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एक्यूपंक्चर थेरेपी मूल रूप से चीन की उपचार की एक प्राचीन विधि है। इसमें शरीर के किसी निश्चित बिंदु में पतली-पतली सुइयां चुभाई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है की इससे दर्द में राहत मिलती है और इसका उपयोग अन्य प्रकार की परेशानियों में भी किया जाता हैं।

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इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि एक्यूपंक्चर क्या है, इसके फायदे, नुकसान और करने का तरीका क्या है। साथ ही आप यह भी जानेंगे की एक्यूपंक्चर की बिंदु कौन-कौन सी होती हैं। 

  1. एक्यूपंक्चर क्या है - Acupuncture kya hai in hindi
  2. एक्यूपंक्चर बिंदु - Acupuncture points in hindi
  3. एक्यूपंक्चर पद्धति - Acupuncture therapy kaise ki jaati hai in hindi
  4. एक्यूपंक्चर के फायदे - Acupuncture ke fayde in hindi
  5. एक्यूपंक्चर के साइड इफेक्ट - Acupuncture side effects in hindi

एक्यूपंक्चर थेरेपी के अंतर्गत एक प्रशिक्षित एक्युपंक्चरिस्ट आपके शरीर के किसी खास बिंदु पर एकदम पतली सुइयां चुभाता है, उस बिंदु का संबंध आपकी बीमारी से होता है। चीन की इस तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से दर्द कम करने के लिए किया जाता है।

इस चीनी पद्धति के द्वारा हमारे शरीर में बहने वाली ऊर्जा के प्रवाह को सही किया जाता है, इस जीवन ऊर्जा को वे लोग “की” (Qi) और “ची” (Chi or Chee) का नाम देते हैं।

हालाँकि, आधुनिक समय में पश्चिमी देशों के विद्वान एक्युपंक्चर बिंदुओं को हमारे शरीर की नसों, मांसपेशियों और संबंधित टिश्यू को उत्तेजित करने का तरीका मानते हैं। कुछ विद्वानों का मानना है की इस प्रकार की उत्तेजना से शरीर में प्राकृतिक दर्द निवारक का स्त्राव होता है और खून का संचरण भी सही होता हैं।

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हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों एक्यूपंक्चर बिंदु होते है, सभी का नाम बताना भी मुश्किल है। यहाँ एक्युपंक्चरिस्ट्स द्वारा तीन मुख्य रूप से उपयोग किये जाने वाले बिंदुओं की जानकारी दी जा रही है: 

  • लार्ज इंटेस्टाइन 4 (LI 4): यह हमारे हाथ के अगूंठे और चारो अँगुलियों के बीच के मुलायम हिस्से में पाए जाते हैं।
  • लिवर 3 (LR-3): यह बिंदु हमारे पैर के पंजे के ऊपर की तरफ अंगूठे और उसके पास वाली अंगुली के बिच होता है।
  • स्प्लीन 6 (SP-6): यह बिंदु आपके पैर के अंदुरनी हिस्से में एड़ी से थोड़ा ऊपर की तरफ होता हैं।

नोट:- किसी भी बिंदु की सही स्थिति जानने के लिए विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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हर एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ (जिसे "एक्युपंक्चरिस्ट" कहते हैं) का एक अलग तरीका हो सकता है, जिसमें सामान्य रूप से पश्चिमी और पूर्वी देशों की तकनीकों का मिश्रण होता है। आपको आपका एक्युपंक्चरिस्ट इलाज से पहले आपके बीमारी के लक्षण, व्यवहार तथा जीवनशैली के संबंध में सवाल कर सकता है। वह आपके निम्न परिक्षण भी कर सकता है: 

  1. शरीर का दर्द होने वाले भाग की करीबी जांच
  2. आपकी जीभ का आकार, उसकी ऊपरी परत और रंगत की जांच
  3. आपके चेहरे के रंग की जांच
  4. आपकी नाड़ी (पल्स) की गति, मजबूती तथा गुणवत्ता इत्यादि की जांच। (और पढ़े:- अनियमित दिल की धड़कन का इलाज)

