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नियमित रूप से ब्रश करने, जीभ की सफाई करने, माउथवॉश का उपयोग करने और फ्लॉसिंग के जरिए ओरल हाइजीन को बनाए रखा जा सकता है। फ्लॉस एक तरह का धागा है, जो दांतों के बीच से भोजन और प्लॉक को हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह एक आसान हानिरहित तरीका है, इसका उपयोग करने के दो तरीके हैं, स्पूल विधि और लूप विधि।

ज्यादातर घरों में मुंह की सफाई करने के लिए सिर्फ ब्रशिंग की जाती है, लेकिन यहां दांत की स्थिति के अनुसार कुल 9 प्रकार के ब्रशिंग तकनीकों के बारे में बताया जा रहा है। उदाहरण के लिए, बच्चों के लिए फोंस टेक्निक (दांतों के चारों तरफ ब्रश को घुमाना) की सलाह दी जाती है, जबकि मोडिफाइड स्टिलमैन तकनीक का इस्तेमाल 'रिसीडेड गम लाइन' (ऐसी स्थिति जिसमें मसूड़े दांतों की सतह से हट जाते हैं और दांत बड़े नजर आते हैं) वाले लोगों के लिए अनुशंसित है।

'टंग स्क्रैपिंग' यानी जीभ को रगड़कर साफ करना, यह न केवल जीभ साफ करने का तरीका है बल्कि इससे सांसों की दुर्गंध की समस्या भी नहीं होने पाती है।

माउथवाश, के जरिए न केवल मुंह की दुर्गंध को ठीक किया जा सकता है, बल्कि यह मुंह में समग्र बैक्टीरिया की संख्या को भी कम करता है। बाजार में दो प्रकार के माउथवॉश उपलब्ध हैं, कॉस्मेटिक माउथवॉश और थेराप्यूटिक (औषधीय) माउथवॉश।

  1. ब्रश करना - Brushing in Hindi
  2. ब्रश के प्रकार - Types of brushes in Hindi
  3. ब्रश करने की तकनीक - Techniques of brushing in Hindi
  4. फ्लॉसिंग - Flossing in Hindi
  5. जीभ की सफाई - Tongue cleaning in Hindi
  6. माउथवॉश - Mouthwash in Hindi

ब्रश करना मौखिक स्वच्छता दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रत्येक व्यक्ति को दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए, एक बार सुबह उठने के बाद और एक बार रात को सोने से पहले। ध्यान रहे दांतों और मसूड़ों के स्वास्थ के अनुसार ब्रश का चुनाव करना चाहिए।

(और पढ़ें - मुंह की बदबू का आयुर्वेदिक इलाज)

बाजार में विभिन्न प्रकार के ब्रश उपलब्ध हैं, जो दांतों को साफ करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। उनमें से कुछ ऐसे हैं, जिन्हें व्यक्ति सामान्य रूप से अपने दैनिक जीवन में उपयोग करता है, जबकि कुछ ऐसे भी ब्रश हैं, जो दांतों के उन जटिल हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जहां नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाला ब्रश नहीं पहुंच सकता है।

  1. मैनुअल ब्रश - Manual brush in Hindi
  2. इलेक्ट्रिकल ब्रश - Electrical brush in Hindi
  3. इंटरप्रॉक्सिमल ब्रश - Interproximal brush in Hindi
  4. सिंगल टफ ब्रश - Single tuft brushes in Hindi

मैनुअल ब्रश - Manual brush in Hindi

ये ऐसे टूथब्रश हैं, जिनका हम दैनिक रूप से उपयोग करते हैं। ये ब्रश के बालों की मोटाई के आधार पर चार अलग-अलग रूपों में आते हैं:

  • अल्ट्रा-सॉफ्ट: 0.10 मिमी
  • सॉफ्ट: 0.15–0.18 मिमी
  • मीडियम: 0.18–0.23 मिमी
  • हार्ड/एक्स्ट्रा हार्ड: 0.23–0.28 मिमी

