात जोखिम नहीं है।

टेस्ट के तुरंत बाद आप अपनी दैनिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं है।

डॉक्टर विशेष स्थिति की पुष्टि करने के लिए अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी के साथ लिवर फंक्शन ब्लड टेस्ट या लिवर बायोप्सी भी करवा सकते हैं। 

ध्यान रहे : टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सहसंबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

Dr. Rachita Gupta

Dr. Rachita Gupta

रेडियोलोजी
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Dr. Tejinder Kataria

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