एक्यूपंक्चर थेरेपी के दौरान आपका इलाज करने वाला आपके शरीर के उस भाग के बारे में बताता है जहाँ पर यह प्रक्रिया की जानी है। यह प्रक्रिया निम्न चरणों में पूरी की जाती है:

  • सुई चुभाना - आपके शरीर के उस भाग में स्थित बिंदुओं में सुइयां चुभाई जाती हैं। इससे बहुत कम चुभन महसूस होती है क्योंकि सुई बहुत पतली होती है। एक सामान्य इलाज में 5 से 20 सुई का उपयोग होता हैं। जब सुई सही बिंदु पर चुभती है तो आपको सिहरन (हलकी कंपन) महसूस हो सकती है। 
  • सुई को हिलना-डुलाना - आपका एक्युपंक्चरिस्ट सुइयों को धीरे-धीरे हिला सकता है या मोड़ सकता है। अथवा सुइयों पर हल्का इलेक्ट्रिक प्रवाह कर सकता है।
  • सुइ का निकालना - अधिकांश मामलों में सुइयां अपने स्थान पर 10 से 20 मिनट तक रखी जाती हैं। सामान्यत: सुई निकलते वक्त किसी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं होती हैं।

नोट: कुछ लोगों को इससे आराम मिलता है, कुछ ऊर्जावान महसूस करते हैं। किन्तु यदि आपको इसका कोई प्रभाव महसूस नहीं हो रहा है और परेशानी में कोई राहत नहीं मिलती है तो यह पद्धति छोड़ कर कोई और उपचार करवाएं।

एक्यूपंक्चर थेरेपी निम्न आधार पर लाभकारी हो सकती है:

  • सही तरीके से करने पर यह एक सुरक्षित तकनीक है। 
  • सही तरीके से करने पर इसके बहुत कम साइड इफेक्ट्स होते हैं। 
  • इसको किसी भी अन्य उपचार के साथ भी प्रभावी रूप से किया जा सकता है। 
  • यह कुछ प्रकार के दर्द से निजात दिलाती है। 
  • यह उन मरीजों के लिए भी उपयोगी हो सकती है जिनको दर्द निवारक दवाइयों से कोई लाभ नहीं मिल रहा हो।

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एक्यूपंक्चर थेरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते हैं यदि आप एक अच्छे प्रशिक्षित एक्युपंक्चरिस्ट से उपचार करवाते हैं। इसके संभावित प्रभाव निम्न है:

  • एक्यूपंक्चर के पश्चात आपको हल्का दर्द, खून निकलने या छिलने की समस्या हो सकती है। 
  • अगर सुई अधिक गहरी या गलत जगह पर चुभ जाये तो आपके शरीर के अन्दर किसी अंग को नुकसान हो सकता है। 
  • आपको सुई चुभने वाली जगह पर इन्फेक्शन की समस्या भी हो सकती है। 

यह ध्यान रखे की जरुरी नहीं की उपचार की यह तकनीक हर व्यक्ति को फायदा करे। निम्न स्थितियों में आपकों अधिक खतरा हो सकता है:-

  • अगर आपको खून बहने की समस्या पहले से है तो सुई के कारण यह गंभीर हो सकती हैं। 
  • यदि आपको "पेसमेकर" (Pacemaker: हृदय रोग के इलाज के लिए हृदय में लगाया जाने वाला एक यंत्र) लगा हुआ है तो सुई में इलेक्ट्रिक प्रवाह करने से पेसमेकर के कार्य में दिक्कत आ सकती है।
  • यदि आप गर्भवती हैं तो यह उपचार आपके लिए परेशानी उत्त्पन कर सकता है इसलिए इस दौरान एक्यूपंक्चर न करवाएं।

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नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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