इलेक्ट्रिकल ब्रश - Electrical brush in Hindi

ये ब्रश उन लोगों (वृद्ध लोगों और मानसिक रूप से बीमार) के लिए बनाया गया था, जो किसी शारीरिक या मानसिक परेशानी के कारण सही से ब्रश इस्तेमाल नहीं कर सकते, लेकिन इसका उपयोग स्वस्थ व्यक्ति भी कर सकता है। इस ब्रश का अगला हिस्सा यानी जहां ब्रश के बाल होते हैं, वह स्थान गोल होता है और ब्रश में सेल लगा होता है, जिसकी मदद से ब्रश का अगला हिस्सा गोल-गोल घूमता है, जो प्रति मिनट लगभग 7600 स्ट्रोक के बराबर है। एक इलेक्ट्रिक टूथब्रश आपके नियमित टूथब्रश की तरह सफाई दे सकता है।

इंटरप्रॉक्सिमल ब्रश - Interproximal brush in Hindi

इंटरप्रोक्सिमल या इंटरडेंटल ब्रश का अगला हिस्सा शंक्वाकार या पतला होता है। इसे विशेष रूप से दांतों के बीच के रिक्त स्थान को साफ करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें एक नियमित ब्रश द्वारा साफ नहीं किया जा सकता है। इनमें काफी लचीला हैंडल होता है, जिसे आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है। इस ब्रश की मदद से दांतों में एम्ब्रेशर की बेहतर सफाई की जा सकती है। एम्ब्रेशर मसूड़ों के पास दांतों के बीच का त्रिकोणीय स्थान होता है।

इन ब्रश की चौड़ाई अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि दांतों की स्थिति के अनुसार ब्रश की चौड़ाई का चयन किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के दांतों में एम्ब्रेशर की स्थिति सामान्य है, तो उसे कम चौड़े वाले इंटरडेंटल टूथब्रश की जरूरत है, जबकि दांतों के बीच में जगह होने की स्थिति में ज्यादा चौड़ाई वाले टूथब्रश की आवश्यकता होती है।

सिंगल टफ ब्रश - Single tuft brushes in Hindi

सिंगल टफ ब्रश का उपयोग उन हिस्सों में किया जाता है, जहां एम्ब्रेशर वाले हिस्से पर मसूड़े नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में दांतों में खाना फंस जाता है। वैसे तो यह एक सामान्य ब्रश की तरह दिखता है, लेकिन ब्रश के बाल (ब्रिसल) केवल ऊपरी हिस्से पर ही होते हैं।

बास तकनीक - Bass technique in Hindi

यह दांतों को ब्रश करने का सबसे प्रभावी तरीका है, क्योंकि यह दांतों की पूरी सतह को अच्छी तरह से साफ करता है।

  • इसमें ब्रश को दांतों की बाहरी सतह पर 45° कोण पर रखें और गोल-गोल घुमाएं।
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करें।
  • मोलर (सबसे पीछे के तीन दांत) और प्रीमोलर (मोलर से पहले के दो दांत) दांतों की ऊपरी सतह को साफ करने के लिए, ब्रिसल पर थोड़ा दबाव बनाया जाता है, क्योंकि सबसे पीछे के दांतों की सतह पर हल्के गढ्ढे होते हैं।

मोडिफाइड बास तकनीक - Modified Bass technique in Hindi

यह बास तकनीक का एक संशोधित और बेहतर संस्करण है, क्योंकि यह दांतों में बेहतर सफाई दे सकता है।

  • दांतों की बाहरी सतह के मसूड़ों और दांतों पर  45° पर ब्रश रखें और इसे 'टू एंड फ्रो' मोशन यानी आगे-पीछे करने के बाद गोल-गोल घुमाएं।
  • हर 10-15 बार करने के बाद ब्रश को मोलर और प्रीमोलर की ऊपरी सतह पर ब्रश करें।
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालें की कोशिश करें।

मोडिफाइड स्टिलमैन तकनीक - Modified Stillman's technique in Hindi

यह तकनीक न केवल दांतों को साफ करती है, बल्कि मसूड़ों की भी मालिश करती है। इस तकनीक का उपयोग एक 'रिसीड गम लाइन' (जब मसूड़े दांतों से पीछे हट जाएं, जिस कारण दांत ज्यादा बड़े दिखने लगें) वाले लोगों के लिए किया जा सकता है।

