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बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जिनको दोपहर में एक झपकी की आदत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, क्यों हमें दोपहर के दौरान इतनी नींद आती है? क्या यह रात के दौरान नींद की कमी की वजह से है? क्या यह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छी है? दिन में नींद को लेकर, ऐसे ही बहुत सारे प्रश्न हमारे दिमाग़ में चलते रहते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि दिन के दौरान सोना मानव शरीर के लिए अच्छा है, जबकि अन्य इस तर्क से इनकार करते हैं।

किंतु आयुर्वेद के पास इन सभी सवालों का जवाब है और दिन के दौरान एक झपकी लेने के साइड इफेक्ट के साथ-साथ इसके लाभो के बारे में भी बताया गया है।

  1. शरीर पर दोषों का प्रभाव - Effect of doshas on the body
  2. दिन में सोने के फायदे किन्हें हैं - Who can sleep during the day
  3. दिन में सोने के नुकसान किन्हें हैं - Who should avoid sleeping during the day
  4. दिन में सोने के नुकसान क्या हैं - Why we should not sleep in afternoon
  5. दिन में सोना चाहिए या नहीं - Afternoon sleeping is good or bad

हमारा शरीर हर दिन तीन दोषों के माध्यम से चलता है - वात, पित्त, कफ। प्रत्येक समयावधि में संबंधित दोष का बोलबाला होता है।

कफ दोष, जो सुबह 6 से 10 बजे के बीच होता है, इस समय आपको सक्रिय होना चाहिए। इसमें क्रियाशील व्यायाम फायदेमंद है। अगर आप दिन के इस समय सोते हैं, तो यह आपको आलसी महसूस कराता है जिससे आपके आंतरिक अंग बेहतर और सुचारू रूप से कार्य नहीं करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, दोपहर का भोजन दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। इसमें एक हल्का नाश्ता करने की सलाह दी जाती है जिससे आपको नींद महसूस नहीं होगी।

पित्त दोष सुबह के 10 बजे से दोपहर के 2 बजे तक रहता है। पित्त दोष शरीर की चयापचय क्रियाओं को नियंत्रित करता है। इसी कारण यह हमेशा कहा जाता है कि आपको सुबह और शाम की तुलना मेँ दोपहर के समय सबसे ज़्यादा भोजन करना चाहिए। इस समय के दौरान, आपका शरीर खाने को ऊर्जा और ईंधन में बदलने में सक्षम होता है जो कि बाकी समय के दौरान सहायक होता है।

इसी तरह वात दोष दोपहर 2 बजे से 6 बजे तक हावी होता है। यह समय आपके मानसिक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए सबसे अच्छा है क्योंकि आपका मस्तिष्क इस समय बहुत अच्छे से कार्य करता है। लेकिन इसी के साथ, आपको इस समय के दौरान नींद भी लग सकती है। इसलिए इस समय एक कप गर्म चाय लेनी चाहिए और जिन चीज़ो को करने से खुशी महसूस हो, वो करनी चाहिए। इस तरह यह दोष का चक्र चलता रहता है।

आयुर्वेद के अनुसार, दिन के दौरान सोना उचित नहीं है, यह कफ और पित्त दोषों के बीच असंतुलन का कारण हो सकता है। इस असंतुलन से शरीर के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, आयुर्वेद में ये भी कहा गया है कि जो लोग स्वस्थ और शक्तिशाली हैं, वो केवल गर्मियों के दौरान दिन में झपकी ले सकते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि गर्मियों के दौरान रातें छोटी होती हैं, जिससे हमारी नींद पूरी नही हो पाती है और साथ ही गर्म मौसम के कारण शरीर थक भी जाता है। इसलिए दिन में झपकी लेना उचित रहता है।

आयुर्वेद ने स्पष्ट किया है कि कौन लोग दोपहर में सो सकते हैं और किनको दिन मेँ नहीं सोना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार यह लोग दिन मेँ सो सकते हैं:

छात्र लगातार अध्ययन करके थक जाते हैं। बीच में एक झपकी लेना उनके मस्तिष्क को आराम देने में मदद करता है।

बुज़ुर्ग लोग अपने शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए सो सकते हैं।

दुखी लोगों का दिन में सोना थोड़ी देर के लिए उन्हें अपने दर्द को भूलने में मदद कर सकता है।

  • गुस्सैल लोगों का दिन में सोना उनके दिमाग को शांत कर सकता है।
  •  जिन लोगों ने अतीत में कोई भी सर्जरी करवाई है, दिन में सोना उनके इलाज की प्रक्रिया को दृढ़ कर सकता है।
  •  वो लोग जो कड़ी मेहनत और भारी काम करते हैं जैसे मज़दूर - दिन में सोना उन्हें कुछ समय के लिए आराम दे सकता है।
  •  वो लोग जो वजन बढ़ाना चाहते हैं।

(और पढ़ें - वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए)

 जो लोग मोटापे से पीड़ित हैं।
 जो लोग वजन घटाना चाहते हैं।

मधुमेह के रोगियों को दिन में नही सोना चाहिए।
जो लोग तैलीय खाद्य बहुत खाते हैं। (और पढ़ें – अधिक कोलेस्ट्रॉल वाले खाने के बाद आयुर्वेद के अनुसार ज़रूर करें इन पाँच बातों का ध्यान)

इन लोगों को दिन मेँ ना सोने के लिए कहने का कारण है। दिन के दौरान सोना कई समस्याओं को जन्म दे सकता है। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

निष्कर्ष - आयुर्वेद ने दिन के दौरान सोने की सिफारिश की है, लेकिन हर व्यक्ति को सोचना चाहिए कि नींद उनके लिए फायदेमंद है या कहीं दिन मेँ सोने से उनकी समस्याएँ बढ़ जाएंगी। वही करें जो आपके शरीर के लिए अच्छा हो।

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