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हैदराबाद स्थित सीएसआईआर की शाखा सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायॉलजी (सीसीएमबी) ने कोविड-19 की टेस्टिंग को लिए एक ऐसी प्रक्रिया विकसित की है, जिसकी मदद से आरटी-पीसीआर टेस्ट की क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सकती है और लागत कम की जा सकती है। कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान के लिए यह टेस्ट इतना विश्वसनीय है कि इसे कोविड-19 बीमारी की जांच को लेकर 'गोल्डन स्टैंडर्ड' का तमगा मिला हुआ है। लेकिन आरटी-पीसीआर टेस्ट में पैसा और समय काफी लगता है। इसी के चलते एंटी-बॉडी टेस्ट की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि फॉल्स नेगेटिव परिणाम आने की सूरत में सरकारें अभी भी आरटी-पीसीआर टेस्ट को ही प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में सीसीएमबी द्वारा विकसित टेस्टिंग्र प्रक्रिया न सिर्फ इस टेस्ट की कीमत के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, बल्कि इसे कम समय में ज्यादा परिणाम देने में भी सक्षम बना सकती है।

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आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए किसी व्यक्ति के शरीर से लिए गए सैंपल में से आरएनए निकालना (एक्सट्रैक्शन) जरूरी होता है। फिर उसे ट्रांसफर करने के लिए वायरल ट्रांसफर मीडिया (वीटीएम) का इस्तेमाल किया जाता है। इस काम में काफी समय लगता है। सीसीएमबी के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि उनके द्वारा विकसित टेस्टिंग प्रक्रिया में आरएनए एक्सट्रैक्शन का काम ही हटा दिया गया है। सीसीएमबी के निदेशक राकेश मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, 'नए मेथड में सैंपल को वीटीएम से गुजारने की जरूरत नहीं है। इसे आरटी-पीसीआर टेस्ट के जरिये ड्राई (सूखा) फॉर्म में ही टेस्ट किया जा सकता है।'

राकेश मिश्रा ने आगे कहा, 'आप कह सकते हैं कि आरएनए एक्सट्रैक्शन की प्रक्रिया को खत्म करने और वीटीएम के बिना ही सैंपल को ट्रांसपोर्ट करने से काफी समय और पैसा बचता है। इस तरह मौजूदा (आरटी-पीसीआर) सेटअप में ही टेस्टिंग की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। इस तरह अब आप बड़ी संख्या में सैंपलों का सीधे आरटी-पीसीआर टेस्ट कर सकते हैं।' राकेश मिश्रा ने कहा कि उन्होंने इस नई टेस्टिंग प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर के पास भेज दिया है।

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क्या है प्रक्रिया?
सीसीएमबी के निदेशक ने बताया कि फिलहाल आरटी-पीसीआर टेस्ट में रीबोन्यूक्लिक एसिट (आरएनए) को सैंपल से अलग किया जाता है। यह पदार्थ सभी जीवित कोशिताओं में पाया जाता है, जिसमें जीवन के लिए जरूरी शारीरिक संरचना की जेनेटिक जानकारियां होती हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि आरटीपीसीआर टेस्ट में इस पदार्थ को सैंपल से अलग करने के लिए क्या तैयारी की जाती है।

कोविड-19 के खिलाफ जंग में कई प्रकार से योगदान दे रहा सीसीएमबी कुछ समय से यह जानने की कोशिश में लगा हुआ है कि क्या आरटीपीसीआर टेस्ट में आरएनए के आइसोलेशन को अनदेखा किया जा सकता है, क्योंकि इसमें काफी समय खपता है। अच्छी बात यह है कि अब संस्थान ने नए तरीके की खोज कर ली है। इसमें सैंपल को लैब में लाए जाने के बाद उसमें रोजाना इस्तेमाल होने वाला बफर मिला दिया दाता है। फिर उसे 98 डिग्री के तापमान पर छह मिनट तक गर्म किया जाता है। इस तरह महज चंद मिनटों में सैंपल टेस्ट के लिए तैयार हो जाता है। सीसीएमबी मिश्रा का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिये वे और उनके संस्थान के वैज्ञानिक आरटी-पीसीआर टेस्ट को आरएनए एक्ट्रैक्शन से मुक्त करने में सफल रहे हैं।

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समाचार एजेंसी के मुताबिक, गर्म किए जाने के बाद ड्राई स्वैब को टेस्टिंग सेंटर भेजा जा सकता है, क्योंकि वायरस चार डिग्री तापमान में भी कई दिनों तक जीवित रह सकता है। इस तरह सैंपल को इंपोर्ट करने के लिए वीटीएम की जरूरत नहीं रह जाती, जो प्रक्रिया को कम खर्चीली बनाती है। इसके अलावा सैंपल को लिक्विड फॉर्म में नहीं भेजे जाने के चलते इसके लीक होने की संभावना भी नहीं रह जाती। इस तरह यह नई विकसित प्रक्रिया आरटी-पीसीआर टेस्ट की क्षमता बढ़ाती है और प्रति टेस्ट पर 200 से 300 रुपये बचाती है। सीसीएमबी निदेशक ने कहा कि उनके संस्थान ने इस प्रक्रिया को कई बार आजमाने के बाद ही आईसीएमआर को प्रपोजल भेजा है।

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