  • दांतों की बाहरी सतह पर 45° के कोण पर ब्रिसल को रखें, इस दौरान ब्रश घुमाते समय दांत और मसूड़े दोनों को कवर करें।
  • अब दांतों के दोंनों किनारों की सफाई करें।
  • लगभग 15 बार घुमाने के बाद, अपने ब्रश को मोलर और प्रीमोलर की ऊपरी सतह पर ले जाएं और वहां थोड़े दबाव के साथ ब्रश करें।
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करें।

फोंस तकनीक - Fones technique in Hindi

इसका उपयोग आमतौर पर बच्चों के दांत ब्रश करने के लिए किया जाता है। इसे सर्कुलर तकनीक भी कहा जाता है।

  • बच्चे को हल्के से दांत कंसने के लिए कहा जाता है और दांतों की बाहरी सतह पर हलके हाथों से ब्रश किया जाता है।
  • दांतों की सतह पर ब्रश को गोल-गोल घुमाया जाता है।
  • इस मोशन को 10 बार दोहराएं और फिर मोलर की ऊपरी सतह पर ब्रश करें और आगे-पीछे करके दांतों की सफाई करें।

लियोनार्ड तकनीक - Leonard's technique in Hindi

यह बच्चों के दांतों को साफ करने के लिए अधिक सुविधाजनक तरीकों में से एक है। इसे वर्टिकल मेथड के रूप में भी जाना जाता है।

  • नीचे और ऊपर के दांतों को मिलाएं और दांतों की बाहरी सतह पर ब्रश रखें।
  • अब वर्टिकल मोशन (ऊपर-नीचे करके) में ब्रश करें।
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करें।

चार्टर तकनीक - Charter's technique in Hindi

इस विधि के लिए एक अल्ट्रा-सॉफ्ट ब्रिसल्ड टूथब्रश इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। यह ज्यादातर ब्रेसिज वाले लोगों के लिए या 'रिसीड गम लाइन' वालों के लिए अनुशंसित है।

  • मसूड़ों पर 45 डिग्री के कोण पर ब्रश के ब्रिसल को रखें।
  • अब इससे निचले दांतों के किनारे को अच्छे से साफ करें और इस प्रक्रिया को 5-6 बार दोहराएं।
  • ऊपरी दांतों के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाएं।

स्क्रब ब्रश तकनीक - Scrub brush technique in Hindi

यह शायद सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है।

  • ऊपरी दांतों को निचले दांतों से मिलाएं और ब्रश को दांतों की बाहरी सतह पर रखें।
  • अब अपने दांतों को टू-और-फ्रो मोशन (दांए से बाएं या बाएं से दाएं) और फिर वर्टिकल मोशन (ऊपर-नीचे या नीचे से ऊपर) का उपयोग करके ब्रश करें।
  • दांतों की भीतरी सतह के लिए भी टू-और-फ्रो और अप-डाउन मोशन को दोहराएं।

रोल तकनीक - Roll technique in Hindi

यह सबसे अच्छी तकनीकों में से एक है, जिसका उपयोग वयस्क और बच्चे दोनों कर सकते हैं।

  • ऊपरी दांतों की बाहरी सतह पर 45° के कोण पर ब्रिसल को रखें और नीचे की तरफ स्वाइप करें।
  • अब ब्रश को अपने निचले दांतों की बाहरी सतह पर रखें और इसे ऊपर की तरफ स्वाइप करें।
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालें की कोशिश करें।

स्मिथ तकनीक - Smith technique in Hindi

इसे फिजिओलॉजिक के नाम से भी जाना जाता है, जो गंभीर रूप से रिसीड गम लाइन की स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। यह बड़े स्तर पर लोगों द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है और सभी के लिए अनुशंसित नहीं है।

  • ब्रश को दांतों की बाहरी सतह पर रखें और गम लाइन यानी मसूड़ों की तरफ ब्रशिंग करना शुरू करें।
  • एक मोशन को 5-6 बार दोहराएं
  • दांतों की आंतरिक सतह पर, ब्रिसल के अगले हिस्से की मदद से गंदगी को बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करें।

​यह दांतों के बीच की जगह को साफ करने का सबसे अच्छा तरीका है, लेकिन टूथपिक की तुलना में इसे अधिक समय की आवश्यकता हो सकती है। इसकी खासियत यह है कि इसमें मसूड़ों या दांतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

