घुटने का एक्स-रे एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसे घुटने के जोड़ों और आसपास के उत्तकों की तस्वीरें लेने के लिए किया जाता है।

एक्स-रे इमेजिंग प्रक्रिया के तहत रेडिएशन का एक छोटा सा भाग शरीर के उस हिस्से से गुजरता है, जिसकी जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान एक्स-रे फिल्म या रिकॉर्डिंग प्लेट पर छवियां रिकॉर्ड की जाती हैं।

हड्डियां ज्यादातर विकिरणों को सोख लेती हैं और एक्स-रे छवि में यह सफेद रंग की दिखाई देती हैं। नरम उत्तक जैसे कि मासपेशियां और वसा से विकिरण आर-पार हो जाती हैं। इसीलिए एक्स-रे में यह ग्रे रंग के शेड में दिखते हैं।

घुटने का एक्स-रे घुटने के जोड़ और अन्य परेशानियों जैसे फ्रैक्चर (टूटी हुई हड्डियां) और जोड़ों की अन्य असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।

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  1. घुटने का एक्स-रे कौन नहीं करवा सकता - Who cannot get a knee X-ray done in Hindi?
  2. घुटने का एक्स-रे क्यों किया जाता है - Why is a knee X-ray done in Hindi?
  3. घुटने के एक्स-रे के लिए तैयारी - How should I prepare for a knee X-ray in Hindi?
  4. घुटने का एक्स-रे कैसे होता है - What is the procedure of a knee X-ray in Hindi?
  5. घुटने के एक्स-रे में कैसा महसूस होता है - How does a knee X-ray feel in Hindi?
  6. घुटने के एक्स-रे के रिजल्ट का क्या मतलब है - What do the results of a knee X-ray mean in Hindi?
  7. घुटने के एक्स-रे के जोखिम और लाभ - What are the risks and benefits of the knee X-ray in Hindi?
  8. घुटने का एक्स-रे के बाद क्या होता है - What happens after the knee X-ray in Hindi?
  9. एक्स-रे के साथ अन्य कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं - What other tests can be done with the knee X-ray in Hindi?
घुटने का एक्स-रे के डॉक्टर

आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को घुटने का एक्स-रे करवाने से मना किया जाता है। क्योंकि इस दौरान रेडिएशन से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान होने का खतरा रहता है।

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घुटने का एक्स-रे, घुटने में निम्न परेशानियों के पीछे के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए किया जाता है :

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निम्न मामलों में निदान के लिए एक्स-रे करवाने की सलाह जी जाती है :

  • टूटी हुई हड्डियां
  • जोड़ का खिसक जाना

यदि आपकी टूटी हुई हड्डी को जोड़ा गया है तो डॉक्टर बाद में यह जांच करने के लिए भी एक्स-रे करवा सकते हैं कि हड्डी ठीक से जुड़ी है या नहीं और क्या वह भली-भांति ठीक हो रही है।

घुटने की सर्जरी की योजना से पहले भी एक्स-रे किया जा सकता है और ऑपरेशन के बाद उसकी सफलता की जांच के लिए भी एक्स-रे किया जा सकता है।

घुटने का एक्स-रे घुटने से जुड़ी कई परेशानियों जैसे - संक्रमण, आर्थराइटिस (घुटने में सूजन), ट्यूमर और अन्य दिक्कतों की जांच में भी मदद करता है।

घुटने के जोड़ और आसपास के उत्तकों में किसी बाहरी वस्तु की जांच के लिए भी घुटने का एक्स-रे किया जा सकता है।

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घुटने के एक्स-रे के लिए किसी प्रकार की कोई तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है। यदि पूर्व में आपको एक्स-रे के दौरान किसी भी तरह की कोई समस्या हुई है तो इस बारे में अपने डॉक्टर को पहले ही बता दें।

यदि आप गर्भवती हैं या ऐसी योजना बना रही हैं तो एक्स-रे करवाने से पहले अपने डॉक्टर को इस बारे में बता दें

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घुटने के एक्स-रे के लिए निम्न चरण अपनाए जाते हैं :