  1. फ्लॉसिंग के फायदे - Benefits of flossing in Hindi
  2. फ्लॉस के प्रकार - Types of dental floss in Hindi

फ्लॉसिंग के फायदे - Benefits of flossing in Hindi

  • फ्लॉसिंग से दांतों के बीच के हिस्से में फंसी गंदगी को हटाया जाता है।
  • यह न केवल प्लाक को हटाता है, बल्कि मसूड़ों की मालिश भी करता है।
  • दांतों के बीच की जगह पर की गई नियमित सफाई से मसूड़ों से ब्लीडिंग को कम किया जा सकता है।
  • नियमित रूप से फ्लॉसिंग आपके दांतों के बीच फंसे भोजन को हटाता है, इस प्रकार दो दांतों के बीच कैविटी होने का खतरा कम हो जाता है और सांसों की बदबू भी दूर होती है।

फ्लॉस के प्रकार - Types of dental floss in Hindi

बाजार में विभिन्न प्रकार के फ्लॉस उपलब्ध हैं।

  • धागे के लेप (कोटिंग) पर निर्भर करता है : मोमयुक्त या बिना मोम वाला
  • धागे की चौड़ाई के आधार पर निर्भर करता है : पतला या मोटा
  • धागे के डिजाइन पर निर्भर करता है : मुड़ा हुआ या बिना मुड़ा हुआ

मौखिक स्वच्छता केवल दांतों की सफाई पर समाप्त नहीं होती है, बल्कि जीभ की सफाई भी महत्वपूर्ण है। जीभ को साफ करने वाले उपकरण (टंग क्लीनर) बाजार में आसानी से उपलब्ध हैंं और कभी-कभी टूथब्रश के पिछले हिस्से में भी उभार वाली डिजाइन होती है जो जीभ को साफ करने में मददगार होती है। नीचे बताया गया है कि जीभ को कैसे साफ किया जाना चाहिए :

  • अपना मुंह खोलें और जीभ को मुंह से जितना हो सके बाहर निकालें।
  • ज्यादातर गंदगी जीभ के पिछले हिस्से में पाई जाती है। गंदगी वाले हिस्से पर टंग क्लीनर का इस्तेामल करें।
  • जीभ को समतल करने के लिए टंग क्लीनर पर थोड़ा दबाव डालें।
  • अब धीरे-धीरे टंग क्लीनर को मुंह से बाहर की ओर लाएं।
  • पानी की टोटी के नीचे टंग क्लीनर की गंदगी को साफ करें।

(और पढ़ें - जीभ साफ करने के तरीके)

माउथवॉश अन्य मौखिक स्वच्छता उपायों के लिए एक सहायक होता है। इसका उपयोग करने से पहले माउथवॉश के डिब्बे या शीशी को हिला लें। माउथवॉश का उपयोग लगातार 21 दिनों तक किया जाना चाहिए और फिर उपयोग जारी रखने से पहले कम से कम 2 सप्ताह के लिए बंद कर देना चाहिए।

  1. माउथवॉश के प्रकार - Types of mouthwashes in Hindi

माउथवॉश के प्रकार - Types of mouthwashes in Hindi

माउथवॉश दो प्रकार के होते हैं :

1. कॉस्मेटिक माउथवॉश
कॉस्मेटिक माउथवॉश का कोई चिकित्सकीय लाभ नहीं है। वे केवल अस्थायी रूप से बदबूदार सांस की समस्या को नियंत्रित करते हैं और एक अच्छी खुशबू होने के कारण लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। वे नियमित रूप से उपयोग किया जाता है और यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

2. चिकित्सीय माउथवॉश
चिकित्सीय माउथवॉश में कुछ सक्रिय तत्व होते हैं जो बदबूदार सांस की समस्या, मसूड़े की सूजन और प्लाक का जमना जैसी परेशानियों से छुटकारा दिला सकता है।

क्लोरेक्सिडाइन डिग्लुकोनेट (0.2%) चिकित्सीय रूप से सबसे व्यापक रूप से अनुशंसित माउथवॉश है। ये दंत चिकित्सक द्वारा उचित मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं। इसके अलावा ब्रेसज और फ्लैप सर्जरी (मसूड़ों की सर्जरी) जैसी दांतों की सर्जरी के बाद भी चिकित्सीय माउथवॉश का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

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