  • यदि आपने किसी भी प्रकार का कोई धातु का आभूषण पहना है तो टेक्नीशियन आपको उसे उतारने के लिए कहेगा। क्योंकि आभूषण टेस्ट के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
  • यदि आपको कुछ कपड़े उतारने को कहा जाता है तो आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को दी जाएगी, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है। पूरे टेस्ट के दौरान आपको इस हॉस्पिटल गाउन को पहने रखना होगा। 
  • टेक्नीशियन आपको एक्स-रे टेबल पर उचित तरीके से लेटने या सही से खड़े होने में मदद करेंगे।
  • इसके बाद टेक्नीशियन एक दीवार के पीछे से या साथ में जुड़े हुए कमरे से एक्स-रे मशीन को ऑपरेट करेंगे।
  • जिस समय एक्स-रे किया जा रहा है, उस वक्त आपको सांस रोककर स्थिर रहने को कहा जाएगा।
  • घुटने की और तस्वीरें लेने के लिए टेक्नीशियन आपके पैर की स्थिति को बदलकर फिर से एक्स-रे ले सकते हैं।
  • इस टेस्ट में आमतौर पर पांच से 10 मिनट का अधिकतम समय लगता है।

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आमतौर पर घुटने की समस्या के निदान के लिए तीन एक्स-रे किए जाते हैं :

  • घुटने के सामने से
  • घुटने के दाएं या बाईं तरफ से
  • घुटने के पीछे या जहां पैर मुड़ता है उस तरफ से

कुछ मामलों में डॉक्टर तुलना के लिए उस घुटने का भी एक्स-रे करवाने की सलाह दे सकते हैं, जिसमें कोई समस्या नहीं है।

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एक्स-रे रूम के ठंडे तापमान के कारण आप कुछ असहज महसूस कर सकते हैं।

एक्स-रे एक दर्द रहित प्रक्रिया है। हालांकि, एक्स-रे के दौरान जब टेक्नीशियन आपको सांस रोककर स्थिर रहने को कहते हैं तो यह स्थिति थोड़ी असुविधाजनक हो सकती है। खासतौर पर यदि आपको चोट लगी हो तो यह पीड़ादायक हो सकता है। बेहतर एक्स-रे इमेज क्वालिटी के लिए टेक्नीशियन आपके लिए आसान पोजिशन चुनने में मदद करेंगे।

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एक्स-रे घुटने से जुड़ी निम्न स्थितियों का पता लगाने में मदद कर सकता है :

  • फ्रैक्चर
  • गठिया (आर्थरायटिस)
  • संक्रमण
  • हड्डी के जोड़ का खिसकना (और पढ़ें - कंधा उतर जाना क्या होता है)
  • घुटने में और आसपास अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होना
  • घुटने के जोड़ों का सही से अलाइनमेंट न होना
  • हड्डी की संरचना में असमान्यताएं
  • हड्डी का अल्सर (द्रव से भरा होना)
  • हड्डी की असामान्य वृद्धि (और पढ़ें - पैर की हड्डी बढ़ने के लक्षण)
  • हड्डी का ट्यूमर
  • हड्डी का कैंसर
  • कुछ चयापचय विकारों में हड्डी में परिवर्तन

(और पढ़ें - हड्डी के संक्रमण का इलाज)

घुटने के एक्स-रे से जुड़े लाभ इस प्रकार हैं :

  • हड्डी की चोटों और जोड़ों की असामान्यताओं के निदान का तेज और आसान तरीका।
  • अधिकत्तर स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे की सुविधा आसानी से उपलब्ध होती है।
  • आपातकालीन निदान के लिए अत्यंत उपयोगी।
  • यदि सुरक्षित डायग्नोस्टिक रेंज में उपयोग किया जाए तो कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
  • एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने पर शरीर में विकिरण का कोई अंश नहीं बचता है।

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एक्स-रे से निम्न जोखिम जुड़े हुए हैं : 

  • रेडिएशन के संपर्क में आने के कारण कैंसर का जोखिम
  • यदि गर्भावस्था में एक्स-रे करवा रही हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है।

एक्स-रे टेस्ट पूरा होने के बाद रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे फिल्म की बारीकी से जांच करेंगे और उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद इस रिपोर्ट और एक्स-रे फिल्म को आपके डॉक्टर के पास भेज दिया जाएगा, ताकि वे आपके इलाज को आगे बढ़ा सकें।

डॉक्टर इस एक्स-रे फिल्म की जांच करेंगे और इस दौरान आपको इंतजार करना होगा, ताकि वे देख सकें कहीं तस्वीरें धुंधली तो नहीं आई हैं। यदि एक्स-रे फिल्म पर तस्वीरें धुंधली आई हैं तो फिर से एक्स-रे जांच करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

(और पढ़ें - घुटने में मोच के उपाय)

यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है कि और कौन-कौन से टेस्ट करने की आवश्यकता है। निम्न टेस्ट एक्स-रे के साथ किए जा सकते हैं :

ध्यान रहे : इन सभी टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सहसंबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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